भारत में उर्दू और फ़ारसी साहित्य: कृतियां और लेखक
भारत में उर्दू तथा फ़ारसी साहित्य के नोट्स: सल्तनत और मुगल काल के इतिहास ग्रंथ, अमीर खुसरो, मुगल संस्मरण, फ़ारसी अनुवाद तथा उर्दू के महान कवि और लेखक।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

सामान्य ज्ञान के प्रश्नपत्रों में पुस्तक और लेखक के प्रश्न बहुत हद तक उन दो साहित्यों पर टिके हैं जो भारतीय भूमि पर पनपे: फ़ारसी, जो छह शताब्दियों से अधिक समय तक दरबार और इतिहास लेखन की भाषा रही, और उर्दू, जो इसी उपमहाद्वीप के बाजारों तथा छावनियों में जन्मी और यहां की श्रेष्ठतम साहित्यिक भाषाओं में गिनी गई। परीक्षक आलोचना नहीं पूछता; वह पूछता है कि किसने क्या लिखा, किस भाषा में लिखा और किसके शासन में लिखा। यह नोट उसी सामग्री को काल के अनुसार सजाता है ताकि प्रश्नों का पूरा परिवार एक ही बार में दोहराया जा सके।
फ़ारसी, दरबार की भाषा
फ़ारसी भारत में गजनवी और गोरी आक्रमणों के साथ आई और दिल्ली सल्तनत तथा मुगल साम्राज्य में प्रशासन की भाषा बनी रही। विद्यार्थी जिसे मध्यकालीन स्रोत कहता है, चाहे वह इतिहास ग्रंथ हो या कोई फरमान, वह प्रायः इसी भाषा में है, और ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन में भी यह तब तक सरकारी कामकाज की भाषा रही जब तक अठारह सौ तीस के दशक में अंग्रेजी तथा क्षेत्रीय भाषाओं ने इसका स्थान नहीं ले लिया। इसीलिए किसी मध्यकालीन भारतीय पुस्तक का प्रश्न प्रायः किसी फ़ारसी पुस्तक का ही प्रश्न होता है।
सल्तनत काल के इतिहास ग्रंथ
| कृति | लेखक |
|---|---|
| तबकात-ए-नासिरी | मिन्हाज-उस-सिराज |
| तारीख-ए-फिरोजशाही | जियाउद्दीन बरनी |
| फतवा-ए-जहांदारी | जियाउद्दीन बरनी |
| खजाइन-उल-फुतूह | अमीर खुसरो |
| फुतूह-उस-सलातीन | इसामी |
| किताब-उर-रेहला | इब्न बतूता, मोरक्को का यात्री |
अमीर खुसरो इस युग की सबसे बड़ी हस्ती हैं। सूफी संत निजामुद्दीन औलिया के शिष्य खुसरो ने कई सुल्तानों की सेवा की, उन्हें तूती-ए-हिंद अर्थात भारत का तोता कहा गया, और उन्होंने खजाइन-उल-फुतूह, किरान-उस-सादैन, नुह सिपिहर तथा तुगलकनामा लिखे। उन्होंने लिखा फ़ारसी में, पर अपनी पहेलियों और पदों में दिल्ली की बोली का प्रयोग किया, इसीलिए वे उस भाषा के भी पितृपुरुष माने जाते हैं जो आगे चलकर उर्दू कहलाई, और कव्वाली के भी।
मुगल संस्मरण और इतिहास
| कृति | लेखक तथा टिप्पणी |
|---|---|
| तुजुक-ए-बाबरी अथवा बाबरनामा | बाबर, चगताई तुर्की में लिखा, बाद में फ़ारसी में अनूदित |
| हुमायूंनामा | गुलबदन बेगम, हुमायूं की बहन |
| अकबरनामा तथा आईन-ए-अकबरी | अबुल फजल |
| मुंतखब-उत-तवारीख | अब्दुल कादिर बदायूंनी, अकबर के आलोचक |
| तुजुक-ए-जहांगीरी | जहांगीर का अपना संस्मरण, फ़ारसी में |
| इकबालनामा-ए-जहांगीरी | मोतमिद खान |
| पादशाहनामा | अब्दुल हमीद लाहौरी, शाहजहां पर |
| मुंतखब-उल-लुबाब | खाफी खान, औरंगजेब तथा उसके बाद के काल पर |
मुगल दरबार में अनुवाद विभाग भी चलता था। अकबर के समय महाभारत का फ़ारसी अनुवाद रज्मनामा नाम से हुआ, रामायण का अनुवाद बदायूंनी ने किया, और दारा शिकोह ने उपनिषदों का अनुवाद सिर्र-ए-अकबर नाम से कराया तथा स्वयं मजमा-उल-बहरैन लिखी, जिसमें हिंदू और मुस्लिम रहस्यवाद की साझी बातें हैं। विडंबना यह है कि भारतीय शास्त्रीय संगीत पर सर्वाधिक फ़ारसी ग्रंथ औरंगजेब के शासनकाल में लिखे गए, जिसने दरबार से संगीत के प्रदर्शन का संरक्षण हटा लिया था।
उर्दू का विकास
उर्दू ने दिल्ली क्षेत्र की खड़ी बोली से आकार लिया, जिसमें फ़ारसी, अरबी और तुर्की के शब्द भरपूर जुड़े, और उर्दू नाम स्थिर होने से पहले इसे हिंदवी, दहलवी तथा रेख्ता कहा जाता रहा। इसका आरंभिक साहित्य दक्कन से आया, जहां बहमनी और कुतुबशाही दरबारों में इसका दक्कनी रूप चलता था। गोलकुंडा के शासक तथा हैदराबाद के संस्थापक मुहम्मद कुली कुतुब शाह को इस भाषा में पूरा काव्य संग्रह छोड़ने वाला पहला कवि माना जाता है, और वली दक्कनी दक्कन की शैली को उत्तर में दिल्ली तक ले आए, इसीलिए उन्हें उर्दू काव्य का पिता कहा जाता है।
महान कवि और लेखक
- मीर तकी मीर, जिन्हें खुदा-ए-सुखन कहा गया, अठारहवीं शताब्दी की दिल्ली में लिखते रहे।
- मिर्जा गालिब ने दीवान-ए-गालिब तथा पत्रों का वह भंडार छोड़ा जिसने उर्दू गद्य को जीवंत और आत्मीय भाषा बना दिया।
- अल्ताफ हुसैन हाली ने मुसद्दस लिखी, और सर सैयद अहमद खान ने आसार-उस-सनादीद लिखकर तहजीब-उल-अखलाक पत्रिका निकाली।
- मुहम्मद इकबाल ने उर्दू में बांग-ए-दरा और फ़ारसी में असरार-ए-खुदी लिखी; सारे जहां से अच्छा, वस्तुतः तराना-ए-हिंदी, उन्हीं का है।
- प्रेमचंद ने लेखन का आरंभ नवाब राय नाम से उर्दू में किया, उसके बाद वे हिंदी कथा साहित्य का सबसे बड़ा नाम बने।
- सआदत हसन मंटो, इस्मत चुगताई, कृष्ण चंदर और राजिंदर सिंह बेदी ने उर्दू कहानी गढ़ी, और टोबा टेक सिंह विभाजन की सबसे प्रसिद्ध कहानी है।
- फिराक गोरखपुरी को 1969 में और आग का दरिया की लेखिका कुर्रतुलैन हैदर को 1989 में ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला।
प्रगतिशील लेखक संघ का पहला सम्मेलन 1936 में लखनऊ में हुआ, जिसकी अध्यक्षता प्रेमचंद ने की, और उसी के माध्यम से उर्दू साहित्य गरीबी, स्वतंत्रता तथा समाज सुधार के प्रश्नों की ओर मुड़ा।
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्न चार जाने पहचाने रूपों में आते हैं। पहला, सीधा पुस्तक और लेखक का जोड़ा, जिसमें आईन-ए-अकबरी के साथ अबुल फजल और हुमायूंनामा के साथ गुलबदन बेगम हर वर्ष पूछे जाते हैं। दूसरा, कृति की भाषा, जहां सबसे बड़ा जाल बाबर का संस्मरण है, जो तुर्की में लिखा गया और बाद में फ़ारसी में अनूदित हुआ, तथा अलबरूनी की किताब-उल-हिंद, जो अरबी में है। तीसरा, किस शासन में कौन सी पुस्तक लिखी गई, इसलिए हर इतिहास ग्रंथ को उसके शासक के साथ याद करना चाहिए। चौथा, उर्दू का विकास, जहां दक्कनी, कुली कुतुब शाह, वली दक्कनी तथा मीर और गालिब की उपाधियां सर्वाधिक पूछी जाती हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| अमीर खुसरो | उपाधि तूती-ए-हिंद; खजाइन-उल-फुतूह तथा किरान-उस-सादैन के रचयिता |
|---|---|
| तारीख-ए-फिरोजशाही | जियाउद्दीन बरनी द्वारा लिखित |
| तुजुक-ए-बाबरी | बाबर का संस्मरण, चगताई तुर्की में लिखा गया |
| हुमायूंनामा | गुलबदन बेगम द्वारा लिखित |
| अकबरनामा तथा आईन-ए-अकबरी | अबुल फजल द्वारा लिखित |
| इकबालनामा-ए-जहांगीरी | मोतमिद खान द्वारा लिखित |
| पादशाहनामा | अब्दुल हमीद लाहौरी द्वारा शाहजहां पर लिखित |
| रज्मनामा | अकबर के समय हुआ महाभारत का फ़ारसी अनुवाद |
| सिर्र-ए-अकबर | दारा शिकोह द्वारा कराया गया उपनिषदों का फ़ारसी अनुवाद |
| उर्दू काव्य के पिता | वली दक्कनी |
| खुदा-ए-सुखन | मीर तकी मीर की उपाधि |
| प्रगतिशील लेखक संघ | पहला सम्मेलन 1936 में लखनऊ में, अध्यक्षता प्रेमचंद ने की |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
तुजुक-ए-बाबरी किस भाषा में लिखी गई थी?
- A.फ़ारसी
- B.अरबी
- C.तुर्की
- D.उर्दू
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. तुर्की
व्याख्या
सही उत्तर C, तुर्की है। बाबर ने अपने संस्मरण चगताई तुर्की में लिखे, जो मध्य एशिया में उसकी जन्मभूमि की भाषा थी, और यह पुस्तक उन देशों के लोगों, फलों, पशुओं तथा नदियों के सरल एवं पैनी दृष्टि वाले वर्णन के लिए सराही जाती है जिनसे वह गुजरा। विकल्प A रचना की भाषा के रूप में गलत है, यद्यपि मुगल दरबार के लिए हुए प्रसिद्ध अनुवाद की भाषा यही है, जिस रूप में यह कृति बाबरनामा कहलाती है; प्रश्न पूछता है कि लिखी किस भाषा में गई। विकल्प B गलत है क्योंकि अरबी धार्मिक विद्वत्ता की भाषा थी, मुगल संस्मरणों की नहीं, और भारत पर प्रसिद्ध अरबी कृति अलबरूनी की किताब-उल-हिंद है। विकल्प D गलत है क्योंकि उर्दू ने 1530 में बाबर की मृत्यु के बहुत बाद आकार लिया।
बाबर की आत्मकथा बाबरनामा का अनुवाद किस भाषा में हुआ था?
- A.तुर्की
- B.अरबी
- C.फ़ारसी
- D.उर्दू
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. फ़ारसी
व्याख्या
सही उत्तर C, फ़ारसी है। बाबर का संस्मरण चगताई तुर्की में लिखा गया था और अकबर के समय उसका फ़ारसी अनुवाद अब्दुर रहीम खानखाना ने किया, जो दरबार के नवरत्नों में थे, ताकि साम्राज्य का फ़ारसी जानने वाला अमीर वर्ग इसे पढ़ सके। विकल्प A गलत है क्योंकि तुर्की मूल रचना की भाषा है, अनुवाद की नहीं, और इस तथ्य के दोनों हिस्से परीक्षा में जानबूझकर आमने सामने रखे जाते हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि मुगल दरबार में इस कृति का अरबी रूप कभी तैयार नहीं हुआ। विकल्प D गलत है क्योंकि साहित्यिक भाषा के रूप में उर्दू बहुत बाद में विकसित हुई और उसमें इस संस्मरण के अनुवाद आधुनिक काल के हैं। जोड़ी याद रखिए: लिखी तुर्की में, अनूदित फ़ारसी में। परीक्षा में इस कृति से जुड़े दोनों तथ्य, मूल भाषा और अनुवाद की भाषा, बारी बारी से पूछे जाते हैं, इसलिए इन्हें साथ याद रखना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।
हुमायूंनामा किसने लिखा था?
- A.हुमायूं
- B.अकबर
- C.गुलबदन बेगम
- D.बाबर
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. गुलबदन बेगम
व्याख्या
सही उत्तर C, गुलबदन बेगम है। वे बाबर की पुत्री और हुमायूं की बहन थीं, और उन्होंने अपने भतीजे अकबर के कहने पर परिवार का यह वृत्तांत लिखा, क्योंकि अकबर को अकबरनामा के लिए सामग्री चाहिए थी। उनकी पुस्तक इसलिए मूल्यवान है कि वह दरबार के घर परिवार तथा स्त्रियों का वर्णन भीतर से करती है, ऐसा दृश्य जो औपचारिक इतिहास ग्रंथ कभी नहीं देते। विकल्प A गलत है क्योंकि हुमायूं ने अपना कोई संस्मरण नहीं छोड़ा; उसका शासन बहन तथा दरबार के सेवकों के लेखन से जाना जाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि अकबर निरक्षर था और उसके लिए दूसरे लिखते थे, सबसे बढ़कर अबुल फजल। विकल्प D गलत है क्योंकि बाबर ने तुजुक-ए-बाबरी में अपने विषय में लिखा और पुत्र के शासन की घटनाओं से पहले ही उसकी मृत्यु हो गई।
जहांगीर की जीवनी इकबालनामा-ए-जहांगीरी निम्नलिखित में से किसने लिखी थी?
- A.मोतमिद खान
- B.इनायत खान
- C.अब्दुल रहीम खान
- D.अबुल फजल
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. मोतमिद खान
व्याख्या
सही उत्तर A, मोतमिद खान है। वे जहांगीर के दरबार के अधिकारी थे और जब बादशाह ने अपना संस्मरण लिखना बंद कर दिया तब उन्होंने शासन का विवरण आगे बढ़ाया; उनका इकबालनामा-ए-जहांगीरी इस काल के प्रमुख फ़ारसी स्रोतों में है। विकल्प B गलत है क्योंकि इनायत खान अगले शासनकाल के हैं और शाहजहांनामा से जुड़े हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि अकबर के दरबार के कवि तथा अमीर अब्दुर रहीम खानखाना बाबर के संस्मरण के फ़ारसी अनुवाद और अपने हिंदी दोहों के लिए याद किए जाते हैं, जहांगीर की जीवनी के लिए नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि अबुल फजल ने अकबरनामा तथा आईन-ए-अकबरी लिखी और 1602 में उनकी हत्या हो गई, जबकि जहांगीर का शासन 1605 में आरंभ हुआ। परीक्षा में मुगल इतिहास ग्रंथ को उसके शासनकाल के साथ याद रखना सबसे सुरक्षित तरीका है, क्योंकि इन अधिकारियों के नाम मिलते जुलते हैं और आमने सामने रखे जाते हैं।
भारतीय शास्त्रीय संगीत पर फ़ारसी में सर्वाधिक पुस्तकें किसके शासनकाल में लिखी गईं?
- A.शाहजहां
- B.जहांगीर
- C.अकबर
- D.औरंगजेब
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. औरंगजेब
व्याख्या
सही उत्तर D, औरंगजेब है। यह मुगल सांस्कृतिक इतिहास का सबसे चौंकाने वाला तथ्य है: जिस बादशाह ने दरबार से संगीत के प्रदर्शन का संरक्षण हटा लिया, उसी के शासनकाल में भारतीय शास्त्रीय संगीत पर सर्वाधिक फ़ारसी ग्रंथ लिखे गए, क्योंकि विद्वानों का ध्यान मंच से हटकर पुस्तक की ओर मुड़ गया। विकल्प A गलत है क्योंकि शाहजहां संगीत का संरक्षक और स्वयं प्रशिक्षित गायक होते हुए भी इतने लेखन का साक्षी नहीं बना। विकल्प B गलत है क्योंकि जहांगीर का दरबार सब कलाओं में चित्रकला के लिए याद किया जाता है। विकल्प C गलत है क्योंकि अकबर का काल तानसेन तथा प्रस्तुति के लिए प्रसिद्ध है, संगीत पर विद्वत्ता के भंडार के लिए नहीं। परीक्षक यहां बादशाह की कठोरता और युग की विद्वत्ता का विरोधाभास ही पूछते हैं।
अलाउद्दीन खिलजी के अभियानों पर लिखी फ़ारसी कृति खजाइन-उल-फुतूह के रचयिता कौन थे?
- A.अमीर खुसरो
- B.जियाउद्दीन बरनी
- C.मिन्हाज-उस-सिराज
- D.इब्न बतूता
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. अमीर खुसरो
व्याख्या
सही उत्तर A, अमीर खुसरो है। खुसरो ने दिल्ली के कई सुल्तानों की सेवा की, वे सूफी संत निजामुद्दीन औलिया के शिष्य थे और उन्हें तूती-ए-हिंद अर्थात भारत का तोता कहा गया। खजाइन-उल-फुतूह, जिसे तारीख-ए-अलाई भी कहते हैं, अलाउद्दीन खिलजी के अभियानों का वर्णन करती है, और किरान-उस-सादैन तथा नुह सिपिहर भी उन्हीं की कृतियां हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि जियाउद्दीन बरनी ने फिरोज शाह तुगलक के शासनकाल में तारीख-ए-फिरोजशाही तथा फतवा-ए-जहांदारी लिखीं। विकल्प C गलत है क्योंकि मिन्हाज-उस-सिराज ने तबकात-ए-नासिरी लिखी, जो बलबन के समय तक आती है। विकल्प D गलत है क्योंकि इब्न बतूता मोरक्को का यात्री था, जिसकी रेहला मुहम्मद बिन तुगलक के दरबार का बाहरी वर्णन देती है। परीक्षा में इन चारों नामों को साथ रखकर प्रश्न बनते हैं, इसलिए हर सल्तनतकालीन ग्रंथ को उसके लेखक तथा शासक के साथ याद करना ही सुरक्षित तरीका है और इससे भ्रम नहीं होता।
अकबर के साम्राज्य के प्रशासन का विवरण देने वाली आईन-ए-अकबरी किसने लिखी थी?
- A.बदायूंनी
- B.अबुल फजल
- C.फैजी
- D.टोडरमल
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अबुल फजल
व्याख्या
सही उत्तर B, अबुल फजल है। वे अकबर के मंत्री तथा घनिष्ठ मित्र थे और उन्होंने अकबरनामा लिखा, जिसका तीसरा खंड आईन-ए-अकबरी है; इसमें राज्य के विभाग, सूबों का राजस्व, अमीरों के मनसब, सिक्के, फसलें तथा देश के रीति रिवाज दिए गए हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि अब्दुल कादिर बदायूंनी ने मुंतखब-उत-तवारीख लिखी, जो उसी शासन का इतिहास है पर गुप्त रूप से लिखा गया और बादशाह की धार्मिक नीति की तीखी आलोचना करता है। विकल्प C गलत है क्योंकि अबुल फजल के भाई फैजी दरबार के राजकवि थे, इस कृति के लेखक नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि राजा टोडरमल राजस्व मंत्री थे, जिनकी व्यवस्था का वर्णन आईन करती है, वे उसके लेखक नहीं थे। परीक्षा में अकबर के दरबार से जुड़े इन चार नामों को आमने सामने रखकर प्रश्न बनाए जाते हैं, इसलिए हर नाम को उसकी कृति के साथ याद रखना आवश्यक है और यही अभ्यास अंक दिलाता है।
तारीख-ए-फिरोजशाही तथा फतवा-ए-जहांदारी दिल्ली सल्तनत के किस इतिहासकार ने लिखीं?
- A.इसामी
- B.शम्स-ए-सिराज अफीफ
- C.जियाउद्दीन बरनी
- D.अमीर खुसरो
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. जियाउद्दीन बरनी
व्याख्या
सही उत्तर C, जियाउद्दीन बरनी है। बरनी मुहम्मद बिन तुगलक के दरबार में रहे और उन्होंने फिरोज शाह तुगलक के शासनकाल में लिखा। उनकी तारीख-ए-फिरोजशाही बलबन के काल से आगे की सल्तनत का इतिहास है और फतवा-ए-जहांदारी में उन्होंने अपना यह विचार रखा कि मुस्लिम शासक को कैसे शासन करना चाहिए, जिससे वे सल्तनत के सबसे मुखर इतिहासकार बन जाते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि इसामी ने दक्कन में फुतूह-उस-सलातीन लिखी, जो सुल्तानों का काव्य इतिहास है। विकल्प B गलत है क्योंकि शम्स-ए-सिराज अफीफ ने इसी नाम की बाद की कृति केवल फिरोज शाह पर लिखी, और नाम की यही समानता इस प्रश्न का जाल है। विकल्प D गलत है क्योंकि अमीर खुसरो कवि थे और उनकी कृतियां खिलजी काल की हैं। परीक्षा में एक ही नाम की दो कृतियों वाला यह प्रश्न बार बार आता है, इसलिए बरनी और अफीफ का अंतर ध्यान से याद रखिए तथा दोनों के शासनकाल भी साथ जोड़िए।
अकबर के काल में महाभारत का फ़ारसी अनुवाद किस नाम से हुआ था?
- A.रज्मनामा
- B.सिर्र-ए-अकबर
- C.अनवार-ए-सुहैली
- D.मजमा-उल-बहरैन
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. रज्मनामा
व्याख्या
सही उत्तर A, रज्मनामा है। अकबर ने अनुवाद विभाग स्थापित किया जिसमें संस्कृत कृतियों का फ़ारसी में अनुवाद हुआ, और वहीं महाभारत का अनुवाद रज्मनामा नाम से हुआ, जिसका अर्थ युद्ध की पुस्तक है। विकल्प B गलत है क्योंकि सिर्र-ए-अकबर उपनिषदों का वह फ़ारसी अनुवाद है जो शाहजहां के ज्येष्ठ पुत्र दारा शिकोह ने तीन पीढ़ी बाद कराया। विकल्प C गलत है क्योंकि अनवार-ए-सुहैली पंचतंत्र की कथाओं का फ़ारसी रूप है और अनुवाद की भिन्न परंपरा से आता है। विकल्प D गलत है क्योंकि मजमा-उल-बहरैन अर्थात दो सागरों का संगम दारा शिकोह की अपनी कृति है, जिसमें उन्होंने हिंदू और मुस्लिम रहस्यवाद की साझी बातें देखीं। अकबर के साथ रज्मनामा और दारा शिकोह के साथ शेष दोनों नाम जोड़िए। परीक्षा में अनुवाद विभाग के प्रश्न सामान्य हैं, इसलिए यह याद रखिए कि संस्कृत महाकाव्यों का अनुवाद अकबर ने और उपनिषदों का दारा शिकोह ने कराया था।
उर्दू के दक्कनी रूप में पूरा काव्य संग्रह छोड़ने वाला पहला कवि किसे माना जाता है?
- A.मुहम्मद कुली कुतुब शाह
- B.मिर्जा गालिब
- C.मीर तकी मीर
- D.अल्ताफ हुसैन हाली
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. मुहम्मद कुली कुतुब शाह
व्याख्या
सही उत्तर A, मुहम्मद कुली कुतुब शाह है। गोलकुंडा के जिस शासक ने हैदराबाद नगर बसाया, उसने दक्कनी में, अर्थात भाषा के दक्षिणी रूप में, काव्य रचा, और उनके नाम से बचा हुआ संग्रह इस भाषा का पहला पूरा दीवान माना जाता है; इसीलिए उर्दू साहित्य का आरंभिक अध्याय दक्कन का है, दिल्ली का नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि मिर्जा गालिब उन्नीसवीं शताब्दी की उस दिल्ली के हैं जहां बहादुर शाह जफर का दरबार था। विकल्प C गलत है क्योंकि खुदा-ए-सुखन कहे जाने वाले मीर तकी मीर अठारहवीं शताब्दी में लिखते रहे, दक्कन के आरंभ से बहुत बाद। विकल्प D गलत है क्योंकि मुसद्दस के रचयिता अल्ताफ हुसैन हाली उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध के सुधार आंदोलन के कवि हैं। परीक्षा में उर्दू के आरंभ से जुड़े प्रश्न प्रायः दक्कन और दिल्ली के बीच अंतर पर ही टिके होते हैं, इसलिए कुली कुतुब शाह तथा वली दक्कनी दोनों नाम याद रखिए।
सारे जहां से अच्छा पंक्ति से प्रसिद्ध कविता तराना-ए-हिंदी किसने लिखी थी?
- A.मुहम्मद इकबाल
- B.फैज अहमद फैज
- C.जोश मलीहाबादी
- D.फिराक गोरखपुरी
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. मुहम्मद इकबाल
व्याख्या
सही उत्तर A, मुहम्मद इकबाल है। उन्होंने बीसवीं शताब्दी के आरंभ में यह कविता उर्दू में देश की प्रशंसा में लिखी, जिसे बाद में स्वर दिया गया और वह देश के सर्वाधिक प्रिय देशभक्ति गीतों में गिनी जाने लगी। इकबाल ने उर्दू में बांग-ए-दरा तथा फ़ारसी में असरार-ए-खुदी भी लिखी, और वे उपमहाद्वीप के उन थोड़े से कवियों में हैं जिन्होंने दोनों भाषाओं में बड़ी रचनाएं दीं। विकल्प B गलत है क्योंकि फैज अहमद फैज बाद के कवि हैं, जो मुझसे पहली सी मोहब्बत जैसी रचनाओं के लिए जाने जाते हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि जोश मलीहाबादी शायर-ए-इंकलाब कहे जाते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि 1969 में ज्ञानपीठ पाने वाले फिराक गोरखपुरी गजल तथा गुल-ए-नग्मा के लिए प्रसिद्ध हैं। परीक्षा में इकबाल से जुड़े प्रश्न प्रायः तराना-ए-हिंदी अथवा उनकी फ़ारसी कृतियों पर आते हैं, इसलिए दोनों भाषाओं की उनकी रचनाएं साथ याद रखनी चाहिए।
प्रगतिशील लेखक संघ का पहला सम्मेलन 1936 में लखनऊ में किस लेखक की अध्यक्षता में हुआ था?
- A.प्रेमचंद
- B.सआदत हसन मंटो
- C.इस्मत चुगताई
- D.कुर्रतुलैन हैदर
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. प्रेमचंद
व्याख्या
सही उत्तर A, प्रेमचंद है। प्रगतिशील लेखक संघ का पहला सम्मेलन 1936 में लखनऊ में हुआ और प्रेमचंद ने, जिन्होंने अपने लेखन का आरंभ नवाब राय नाम से उर्दू में किया था और बाद में हिंदी की ओर मुड़े, उसकी अध्यक्षता करते हुए उद्घाटन भाषण दिया। इस आंदोलन ने उर्दू तथा अन्य भारतीय भाषाओं के लेखकों को गरीबी, जाति, स्वतंत्रता और समाज सुधार के प्रश्नों की ओर मोड़ा। विकल्प B गलत है क्योंकि मंटो, यद्यपि उसी मंडली से निकले सबसे बड़े कहानीकार थे, 1936 में युवा थे और उन्होंने अध्यक्षता नहीं की। विकल्प C गलत है क्योंकि लिहाफ की लेखिका इस्मत चुगताई भी उसके बाद की पीढ़ी की थीं। विकल्प D गलत है क्योंकि 1989 में ज्ञानपीठ पाने वाली कुर्रतुलैन हैदर ने लिखना और भी बाद में आरंभ किया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बाबर ने अपने संस्मरण किस भाषा में लिखे थे?
बाबर ने तुजुक-ए-बाबरी अपनी मातृभाषा चगताई तुर्की में लिखा था। बाद में इसका फ़ारसी अनुवाद हुआ, जिस रूप में यह बाबरनामा कहलाता है, और उसी अनुवाद से यह कृति मुगल दरबार के बड़े वर्ग तक पहुंची।
आईन-ए-अकबरी किसने लिखी और उसमें क्या है?
अकबर के मंत्री और मित्र अबुल फजल ने इसे अकबरनामा के तीसरे खंड के रूप में लिखा। इसमें साम्राज्य के प्रशासन का विवरण है, विभाग, राजस्व के आंकड़े, सूबे, सिक्के तथा रीति रिवाज, और यह अकबर के शासन का सबसे विस्तृत स्रोत है।
अमीर खुसरो कौन थे?
दिल्ली सल्तनत के कवि और संगीतकार, निजामुद्दीन औलिया के शिष्य, जिन्हें तूती-ए-हिंद की उपाधि मिली। उन्होंने खजाइन-उल-फुतूह तथा किरान-उस-सादैन जैसी फ़ारसी कृतियां लिखीं, अपने पदों और पहेलियों में दिल्ली की बोली का प्रयोग किया, और कव्वाली के विकास से भी जुड़े हैं।
उर्दू किस भाषा से विकसित हुई?
उर्दू दिल्ली क्षेत्र की बोली खड़ी बोली से विकसित हुई और उसमें फ़ारसी, अरबी तथा तुर्की के बहुत से शब्द जुड़े। उर्दू नाम प्रचलित होने से पहले इसे हिंदवी, दहलवी और रेख्ता कहा जाता था।
उर्दू काव्य का पिता किसे कहा जाता है?
वली दक्कनी को, जिनकी अठारहवीं शताब्दी के आरंभ में दिल्ली यात्रा ने उत्तर के कवियों को दिखाया कि यह भाषा क्या कर सकती है। इस भाषा में पहला पूरा काव्य संग्रह गोलकुंडा के मुहम्मद कुली कुतुब शाह के नाम माना जाता है।
रज्मनामा क्या है?
यह अकबर के अनुवाद विभाग में तैयार हुआ महाभारत का फ़ारसी अनुवाद है, जिसके नाम का अर्थ युद्ध की पुस्तक है। उसी काल में बदायूंनी ने रामायण का अनुवाद किया, जो संस्कृत ज्ञान को फ़ारसी पढ़ने वाले दरबार तक पहुंचाने के अकबर के प्रयास का भाग था।





