भारत की प्रसिद्ध लेखिकाएं और उनकी रचनाएं: जीके नोट्स
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भारत की प्रसिद्ध लेखिकाओं और उनकी रचनाओं के पूर्ण नोट्स: कवयित्रियाँ, उपन्यासकार, ज्ञानपीठ तथा बुकर विजेता, अभ्यास प्रश्नों के साथ।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

सामान्य ज्ञान के प्रश्नपत्र में भारतीय लेखिकाओं से जुड़े प्रश्न दो रूपों में आते हैं। पहला रूप लेखक और रचना का मिलान है, और दूसरा रूप पुरस्कारों वाला है, जहाँ वही नाम ज्ञानपीठ, साहित्य अकादमी, बुकर या पुलित्जर विजेता के रूप में लौटते हैं। नीचे वही नाम दिए गए हैं जो बार-बार पूछे जाते हैं, काल और भाषा के क्रम में, उस रचना के साथ जिसके लिए प्रत्येक लेखिका जानी जाती हैं।
लेखिकाओं की पहली पीढ़ी
भारत में महिलाओं का लेखन उपन्यास से नहीं, बल्कि सुधार काल के गद्य से शुरू होता है। रससुंदरी देवी ने बांग्ला में आमार जीबोन लिखा, जो किसी भारतीय महिला द्वारा लिखी गई पहली पूर्ण आत्मकथा है। महाराष्ट्र की ताराबाई शिंदे ने 1882 में स्त्री पुरुष तुलना प्रकाशित की, जिसमें उन्होंने यह दिखाया कि समाज स्त्री और पुरुष को किस भिन्न दृष्टि से आँकता है; इसे किसी भारतीय भाषा के आरंभिक स्त्रीवादी ग्रंथों में गिना जाता है। पंडिता रमाबाई ने 1887 में अंग्रेजी में द हाई कास्ट हिंदू वुमन लिखी और विधवाओं के लिए शारदा सदन की स्थापना की। इक्कीस वर्ष की आयु में दिवंगत हुई तोरू दत्त की रचनाएँ ए शीफ ग्लीन्ड इन फ्रेंच फील्ड्स और एंशिएंट बैलेड्स एंड लेजेंड्स ऑफ हिंदुस्तान हैं। बेगम रुकैया सखावत हुसैन ने 1905 में सुल्ताना'ज ड्रीम लिखी, एक स्त्रीवादी कल्पना जिसमें शासन महिलाएँ चलाती हैं और पुरुष परदे में रहते हैं।
सरोजिनी नायडू
स्वतंत्रता संग्राम की जिन कवयित्री के बारे में लगभग हर वर्ष प्रश्न आता है, वे सरोजिनी नायडू हैं। उन्हें भारत कोकिला कहा जाता है और उनके तीन काव्य संग्रह हैं द गोल्डन थ्रेशोल्ड (1905), द बर्ड ऑफ टाइम (1912) तथा द ब्रोकन विंग (1917)। उनकी मृत्यु के बाद द फेदर ऑफ द डॉन प्रकाशित हुई। वे 1925 के कानपुर अधिवेशन की अध्यक्ष बनीं और इस प्रकार कांग्रेस की अध्यक्ष बनने वाली पहली भारतीय महिला थीं; बाद में वे संयुक्त प्रांत की राज्यपाल रहीं। प्रश्न सामान्यतः किसी एक संग्रह का नाम देकर कवयित्री पूछता है, या कवयित्री का नाम देकर पूछता है कि कौन-सी रचना उनकी नहीं है।
लेखिका, भाषा और रचना
| लेखिका | भाषा | प्रमुख रचना |
|---|---|---|
| आशापूर्णा देवी | बांग्ला | प्रथम प्रतिश्रुति |
| अमृता प्रीतम | पंजाबी | कागज ते कैनवास; पिंजर |
| महादेवी वर्मा | हिंदी | यामा; दीपशिखा; नीरजा |
| कुर्रतुल ऐन हैदर | उर्दू | आग का दरिया |
| महाश्वेता देवी | बांग्ला | हजार चुराशिर माँ; अरण्येर अधिकार |
| इंदिरा गोस्वामी | असमिया | मामरे धरा तरोवाल; नीलकंठी ब्रज |
| कृष्णा सोबती | हिंदी | जिंदगीनामा; मित्रो मरजानी |
| कमला दास | अंग्रेजी और मलयालम | माई स्टोरी; समर इन कलकत्ता |
| कमला मार्कंडेय | अंग्रेजी | नेक्टर इन ए सीव |
| अनिता देसाई | अंग्रेजी | क्राई, द पीकॉक; क्लियर लाइट ऑफ डे |
| अरुंधति रॉय | अंग्रेजी | द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स |
| गीतांजलि श्री | हिंदी | रेत समाधि, अंग्रेजी में टॉम्ब ऑफ सैंड |
पुरस्कार विजेता लेखिकाएँ
- आशापूर्णा देवी ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाली पहली महिला थीं। उन्हें 1976 में बांग्ला उपन्यास प्रथम प्रतिश्रुति के लिए यह सम्मान मिला, जो तीन पीढ़ियों की स्त्रियों पर लिखी त्रयी का पहला भाग है।
- अमृता प्रीतम को 1981 में पंजाबी संग्रह कागज ते कैनवास के लिए ज्ञानपीठ मिला। इससे पहले 1956 में सुनेहड़े के लिए वे पंजाबी में साहित्य अकादमी पुरस्कार पाने वाली पहली महिला बनी थीं, और विभाजन पर लिखा उनका उपन्यास पिंजर अलग से पूछा जाता है।
- हिंदी के छायावाद के चार स्तंभों में एकमात्र कवयित्री महादेवी वर्मा को 1982 में यामा के लिए ज्ञानपीठ मिला।
- कुर्रतुल ऐन हैदर (1989, आग का दरिया), महाश्वेता देवी (1996), इंदिरा गोस्वामी (2000), प्रतिभा राय (2011) और कृष्णा सोबती (2017) अन्य महिला ज्ञानपीठ विजेता हैं जिनके नाम प्रश्नपत्रों में आते हैं।
- अरुंधति रॉय को 1997 में द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स के लिए बुकर पुरस्कार मिला, जिसकी कथा केरल के अयमनम की है; किरण देसाई को यही पुरस्कार 2006 में द इनहेरिटेंस ऑफ लॉस के लिए मिला।
- झुंपा लाहिड़ी को कहानी संग्रह इंटरप्रेटर ऑफ मैलेडीज के लिए 2000 में कथा साहित्य का पुलित्जर पुरस्कार मिला; इसके बाद उनके उपन्यास द नेमसेक और द लोलैंड आए।
- गीतांजलि श्री को 2022 में रेत समाधि के लिए अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार मिला, जिसका अंग्रेजी अनुवाद डेजी रॉकवेल ने टॉम्ब ऑफ सैंड नाम से किया; हिंदी में लिखी यह पहली पुस्तक है जिसे यह पुरस्कार मिला।
- अंग्रेजी में साहित्य अकादमी पुरस्कार पाने वाली दो लेखिकाएँ सर्वाधिक पूछी जाती हैं: नयनतारा सहगल (रिच लाइक अस, 1986) और शशि देशपांडे (दैट लॉन्ग साइलेंस, 1990)।
उपन्यास, आत्मकथाएँ और उनकी लेखिकाएँ
कमला मार्कंडेय ने 1954 में नेक्टर इन ए सीव लिखा, जिसमें एक किसान परिवार चमड़े के कारखाने और अकाल के बीच पिसता है। अनिता देसाई तीन बार बुकर की अंतिम सूची में पहुँचीं और उन्होंने फास्टिंग, फीस्टिंग तथा इन कस्टडी लिखीं। कमला दास ने अंग्रेजी में अपने नाम से कविता लिखी और मलयालम गद्य माधविकुट्टी नाम से; उनकी आत्मकथा माई स्टोरी ही परीक्षा में पूछी जाती है। महाश्वेता देवी ने लेखन को आदिवासी समाज के संघर्ष से जोड़ा और बिरसा मुंडा के नेतृत्व वाले मुंडा विद्रोह पर लिखे अरण्येर अधिकार के लिए उन्हें 1979 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। चित्रा बनर्जी दिवाकरुणी ने द पैलेस ऑफ इल्यूजन्स में महाभारत की कथा द्रौपदी की दृष्टि से कही। सुधा मूर्ति से वाइज एंड अदरवाइज और डॉलर बहू पूछे जाते हैं। आत्मकथाओं में ए प्रिंसेस रिमेंबर्स जयपुर की गायत्री देवी की है और द स्कोप ऑफ हैपीनेस विजय लक्ष्मी पंडित की।
इस सूची को याद कैसे रखें
तीन-तीन के समूह में याद करें: लेखिका, भाषा और रचना। इसके बाद केवल उन आठ-नौ नामों के साथ पुरस्कार और उसका वर्ष जोड़ें जिन्हें कोई पुरस्कार मिला है, क्योंकि दूसरा अंक वहीं से आता है। अंत में वे उपनाम और शीर्षक देख लें जिन्हें विकल्पों में भ्रम फैलाने के लिए रखा जाता है, जैसे कमला दास के लिए माधविकुट्टी, सरोजिनी नायडू के लिए भारत कोकिला, और अनिता देसाई तथा किरण देसाई, जिन्हें विकल्पों में आपस में बदल दिया जाता है।
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्नपत्र इस विषय को मिलान के रूप में पूछते हैं: लेखिका और रचना, या लेखिका और भाषा, और इसके बाद पुरस्कार तथा उसके वर्ष पर दूसरा प्रश्न। हर वर्ष लौटने वाले नाम हैं सरोजिनी नायडू अपने तीन संग्रहों के साथ, पहली महिला ज्ञानपीठ विजेता आशापूर्णा देवी, पिंजर के साथ अमृता प्रीतम, यामा के साथ महादेवी वर्मा, हजार चुराशिर माँ के साथ महाश्वेता देवी, 1997 के बुकर के साथ अरुंधति रॉय और 2022 के अंतरराष्ट्रीय बुकर के साथ गीतांजलि श्री। तीन जाल बार-बार आते हैं। पहला अनिता देसाई और किरण देसाई को आपस में बदल देता है। दूसरा वहाँ बुकर पुरस्कार का विकल्प देता है जहाँ उत्तर अंतरराष्ट्रीय बुकर है, जो अनूदित कृतियों का अलग पुरस्कार है। तीसरा उपनामों का प्रयोग करता है, विशेष रूप से कमला दास के लिए माधविकुट्टी और इंदिरा गोस्वामी के लिए मामोनी रायसम गोस्वामी। लेखिका, भाषा और रचना एक साथ याद करें तथा ज्ञानपीठ वर्षों का क्रम भी।
महत्वपूर्ण तथ्य
| पहली महिला ज्ञानपीठ विजेता | आशापूर्णा देवी, 1976, प्रथम प्रतिश्रुति (बांग्ला) |
|---|---|
| भारत कोकिला | सरोजिनी नायडू; कांग्रेस की पहली भारतीय महिला अध्यक्ष, कानपुर अधिवेशन 1925 |
| अमृता प्रीतम | ज्ञानपीठ 1981, कागज ते कैनवास; विभाजन पर उपन्यास पिंजर; पंजाबी |
| महादेवी वर्मा | ज्ञानपीठ 1982, यामा; अन्य रचनाएँ नीरजा, दीपशिखा, अतीत के चलचित्र |
| कुर्रतुल ऐन हैदर | ज्ञानपीठ 1989, आग का दरिया (उर्दू) |
| महाश्वेता देवी | ज्ञानपीठ 1996; हजार चुराशिर माँ; अरण्येर अधिकार, साहित्य अकादमी 1979 |
| इंदिरा गोस्वामी | ज्ञानपीठ 2000; असमिया; मामोनी रायसम गोस्वामी नाम से भी जानी जाती हैं |
| प्रतिभा राय | ज्ञानपीठ 2011; ओड़िया; उपन्यास याज्ञसेनी |
| कृष्णा सोबती | ज्ञानपीठ 2017; हिंदी; जिंदगीनामा, मित्रो मरजानी |
| बुकर पुरस्कार | अरुंधति रॉय 1997, द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स; किरण देसाई 2006, द इनहेरिटेंस ऑफ लॉस |
| पुलित्जर पुरस्कार (कथा) | झुंपा लाहिड़ी, 2000, इंटरप्रेटर ऑफ मैलेडीज |
| अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार | गीतांजलि श्री, 2022, रेत समाधि; अनुवाद टॉम्ब ऑफ सैंड, डेजी रॉकवेल |
| कमला दास | माई स्टोरी; समर इन कलकत्ता; मलयालम उपनाम माधविकुट्टी |
| आरंभिक स्त्रीवादी ग्रंथ | स्त्री पुरुष तुलना, ताराबाई शिंदे, 1882; द हाई कास्ट हिंदू वुमन, पंडिता रमाबाई, 1887 |
| भारतीय महिला की पहली आत्मकथा | रससुंदरी देवी की आमार जीबोन, बांग्ला में |
| अंग्रेजी में साहित्य अकादमी | नयनतारा सहगल 1986, रिच लाइक अस; शशि देशपांडे 1990, दैट लॉन्ग साइलेंस |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाली पहली महिला कौन थीं?
- A.अमृता प्रीतम
- B.महादेवी वर्मा
- C.आशापूर्णा देवी
- D.महाश्वेता देवी
उत्तर देखें
उन्हें 1976 में बांग्ला उपन्यास प्रथम प्रतिश्रुति के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला, जो एक बांग्ला परिवार की तीन पीढ़ियों की स्त्रियों की कथा कहने वाली त्रयी का पहला भाग है, और वे इस पुरस्कार के इतिहास में यह सम्मान पाने वाली पहली महिला थीं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →काव्य संग्रह द गोल्डन थ्रेशोल्ड की रचना किस भारतीय लेखिका ने की?
- A.तोरू दत्त
- B.सरोजिनी नायडू
- C.कमला दास
- D.पंडिता रमाबाई
उत्तर देखें
1905 में प्रकाशित द गोल्डन थ्रेशोल्ड अंग्रेजी में उनका पहला काव्य संग्रह था, और इसके बाद 1912 में द बर्ड ऑफ टाइम तथा 1917 में द ब्रोकन विंग आए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1997 में अरुंधति रॉय को किस उपन्यास के लिए बुकर पुरस्कार मिला?
- A.द इनहेरिटेंस ऑफ लॉस
- B.टॉम्ब ऑफ सैंड
- C.द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स
- D.ए सूटेबल बॉय
उत्तर देखें
अरुंधति रॉय का यह पहला उपन्यास केरल के अयमनम में स्थित है और राहेल तथा एस्था नामक जुड़वाँ बच्चों के इर्द-गिर्द बुना गया है; इसे भारत की स्वतंत्रता के पचासवें वर्ष, 1997 में बुकर पुरस्कार मिला।
पूरी व्याख्या पढ़ें →वर्ष 2000 में कथा साहित्य का पुलित्जर पुरस्कार जीतने वाली इंटरप्रेटर ऑफ मैलेडीज किसकी रचना है?
- A.झुंपा लाहिड़ी
- B.किरण देसाई
- C.चित्रा बनर्जी दिवाकरुणी
- D.अनिता देसाई
उत्तर देखें
इंटरप्रेटर ऑफ मैलेडीज नौ कहानियों का संग्रह है, जिसमें भारतीय और भारतीय-अमेरिकी जीवन की कथाएँ हैं, और इसे वर्ष 2000 में कथा साहित्य का पुलित्जर पुरस्कार मिला; इस प्रकार लाहिड़ी कथा साहित्य में यह पुरस्कार पाने वाली भारतीय मूल की पहली लेखिका बनीं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मूल रूप से हिंदी में लिखी गई पहली पुस्तक, जिसे अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार मिला, कौन-सी है?
- A.जिंदगीनामा
- B.रेत समाधि
- C.प्रथम प्रतिश्रुति
- D.आग का दरिया
उत्तर देखें
गीतांजलि श्री के उपन्यास रेत समाधि का अंग्रेजी अनुवाद डेजी रॉकवेल ने टॉम्ब ऑफ सैंड नाम से किया और उसे 2022 में अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार मिला; इस प्रकार यह हिंदी में लिखी गई तथा किसी भी भारतीय भाषा की पहली पुस्तक बनी जिसे यह पुरस्कार मिला।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1981 में ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाली अमृता प्रीतम मुख्य रूप से किस भाषा में लिखती थीं?
- A.उर्दू
- B.बांग्ला
- C.पंजाबी
- D.असमिया
उत्तर देखें
अमृता प्रीतम आधुनिक पंजाबी की सर्वाधिक प्रसिद्ध लेखिका हैं और 1981 का ज्ञानपीठ पुरस्कार उन्हें पंजाबी काव्य संग्रह कागज ते कैनवास के लिए दिया गया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1882 में प्रकाशित तथा किसी भारतीय भाषा के आरंभिक स्त्रीवादी ग्रंथों में गिनी जाने वाली स्त्री पुरुष तुलना किसने लिखी?
- A.ताराबाई शिंदे
- B.सावित्रीबाई फुले
- C.पंडिता रमाबाई
- D.रससुंदरी देवी
उत्तर देखें
1882 में प्रकाशित मराठी पुस्तिका स्त्री पुरुष तुलना में यह तर्क दिया गया कि समाज स्त्रियों पर जो मानदंड लागू करता है, वे पुरुषों के मानदंडों से बहुत कठोर हैं, और इसे किसी भी भारतीय भाषा के आरंभिक स्त्रीवादी लेखन में पढ़ा जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →यामा, जिसके लिए उसकी रचनाकार को 1982 में ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला, किस लेखिका की कृति है?
- A.सुभद्रा कुमारी चौहान
- B.महादेवी वर्मा
- C.कृष्णा सोबती
- D.प्रतिभा राय
उत्तर देखें
यामा उनके पूर्व के काव्य संग्रहों को एक साथ समेटने वाली कृति है और इसके लिए उन्हें 1982 में ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उपन्यास हजार चुराशिर माँ किसकी रचना है?
- A.आशापूर्णा देवी
- B.नवनीता देव सेन
- C.महाश्वेता देवी
- D.कुर्रतुल ऐन हैदर
उत्तर देखें
1974 में बांग्ला में लिखा गया हजार चुराशिर माँ उस माँ की कथा कहता है जिसे पता चलता है कि नक्सली के रूप में मारा गया उसका बेटा पुलिस के रजिस्टर में केवल एक शव संख्या है; बाद में इस पर हिंदी में हजार चौरासी की माँ नाम से फिल्म…
पूरी व्याख्या पढ़ें →आत्मकथा माई स्टोरी किस भारतीय लेखिका ने लिखी, जो अपना मलयालम गद्य माधविकुट्टी नाम से प्रकाशित करती थीं?
- A.कमला दास
- B.सुधा मूर्ति
- C.नयनतारा सहगल
- D.शशि देशपांडे
उत्तर देखें
माई स्टोरी उनकी निर्भीक आत्मकथा है, जो पहले धारावाहिक रूप में और बाद में पुस्तक रूप में आई; वे अंग्रेजी कविता कमला दास नाम से लिखती थीं और मलयालम कथा-गद्य माधविकुट्टी उपनाम से प्रकाशित करती थीं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाली पहली महिला कौन थीं?
आशापूर्णा देवी, जिन्हें 1976 में बांग्ला उपन्यास प्रथम प्रतिश्रुति के लिए यह सम्मान मिला। यह एक बांग्ला परिवार की तीन पीढ़ियों की स्त्रियों पर लिखी त्रयी का पहला भाग है।
किन भारतीय लेखिकाओं को बुकर पुरस्कार मिला है?
अरुंधति रॉय को 1997 में द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स के लिए और किरण देसाई को 2006 में द इनहेरिटेंस ऑफ लॉस के लिए बुकर पुरस्कार मिला। गीतांजलि श्री को 2022 में रेत समाधि के लिए अलग अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार मिला, जिसका अनुवाद टॉम्ब ऑफ सैंड है।
सरोजिनी नायडू को भारत कोकिला क्यों कहा जाता है?
यह नाम उनकी अंग्रेजी कविता की गीतात्मकता से आया, जो द गोल्डन थ्रेशोल्ड, द बर्ड ऑफ टाइम और द ब्रोकन विंग में दिखती है। वे कांग्रेस अधिवेशन की अध्यक्षता करने वाली पहली भारतीय महिला भी थीं, 1925 में कानपुर में।
माधविकुट्टी उपनाम से कौन लिखती थीं?
कमला दास। वे अंग्रेजी कविता कमला दास नाम से और मलयालम कथा तथा गद्य माधविकुट्टी नाम से प्रकाशित करती थीं। उनकी आत्मकथा माई स्टोरी सर्वाधिक पूछी जाती है।
किन लेखिकाओं को ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला है?
आशापूर्णा देवी 1976, अमृता प्रीतम 1981, महादेवी वर्मा 1982, कुर्रतुल ऐन हैदर 1989, महाश्वेता देवी 1996, इंदिरा गोस्वामी 2000, प्रतिभा राय 2011 और कृष्णा सोबती 2017।
बुकर पुरस्कार और अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार में क्या अंतर है?
बुकर पुरस्कार अंग्रेजी में लिखे उपन्यास को मिलता है, जैसे 1997 में अरुंधति रॉय को। अंतरराष्ट्रीय बुकर अंग्रेजी में अनूदित पुस्तक को मिलता है और उसकी राशि लेखक तथा अनुवादक में बाँटी जाती है, जैसे 2022 में गीतांजलि श्री और डेजी रॉकवेल को।
स्रोत
- साहित्य अकादमी पुरस्कार: भाषावार विजेता सूची — साहित्य अकादमी, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार
- ज्ञानपीठ पुरस्कार: विजेता सूची और प्रशस्तियाँ — भारतीय ज्ञानपीठ
- सरोजिनी नायडू की संकलित कविताएँ — सार्वजनिक क्षेत्र के संस्करण





