प्रसिद्ध लेखकों के उपनाम: वास्तविक नाम और तख़ल्लुस
उपनामों के परीक्षा नोट्स: प्रेमचंद, निराला, अज्ञेय, ग़ालिब और गुलज़ार, साथ ही मार्क ट्वेन, ऑरवेल तथा इलियट, और वे उपाधियाँ जो उपनाम नहीं हैं।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

उपनाम वह गढ़ा हुआ नाम है जिसके अंतर्गत कोई लेखक अपनी रचना प्रकाशित करता है; अंग्रेजी में इसे स्यूडोनिम, फ्रेंच में नोम द प्लूम और उर्दू शायरी में तख़ल्लुस कहा जाता है। लेखकों ने उपनाम हर प्रकार के कारण से लिए हैं: ऐसे प्रकाशकों से अपना स्त्री होना छिपाने के लिए जो स्त्री की रचना नहीं छापते थे, औपनिवेशिक सरकार की दृष्टि से बचने के लिए, गंभीर लेखन को लोकप्रिय लेखन से अलग रखने के लिए, सरकारी नौकरी और साहित्यिक जीवन को अलग-अलग रखने के लिए, अथवा केवल इस कारण कि छोटा और मधुर नाम शेर के अंत में अच्छा बैठता है। प्रतियोगी परीक्षा के लिए यह विषय शुद्ध मिलान का है: एक ओर वास्तविक नाम और दूसरी ओर उपनाम। एसएससी, रेलवे तथा राज्य परीक्षाओं में यह एक पंक्ति के प्रश्न और चार युग्मों के मिलान के रूप में आता है, अतः हिंदी, उर्दू, बांग्ला और विश्व साहित्य के खंड बनाकर याद करना सबसे सुरक्षित है।
लेखक उपनाम क्यों रखते हैं
- दूसरे लिंग के नाम से लिखने के लिए: ब्रॉन्टे बहनों ने करर, एलिस और एक्टन बेल के नाम से तथा मेरी एन इवांस ने जॉर्ज इलियट के नाम से लिखा, क्योंकि स्त्रियों की कथा-रचना को कम गंभीरता से लिया जाता था।
- दो प्रकार के लेखन को अलग रखने के लिए: अगाथा क्रिस्टी ने प्रेम-कथाएँ मेरी वेस्टमैकॉट के नाम से और स्टीफन किंग ने रिचर्ड बैकमैन के नाम से लिखीं।
- सरकार अथवा नियोक्ता के अधीन रहकर स्वतंत्र लेखन के लिए: उन्नीसवीं शताब्दी का बहुत सा राजनीतिक लेखन गढ़े नामों से प्रकाशित हुआ।
- विधा की परंपरा निभाने के लिए: प्रत्येक उर्दू शायर तख़ल्लुस रखता है, जो गज़ल के अंतिम शेर में गूँथा जाता है।
- अर्थपूर्ण नाम चुनने के लिए: निराला का अर्थ अनन्य, अज्ञेय का अर्थ न जाना जा सकने वाला और दिनकर का अर्थ सूर्य है।
हिंदी लेखक और उनके उपनाम
| वास्तविक नाम | उपनाम |
|---|---|
| धनपत राय श्रीवास्तव | प्रेमचंद, तथा आरंभिक उर्दू लेखन में नवाब राय |
| सूर्यकांत त्रिपाठी | निराला |
| सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन | अज्ञेय |
| रामधारी सिंह | दिनकर |
| गोपाल दास सक्सेना | नीरज |
| अयोध्या सिंह उपाध्याय | हरिऔध |
| हरिवंश राय श्रीवास्तव | बच्चन |
| वैद्यनाथ मिश्र | हिंदी में नागार्जुन और मैथिली में यात्री |
| प्रभु लाल गर्ग | काका हाथरसी |
| केदारनाथ पांडेय | राहुल सांकृत्यायन |
इनमें प्रेमचंद सर्वाधिक पूछे जाते हैं। धनपत राय ने पहले उर्दू में नवाब राय के नाम से लिखा; जब उनका कहानी संग्रह सोज़-ए-वतन औपनिवेशिक प्रशासन ने जब्त कर लिया तो उन्होंने प्रेमचंद के नाम से लिखना आरंभ किया और इसी नाम से गोदान, निर्मला, गबन तथा कफन लिखे। निराला, दिनकर, नीरज और बच्चन वे उपनाम हैं जो आगे चलकर कुलनाम बन गए और परिवार तथा पुस्तकों के मुखपृष्ठ पर चलते रहे।
उर्दू शायर और तख़ल्लुस
उर्दू और फारसी शायरी में उपनाम वैकल्पिक नहीं है। उसे तख़ल्लुस कहा जाता है और शायर प्रायः गज़ल के अंतिम शेर अर्थात मक़ता में स्वयं का नाम लेता है। मिर्ज़ा असदुल्ला बेग खाँ ने पहले असद और बाद में ग़ालिब के नाम से लिखा, जिसका अर्थ विजेता अथवा प्रभावी होता है। रघुपति सहाय फ़िराक़ गोरखपुरी, अब्दुल हई साहिर लुधियानवी, अतहर हुसैन रिज़वी कैफ़ी आज़मी, असरार उल हसन खाँ मजरूह सुल्तानपुरी, शब्बीर हसन खाँ जोश मलीहाबादी और संपूरण सिंह कालरा गुलज़ार के नाम से जाने जाते हैं। ऐसे नाम का दूसरा भाग प्रायः शायर का नगर होता है, इसी कारण लुधियानवी, सुल्तानपुरी, आज़मी, मलीहाबादी और गोरखपुरी बार-बार मिलते हैं।
विश्व साहित्य
| वास्तविक नाम | उपनाम |
|---|---|
| सैमुअल लैंगहॉर्न क्लेमेंस | मार्क ट्वेन |
| एरिक आर्थर ब्लेयर | जॉर्ज ऑरवेल |
| चार्ल्स लुटविज डॉजसन | लुई कैरोल |
| मेरी एन इवांस | जॉर्ज इलियट |
| विलियम सिडनी पोर्टर | ओ. हेनरी |
| हेक्टर ह्यू मुनरो | साकी |
| फ्रांस्वा-मारी आरुए | वॉल्तेयर |
| ज्याँ-बातिस्त पोकलाँ | मोलियर |
| थियोडोर सियस गाइज़ल | डॉ. सियस |
| नेफ्ताली रिकार्डो रेयेस बासोआल्तो | पाब्लो नेरूदा |
| एलिसा रोज़ेनबॉम | आयन रैंड |
| कैरेन ब्लिक्सन | इसाक डिनेसन |
मार्क ट्वेन ने यह नाम मिसिसिपी नदी के नाविकों की उस पुकार से लिया जिसमें मार्क ट्वेन का अर्थ दो फैदम गहरे सुरक्षित जल से था। चार्ल्स डिकेंस ने अपने आरंभिक रेखाचित्र बोज़ के नाम से लिखे। जे. के. रोलिंग, जिनका नाम ही इस प्रकार संक्षिप्त रखा गया कि लड़के पुस्तक पढ़ें, बाद में अपराध कथाएँ रॉबर्ट गैलब्रेथ के नाम से लिखती रहीं। निकोलस बुर्बाकी कोई व्यक्ति ही नहीं था, वह फ्रांसीसी गणितज्ञों के एक समूह का साझा उपनाम था।
किन भ्रमों से बचना है
अनेक नाम उपनाम जैसे लगते हैं परंतु उपनाम नहीं हैं। रवींद्रनाथ टैगोर के लिए गुरुदेव, गांधीजी के लिए महात्मा और बापू, सुभाष चंद्र बोस के लिए नेताजी, चित्तरंजन दास के लिए देशबंधु तथा बाल गंगाधर तिलक के लिए लोकमान्य दूसरों द्वारा दी गई उपाधियाँ हैं, वे नाम नहीं जिनसे उन्होंने प्रकाशन किया। टैगोर ने वास्तविक उपनाम भानुसिंह रखा था, जिससे भानुसिंह ठाकुरेर पदावली की कविताएँ लिखी गईं, और परीक्षक को यही तथ्य चाहिए। इसी प्रकार मुंशी प्रेमचंद में मुंशी बाद में जुड़ा आदर-शब्द है, उनका चुना उपनाम नहीं, तथा कबीर, तुलसीदास और सूरदास ने अपने ही नाम से लिखा। उपनाम, उपाधि और कुलनाम को अलग-अलग रखने पर यह अध्याय अंक देने वाला बन जाता है।
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्न प्रायः मिलान का ही होता है और तीन रूपों में आता है। पहला, सीधा एक पंक्ति का प्रश्न, जिसमें प्रेमचंद, निराला, अज्ञेय, दिनकर अथवा मार्क ट्वेन किसी भी ओर दे दिए जाते हैं। दूसरा, चार युग्मों का मिलान, जिसमें एक युग्म गलत होता है और प्रायः दो हिंदी उपनाम अथवा समान नगर वाले दो उर्दू शायर आपस में बदल दिए जाते हैं। तीसरा, बेमेल छाँटने का प्रश्न, जिसमें नेताजी, गुरुदेव, लोकमान्य या देशबंधु जैसी उपाधि वास्तविक उपनामों के बीच रख दी जाती है, अथवा मुंशी को प्रेमचंद के उपनाम का भाग मान लिया जाता है। उर्दू पक्ष से मतला, मक़ता, रदीफ़, क़ाफ़िया और तख़ल्लुस की परिभाषाएँ पूछी जाती हैं। सुरक्षित तैयारी यह है कि प्रत्येक युग्म दोनों दिशाओं से याद हो और तीन श्रेणियाँ अलग रहें: चुना गया उपनाम, दी गई उपाधि और कुलनाम।
महत्वपूर्ण तथ्य
| प्रेमचंद | धनपत राय श्रीवास्तव; पूर्व उपनाम नवाब राय |
|---|---|
| निराला | सूर्यकांत त्रिपाठी |
| अज्ञेय | सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन |
| दिनकर | रामधारी सिंह |
| नीरज | गोपाल दास सक्सेना |
| हरिऔध | अयोध्या सिंह उपाध्याय |
| नागार्जुन और यात्री | वैद्यनाथ मिश्र, हिंदी तथा मैथिली में |
| काका हाथरसी | प्रभु लाल गर्ग |
| राहुल सांकृत्यायन | केदारनाथ पांडेय |
| ग़ालिब | मिर्ज़ा असदुल्ला बेग खाँ; पूर्व तख़ल्लुस असद |
| फ़िराक़ गोरखपुरी | रघुपति सहाय |
| साहिर लुधियानवी | अब्दुल हई |
| कैफ़ी आज़मी | अतहर हुसैन रिज़वी |
| गुलज़ार | संपूरण सिंह कालरा |
| मार्क ट्वेन | सैमुअल लैंगहॉर्न क्लेमेंस |
| जॉर्ज ऑरवेल | एरिक आर्थर ब्लेयर |
| जॉर्ज इलियट | मेरी एन इवांस |
| लुई कैरोल | चार्ल्स लुटविज डॉजसन |
| बोज़ | चार्ल्स डिकेंस |
| भानुसिंह | रवींद्रनाथ टैगोर |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
प्रेमचंद किस लेखक का उपनाम था?
- A.धनपत राय श्रीवास्तव
- B.सूर्यकांत त्रिपाठी
- C.रामधारी सिंह
- D.अयोध्या सिंह उपाध्याय
उत्तर देखें
उन्होंने पहले उर्दू में नवाब राय के नाम से लिखा और औपनिवेशिक प्रशासन द्वारा उनका संग्रह सोज़-ए-वतन जब्त किए जाने के बाद प्रेमचंद नाम अपनाया, जिससे गोदान, निर्मला, गबन, रंगभूमि तथा कहानी कफन लिखी गईं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निराला किसका उपनाम था?
- A.सुमित्रानंदन पंत
- B.सूर्यकांत त्रिपाठी
- C.महादेवी वर्मा
- D.जयशंकर प्रसाद
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उन्हें सदैव सूर्यकांत त्रिपाठी निराला लिखा जाता है; इस उपनाम का अर्थ अनन्य अथवा सबसे भिन्न है, और उन्होंने सरोज स्मृति, राम की शक्ति पूजा तथा भिक्षुक जैसी रचनाएँ दीं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →द एडवेंचर्स ऑफ टॉम सॉयर के लेखक मार्क ट्वेन किसका उपनाम था?
- A.सैमुअल लैंगहॉर्न क्लेमेंस
- B.विलियम सिडनी पोर्टर
- C.एरिक आर्थर ब्लेयर
- D.चार्ल्स लुटविज डॉजसन
उत्तर देखें
उन्होंने यह नाम मिसिसिपी नदी के नाविकों की उस पुकार से लिया जिसमें मार्क ट्वेन का अर्थ दो फैदम की गहराई अर्थात सुरक्षित जल होता था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मिर्ज़ा असदुल्ला बेग खाँ ने कौन सा उपनाम प्रयोग किया?
- A.ग़ालिब
- B.फ़िराक़
- C.जोश
- D.मजरूह
उत्तर देखें
मिर्ज़ा असदुल्ला बेग खाँ ने पहले असद तख़ल्लुस रखा और बाद में ग़ालिब चुना, जिसका अर्थ प्रभावी अथवा विजेता है, और वे अनेक गज़लों के अंतिम शेर में स्वयं का नाम लेते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मिडलमार्च की लेखिका जॉर्ज इलियट किसका उपनाम था?
- A.जेन ऑस्टेन
- B.मेरी एन इवांस
- C.एमिली ब्रॉन्टे
- D.वर्जीनिया वुल्फ
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उन्होंने पुरुष नाम इसलिए अपनाया कि उनके उपन्यास स्त्री की हल्की प्रेम-कथा के रूप में न देखे जाकर गंभीर साहित्य माने जाएँ, और इसी नाम से मिडलमार्च, साइलस मार्नर, एडम बीड तथा द मिल ऑन द फ्लॉस लिखे गए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भानुसिंह ठाकुरेर पदावली की कविताओं के लिए रवींद्रनाथ टैगोर ने कौन सा उपनाम प्रयोग किया था?
- A.गुरुदेव
- B.भानुसिंह
- C.कविगुरु
- D.ठाकुर
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किशोरावस्था में टैगोर ने प्राचीन वैष्णव शैली में कविताएँ लिखकर उन्हें भानुसिंह नामक कवि की रचना बताया था, इसी कारण उस संग्रह का नाम भानुसिंह ठाकुरेर पदावली है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →वैद्यनाथ मिश्र किस उपनाम से अधिक प्रसिद्ध हैं?
- A.नागार्जुन
- B.दिनकर
- C.नीरज
- D.अज्ञेय
उत्तर देखें
वैद्यनाथ मिश्र ने हिंदी में नागार्जुन नाम से लिखा, जो बौद्ध दार्शनिक से लिया गया है, और मैथिली में यात्री नाम से, जिसका अर्थ पथिक है; वे बलचनमा तथा तीखी राजनीतिक कविताओं के लिए जाने जाते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ने किस उपनाम से लेखन किया?
- A.अज्ञेय
- B.हरिऔध
- C.बच्चन
- D.निराला
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वे नई कविता आंदोलन के प्रमुख हस्ताक्षर थे, उन्होंने तार सप्तक संकलनों का संपादन कर एक पीढ़ी के कवियों को सामने लाया, और शेखर एक जीवनी तथा नदी के द्वीप उपन्यास लिखे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उर्दू शायरी में शायर द्वारा रखा गया वह उपनाम, जो प्रायः गज़ल के अंतिम शेर में आता है, क्या कहलाता है?
- A.रदीफ़
- B.क़ाफ़िया
- C.तख़ल्लुस
- D.मक़ता
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तख़ल्लुस वह उपनाम है जो शायर अपनाता है, जैसे ग़ालिब, मीर, फ़ैज़ अथवा फ़िराक़, और परंपरा के अनुसार शायर गज़ल के अंतिम शेर में उसका उल्लेख करता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन उपनाम नहीं है?
- A.बोज़
- B.साकी
- C.नेताजी
- D.वॉल्तेयर
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नेताजी सुभाष चंद्र बोस को उनके अनुयायियों द्वारा दी गई आदर-उपाधि है और उन्होंने इस नाम से अपना लेखन प्रकाशित नहीं किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →संपूरण सिंह कालरा किस प्रसिद्ध गीतकार और कवि का वास्तविक नाम है?
- A.गुलज़ार
- B.साहिर लुधियानवी
- C.कैफ़ी आज़मी
- D.शैलेंद्र
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संपूरण सिंह कालरा ने गुलज़ार उपनाम रखा, जिसका अर्थ फूलों से भरा उद्यान है, और वे उर्दू कविता तथा फिल्मी गीतों दोनों के लिए प्रसिद्ध हैं; उनका संग्रह रात पश्मीने की है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एनिमल फार्म के लेखक एरिक आर्थर ब्लेयर किस नाम से अधिक जाने जाते हैं?
- A.जॉर्ज ऑरवेल
- B.जॉर्ज इलियट
- C.जॉर्ज बर्नार्ड शॉ
- D.ग्राहम ग्रीन
उत्तर देखें
एरिक आर्थर ब्लेयर ने जॉर्ज ऑरवेल उपनाम चुना, जिसका कुलनाम इंग्लैंड की ऑरवेल नदी से लिया गया, और इसी नाम से एनिमल फार्म, उन्नीस सौ चौरासी, बर्मीज़ डेज़ तथा निबंध शूटिंग एन एलिफेंट लिखे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उपनाम क्या होता है?
उपनाम वह गढ़ा हुआ नाम है जिससे कोई लेखक अपनी रचना प्रकाशित करता है; इसे स्यूडोनिम, नोम द प्लूम तथा उर्दू शायरी में तख़ल्लुस कहा जाता है। लेखक उपनाम अपनी पहचान या लिंग छिपाने, भिन्न प्रकार के लेखन को अलग रखने, सरकार या नियोक्ता के अधीन रहकर स्वतंत्र लिखने, अथवा केवल अर्थपूर्ण नाम चुनने के लिए रखते हैं, जैसे निराला का अर्थ अनन्य है।
प्रेमचंद का वास्तविक नाम क्या था?
धनपत राय श्रीवास्तव। उन्होंने उर्दू में नवाब राय के नाम से लिखना आरंभ किया और औपनिवेशिक सरकार द्वारा उनका संग्रह सोज़-ए-वतन जब्त किए जाने के बाद प्रेमचंद नाम अपनाया, जिससे गोदान, निर्मला, गबन, रंगभूमि तथा कहानी कफन लिखी गईं। प्रेमचंद के आगे प्रायः लगाया जाने वाला मुंशी शब्द बाद में जुड़ा आदर-शब्द है और उनके चुने उपनाम का भाग नहीं था।
उर्दू शायरी में तख़ल्लुस क्या है?
तख़ल्लुस वह उपनाम है जो उर्दू अथवा फारसी का शायर अपनाता है, और परंपरा के अनुसार वह उसका उल्लेख गज़ल के अंतिम शेर मक़ता में करता है। ग़ालिब, मीर, फ़ैज़, फ़िराक़ और जोश तख़ल्लुस हैं। ऐसे नाम का दूसरा भाग प्रायः शायर का नगर बताता है, जैसे लुधियाना के लिए लुधियानवी, आज़मगढ़ के लिए आज़मी और गोरखपुर के लिए गोरखपुरी।
निराला, अज्ञेय और दिनकर किन लेखकों के उपनाम थे?
निराला सूर्यकांत त्रिपाठी का, अज्ञेय सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन का और दिनकर रामधारी सिंह का उपनाम था। नीरज गोपाल दास सक्सेना थे, हरिऔध अयोध्या सिंह उपाध्याय थे, तथा बच्चन हरिवंश राय श्रीवास्तव का उपनाम था, जिसे आगे उनके परिवार ने कुलनाम के रूप में अपनाया।
क्या गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर का उपनाम है?
नहीं। गुरुदेव तथा कविगुरु दूसरों द्वारा दी गई आदर-उपाधियाँ हैं। उन्होंने वास्तव में भानुसिंह उपनाम प्रयोग किया था, जिससे भानुसिंह ठाकुरेर पदावली की कविताएँ प्रस्तुत की गईं। परीक्षक इस अंतर को परखने के लिए गुरुदेव, नेताजी, महात्मा, लोकमान्य और देशबंधु जैसी उपाधियाँ वास्तविक उपनामों के बीच रख देते हैं।
उन्नीसवीं शताब्दी की लेखिकाओं ने पुरुष नाम क्यों अपनाए?
क्योंकि प्रकाशक और समीक्षक स्त्रियों की कथा-रचना को हल्का पठन मानते थे। मेरी एन इवांस ने जॉर्ज इलियट के नाम से लिखा, और शार्लट, एमिली तथा ऐन ब्रॉन्टे ने अपने प्रथम नामों के आद्यक्षर रखते हुए करर, एलिस और एक्टन बेल के नाम से प्रकाशन किया। यह प्रवृत्ति समाप्त नहीं हुई: जे. के. रोलिंग ने आद्यक्षर रखे कि लड़के पुस्तक उठाएँ और बाद में रॉबर्ट गैलब्रेथ के नाम से अपराध कथाएँ लिखीं।
स्रोत
- भारतीय साहित्य का विश्वकोश तथा लेखक परिचय — साहित्य अकादमी
- साहित्य का नोबेल पुरस्कार: विजेताओं का परिचय — नोबेल फाउंडेशन
- अंतरा और आरोह, कक्षा 11 तथा 12 की हिंदी पाठ्यपुस्तकें — एनसीईआरटी





