एक परमाणु से दूसरे परमाणु को इलेक्ट्रॉनों के पूर्ण स्थानांतरण से बनने वाला रासायनिक बंधन कहलाता है:
- A.सहसंयोजक बंधन
- B.आयनिक बंधन
- C.उपसहसंयोजक बंधन
- D.हाइड्रोजन बंधन
सही उत्तर
B. आयनिक बंधन
व्याख्या
सही उत्तर B, आयनिक बंधन है। आयनिक या विद्युत संयोजक बंधन में धातु परमाणु एक या अधिक इलेक्ट्रॉन अधातु परमाणु को दे देता है; धातु धनायन बन जाती है और अधातु ऋणायन, तथा दोनों के बीच का स्थिर वैद्युत आकर्षण यौगिक को जोड़े रखता है, जैसे सोडियम क्लोराइड और मैग्नीशियम ऑक्साइड में। विकल्प A गलत है क्योंकि सहसंयोजक बंधन दो परमाणुओं के बीच, प्रायः दो अधातुओं के बीच, इलेक्ट्रॉन युग्मों की साझेदारी से बनता है और उसमें स्थानांतरण होता ही नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि उपसहसंयोजक बंधन ऐसा विशेष सहसंयोजक बंधन है जिसमें दोनों साझा इलेक्ट्रॉन एक ही परमाणु से आते हैं, जैसे अमोनियम आयन में; वहाँ भी इलेक्ट्रॉन साझा होते हैं, स्थानांतरित नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि हाइड्रोजन बंधन अत्यधिक विद्युत ऋणात्मक परमाणु से जुड़े हाइड्रोजन और दूसरे ऐसे परमाणु के एकाकी युग्म के बीच का दुर्बल आकर्षण है।
पूरा लेख पढ़ें: रासायनिक बंधन और अभिक्रियाएं: प्रकार, नियम और तथ्य
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से कौन-सी द्विविस्थापन अभिक्रिया नहीं है?
- A.BaCl2 + H2SO4 → BaSO4 + 2HCl
- B.2H2 + O2 → 2H2O
- C.CuSO4 + H2S → CuS + H2SO4
- D.NaOH + HCl → NaCl + H2O
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 2H2 + O2 → 2H2O
व्याख्या
सही उत्तर B है। द्विविस्थापन अभिक्रिया में दो यौगिक अपने आयनों का आदान-प्रदान करते हैं, इसलिए दोनों अभिकारकों का यौगिक होना आवश्यक है। यहाँ हाइड्रोजन और ऑक्सीजन तत्व हैं जो मिलकर एक ही उत्पाद जल बनाते हैं, अतः यह संयोजन अभिक्रिया है और साथ ही दहन तथा रेडॉक्स भी, किंतु द्विविस्थापन निश्चित रूप से नहीं। विकल्प A इसलिए गलत विकल्प है क्योंकि बेरियम क्लोराइड और सल्फ्यूरिक अम्ल आयन बदलकर बेरियम सल्फेट का श्वेत अवक्षेप तथा हाइड्रोक्लोरिक अम्ल देते हैं, जो द्विविस्थापन का प्रचलित अवक्षेपण प्रकार है। विकल्प C गलत है क्योंकि कॉपर सल्फेट और हाइड्रोजन सल्फाइड आयन बदलकर काला कॉपर सल्फाइड तथा सल्फ्यूरिक अम्ल देते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि सोडियम हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल आयन बदलकर लवण और जल देते हैं, जो उदासीनीकरण है और द्विविस्थापन का ही विशेष रूप है। पहचान सरल है: दो यौगिक साथी बदल रहे हों।
निम्नलिखित यौगिकों में से किसमें द्विबंध होता है?
- A.एथेन
- B.मेथेन
- C.एसिटिलीन
- D.एथिलीन
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. एथिलीन
व्याख्या
सही उत्तर D, एथिलीन है। एथिलीन, जिसे एथीन भी कहते हैं, का सूत्र C2H4 है और उसके दोनों कार्बन परमाणु इलेक्ट्रॉनों के दो युग्म साझा करते हैं, अर्थात उनके बीच कार्बन-कार्बन द्विबंध है, जो एक सिग्मा और एक पाई बंध से बना है; यह सबसे सरल एल्कीन है। विकल्प A गलत है क्योंकि एथेन, C2H6, एल्केन है जिसमें दोनों कार्बन केवल एकल बंध से जुड़े हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि मेथेन, CH4, में केवल एक कार्बन परमाणु है जो चार हाइड्रोजन से एकल बंधों द्वारा जुड़ा है और उसमें कार्बन-कार्बन बंध हो ही नहीं सकता। विकल्प C गलत है क्योंकि एसिटिलीन या एथाइन, C2H2, में त्रिबंध होता है, अर्थात तीन साझा युग्म जो एक सिग्मा और दो पाई बंध बनाते हैं, द्विबंध नहीं। क्रम याद रखें: एथेन एकल, एथिलीन द्विक और एसिटिलीन त्रिक, तथा द्विबंध और त्रिबंध वाले यौगिक असंतृप्त होते हैं।
बेंजीन में सिग्मा और पाई बंधों की संख्या क्रमशः कितनी होती है?
- A.12 और 3
- B.3 और 3
- C.6 और 3
- D.9 और 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. 12 और 3
व्याख्या
सही उत्तर A, 12 और 3 है। बेंजीन का सूत्र C6H6 है और उसमें छह कार्बन परमाणुओं की वलय होती है, जिनमें से प्रत्येक पर एक हाइड्रोजन लगा रहता है। पहले सिग्मा बंध गिनें: वलय के चारों ओर छह कार्बन-कार्बन बंध और छह कार्बन-हाइड्रोजन बंध मिलकर बारह सिग्मा बंध देते हैं। केकुले संरचना के अनुसार वलय में तीन कार्बन-कार्बन द्विबंध भी हैं, और चूँकि प्रत्येक द्विबंध एक सिग्मा तथा एक पाई से बनता है, अतिरिक्त अंश तीन पाई बंध हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि केवल तीन कहना बारह सिग्मा के ढाँचे की उपेक्षा करता है। विकल्प C गलत है क्योंकि छह में केवल कार्बन-कार्बन सिग्मा बंध गिने गए हैं और छह कार्बन-हाइड्रोजन बंध छूट गए हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि नौ का संरचना में कोई आधार नहीं है। सामान्य नियम याद रखें: एकल बंध एक सिग्मा, द्विबंध एक सिग्मा और एक पाई तथा त्रिबंध एक सिग्मा और दो पाई।
निम्नलिखित में से कौन-सा उभयधर्मी ऑक्साइड है?
- A.एल्युमिनियम ऑक्साइड
- B.आयरन (II) ऑक्साइड
- C.मैग्नीशियम ऑक्साइड
- D.कार्बन डाइऑक्साइड
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. एल्युमिनियम ऑक्साइड
व्याख्या
सही उत्तर A, एल्युमिनियम ऑक्साइड है। उभयधर्मी ऑक्साइड अम्ल और क्षार दोनों से क्रिया करके लवण तथा जल देता है। एल्युमिनियम ऑक्साइड हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में घुलकर एल्युमिनियम क्लोराइड देता है और सोडियम हाइड्रॉक्साइड में घुलकर सोडियम एल्युमिनेट, अर्थात एक स्थिति में वह क्षार जैसा और दूसरी में अम्ल जैसा व्यवहार करता है। जिंक ऑक्साइड भी ऐसा ही करता है। विकल्प B गलत है क्योंकि आयरन ऑक्साइड क्षारीय ऑक्साइड है, जो अम्लों से क्रिया करता है पर क्षारों से नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि मैग्नीशियम ऑक्साइड प्रबल क्षारीय है; जल में घुलने पर वह क्षारीय विलयन देता है और केवल अम्लों से क्रिया करता है। विकल्प D गलत है क्योंकि कार्बन डाइऑक्साइड अधातु का विशिष्ट अम्लीय ऑक्साइड है, जो जल से कार्बोनिक अम्ल बनाता है और चूने के पानी जैसे क्षारों से क्रिया करता है। सबसे अधिक पूछे जाने वाले उभयधर्मी ऑक्साइड एल्युमिनियम और जस्ते के हैं।
वनस्पति तेल के हाइड्रोजनीकरण में निम्नलिखित में से किसे उत्प्रेरक के रूप में प्रयोग किया जाता है?
- A.Pb
- B.Ni
- C.H2
- D.He
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. Ni
व्याख्या
सही उत्तर B, Ni अर्थात निकल है। वनस्पति तेलों में असंतृप्त वसा अम्ल होते हैं जिनमें कार्बन-कार्बन द्विबंध रहते हैं, और जब लगभग 60 डिग्री सेल्सियस पर बारीक विभाजित निकल की उपस्थिति में तेल में हाइड्रोजन प्रवाहित की जाती है तो द्विबंध हाइड्रोजन जोड़कर संतृप्त हो जाते हैं और द्रव तेल अर्ध-ठोस वनस्पति घी में बदल जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि सीसा हाइड्रोजनीकरण का उत्प्रेरक नहीं है; कुछ अभिक्रियाओं में तो उसे उत्प्रेरक विष के रूप में प्रयोग किया जाता है। विकल्प C गलत है क्योंकि हाइड्रोजन वह अभिकारक है जो द्विबंध पर जुड़ता है, उत्प्रेरक नहीं, जबकि प्रश्न उस पदार्थ का है जो स्वयं व्यय हुए बिना अभिक्रिया तेज करे। विकल्प D गलत है क्योंकि हीलियम उत्कृष्ट गैस है, रासायनिक रूप से निष्क्रिय, और किसी ऐसी अभिक्रिया में भाग नहीं लेती। औद्योगिक उत्प्रेरक याद रखें: हाइड्रोजनीकरण में निकल, हैबर प्रक्रम में लोहा और संपर्क प्रक्रम में वैनेडियम पेंटॉक्साइड।