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UPSC पिछले वर्ष के GK प्रश्न

UPSC की परीक्षाओं, UPSC सिविल सेवा और UPSC CAPF, के आधिकारिक पेपरों में पूछे गए सामान्य ज्ञान के प्रश्न, एक जगह। हर प्रश्न के साथ सही उत्तर, व्याख्या और यह जानकारी है कि वह किस परीक्षा में, किस वर्ष और किस शिफ्ट में पूछा गया था।

साल के अनुसार प्रश्न देखने के लिए नीचे वर्ष चुनें, या किसी एक परीक्षा के प्रश्नों के लिए उसका पेज खोलें। एक परीक्षा के पुराने प्रश्न दूसरी परीक्षा में भी दोहराए जाते हैं, इसलिए पूरे UPSC परिवार के प्रश्न साथ में दोहराना तैयारी का तेज तरीका है।

पिछले वर्ष के प्रश्न

Q41.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2025, Paper Iकठिन

भारत द्वारा पाकिस्तान के विरुद्ध चलाए गए निम्नलिखित सैन्य अभियानों को सही कालानुक्रम में व्यवस्थित कीजिए : 1. ऑपरेशन कैक्टस लिली 2. ऑपरेशन रिडल 3. ऑपरेशन मेघदूत 4. ऑपरेशन सफेद सागर नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए।

  1. A.1-2-3-4
  2. B.2-1-3-4
  3. C.4-1-2-3
  4. D.4-2-1-3
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 2-1-3-4

व्याख्या

सही उत्तर है B, 2-1-3-4। ये अभियान क्रमशः 1965, 1971, 1984 और 1999 के हैं: रिडल, कैक्टस लिली, मेघदूत, सफेद सागर।

ऑपरेशन रिडल सितंबर 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में लाहौर की ओर भारतीय सेना का आक्रमण था। ऑपरेशन कैक्टस लिली 1971 में पूर्वी मोर्चे का अभियान था, जिसमें हेलिकॉप्टरों से सैनिकों को मेघना नदी के पार उतारा गया और ढाका का पतन तथा बांग्लादेश का जन्म जल्दी हुआ। ऑपरेशन मेघदूत अप्रैल 1984 में सियाचिन ग्लेशियर पर नियंत्रण के लिए चलाया गया। ऑपरेशन सफेद सागर 1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय वायुसेना का अभियान था, जबकि थल सेना का अभियान ऑपरेशन विजय था।

A गलत है: इसमें कैक्टस लिली (1971) को रिडल (1965) से पहले रखा गया है।

C गलत है: यह सफेद सागर से शुरू होता है, जो चारों में सबसे बाद (1999) का है।

D गलत है: यह भी सफेद सागर से शुरू होता है और मेघदूत (1984) को अंत में रखता है।

परीक्षा टिप: रिडल 1965 → कैक्टस लिली 1971 → मेघदूत 1984 (सियाचिन) → सफेद सागर 1999 (कारगिल में वायुसेना)।

Q42.सामान्य विज्ञानपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2018, Paper Iमध्यम

पौधों में परिवहन क्रियाविधि के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  1. A.कोशिका झिल्ली के आर-पार आयनों और छोटे अणुओं के विसरण के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
  2. B.सांद्रता प्रवणता के विरुद्ध कोशिका झिल्ली के आर-पार आयनों और छोटे अणुओं के सक्रिय परिवहन के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
  3. C.कोशिकाएँ ऊर्जा बचाती हैं और सांद्रता प्रवणता के विरुद्ध आयनों व छोटे अणुओं के परिवहन के लिए कोई ऊर्जा नहीं लगती।
  4. D.कोशिकाएँ अपनी झिल्ली के आर-पार आयनों का परिवहन नहीं करतीं, क्योंकि ये आवेशित अणु होते हैं।
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. सांद्रता प्रवणता के विरुद्ध कोशिका झिल्ली के आर-पार आयनों और छोटे अणुओं के सक्रिय परिवहन के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

व्याख्या

सही उत्तर है B, सांद्रता प्रवणता के विरुद्ध कोशिका झिल्ली के आर-पार आयनों और छोटे अणुओं के सक्रिय परिवहन के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। किसी पदार्थ को कम सांद्रता से अधिक सांद्रता की ओर ले जाना चढ़ाई जैसा काम है, और कोशिका इसके लिए ATP खर्च करती है।

सक्रिय परिवहन में झिल्ली के वाहक प्रोटीन, जिन्हें पंप कहते हैं, ATP की ऊर्जा से K+ और नाइट्रेट जैसे आयनों को मूलरोम कोशिकाओं में धकेलते हैं, चाहे मिट्टी में उनकी मात्रा कोशिका से बहुत कम हो। इसके विपरीत विसरण और परासरण निष्क्रिय क्रियाएँ हैं: पदार्थ अधिक से कम सांद्रता की ओर बिना ऊर्जा खर्च किए चलते हैं।

A गलत है: विसरण निष्क्रिय है और इसमें कोशिका की ऊर्जा नहीं लगती।

C गलत है: सांद्रता प्रवणता के विरुद्ध कुछ भी ले जाने में हमेशा ऊर्जा लगती है।

D गलत है: पादप कोशिकाएँ चैनलों, वाहकों और पंपों से लगातार आयन झिल्ली के आर-पार ले जाती हैं; जड़ें इसी तरह खनिज लेती हैं।

परीक्षा टिप: प्रवणता के साथ = विसरण या परासरण, ऊर्जा नहीं; प्रवणता के विरुद्ध = सक्रिय परिवहन, ATP चाहिए।

Q43.सामान्य विज्ञानपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2019, Paper Iआसान

खुरदरी अंतर्द्रव्यी जालिका (RER) सूक्ष्मदर्शी में खुरदरी क्यों दिखती है? निम्नलिखित में से किस कोशिकांग के उसकी सतह से जुड़े होने के कारण?

  1. A.तारककेंद्रक (सेंट्रिओल)
  2. B.लवक (प्लास्टिड)
  3. C.लयनकाय (लाइसोसोम)
  4. D.राइबोसोम
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. राइबोसोम

व्याख्या

सही उत्तर है D, राइबोसोम। अंतर्द्रव्यी जालिका की बाहरी सतह पर चिपके राइबोसोम उसे इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी में दानेदार और खुरदरा रूप देते हैं।

अंतर्द्रव्यी जालिका कोशिकाद्रव्य में झिल्लीदार नलिकाओं और थैलियों का जाल है। राइबोसोम वाला भाग खुरदरी ER कहलाता है और यह प्रोटीन बनाने में लगा रहता है, विशेषकर वे प्रोटीन जो स्रावित होते हैं या झिल्लियों में लगते हैं। बिना राइबोसोम वाला भाग चिकनी ER है, जो लिपिड और स्टेरॉयड हार्मोन बनाती है और यकृत कोशिकाओं में विषहरण में मदद करती है। अधिक प्रोटीन स्रावित करने वाली कोशिकाओं, जैसे अग्न्याशय की कोशिकाओं, में RER अधिक होती है।

A गलत है: सेंट्रिओल केंद्रक के पास जोड़े में होते हैं और कोशिका विभाजन में मदद करते हैं; वे ER पर नहीं होते।

B गलत है: क्लोरोप्लास्ट जैसे लवक पादप कोशिकाओं के बड़े, अलग कोशिकांग हैं।

C गलत है: लाइसोसोम पाचक एंजाइमों की स्वतंत्र थैलियाँ हैं, ER पर लगे कण नहीं।

परीक्षा टिप: RER = राइबोसोम + प्रोटीन संश्लेषण; SER = राइबोसोम नहीं + लिपिड संश्लेषण और विषहरण।

Q44.सामान्य विज्ञानपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2020, Paper Iमध्यम

निम्नलिखित में से किस विधि का उपयोग जल की स्थायी कठोरता दूर करने के लिए किया जा सकता है?

  1. A.उबालना
  2. B.आयन-विनिमय
  3. C.चूना उपचार
  4. D.सल्फर डाइऑक्साइड गैस प्रवाहित करना
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. आयन-विनिमय

व्याख्या

सही उत्तर है B, आयन-विनिमय। आयन-विनिमय रेज़िन या ज़िओलाइट स्थायी कठोरता पैदा करने वाले कैल्शियम और मैग्नीशियम आयनों को सोडियम या हाइड्रोजन आयनों से बदल देता है।

स्थायी कठोरता कैल्शियम और मैग्नीशियम के क्लोराइडों और सल्फेटों से होती है, जो गर्म करने पर नहीं टूटते। ज़िओलाइट (परम्यूटिट) विधि में सोडियम एल्युमिनियम सिलिकेट Ca2+ और Mg2+ को ले लेता है और Na+ छोड़ता है, जिससे जल कठोर नहीं होता; उपयोग हो चुके ज़िओलाइट को नमक के घोल से धोकर फिर तैयार कर लिया जाता है। कृत्रिम रेज़िन भी इसी तरह काम करते हैं। धोने का सोडा और कैलगॉन भी स्थायी कठोरता दूर करते हैं।

A गलत है: उबालने से केवल अस्थायी कठोरता दूर होती है, क्योंकि घुलनशील बाइकार्बोनेट अघुलनशील कार्बोनेट बन जाते हैं।

C गलत है: चूना उपचार (क्लार्क विधि) भी केवल अस्थायी कठोरता दूर करता है।

D गलत है: सल्फर डाइऑक्साइड प्रवाहित करने से जल केवल अम्लीय होता है; कैल्शियम या मैग्नीशियम नहीं निकलते।

परीक्षा टिप: अस्थायी कठोरता = बाइकार्बोनेट, उबालने या क्लार्क विधि से; स्थायी = क्लोराइड और सल्फेट, धोने का सोडा, कैलगॉन या आयन-विनिमय से।

Q45.सामान्य विज्ञानपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2021, Paper Iआसान

निम्नलिखित में से कौन-सा संयोजी ऊतक नहीं है?

  1. A.स्नायुबंधन (लिगामेंट)
  2. B.कंडरा (टेंडन)
  3. C.चिकनी पेशी
  4. D.उपास्थि (कार्टिलेज)
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. चिकनी पेशी

व्याख्या

सही उत्तर है C, चिकनी पेशी। चिकनी पेशी पेशीय ऊतक है, जो चार मूल जंतु ऊतकों में से एक है; यह संयोजी ऊतक नहीं है।

जंतु ऊतक चार प्रकार के होते हैं: उपकला, संयोजी, पेशीय और तंत्रिका। संयोजी ऊतक में कोशिकाएँ एक आधात्री (मैट्रिक्स) में फैली होती हैं और ये दूसरे अंगों को जोड़ते या सहारा देते हैं; अस्थि, उपास्थि, रक्त, एरिओलर ऊतक, वसा ऊतक, स्नायुबंधन और कंडरा इसी में आते हैं। चिकनी पेशी तर्कु आकार की, बिना धारियों वाली कोशिकाओं से बनी होती है और आमाशय, आँत, रक्त वाहिकाओं तथा परितारिका की दीवारों में हमारी इच्छा के बिना सिकुड़ती है।

A गलत है: स्नायुबंधन हड्डी को हड्डी से जोड़ने वाला सघन संयोजी ऊतक है।

B गलत है: कंडरा पेशी को हड्डी से जोड़ने वाला सघन संयोजी ऊतक है।

D गलत है: उपास्थि ठोस आधात्री वाला संयोजी ऊतक है, जो नाक, कान, श्वासनली और जोड़ों में मिलता है।

परीक्षा टिप: स्नायुबंधन = हड्डी से हड्डी, कंडरा = पेशी से हड्डी; पेशियाँ अलग ऊतक हैं।

Q46.सामान्य विज्ञानपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2023, Paper Iकठिन

निम्नलिखित रेडॉक्स अभिक्रिया पर विचार कीजिए : 2Cu2O (s) + Cu2S (s) → 6Cu (s) + SO2 (g) निम्नलिखित में से क्रमशः ऑक्सीकारक और अपचायक के रूप में कार्य करने वाली स्पीशीज़ को पहचानिए :

  1. A.Cu(I) और Cu2S का S
  2. B.Cu और SO2 का S
  3. C.Cu और SO2 का O
  4. D.Cu(I) और SO2 का O
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. Cu(I) और Cu2S का S

व्याख्या

सही उत्तर है A, Cu(I) और Cu2S का S। +1 अवस्था वाला ताँबा धातु में अपचयित होता है, इसलिए वह ऑक्सीकारक है; Cu2S का सल्फर ऑक्सीकृत होता है, इसलिए वह अपचायक है।

ऑक्सीकरण संख्याएँ देखिए। ताँबा Cu2O और Cu2S दोनों में +1 से धात्विक Cu में 0 हो जाता है: वह इलेक्ट्रॉन लेता है, अपचयित होता है और इसलिए ऑक्सीकारक का काम करता है। सल्फर Cu2S में −2 से SO2 में +4 हो जाता है: वह छह इलेक्ट्रॉन खोता है, ऑक्सीकृत होता है और इसलिए अपचायक है। ऑक्सीजन पूरे समय −2 पर रहती है। बेसेमर परिवर्तक में कॉपर ग्लांस से ताँबा निकालने का अंतिम चरण यही स्व-अपचयन है।

B गलत है: धात्विक Cu और SO2 का S उत्पाद हैं, परिवर्तन कराने वाली स्पीशीज़ नहीं।

C गलत है: ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या नहीं बदलती, इसलिए वह न ऑक्सीकारक है न अपचायक।

D गलत है: Cu(I) ऑक्सीकारक है, पर अपचायक ऑक्सीजन नहीं, सल्फर है।

परीक्षा टिप: ऑक्सीकारक स्वयं अपचयित होता है (संख्या घटती है); अपचायक स्वयं ऑक्सीकृत होता है (संख्या बढ़ती है)।

Q47.भूगोलपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2024, Paper Iआसान

अयनांत (solstice), वह घटना जब सूर्य सबसे उत्तर या सबसे दक्षिण में पहुँचता प्रतीत होता है, के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  1. A.शीत अयनांत उत्तरी और दक्षिणी दोनों गोलार्धों में 21 जून को होता है
  2. B.शीत अयनांत उत्तरी और दक्षिणी दोनों गोलार्धों में 21 दिसंबर को होता है
  3. C.ग्रीष्म अयनांत उत्तरी गोलार्ध में 21 जून को और दक्षिणी गोलार्ध में 21 दिसंबर को होता है
  4. D.ग्रीष्म अयनांत उत्तरी गोलार्ध में 21 दिसंबर को और दक्षिणी गोलार्ध में 21 जून को होता है
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. ग्रीष्म अयनांत उत्तरी गोलार्ध में 21 जून को और दक्षिणी गोलार्ध में 21 दिसंबर को होता है

व्याख्या

सही उत्तर है C, ग्रीष्म अयनांत उत्तरी गोलार्ध में 21 जून को और दक्षिणी गोलार्ध में 21 दिसंबर को होता है। दोनों गोलार्धों में ऋतुएँ हमेशा उलटी होती हैं, इसलिए एक का ग्रीष्म अयनांत दूसरे का शीत अयनांत होता है।

लगभग 21 जून को सूर्य कर्क रेखा पर लंबवत चमकता है; उत्तरी गोलार्ध में सबसे लंबा दिन होता है और वहाँ गर्मी शुरू होती है, जबकि दक्षिणी गोलार्ध में सबसे छोटा दिन होता है। लगभग 22 दिसंबर को सूर्य मकर रेखा पर लंबवत होता है और स्थिति उलट जाती है: ऑस्ट्रेलिया और अर्जेंटीना में ग्रीष्म अयनांत होता है। इसका कारण पृथ्वी के अक्ष का लगभग 23.5° झुकाव है।

A गलत है: 21 जून केवल दक्षिणी गोलार्ध में शीत अयनांत है, दोनों में नहीं।

B गलत है: 21 दिसंबर केवल उत्तरी गोलार्ध में शीत अयनांत है।

D गलत है: इसमें तिथियाँ उलट दी गई हैं; उत्तरी ग्रीष्म अयनांत जून में होता है, दिसंबर में नहीं।

परीक्षा टिप: 21 जून = सूर्य कर्क रेखा पर (उत्तरी गर्मी); 22 दिसंबर = मकर रेखा पर (दक्षिणी गर्मी)।

Q48.उत्तर प्रदेशपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2025, Paper Iमध्यम

घाटमपुर ताप विद्युत परियोजना कहाँ स्थित है?

  1. A.बिहार
  2. B.उत्तर प्रदेश
  3. C.मध्य प्रदेश
  4. D.गुजरात
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. उत्तर प्रदेश

व्याख्या

सही उत्तर है B, उत्तर प्रदेश। घाटमपुर ताप विद्युत परियोजना उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर जिले के घाटमपुर में स्थित है।

यह कोयला आधारित संयंत्र है, जिसमें 660 मेगावाट की तीन इकाइयाँ हैं। इसे नेवेली उत्तर प्रदेश पावर लिमिटेड ने बनाया है, जो NLC इंडिया लिमिटेड और उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम का संयुक्त उपक्रम है। इसमें सुपरक्रिटिकल तकनीक है, जिससे प्रति इकाई बिजली के लिए कम कोयला जलता है, और इसकी अधिकतर बिजली उत्तर प्रदेश को मिलती है। परीक्षा में स्थान (कानपुर) और राज्य का मेल पूछा जाता है।

A गलत है: बिहार के बड़े ताप संयंत्र बाढ़, कहलगाँव और नबीनगर हैं, घाटमपुर नहीं।

C गलत है: मध्य प्रदेश विंध्याचल, सतपुड़ा और सासन के लिए जाना जाता है।

D गलत है: गुजरात के बड़े कोयला संयंत्र मुंद्रा और उकाई में हैं; घाटमपुर गुजरात में नहीं है।

परीक्षा टिप: घाटमपुर = कानपुर नगर, उत्तर प्रदेश; 3 × 660 मेगावाट, NLC और उत्तर प्रदेश का संयुक्त उपक्रम।

Q49.सामान्य विज्ञानपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2018, Paper Iआसान

स्तनधारियों की कोशिकाओं में प्रोटीन के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  1. A.स्तनधारी कोशिकाओं में प्रोटीन का संश्लेषण कोशिका झिल्ली में होता है।
  2. B.स्तनधारी कोशिकाओं में प्रोटीन कोशिका झिल्ली में संश्लेषित नहीं होते, बल्कि सीधे भोजन से अवशोषित होते हैं।
  3. C.स्तनधारी कोशिकाओं में प्रोटीन का संश्लेषण खुरदरी अंतर्द्रव्यी जालिका (RER) में होता है।
  4. D.स्तनधारी कोशिकाओं में प्रोटीन का संश्लेषण गॉल्जी उपकरण में होता है।
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. स्तनधारी कोशिकाओं में प्रोटीन का संश्लेषण खुरदरी अंतर्द्रव्यी जालिका (RER) में होता है।

व्याख्या

सही उत्तर है C, स्तनधारी कोशिकाओं में प्रोटीन का संश्लेषण खुरदरी अंतर्द्रव्यी जालिका (RER) में होता है। RER पर राइबोसोम जुड़े होते हैं, और यही वे स्थान हैं जहाँ अमीनो अम्ल जुड़कर प्रोटीन बनाते हैं।

राइबोसोम mRNA के संदेश को पढ़कर अमीनो अम्लों को सही क्रम में जोड़ते हैं। RER से जुड़े राइबोसोम झिल्ली के लिए या कोशिका से बाहर भेजे जाने वाले प्रोटीन, जैसे एंजाइम और हार्मोन, बनाते हैं; नई शृंखलाएँ RER में जाकर मुड़ती हैं और फिर पुटिकाओं में आगे बढ़ती हैं। कोशिकाद्रव्य के मुक्त राइबोसोम कोशिका के भीतर काम आने वाले प्रोटीन बनाते हैं।

A गलत है: कोशिका झिल्ली केवल आने-जाने वाले पदार्थों को नियंत्रित करती है; उसमें प्रोटीन बनाने की व्यवस्था नहीं है।

B गलत है: भोजन के प्रोटीन पचकर अमीनो अम्ल बनते हैं, जो अवशोषित होकर कोशिकाओं में शरीर के अपने प्रोटीन बनाते हैं।

D गलत है: गॉल्जी उपकरण RER में बने प्रोटीन को बदलता, पैक करता और भेजता है; उन्हें बनाता नहीं।

परीक्षा टिप: राइबोसोम (RER पर) = प्रोटीन संश्लेषण; गॉल्जी = पैकेजिंग और स्रावण; SER = लिपिड संश्लेषण।

Q50.सामान्य विज्ञानपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2019, Paper Iआसान

यदि कोशिका को घेरे हुए माध्यम की सांद्रता कोशिका से अधिक हो, तो निम्नलिखित में से क्या होगा?

  1. A.कोशिका जल ग्रहण करेगी
  2. B.कोशिका मर जाएगी
  3. C.कोई परिवर्तन नहीं होगा
  4. D.कोशिका जल खो देगी
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. कोशिका जल खो देगी

व्याख्या

सही उत्तर है D, कोशिका जल खो देगी। कोशिका से अधिक सांद्र माध्यम अतिपरासरी (हाइपरटॉनिक) होता है, इसलिए परासरण द्वारा जल कोशिका से बाहर निकलता है।

परासरण में जल अर्धपारगम्य झिल्ली के आर-पार कम घुले कणों वाली ओर से अधिक घुले कणों वाली ओर जाता है। बाहर का विलयन तेज हो तो जल बाहर निकलता है और कोशिका सिकुड़ जाती है; पादप कोशिका में कोशिकाद्रव्य भित्ति से अलग हो जाता है, जिसे जीवद्रव्यकुंचन (प्लाज़्मोलिसिस) कहते हैं। इसी कारण नमक लगी कच्ची आम की फाँकें पानी छोड़ती हैं।

A गलत है: कोशिका जल तभी लेती है जब बाहर का माध्यम कम सांद्र (हाइपोटॉनिक) हो।

B गलत है: केवल कुछ जल खोने से कोशिका नहीं मरती; जीवद्रव्यकुंचित पादप कोशिका पानी में रखने पर फिर सामान्य हो जाती है।

C गलत है: कोई शुद्ध परिवर्तन केवल समान सांद्रता वाले (आइसोटॉनिक) माध्यम में होता है।

परीक्षा टिप: बाहर हाइपरटॉनिक = कोशिका सिकुड़ती है; बाहर हाइपोटॉनिक = कोशिका फूलती है; आइसोटॉनिक = कोई बदलाव नहीं।

Q51.सामान्य विज्ञानपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2021, Paper Iआसान

निम्नलिखित में से किस पादप ऊतक में बड़े वायु-स्थान होते हैं?

  1. A.दृढ़ोतक (स्क्लेरेनकाइमा)
  2. B.विभज्योतक (मेरिस्टेम)
  3. C.स्थूलकोणोतक (कोलेनकाइमा)
  4. D.वायूतक (एरेनकाइमा)
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. वायूतक (एरेनकाइमा)

व्याख्या

सही उत्तर है D, वायूतक (एरेनकाइमा)। एरेनकाइमा मृदूतक का एक प्रकार है, जिसकी कोशिकाओं के बीच हवा से भरे बड़े स्थान होते हैं।

ये वायु-गुहाएँ जलकुंभी, कमल और हाइड्रिला जैसे जलीय पौधों को पानी पर तैरने में मदद करती हैं और पानी में डूबी जड़ों व तनों तक ऑक्सीजन पहुँचाती हैं। धान और दलदली पौधों की जड़ों में भी जलभराव होने पर एरेनकाइमा बनता है। नाम से ही याद रहता है: 'एयर' यानी हवा।

A गलत है: स्क्लेरेनकाइमा की कोशिकाएँ मृत, मोटी लिग्निनयुक्त भित्ति वाली और सटी हुई होती हैं; यह कठोरता देता है, जैसे नारियल का रेशा।

B गलत है: विभज्योतक की कोशिकाएँ छोटी, जीवित और विभाजित होने वाली होती हैं, उनके बीच कोई अंतराकोशिकीय स्थान नहीं होता।

C गलत है: कोलेनकाइमा की जीवित कोशिकाएँ कोनों पर मोटी होती हैं और बीच में बहुत कम स्थान होता है; यह तनों को लचीलापन देता है।

परीक्षा टिप: एरेनकाइमा = वायु-स्थान और तैरना; स्क्लेरेनकाइमा = कठोरता; कोलेनकाइमा = लचीलापन।

Q52.सामान्य विज्ञानपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2023, Paper Iमध्यम

सभी घुलनशील खनिज लवणों से मुक्त शुद्ध, विखनिजीकृत (demineralized) जल निम्नलिखित में से किस विधि से प्राप्त किया जाता है?

  1. A.जल को सूक्ष्म-निस्यंदन (माइक्रोफिल्ट्रेशन) झिल्ली से गुजारकर
  2. B.कैलगॉन विधि
  3. C.जल को धनायन-विनिमय और ऋणायन-विनिमय रेज़िन के स्तंभ से गुजारकर
  4. D.उबालकर
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. जल को धनायन-विनिमय और ऋणायन-विनिमय रेज़िन के स्तंभ से गुजारकर

व्याख्या

सही उत्तर है C, जल को धनायन-विनिमय और ऋणायन-विनिमय रेज़िन के स्तंभ से गुजारकर। दोनों रेज़िन मिलकर हर घुला हुआ आयन निकाल देते हैं और विखनिजीकृत जल बचता है।

धनायन-विनिमय रेज़िन (RH) में Ca2+, Mg2+ और Na+ जैसे धातु आयन H+ आयनों से बदल जाते हैं। फिर जल ऋणायन-विनिमय रेज़िन (R'OH) से गुजरता है, जहाँ क्लोराइड, सल्फेट और बाइकार्बोनेट आयन OH− आयनों से बदल जाते हैं। निकले हुए H+ और OH− मिलकर जल बना लेते हैं, इसलिए कोई लवण नहीं बचता। यह विआयनित जल प्रयोगशालाओं, बैटरियों और बॉयलरों में काम आता है।

A गलत है: माइक्रोफिल्ट्रेशन झिल्ली निलंबित कणों और सूक्ष्मजीवों को रोकती है, घुले लवणों को नहीं।

B गलत है: कैलगॉन (सोडियम हेक्सामेटाफॉस्फेट) केवल कैल्शियम और मैग्नीशियम आयनों को बाँधता है; लवण जल में घुले रहते हैं।

D गलत है: उबालने से केवल बाइकार्बोनेट वाली अस्थायी कठोरता दूर होती है; क्लोराइड और सल्फेट बने रहते हैं।

परीक्षा टिप: धनायन रेज़िन H+ देता है, ऋणायन रेज़िन OH− देता है; दोनों साथ = विखनिजीकृत (विआयनित) जल।

Q53.सामान्य विज्ञानपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2024, Paper Iआसान

निम्नलिखित में से किस ऊष्मा-स्थानांतरण क्रियाविधि के लिए माध्यम की आवश्यकता नहीं होती?

  1. A.चालन
  2. B.संवहन
  3. C.विकिरण
  4. D.संघट्ट (टक्कर)
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. विकिरण

व्याख्या

सही उत्तर है C, विकिरण। विकिरण में ऊष्मा विद्युत-चुंबकीय तरंगों के रूप में जाती है, और ये तरंगें खाली स्थान (निर्वात) से भी गुजर सकती हैं।

ऊष्मा तीन तरीकों से चलती है। चालन में ऊर्जा ठोस के एक कण से दूसरे कण तक पहुँचती है; संवहन में गर्म द्रव या गैस स्वयं बहकर ऊर्जा ले जाती है। विकिरण को किसी कण की जरूरत नहीं होती: सूर्य की अवरक्त तरंगें लगभग 15 करोड़ किलोमीटर के लगभग निर्वात को पार करके पृथ्वी को गर्म करती हैं। इसी कारण थर्मस फ्लास्क में निर्वात चालन और संवहन रोकता है, जबकि विकिरण रोकने के लिए चमकदार परत लगानी पड़ती है।

A गलत है: चालन के लिए पदार्थ, प्रायः ठोस, चाहिए जिसके कण कंपन आगे बढ़ाते हैं।

B गलत है: संवहन केवल द्रवों और गैसों में होता है, जिन्हें बहना पड़ता है।

D गलत है: कणों की टक्कर तो माध्यम के भीतर चालन का तरीका है, इसलिए इसमें भी पदार्थ चाहिए।

परीक्षा टिप: चालन = ठोस, संवहन = द्रव/गैस, विकिरण = बिना माध्यम (सूर्य की ऊष्मा पृथ्वी तक)।

Q54.सामान्य विज्ञानपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2018, Paper Iकठिन

4d कक्षक के लिए कोणीय और त्रिज्य नोडों की संख्या क्रमशः है

  1. A.2 और 1
  2. B.1 और 2
  3. C.3 और 1
  4. D.4 और 0
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. 2 और 1

व्याख्या

सही उत्तर है A, 2 और 1। 4d कक्षक के लिए n = 4 और l = 2 है, इसलिए कोणीय नोड l = 2 और त्रिज्य नोड n − l − 1 = 1 होते हैं।

नोड वह क्षेत्र है जहाँ इलेक्ट्रॉन मिलने की प्रायिकता शून्य होती है। कोणीय नोड नाभिक से होकर जाने वाले तल या शंकु होते हैं और इनकी संख्या दिगंशी क्वांटम संख्या l के बराबर होती है। त्रिज्य नोड गोलीय कोश होते हैं और इनकी संख्या n − l − 1 होती है। कुल नोड हमेशा n − 1 होते हैं। 4d के लिए: हर d कक्षक में l = 2, अतः 2 कोणीय नोड; त्रिज्य नोड = 4 − 2 − 1 = 1; कुल = 3, जो n − 1 के बराबर है। इसी तरह 3d में 2 कोणीय और 0 त्रिज्य नोड, तथा 2s में 0 कोणीय और 1 त्रिज्य नोड होता है।

B गलत है: इसमें दोनों मान उलट दिए गए हैं।

C गलत है: 3 कोणीय नोड f कक्षक (l = 3) के होते हैं, d के नहीं।

D गलत है: 4 कोणीय नोड के लिए l = 4 (g कक्षक) चाहिए, और कुल 4 नोड n − 1 = 3 से अधिक हैं।

परीक्षा टिप: कोणीय नोड = l, त्रिज्य नोड = n − l − 1, कुल नोड = n − 1।

Q55.सामान्य विज्ञानपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2019, Paper Iआसान

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  1. A.जीवाणुओं में कोशिकाद्रव्य होता है, परंतु विषाणुओं में नहीं
  2. B.जीवाणुओं में माइटोकॉन्ड्रिया होते हैं, परंतु विषाणुओं में नहीं
  3. C.विषाणुओं में माइटोकॉन्ड्रिया होते हैं, परंतु जीवाणुओं में नहीं
  4. D.विषाणुओं में कोशिका झिल्ली होती है, परंतु जीवाणुओं में नहीं
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. जीवाणुओं में कोशिकाद्रव्य होता है, परंतु विषाणुओं में नहीं

व्याख्या

सही उत्तर है A, जीवाणुओं में कोशिकाद्रव्य होता है, परंतु विषाणुओं में नहीं। जीवाणु कोशिकाद्रव्य से भरी एक जीवित कोशिका है, जबकि विषाणु केवल प्रोटीन के आवरण में बंद आनुवंशिक पदार्थ है।

जीवाणु प्रोकैरियोटिक कोशिकाएँ हैं: इनमें कोशिका भित्ति, कोशिका झिल्ली, राइबोसोम युक्त कोशिकाद्रव्य और वृत्ताकार DNA होता है, पर झिल्ली से घिरा केंद्रक और झिल्लीयुक्त कोशिकांग नहीं होते। विषाणु कोशिका ही नहीं हैं। विषाणु कण DNA या RNA होता है जो प्रोटीन के कैप्सिड में लिपटा होता है, कभी-कभी परपोषी से लिया गया बाहरी आवरण भी होता है। इनमें न कोशिकाद्रव्य होता है, न राइबोसोम, न अपना उपापचय, इसलिए ये केवल जीवित कोशिका के भीतर ही गुणन करते हैं। इसी कारण एंटीबायोटिक जीवाणुओं पर असर करती हैं, विषाणुओं पर नहीं।

B गलत है: प्रोकैरियोट होने के कारण जीवाणुओं में माइटोकॉन्ड्रिया नहीं होते।

C गलत है: विषाणुओं में कोई कोशिकांग नहीं होता।

D गलत है: जीवाणुओं में कोशिका झिल्ली होती है, विषाणुओं में नहीं।

परीक्षा टिप: जीवाणु = प्रोकैरियोटिक कोशिका, माइटोकॉन्ड्रिया नहीं; विषाणु = न्यूक्लिक अम्ल + प्रोटीन आवरण, कोशिका नहीं।

Q56.सामान्य विज्ञानपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2020, Paper Iकठिन

निम्नलिखित में से कौन-सा घटक पेंट का अंग नहीं है?

  1. A.तारपीन का तेल (थिनर)
  2. B.पॉली-हाइड्रॉक्सी फ़ीनॉल (एंटी-स्किनिंग एजेंट)
  3. C.थायोयूरिया (त्वरक)
  4. D.टाइटेनियम डाइऑक्साइड (वर्णक)
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. थायोयूरिया (त्वरक)

व्याख्या

सही उत्तर है C, थायोयूरिया (त्वरक)। त्वरक रबर के वल्कनीकरण को तेज़ करते हैं; वे पेंट का हिस्सा नहीं होते।

तेल वाले पेंट में ये घटक होते हैं: रंग और ढकने की क्षमता देने वाला वर्णक, परत को बाँधने वाला वाहक या सूखने वाला तेल जैसे अलसी का तेल, फैलाने में आसानी देने वाला थिनर, जल्दी सुखाने वाला ड्रायर, गाढ़ापन देने वाले फ़िलर, और डिब्बे में ऊपर परत जमने से रोकने वाला एंटी-स्किनिंग एजेंट। टाइटेनियम डाइऑक्साइड सबसे अधिक प्रयुक्त सफ़ेद वर्णक है, तारपीन पारंपरिक थिनर है और पॉली-हाइड्रॉक्सी फ़ीनॉल एंटी-स्किनिंग एजेंट के रूप में काम आते हैं। थायोयूरिया जैसे यौगिक रबर उद्योग से जुड़े हैं, जहाँ त्वरक सल्फ़र द्वारा रबर के क्रॉस-लिंक बनने का समय घटाते हैं।

A गलत है: तारपीन का तेल पेंट का सामान्य थिनर है।

B गलत है: पॉली-हाइड्रॉक्सी फ़ीनॉल पेंट में एंटी-स्किनिंग एजेंट हैं।

D गलत है: टाइटेनियम डाइऑक्साइड पेंट का मुख्य सफ़ेद वर्णक है।

परीक्षा टिप: पेंट = वर्णक + वाहक (अलसी का तेल) + थिनर (तारपीन) + ड्रायर + फ़िलर + एंटी-स्किनिंग एजेंट।

Q57.सामान्य विज्ञानपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2021, Paper Iआसान

निम्नलिखित में से कौन-सा कोशिकांग जंतु कोशिकाओं में नहीं पाया जाता?

  1. A.कोशिका झिल्ली
  2. B.अंतःप्रद्रव्यी जालिका
  3. C.कोशिका भित्ति
  4. D.लाइसोसोम
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. कोशिका भित्ति

व्याख्या

सही उत्तर है C, कोशिका भित्ति। जंतु कोशिका केवल लचीली कोशिका झिल्ली से घिरी होती है; कठोर कोशिका भित्ति पौधों, कवकों और जीवाणुओं में मिलती है।

पादप कोशिका में कोशिका भित्ति कोशिका झिल्ली के बाहर होती है और मुख्यतः सेल्युलोज़ से बनी होती है। यह कोशिका को आकार, मज़बूती और पानी भरने पर फटने से सुरक्षा देती है। कवकों की भित्ति काइटिन की और जीवाणुओं की पेप्टिडोग्लाइकन की होती है। जंतु कोशिका में भित्ति न होने से वह आकार बदल सकती है, चल सकती है और मांसपेशी जैसे ऊतक बना सकती है। जंतु कोशिकाओं में सामान्यतः हरितलवक और बड़ी केंद्रीय रिक्तिका भी नहीं होती, जबकि तारककाय (सेंट्रियोल) उनकी पहचान हैं।

A गलत है: कोशिका झिल्ली हर जीवित कोशिका को घेरती है।

B गलत है: प्रोटीन और लिपिड बनाने वाली अंतःप्रद्रव्यी जालिका जंतु कोशिकाओं में होती है।

D गलत है: लाइसोसोम, जिन्हें कोशिका की आत्मघाती थैली कहते हैं, जंतु कोशिकाओं की विशेषता हैं।

परीक्षा टिप: पादप कोशिका = कोशिका भित्ति, हरितलवक, बड़ी रिक्तिका; जंतु कोशिका = तारककाय और लाइसोसोम, भित्ति नहीं।

Q58.स्टैटिक GKपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2023, Paper Iमध्यम

निम्नलिखित में से कौन-से सार्क (SAARC) के उद्देश्य हैं? 1. दक्षिण एशिया के लोगों के कल्याण को बढ़ावा देना और उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना 2. दक्षिण एशिया के देशों के बीच सामूहिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना और उसे सुदृढ़ करना 3. आपसी विश्वास, समझ और एक-दूसरे की समस्याओं की सराहना में योगदान देना 4. सीमा-पार आतंकवाद को समाप्त करने की दिशा में कार्य करना नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. A.केवल 1 और 2
  2. B.केवल 1, 2 और 3
  3. C.1, 2, 3 और 4
  4. D.केवल 3 और 4
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. केवल 1, 2 और 3

व्याख्या

सही उत्तर है B, केवल 1, 2 और 3। पहले तीन उद्देश्य सार्क चार्टर के अनुच्छेद I में लिखे हैं; सीमा-पार आतंकवाद समाप्त करना उसके घोषित उद्देश्यों में नहीं है।

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) की स्थापना 8 दिसंबर 1985 को ढाका में हस्ताक्षरित चार्टर से हुई और इसका सचिवालय काठमांडू में है। इसके उद्देश्यों में दक्षिण एशिया के लोगों का कल्याण और जीवन की गुणवत्ता सुधारना, सामूहिक आत्मनिर्भरता मज़बूत करना, आपसी विश्वास और एक-दूसरे की समस्याओं की समझ बढ़ाना तथा आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, तकनीकी और वैज्ञानिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना शामिल है। आतंकवाद के लिए अलग से 1987 का सार्क क्षेत्रीय आतंकवाद दमन अभिसमय बना, यह चार्टर का उद्देश्य नहीं है।

A गलत है: इसमें चार्टर में लिखा उद्देश्य 3 छूट गया है।

C गलत है: इसमें कथन 4 जोड़ा गया है, जो चार्टर का उद्देश्य नहीं।

D गलत है: इसमें सही उद्देश्य 1 और 2 छूट गए और कथन 4 जुड़ गया।

परीक्षा टिप: सार्क, ढाका चार्टर 1985, सचिवालय काठमांडू, आठ सदस्य, अफ़गानिस्तान 2007 में जुड़ा।

Q59.पर्यावरण और पारिस्थितिकीपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2024, Paper Iआसान

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन वायु में PM1 कणों को सही रूप में परिभाषित करता है?

  1. A.ये 10 माइक्रॉन से अधिक व्यास वाले निलंबित कण हैं
  2. B.ये वे कण हैं जिन्हें श्वसन के दौरान नाक छान लेती है
  3. C.ये 1 माइक्रॉन से कम व्यास वाले अत्यंत सूक्ष्म कण हैं
  4. D.ये मोटे कण हैं जो फेफड़ों से होकर सीधे रक्तप्रवाह में पहुँच जाते हैं
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. ये 1 माइक्रॉन से कम व्यास वाले अत्यंत सूक्ष्म कण हैं

व्याख्या

सही उत्तर है C, 1 माइक्रॉन से कम व्यास वाले अत्यंत सूक्ष्म कण। PM के बाद लिखी संख्या कणों के आकार की ऊपरी सीमा माइक्रोमीटर में बताती है।

कणिकीय पदार्थ को उसके वायुगतिकीय व्यास से बाँटा जाता है: PM10 यानी 10 माइक्रोमीटर या उससे छोटे, PM2.5 यानी 2.5 माइक्रोमीटर या उससे छोटे, और PM1 यानी 1 माइक्रोमीटर या उससे छोटे कण, जो मानव बाल की मोटाई के लगभग सत्तरवें हिस्से जितने हैं। कण जितना छोटा, उतना गहरा जाता है: PM1 नाक और गले से बचकर फेफड़ों की वायुकोशिकाओं तक पहुँचता है और रक्त में भी जा सकता है, इसलिए यह हृदय और फेफड़ों के रोगों से जुड़ा है। ये कण मुख्यतः वाहनों के धुएँ, ईंधन और पराली जलाने तथा कारखानों से आते हैं।

A गलत है: 10 माइक्रोमीटर से बड़े कण मोटी धूल हैं, PM1 नहीं।

B गलत है: नाक मुख्यतः बड़े कण रोकती है; PM1 वहाँ नहीं छनता।

D गलत है: PM1 मोटे नहीं, अत्यंत महीन कण हैं, और रक्त तक महीन कण ही पहुँचते हैं।

परीक्षा टिप: PM10 मोटे, PM2.5 महीन, PM1 अति-महीन; संख्या जितनी छोटी, शरीर में उतनी गहराई तक।

Q60.सामान्य विज्ञानपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2018, Paper Iआसान

किसी द्रव पर वायुमंडलीय दाब कम करने से

  1. A.द्रव का क्वथनांक बढ़ जाता है
  2. B.द्रव का क्वथनांक घट जाता है
  3. C.द्रव के क्वथनांक पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता
  4. D.उसे उबलने में लगने वाला समय बढ़ जाता है
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. द्रव का क्वथनांक घट जाता है

व्याख्या

सही उत्तर है B, द्रव का क्वथनांक घट जाता है। द्रव तब उबलता है जब उसका वाष्प दाब ऊपर के दाब के बराबर हो जाए, इसलिए बाहरी दाब कम होने पर वह कम ताप पर ही उबलने लगता है।

द्रव को गर्म करने पर उसका वाष्प दाब बढ़ता है। जिस ताप पर यह वाष्प दाब बाहरी दाब के बराबर हो जाता है, वहीं उबलना शुरू होता है। समुद्र तल पर लगभग 101.3 kPa दाब में पानी 100 °C पर उबलता है। ऊँचे पहाड़ों पर वायुदाब कम होने से पानी लगभग 70 से 90 °C पर ही उबल जाता है, जिससे दाल-चावल जल्दी नहीं पकते। प्रेशर कुकर इसका उल्टा करता है: दाब को लगभग दोगुना कर देता है, जिससे पानी करीब 120 °C पर उबलता है और खाना जल्दी पकता है।

A गलत है: क्वथनांक दाब बढ़ाने से बढ़ता है, घटाने से नहीं।

C गलत है: क्वथनांक सीधे बाहरी दाब पर निर्भर है।

D गलत है: क्वथनांक घटने से द्रव जल्दी उबलता है, देर से नहीं।

परीक्षा टिप: कम दाब, कम क्वथनांक (पहाड़); अधिक दाब, अधिक क्वथनांक (प्रेशर कुकर)।