प्राचीन दक्षिण भारत के संगम साहित्य के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन सही है?
- A.संगम कविताओं में भौतिक संस्कृति का कोई उल्लेख नहीं है।
- B.संगम कवि वर्ण के सामाजिक वर्गीकरण से परिचित थे।
- C.संगम कविताओं में योद्धा नीति का कोई उल्लेख नहीं है।
- D.संगम साहित्य जादुई शक्तियों को अतार्किक बताता है।
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है B, संगम कवि वर्ण के सामाजिक वर्गीकरण से परिचित थे। संगम ग्रंथों में ब्राह्मणों, राजाओं और व्यापारियों का उल्लेख है, जिससे पता चलता है कि कवि वर्ण व्यवस्था को जानते थे, भले ही तमिल समाज उसके अनुसार कड़ाई से बंटा न हो। संगम साहित्य लगभग तीसरी सदी ईसा पूर्व से तीसरी सदी ईस्वी के बीच रचा गया; इसमें एट्टुतोगै और पत्तुप्पाट्टु संग्रह तथा व्याकरण ग्रंथ तोलकाप्पियम शामिल हैं। कविताएं अकम (प्रेम और भीतरी जीवन) और पुरम (युद्ध, राजा और सार्वजनिक जीवन) में बंटी हैं और पांच तिणै भूदृश्यों का वर्णन करती हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि कविताओं में बंदरगाह, रोम से व्यापार, फसलें, शिल्प, भोजन और आभूषण जैसे भौतिक विवरण भरे पड़े हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि पुरम कविताएं वीरता, युद्ध में मृत्यु और वीरगल (स्मारक पत्थर) का गुणगान करती हैं। विकल्प D गलत है, क्योंकि कविताएं अणंगु जैसी पवित्र और जादुई शक्तियों को वास्तविक मानती हैं, अतार्किक नहीं। परीक्षा टिप: संगम कविताएं अकम (प्रेम) और पुरम (युद्ध और राजा) हैं; तोलकाप्पियम सबसे पुराना तमिल व्याकरण है।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंगांधीजी के सत्याग्रह दर्शन पर आधारित निम्नलिखित में से किस संघर्ष में औद्योगिक श्रमिक वर्ग शामिल था?
- A.चंपारण
- B.खेड़ा
- C.अहमदाबाद
- D.बारदोली
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1918 की अहमदाबाद मिल हड़ताल औद्योगिक मजदूरों के लिए गांधीजी का सत्याग्रह था। सूती मिल मालिकों और मजदूरों के बीच प्लेग बोनस को लेकर विवाद हुआ, जिसे मालिक वापस लेना चाहते थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सा हड़प्पा स्थल शंख/सीपी की वस्तुएँ बनाने का विशिष्ट केंद्र था?
- A.लोथल
- B.बालाकोट
- C.आमरी
- D.कोट दीजी
उत्तर देखें
गुजरात के नागेश्वर के साथ बालाकोट को शंख की वस्तुएँ बनाने का विशिष्ट केंद्र बताया जाता है। दोनों बस्तियाँ समुद्र तट के पास थीं, जहाँ शंख आसानी से मिल जाते थे, और वहाँ खुदाई में शंख का भारी कचरा, अधूरे टुकड़े और तैयार वस्तुएँ मिली हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →प्राचीन भारत के भारत-रोमन व्यापार के संदर्भ में, 'ऑरेई' शब्द किसे दर्शाता है?
- A.इत्र
- B.मदिरा
- C.काली मिर्च
- D.सिक्के
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ऑरेई (एकवचन ऑरियस) रोमन साम्राज्य के सोने के सिक्के थे, जो भारतीय वस्तुओं के बदले बड़ी संख्या में भारत आए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →किस यूरोपीय यात्री ने यह टिप्पणी की थी, "एक हिंदू स्त्री अकेले कहीं भी जा सकती है, सबसे भीड़ भरी जगहों पर भी, और उसे आवारा लोगों की अशिष्ट नजरों और फब्तियों का कभी डर नहीं होता"?
- A.फ्रांस्वा बर्नियर
- B.ज्यां-बैप्टिस्ट टैवर्नियर
- C.टॉमस रो
- D.एब्बे जे. ए. दुबॉय
उत्तर देखें
यह टिप्पणी फ्रांसीसी कैथोलिक मिशनरी एब्बे ज्यां-आंत्वान दुबॉय की है, जो 1792 से 1823 तक दक्षिण भारत में, अधिकतर मैसूर में, रहे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अकबर के दरबार के निम्नलिखित विद्वानों में से किसने भास्कराचार्य की लीलावती का फारसी में अनुवाद किया?
- A.अबुल फजल
- B.फैजी
- C.फतहुल्ला शीराजी
- D.अताउल्ला रशीदी
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अकबर के राजकवि और अबुल फजल के बड़े भाई फैजी ने 1587 में लीलावती का फारसी में अनुवाद किया। लीलावती गणितज्ञ भास्कराचार्य (भास्कर द्वितीय) द्वारा बारहवीं शताब्दी में लिखे सिद्धांत शिरोमणि का अंकगणित वाला भाग है, जिसमें संख्याएं, भिन्न, श्रेणियां और मापन आते हैं।
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