"योगवासिष्ठ" का फारसी में अनुवाद निज़ामुद्दीन पानीपती ने किसके शासनकाल में किया था?
- A.अकबर
- B.हुमायूं
- C.शाहजहां
- D.औरंगज़ेब
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है A, अकबर। निज़ामुद्दीन पानीपती ने अकबर के समय योगवासिष्ठ का फारसी अनुवाद किया; यह संस्कृत ग्रंथों के अनुवाद की अकबर की बड़ी योजना का हिस्सा था। अकबर ने फतेहपुर सीकरी में अनुवाद विभाग (मकतबखाना) बनाया, जहां महाभारत का अनुवाद रज़्मनामा के रूप में हुआ और रामायण, अथर्ववेद, लीलावती तथा राजतरंगिणी भी फारसी में लाए गए। योगवासिष्ठ ऋषि वसिष्ठ और राम के बीच मन और मोक्ष पर एक दार्शनिक संवाद है; इसका फारसी रूप शहज़ादे सलीम, यानी बाद के जहांगीर, के लिए तैयार किया गया था। विकल्प B गलत है, क्योंकि हुमायूं के अस्थिर शासन में ऐसा कोई अनुवाद कार्यक्रम नहीं चला। विकल्प C गलत है, क्योंकि शाहजहां के काल का प्रसिद्ध अनुवाद दारा शिकोह का सिर्र-ए-अकबर (उपनिषदों का फारसी अनुवाद) है, यह ग्रंथ नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि औरंगज़ेब ने संस्कृत दर्शन के अनुवादों को संरक्षण नहीं दिया। परीक्षा टिप: अकबर के मकतबखाने ने रज़्मनामा (महाभारत) तैयार किया; दारा शिकोह ने उपनिषदों का अनुवाद सिर्र-ए-अकबर नाम से किया।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंभारतीय व्यापारियों की दक्षिण पूर्व एशिया की प्राचीन समुद्री यात्राओं की स्मृति में मनाई जाने वाली बालीयात्रा किस राज्य में होती है?
- A.ओडिशा
- B.पश्चिम बंगाल
- C.गुजरात
- D.तमिलनाडु
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बालीयात्रा, अर्थात बाली की यात्रा, कटक में महानदी के तट पर कार्तिक पूर्णिमा को मनाई जाती है, जब लोग कागज तथा केले की छाल की छोटी नावें तैराकर उन कलिंग व्यापारियों को स्मरण करते हैं जो बाली, जावा, सुमात्रा और बोर्नियो जाते थे; उसी दिन को बोइता बंदाण भी कहा…
पूरी व्याख्या पढ़ें →संगम युग में पांड्यों का मोती बंदरगाह कोरकई किस नदी पर स्थित था?
- A.कावेरी
- B.वैगै
- C.ताम्रपर्णी
- D.पालार
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कोरकई आज के थूथुकुडी जिले में ताम्रपर्णी के मुहाने के पास था और मन्नार की खाड़ी की पांड्य मोती मत्स्यकी का केंद्र था, जिसकी प्रशंसा पेरिप्लस तथा संगम कवियों ने की; समुद्र पीछे हट जाने से यह स्थल अब भीतर रह गया है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सुमात्रा के श्रीविजय साम्राज्य पर 1025 ईस्वी में नौसैनिक अभियान किस चोल शासक ने भेजा?
- A.राजराज प्रथम
- B.राजेंद्र प्रथम
- C.कुलोत्तुंग प्रथम
- D.विजयालय
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सही उत्तर है B, राजेंद्र प्रथम, जो राजराज प्रथम के पुत्र थे और जिन्होंने 1025 ईस्वी में मलक्का तथा सुंडा जलडमरूमध्य पर नियंत्रण रखने वाली व्यापारिक शक्ति श्रीविजय के विरुद्ध बंगाल की खाड़ी पार चोल बेड़ा भेजा तथा अपने अभिलेखों में इस अभियान और अर्जित उपाधियों का उल्लेख किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →तमिल स्रोतों में किस भारतीय निर्यात वस्तु को यवनप्रिय कहा गया है?
- A.मोती
- B.मलमल
- C.काली मिर्च
- D.चंदन
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संगम काव्य तथा बाद के संस्कृत ग्रंथ काली मिर्च को यवनप्रिय कहते हैं, अर्थात यवनों को प्रिय, और यवन शब्द उन यूनानियों तथा रोमनों के लिए प्रयुक्त होता था जो इसके लिए मलाबार बंदरगाहों पर उमड़ते थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →दक्षिण पश्चिम मानसूनी हवाओं से सीधे अरब सागर पार कर भारत आने का श्रेय किस यूनानी नाविक को दिया जाता है?
- A.मेगस्थनीज
- B.हिप्पालस
- C.टॉलेमी
- D.नियार्कस
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ईसा की पहली शताब्दी के मध्य के आसपास इस नाविक ने दक्षिण पश्चिम मानसून की चाल समझ ली, जिसके बाद जहाज तट से सटकर चलने के बदले लाल सागर के मुहाने से सीधे मलाबार तट पहुँचने लगे; यात्रा घटकर लगभग चालीस दिन की रह गई और भारत रोम व्यापार में…
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