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UPSC सिविल सेवा 2025 पिछले वर्ष के GK प्रश्न

UPSC सिविल सेवा 2025 में पूछे गए GK प्रश्न, उत्तर और व्याख्या सहित।

पिछले वर्ष के प्रश्न

Q1.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2025, GS Paper Iमध्यम

असहयोग आंदोलन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

I. कांग्रेस ने सभी वैध और शांतिपूर्ण साधनों से 'स्वराज' की प्राप्ति को अपना लक्ष्य घोषित किया।

II. इसे चरणों में लागू किया जाना था, जिसमें सविनय अवज्ञा और करों का भुगतान न करना अगले चरण में तभी होना था जब एक वर्ष के भीतर 'स्वराज' न मिले और सरकार दमन का सहारा ले।

ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?

  1. A.केवल I
  2. B.केवल II
  3. C.I और II दोनों
  4. D.न तो I और न ही II
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. I और II दोनों

व्याख्या

सही उत्तर है C, I और II दोनों। असहयोग आंदोलन (1920-22) के बारे में दोनों कथन सही हैं।

सितंबर 1920 के कलकत्ता विशेष अधिवेशन में कांग्रेस ने गांधी का असहयोग कार्यक्रम स्वीकार किया, और दिसंबर 1920 के नागपुर अधिवेशन ने इसकी पुष्टि करते हुए कांग्रेस का ध्येय बदला: संवैधानिक साधनों से साम्राज्य के भीतर स्वशासन के पुराने लक्ष्य के स्थान पर अब सभी शांतिपूर्ण और वैध साधनों से स्वराज की प्राप्ति लक्ष्य बना। आंदोलन चरणों में सोचा गया था: पहले उपाधियों, परिषदों, अदालतों, स्कूलों और विदेशी कपड़े का बहिष्कार, और बाद में, अगर एक वर्ष में स्वराज न मिले और सरकार दमन करे, तो करों का भुगतान न करने सहित सविनय अवज्ञा। फरवरी 1922 की चौरी चौरा घटना के बाद गांधी ने इसे वापस ले लिया।

A गलत है: कथन II भी सही है।

B गलत है: कथन I भी सही है।

D गलत है: दोनों कथन सही हैं।

परीक्षा टिप: कलकत्ता (सितंबर 1920) में असहयोग स्वीकार; नागपुर (दिसंबर 1920) में शांतिपूर्ण और वैध साधनों से स्वराज लक्ष्य बना।

Q2.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2025, GS Paper Iमध्यम

अशोक के अभिलेखों से पता चलता है कि 'प्रादेशिक', 'राजुक' और 'युक्त' किस स्तर के प्रशासन के महत्वपूर्ण अधिकारी थे?

  1. A.ग्राम-स्तरीय प्रशासन
  2. B.जिला-स्तरीय प्रशासन
  3. C.प्रांतीय प्रशासन
  4. D.केंद्रीय प्रशासन का स्तर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. जिला-स्तरीय प्रशासन

व्याख्या

सही उत्तर है B, जिला-स्तरीय प्रशासन। प्रादेशिक, राजुक और युक्त मौर्य साम्राज्य में जिला-स्तरीय प्रशासन के अधिकारी थे।

अशोक का तीसरा बृहद् शिलालेख युक्तों, राजुकों और प्रादेशिकों को आदेश देता है कि वे अपने नियमित काम के साथ धम्म का प्रचार करने के लिए हर पाँच वर्ष में दौरे पर जाएँ। प्रादेशिक जिले का प्रमुख था, जो राजस्व और व्यवस्था देखता था। राजुक भूमि की माप करता था और उसके पास न्यायिक अधिकार भी थे, जिन्हें अशोक ने बढ़ाया (चौथा स्तंभ लेख)। युक्त अधीनस्थ अधिकारी था, जो हिसाब-किताब और अभिलेख रखता तथा इनकी सहायता करता था। ये मिलकर प्रांतों और गाँवों के बीच की कड़ी थे।

A गलत है: गाँवों का प्रबंध ग्रामिक (ग्राम प्रधान) करता था, ये अधिकारी नहीं।

C गलत है: प्रांतों के प्रमुख कुमार या आर्यपुत्र कहलाने वाले राजकुमार होते थे।

D गलत है: केंद्रीय स्तर पर मंत्रिपरिषद और समाहर्ता तथा सन्निधाता जैसे विभाग प्रमुख होते थे।

परीक्षा टिप: प्रादेशिक, राजुक, युक्त = जिला अधिकारी, तीसरे बृहद् शिलालेख में उल्लेख; ग्रामिक = ग्राम प्रधान।

Q3.कला और संस्कृतिपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2025, GS Paper Iमध्यम

संगीत प्रशिक्षण विद्यालय, पहला गांधर्व महाविद्यालय, 1901 में विष्णु दिगंबर पलुस्कर ने कहाँ स्थापित किया था?

  1. A.दिल्ली
  2. B.ग्वालियर
  3. C.उज्जैन
  4. D.लाहौर
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. लाहौर

व्याख्या

सही उत्तर है D, लाहौर। विष्णु दिगंबर पलुस्कर ने 5 मई 1901 को लाहौर में पहला गांधर्व महाविद्यालय स्थापित किया।

ग्वालियर घराने में प्रशिक्षित हिंदुस्तानी गायक पलुस्कर शास्त्रीय संगीत को दरबारी संरक्षण की बंद दुनिया से निकालकर आम विद्यार्थियों को खुलकर सिखाना चाहते थे। लाहौर का यह विद्यालय तय पाठ्यक्रम, शुल्क और परीक्षाओं के साथ जनता को योजनाबद्ध, संस्थागत ढंग से संगीत सिखाने वाले पहले विद्यालयों में था। बाद में 1908 में उन्होंने अपना मुख्य विद्यालय बंबई में स्थानांतरित किया, और 1931 में बना अखिल भारतीय गांधर्व महाविद्यालय मंडल उनका काम आगे बढ़ा रहा है। 'रघुपति राघव राजा राम' भजन की प्रसिद्ध धुन भी उन्हीं की है।

A गलत है: पहला विद्यालय दिल्ली में नहीं खुला।

B गलत है: ग्वालियर वह घराना है जिसमें पलुस्कर ने शिक्षा पाई, विद्यालय का स्थान नहीं।

C गलत है: उज्जैन का महाविद्यालय की स्थापना से कोई संबंध नहीं है।

परीक्षा टिप: गांधर्व महाविद्यालय = वि.दि. पलुस्कर, लाहौर, 1901; वि.ना. भातखंडे = थाट पद्धति और मैरिस कॉलेज, लखनऊ।

Q4.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2025, GS Paper Iमध्यम

प्राचीन भारत (600-322 ई.पू.) के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए :

क्षेत्र : क्षेत्र में बहने वाली नदी

I. अश्मक : गोदावरी

II. कंबोज : विपाशा

III. अवंति : महानदी

IV. कोसल : सरयू

ऊपर दिए गए युग्मों में से कितने सही सुमेलित हैं?

  1. A.केवल एक
  2. B.केवल दो
  3. C.केवल तीन
  4. D.सभी चार
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. केवल दो

व्याख्या

सही उत्तर है B, केवल दो। केवल युग्म I (अश्मक : गोदावरी) और IV (कोसल : सरयू) सही हैं।

अश्मक दक्षिण का एकमात्र महाजनपद था, जो गोदावरी के तट पर स्थित था और जिसकी राजधानी पोटन (पौदन्य) थी। श्रावस्ती और अयोध्या जैसे बड़े केंद्रों वाला कोसल सरयू (घाघरा) के किनारे फैला था। पश्चिमी मालवा में स्थित अवंति की राजधानियाँ उज्जयिनी और माहिष्मती थीं और यहाँ शिप्रा तथा नर्मदा बहती हैं, महानदी नहीं, जो छत्तीसगढ़ और ओडिशा से होकर बहती है। कंबोज सुदूर उत्तर-पश्चिम में हिंदूकुश और काबुल घाटी के आसपास था, पंजाब की विपाशा (ब्यास) से बहुत दूर।

A गलत है: एक नहीं, दो युग्म सही हैं।

C गलत है: युग्म II और III गलत हैं, इसलिए तीन सही नहीं हो सकते।

D गलत है: कंबोज विपाशा पर नहीं और अवंति महानदी पर नहीं है।

परीक्षा टिप: अश्मक = गोदावरी (दक्षिण का एकमात्र महाजनपद); कोसल = सरयू; अवंति = नर्मदा और शिप्रा; विपाशा = ब्यास।

Q5.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2025, GS Paper Iआसान

निम्नलिखित में से किसने श्रीविजय राज्य के विरुद्ध एक सफल सैन्य अभियान का नेतृत्व किया था, जो मलय प्रायद्वीप, सुमात्रा, जावा और आसपास के द्वीपों पर शासन करने वाला शक्तिशाली समुद्री राज्य था?

  1. A.अमोघवर्ष (राष्ट्रकूट)
  2. B.प्रतापरुद्र (काकतीय)
  3. C.राजेंद्र प्रथम (चोल)
  4. D.विष्णुवर्धन (होयसल)
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. राजेंद्र प्रथम (चोल)

व्याख्या

सही उत्तर है C, राजेंद्र प्रथम (चोल)। लगभग 1025 ई. में राजेंद्र चोल प्रथम ने एक नौसैनिक अभियान भेजा, जिसने श्रीविजय राज्य के कडारम (केदाह) और अन्य बंदरगाहों पर धावा बोला।

सुमात्रा स्थित श्रीविजय मलक्का जलडमरूमध्य और भारत-चीन के समुद्री व्यापार पर नियंत्रण रखता था। राजराज प्रथम के पुत्र राजेंद्र प्रथम ने यह अभियान संभवतः चोल व्यापारियों और व्यापार मार्गों की रक्षा के लिए चलाया। उसके अभिलेखों में कडारम, पालेमबांग, मलैयूर और इलामुरिदेशम जैसे जीते गए स्थानों और श्रीविजय के राजा संग्राम विजयोत्तुंगवर्मन को बंदी बनाने का उल्लेख है। राजेंद्र गंगा तक भी गया, गंगैकोंड की उपाधि ली और नई राजधानी गंगैकोंड चोलपुरम बनाई। उसे कडारम कोंडान, यानी कडारम का विजेता, भी कहा जाता है।

A गलत है: अमोघवर्ष नौवीं सदी का राष्ट्रकूट राजा था, जो कविराजमार्ग के लिए जाना जाता है, समुद्र पार युद्धों के लिए नहीं।

B गलत है: प्रतापरुद्र वारंगल का अंतिम काकतीय राजा था, जिसे दिल्ली सल्तनत ने हराया।

D गलत है: विष्णुवर्धन बारहवीं सदी का होयसल राजा था, जिसने बेलूर का चेन्नकेशव मंदिर बनवाया।

परीक्षा टिप: राजेंद्र प्रथम = गंगैकोंड, कडारम कोंडान, श्रीविजय अभियान (लगभग 1025); राजराज प्रथम = बृहदीश्वर मंदिर और श्रीलंका।

Q6.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2025, GS Paper Iआसान

चीनी यात्री फाह्यान (फ़ाश्यान) ने किसके शासनकाल में भारत की यात्रा की थी?

  1. A.समुद्रगुप्त
  2. B.चंद्रगुप्त द्वितीय
  3. C.कुमारगुप्त प्रथम
  4. D.स्कंदगुप्त
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. चंद्रगुप्त द्वितीय

व्याख्या

सही उत्तर है B, चंद्रगुप्त द्वितीय। फाह्यान लगभग 399 से 414 ई. तक भारत में रहा, जब गुप्त साम्राज्य पर चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य का शासन था।

फाह्यान एक चीनी बौद्ध भिक्षु था, जो बौद्ध ग्रंथ, विशेषकर भिक्षु-अनुशासन के नियम, लेने के लिए स्थल मार्ग से भारत आया। उसने कपिलवस्तु, बोधगया, सारनाथ और पाटलिपुत्र जैसे बौद्ध स्थलों की यात्रा की और श्रीलंका होते हुए समुद्री मार्ग से लौटा। उसका वृत्तांत, जिसे फो-क्वो-की कहा जाता है, मध्यदेश को शांत और समृद्ध बताता है: कर हल्के थे, मृत्युदंड कम दिया जाता था, पाटलिपुत्र में निःशुल्क अस्पताल थे, और चांडाल नगरों के बाहर रहते थे। आश्चर्य की बात है कि वह राजा का नाम कहीं नहीं लेता।

A गलत है: चंद्रगुप्त द्वितीय के पिता समुद्रगुप्त का शासन फाह्यान के आने से पहले था।

C गलत है: कुमारगुप्त प्रथम लगभग 415 ई. में गद्दी पर बैठा, जब फाह्यान लौट चुका था।

D गलत है: स्कंदगुप्त ने पाँचवीं सदी के मध्य में शासन किया और हूण आक्रमणों का सामना किया।

परीक्षा टिप: फाह्यान = चंद्रगुप्त द्वितीय (गुप्त); ह्वेनसांग = हर्षवर्धन; इत्सिंग = सातवीं सदी के अंत में नालंदा आया।

Q7.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2025, GS Paper Iमध्यम

प्राचीन भारत के निम्नलिखित शासकों में से किसने 'मत्तविलास', 'विचित्रचित्त' और 'गुणभर' की उपाधियाँ धारण की थीं?

  1. A.महेंद्रवर्मन प्रथम
  2. B.सिंहविष्णु
  3. C.नरसिंहवर्मन प्रथम
  4. D.सिंहवर्मन
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. महेंद्रवर्मन प्रथम

व्याख्या

सही उत्तर है A, महेंद्रवर्मन प्रथम। सातवीं सदी के आरंभ में शासन करने वाले इस पल्लव राजा ने ये उपाधियाँ लीं, जो उसके बनवाए गुफा मंदिरों के अभिलेखों में मिलती हैं।

सिंहविष्णु का पुत्र महेंद्रवर्मन प्रथम कवि, संगीतज्ञ और निर्माता था। उसने संस्कृत प्रहसन मत्तविलास प्रहसन लिखा, जिससे उसे मत्तविलास की उपाधि मिली। विचित्रचित्त, यानी जिज्ञासु मन वाला, उसकी नई सोच दिखाता है: मंडगपट्टु अभिलेख में वह कहता है कि उसने ईंट, लकड़ी, धातु और गारे के बिना मंदिर बनवाया, जिससे तमिल क्षेत्र में शैलकृत मंदिरों की शुरुआत हुई। गुणभर उसकी कई उपाधियों में से एक है। परंपरा के अनुसार वह अप्पर के प्रभाव से जैन से शैव बना, और उसने चालुक्य पुलकेशिन द्वितीय से युद्ध किया।

B गलत है: सिंहविष्णु ने वंश की शक्ति की नींव रखी और वह अवनिसिंह कहलाता था।

C गलत है: नरसिंहवर्मन प्रथम वातापी जीतने के बाद मामल्ल और वातापीकोंड कहलाया।

D गलत है: सिंहवर्मन पहले का पल्लव शासक था, जिसकी ये उपाधियाँ नहीं थीं।

परीक्षा टिप: महेंद्रवर्मन प्रथम = मत्तविलास प्रहसन और मंडगपट्टु गुफा; नरसिंहवर्मन प्रथम = मामल्ल, महाबलीपुरम और वातापीकोंड।

Q8.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2025, GS Paper Iमध्यम

'अरघट्ट' नामक सिंचाई उपकरण क्या था?

  1. A.चरखी पर खींचा जाने वाला चमड़े का पानी का थैला
  2. B.एक बड़ा पहिया जिसकी तीलियों के बाहरी सिरों पर मिट्टी के घड़े बँधे होते थे
  3. C.बैलों द्वारा चलाया जाने वाला एक बड़ा मिट्टी का घड़ा
  4. D.रस्सी से सीधे हाथ द्वारा ऊपर खींची जाने वाली पानी की बड़ी बाल्टी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. एक बड़ा पहिया जिसकी तीलियों के बाहरी सिरों पर मिट्टी के घड़े बँधे होते थे

व्याख्या

सही उत्तर है B, एक बड़ा पहिया जिसकी तीलियों के बाहरी सिरों पर मिट्टी के घड़े बँधे होते थे। अरघट्ट पानी उठाने वाला पहिया था, जो घड़ों की माला को कुएँ में नीचे ले जाकर भरे हुए घड़े ऊपर लाता था।

आरंभिक मध्यकाल के संस्कृत ग्रंथों और अभिलेखों में अरघट्ट का उल्लेख कुओं से खेतों की सिंचाई के आम साधन के रूप में मिलता है। पहिया घूमने पर हर घड़ा पानी में डूबता, भरकर ऊपर आता और ऊपर बनी नाली में खाली हो जाता। यही आगे चलकर फ़ारसी पहिये (रहट) का पूर्वज बना, जो दिल्ली सल्तनत और मुगल काल में बैलों से चलने वाले गियर जुड़ने के बाद उत्तर भारत में खूब फैला।

A गलत है: चरखी पर खींचा जाने वाला चमड़े का थैला चरसा या मोट कहलाता है, जो अलग साधन है।

C गलत है: बैलों से चलने वाला एक बड़ा घड़ा कई घड़ों वाले पहिये का वर्णन नहीं है।

D गलत है: हाथ से रस्सी द्वारा खींची गई बाल्टी कुएँ से पानी निकालने का सबसे सरल तरीका है, अरघट्ट नहीं।

परीक्षा टिप: अरघट्ट = घड़ों की माला वाला पहिया; चरसा या मोट = चमड़े का थैला; ढेकुली = लीवर और बाल्टी वाला साधन।

Q9.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2025, GS Paper Iमध्यम

असहयोग कार्यक्रम के संबंध में निम्नलिखित विषयों पर विचार कीजिए :

I. विधि न्यायालयों और विदेशी कपड़े का बहिष्कार

II. कठोरता से अहिंसा का पालन

III. उपाधियों और सम्मानों को सार्वजनिक रूप से उपयोग किए बिना अपने पास रखना

IV. विवादों के निपटारे के लिए पंचायतों की स्थापना

उपर्युक्त में से कितने असहयोग कार्यक्रम के भाग थे?

  1. A.केवल एक
  2. B.केवल दो
  3. C.केवल तीन
  4. D.सभी चार
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. केवल तीन

व्याख्या

सही उत्तर है C, केवल तीन। विषय I, II और IV असहयोग कार्यक्रम के भाग थे, पर III नहीं: भारतीयों से उपाधियाँ लौटाने को कहा गया था, उन्हें चुपचाप रखने को नहीं।

यह कार्यक्रम सितंबर 1920 में कलकत्ता के विशेष कांग्रेस अधिवेशन में स्वीकृत हुआ और दिसंबर 1920 के नागपुर अधिवेशन में पुष्ट हुआ। इसके नकारात्मक पक्ष में उपाधियों और मानद पदों का त्याग तथा सरकारी स्कूल-कॉलेजों, न्यायालयों, 1919 के सुधारों वाली विधायिकाओं और विदेशी कपड़े का बहिष्कार था। रचनात्मक पक्ष में राष्ट्रीय स्कूल-कॉलेज, ब्रिटिश अदालतों की जगह विवाद सुलझाने के लिए पंचायतें, खादी और चरखे का प्रसार, हिंदू-मुस्लिम एकता और अस्पृश्यता निवारण था। कठोर अहिंसा मूल शर्त थी, इसलिए चौरी चौरा की हिंसा के बाद फरवरी 1922 में गांधी ने आंदोलन वापस ले लिया।

A गलत है: एक नहीं, तीन विषय कार्यक्रम के भाग थे।

B गलत है: दो नहीं, तीन विषय कार्यक्रम के भाग थे।

D गलत है: विषय III उपाधियाँ लौटाने के वास्तविक आह्वान के विपरीत है; गांधी ने स्वयं कैसर-ए-हिंद पदक लौटाया था।

परीक्षा टिप: असहयोग 1920-22 = उपाधि त्याग, न्यायालय, स्कूल, परिषद और विदेशी कपड़े का बहिष्कार; पंचायत और खादी; चौरी चौरा के बाद समाप्त।

Q10.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2025, GS Paper Iआसान

राजा राममोहन राय के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

I. उनके मन में पूर्व की पारंपरिक दार्शनिक प्रणालियों के प्रति गहरा प्रेम और सम्मान था।

II. वे चाहते थे कि उनके देशवासी तर्कसंगत और वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा सभी स्त्री-पुरुषों की मानवीय गरिमा और सामाजिक समानता के सिद्धांत को अपनाएँ।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. A.केवल I
  2. B.केवल II
  3. C.I और II दोनों
  4. D.न तो I और न ही II
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. I और II दोनों

व्याख्या

सही उत्तर है C, I और II दोनों। राममोहन राय पूर्व की दार्शनिक विरासत का सम्मान करते थे और साथ ही भारतीयों से तर्क, विज्ञान और सामाजिक समानता अपनाने का आग्रह करते थे।

भारतीय पुनर्जागरण के जनक कहे जाने वाले राममोहन राय (1772-1833) ने उपनिषदों का अध्ययन किया और उनके अंशों का बांग्ला तथा अंग्रेज़ी में अनुवाद करके दिखाया कि वे एक ईश्वर की उपासना सिखाते हैं; वे फ़ारसी, अरबी और संस्कृत चिंतन के भी गहरे जानकार थे। साथ ही वे आधुनिक, तर्कसंगत दृष्टि चाहते थे: उन्होंने अंग्रेज़ी और वैज्ञानिक शिक्षा का समर्थन किया, सती प्रथा के विरुद्ध अभियान चलाया, जिस पर 1829 में रोक लगी, और स्त्रियों के संपत्ति अधिकार की बात की। उन्होंने 1815 में आत्मीय सभा और 1828 में ब्रह्म सभा स्थापित की।

A गलत है: इसमें तर्क और समानता से जुड़ा कथन II छूट गया है।

B गलत है: इसमें पूर्वी दर्शन के प्रति सम्मान वाला कथन I छूट गया है।

D गलत है: दोनों कथन उनके दृष्टिकोण को सही बताते हैं।

परीक्षा टिप: राममोहन राय = आत्मीय सभा 1815, ब्रह्म सभा 1828, सती उन्मूलन 1829; उपनिषद और आधुनिक तर्क, दोनों।

Q11.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2025, GS Paper Iमध्यम

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

I. पूँजीगत प्राप्तियाँ सरकार की देनदारी उत्पन्न करती हैं या उसकी परिसंपत्तियों में कमी लाती हैं।

II. उधार और विनिवेश पूँजीगत प्राप्तियाँ हैं।

III. ऋणों पर प्राप्त ब्याज सरकार की देनदारी उत्पन्न करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

  1. A.केवल I और II
  2. B.केवल II और III
  3. C.केवल I और III
  4. D.I, II और III
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. केवल I और II

व्याख्या

सही उत्तर है A, केवल I और II। पूँजीगत प्राप्तियाँ या तो देनदारी बढ़ाती हैं या परिसंपत्ति घटाती हैं, और उधार तथा विनिवेश इसके प्रमुख उदाहरण हैं; प्राप्त ब्याज राजस्व प्राप्ति है।

केंद्रीय बजट में कोई प्राप्ति पूँजीगत तब कहलाती है जब वह देनदारी उत्पन्न करे, जैसे बाज़ार उधार, लघु बचत और अन्य ऋण, जिन्हें लौटाना होता है, या परिसंपत्ति घटाए, जैसे विनिवेश, जिसमें सरकार सार्वजनिक उपक्रमों में अपनी हिस्सेदारी बेचती है, अथवा पहले दिए ऋणों की वसूली। राजस्व प्राप्तियाँ इनमें से कुछ नहीं करतीं: कर राजस्व और गैर-कर राजस्व, जैसे प्राप्त ब्याज, लाभांश, मुनाफा और शुल्क, बस आय के रूप में आते हैं। इसलिए सरकार द्वारा दिए ऋणों पर मिलने वाला ब्याज गैर-कर राजस्व है और कोई देनदारी नहीं बनाता।

B गलत है: इसमें कथन III शामिल है, जो गलत है।

C गलत है: इसमें गलत कथन III शामिल है और सही कथन II छूट गया है।

D गलत है: कथन III गलत है, इसलिए तीनों सही नहीं हो सकते।

परीक्षा टिप: पूँजीगत प्राप्ति = देनदारी बढ़े या परिसंपत्ति घटे (उधार, विनिवेश, ऋण वसूली); ब्याज और लाभांश = राजस्व प्राप्ति।

Q12.पर्यावरण और पारिस्थितिकीपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2025, GS Paper Iमध्यम

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

कथन I : चक्रीय अर्थव्यवस्था ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करती है।

कथन II : चक्रीय अर्थव्यवस्था निवेश के रूप में कच्चे माल के उपयोग को कम करती है।

कथन III : चक्रीय अर्थव्यवस्था उत्पादन प्रक्रिया में होने वाली बर्बादी को कम करती है।

उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?

  1. A.कथन II और कथन III दोनों सही हैं और दोनों ही कथन I की व्याख्या करते हैं
  2. B.कथन II और कथन III दोनों सही हैं, किंतु उनमें से केवल एक ही कथन I की व्याख्या करता है
  3. C.कथन II और III में से केवल एक सही है और वही कथन I की व्याख्या करता है
  4. D.न तो कथन II सही है और न ही कथन III
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. कथन II और कथन III दोनों सही हैं और दोनों ही कथन I की व्याख्या करते हैं

व्याख्या

सही उत्तर है A। कथन II और कथन III दोनों सही हैं और दोनों ही बताते हैं कि चक्रीय अर्थव्यवस्था ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन क्यों घटाती है।

रेखीय अर्थव्यवस्था "लो, बनाओ, फेंको" के ढर्रे पर चलती है, जबकि चक्रीय अर्थव्यवस्था पुनः उपयोग, मरम्मत, पुनर्निर्माण और पुनर्चक्रण के जरिए वस्तुओं और सामग्री को लंबे समय तक उपयोग में रखती है। जब नया कच्चा माल कम निकालना, साफ करना और ढोना पड़ता है, तो उससे जुड़ी ऊर्जा और उत्सर्जन घटते हैं; यह कथन II की व्याख्या है। जब उत्पादन में बर्बादी कम होती है और कम कचरा लैंडफिल या भस्मक तक पहुँचता है, तो विनिर्माण और कचरा निपटान का उत्सर्जन भी घटता है; यह कथन III की व्याख्या है।

B गलत है: यह कहता है कि केवल एक कथन व्याख्या करता है, जबकि दोनों करते हैं।

C गलत है: कथन II और III दोनों सही हैं, केवल एक नहीं।

D गलत है: कच्चे माल और बर्बादी को घटाना ही चक्रीय मॉडल का मूल उद्देश्य है।

परीक्षा टिप: चक्रीय अर्थव्यवस्था = कम उपयोग, पुनः उपयोग, पुनर्चक्रण; कम संसाधन और कम कचरा, दोनों से कम उत्सर्जन।

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