निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : I. लोकसभा के विघटन पर अध्यक्ष अपना पद तब तक खाली नहीं करेगा जब तक विघटन के बाद लोकसभा की पहली बैठक से ठीक पहले का समय न आ जाए। II. भारत के संविधान के प्रावधानों के अनुसार, लोकसभा का सदस्य अध्यक्ष चुने जाने पर तुरंत अपने राजनीतिक दल से त्यागपत्र देगा। III. लोकसभा अध्यक्ष को लोकसभा के तत्कालीन सभी सदस्यों के बहुमत से पारित संकल्प द्वारा पद से हटाया जा सकता है, बशर्ते ऐसा कोई संकल्प तब तक प्रस्तुत न किया जाए जब तक उसे प्रस्तुत करने के इरादे की कम से कम चौदह दिन की सूचना न दी गई हो। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
- A.केवल I और II
- B.केवल II और III
- C.केवल I और III
- D.I, II और III
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है C, केवल I और III। ये दोनों कथन अनुच्छेद 94 से लिए गए हैं, जबकि संविधान में अध्यक्ष के अपना दल छोड़ने का कोई प्रावधान नहीं है।
अनुच्छेद 94 अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद खाली होने, त्यागपत्र और हटाए जाने से संबंधित है। इसके परंतुक के अनुसार लोकसभा भंग होने पर भी अध्यक्ष नई लोकसभा की पहली बैठक से ठीक पहले तक पद पर रहता है, ताकि पद कभी खाली न रहे। खंड (c) के अनुसार अध्यक्ष को सदन के तत्कालीन सभी सदस्यों के बहुमत से, अर्थात प्रभावी बहुमत से, पारित संकल्प द्वारा हटाया जा सकता है, पर इसके लिए कम से कम 14 दिन की सूचना जरूरी है। ऐसे संकल्प पर विचार के समय अध्यक्ष पीठासीन नहीं होता, पर अनुच्छेद 96 के अनुसार वह बोल सकता है और पहली बार में मत दे सकता है।
A गलत है क्योंकि कथन II असत्य है: दल से त्यागपत्र देना ब्रिटेन जैसे कुछ देशों की परंपरा है, भारत में संवैधानिक नियम नहीं। B गलत है क्योंकि इसमें कथन II है और कथन I छूट गया है। D गलत है क्योंकि कथन II असत्य है।
Exam tip: अनुच्छेद 94: नई लोकसभा की बैठक तक अध्यक्ष पद पर; 14 दिन की सूचना के बाद प्रभावी बहुमत से हटाया जा सकता है।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंसंघ और यूनियन बनाने का अधिकार एक
- A.सभी को प्रत्याभूत अधिकार है
- B.केवल नागरिकों को प्रत्याभूत स्वतंत्रता का अधिकार है
- C.विधि के समक्ष समता का अधिकार है
- D.प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार है
उत्तर देखें
संघ या यूनियन बनाने का अधिकार अनुच्छेद 19 का हिस्सा है, और अनुच्छेद 19 के अधिकार केवल भारत के नागरिकों को मिलते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- A.संघ और प्रत्येक राज्य सरकार अनुसूचित जनजातियों को प्रभावित करने वाले सभी प्रमुख नीतिगत मामलों पर आयोग से परामर्श करेगी।
- B.आयोग की सभी रिपोर्टें और उसकी सिफ़ारिशें केवल लोकसभा के समक्ष रखी जाएँगी।
- C.किसी मामले की जाँच करते समय आयोग को सिविल न्यायालय की सभी शक्तियाँ प्राप्त होती हैं।
- D.आयोग को अपनी प्रक्रिया स्वयं विनियमित करने की शक्ति है।
उत्तर देखें
यह कथन सही नहीं है, क्योंकि आयोग की रिपोर्टें राष्ट्रपति संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाते हैं, केवल लोकसभा के समक्ष नहीं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में चुनावों के संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही नहीं है/हैं? 1. निर्वाचक नामावलियाँ तैयार करने का उत्तरदायित्व भारत के निर्वाचन आयोग में निहित है। 2. चुनाव की तिथि घोषित होते ही आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है। 3. निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन से संबंधित कानून भारत का निर्वाचन आयोग बनाता है। 4. किसी भी चुनाव को चुनाव याचिका के अलावा किसी अन्य प्रकार से प्रश्नगत नहीं किया जाएगा। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- A.केवल 3
- B.1, 2 और 4
- C.1, 2 और 3
- D.केवल 4
उत्तर देखें
केवल कथन 3 गलत है, क्योंकि निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन से जुड़े कानून संसद बनाती है, निर्वाचन आयोग नहीं। अनुच्छेद 327 संसद को चुनाव से संबंधित सभी विषयों पर कानून बनाने की शक्ति देता है, जिनमें निर्वाचक नामावली और परिसीमन भी शामिल हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत के संविधान की नौवीं अनुसूची के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- A.इसे संविधान (पहला संशोधन) अधिनियम, 1951 द्वारा जोड़ा गया था।
- B.नौवीं अनुसूची में शामिल अधिनियम और विनियम इस आधार पर शून्य हो जाएँगे कि वे संविधान के भाग III के किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन करते हैं।
- C.मूल ढाँचे के सिद्धांत के आधार पर नौवीं अनुसूची में शामिल किसी अधिनियम का न्यायिक पुनर्विलोकन करने की शक्ति सर्वोच्च न्यायालय के पास है।
- D.उपयुक्त विधानमंडल नौवीं अनुसूची में शामिल किसी अधिनियम को निरस्त या संशोधित कर सकता है।
उत्तर देखें
यह कथन सही नहीं है, क्योंकि अनुच्छेद 31B ठीक उलटी बात कहता है: नौवीं अनुसूची में रखा गया कोई अधिनियम केवल इस आधार पर शून्य नहीं होगा कि वह भाग III के किसी मौलिक अधिकार से असंगत है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत के संविधान की छठी अनुसूची निम्नलिखित में से किन राज्यों के जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित है?
- A.असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम
- B.मेघालय, त्रिपुरा, मणिपुर और मिज़ोरम
- C.असम, मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा
- D.मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश
उत्तर देखें
छठी अनुसूची ठीक इन्हीं चार पूर्वोत्तर राज्यों के जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित है। अनुच्छेद 244(2) और 275(1) के अंतर्गत छठी अनुसूची इन राज्यों में स्वायत्त ज़िले और स्वायत्त क्षेत्र बनाती है।
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