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UPSC सिविल सेवा 2020 पिछले वर्ष के GK प्रश्न

UPSC सिविल सेवा 2020 में पूछे गए GK प्रश्न, उत्तर और व्याख्या सहित।

पिछले वर्ष के प्रश्न

Q1.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2020, GS Paper Iआसान

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन उन्नीसवीं सदी के पूर्वार्ध में भारत पर औद्योगिक क्रांति के प्रभाव की सही व्याख्या करता है?

  1. A.भारतीय हस्तशिल्प नष्ट हो गए।
  2. B.भारतीय वस्त्र उद्योग में बड़ी संख्या में मशीनें लाई गईं।
  3. C.देश के अनेक भागों में रेल लाइनें बिछाई गईं।
  4. D.ब्रिटिश निर्मित वस्तुओं के आयात पर भारी शुल्क लगाया गया।
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. भारतीय हस्तशिल्प नष्ट हो गए।

व्याख्या

सही उत्तर है A, भारतीय हस्तशिल्प नष्ट हो गए।। ब्रिटेन की औद्योगिक क्रांति ने उन्नीसवीं सदी के पूर्वार्ध में भारतीय हस्तशिल्प को नष्ट कर दिया।

मशीन से बना ब्रिटिश कपड़ा हाथ से बुने भारतीय कपड़े से सस्ता था। 1813 के चार्टर अधिनियम से ईस्ट इंडिया कंपनी का व्यापार एकाधिकार समाप्त होने के बाद ब्रिटिश माल लगभग बिना शुल्क के भारतीय बाज़ारों में भर गया, जबकि ब्रिटेन में भारतीय माल पर ऊँचे शुल्क लगे। बुनकरों और कारीगरों के बाज़ार छिन गए, ढाका और मुर्शिदाबाद जैसे प्रसिद्ध वस्त्र नगर उजड़ गए और बहुत से कारीगर खेती की ओर धकेल दिए गए। इतिहासकार इसे विऔद्योगीकरण कहते हैं। भारत कच्ची कपास का आपूर्तिकर्ता और ब्रिटिश माल का खरीदार बन गया।

B गलत है: मशीनों वाली भारतीय कपड़ा मिलें बाद में आईं; पहली सफल सूती मिल 1854 में बंबई में खुली।

C गलत है: पहली रेल लाइन, बंबई से ठाणे, 1853 में ही खुली और रेल जाल सदी के उत्तरार्ध में फैला।

D गलत है: ब्रिटिश माल भारत में लगभग शुल्क-मुक्त आता था, इसी कारण हस्तशिल्प को नुकसान हुआ।

परीक्षा टिप: चार्टर अधिनियम 1813 + ब्रिटिश माल का मुक्त प्रवेश = भारतीय हस्तशिल्प का पतन (विऔद्योगीकरण)।

Q2.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2020, GS Paper Iमध्यम

भारत के धार्मिक इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

1. स्थविरवादी महायान बौद्ध धर्म से संबंधित हैं।

2. लोकोत्तरवादी संप्रदाय बौद्ध धर्म के महासांघिक संप्रदाय की एक शाखा था।

3. महासांघिकों द्वारा बुद्ध के देवत्वीकरण ने महायान बौद्ध धर्म को बढ़ावा दिया।

ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?

  1. A.केवल 1 और 2
  2. B.केवल 2 और 3
  3. C.केवल 3
  4. D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. केवल 2 और 3

व्याख्या

सही उत्तर है B, केवल 2 और 3। कथन 2 और 3 सही हैं; स्थविरवादी पुरानी हीनयान परंपरा के हैं, महायान के नहीं।

वैशाली में हुई दूसरी बौद्ध संगीति के बाद संघ स्थविरवादियों ('वरिष्ठ', जो कठोर नियमों पर टिके रहे) और महासांघिकों ('महान संघ') में बँट गया। स्थविरवाद की धारा से थेरवाद निकला, जो हीनयान संप्रदाय है और आज श्रीलंका तथा दक्षिण-पूर्व एशिया में माना जाता है। बुद्ध को 'लोक से परे' (लोकोत्तर) मानने वाले लोकोत्तरवादी महासांघिकों की शाखा थे; उनका ग्रंथ महावस्तु प्रसिद्ध है। बुद्ध को अलौकिक, दैवी पुरुष मानकर महासांघिकों ने महायान बौद्ध धर्म और उसमें बुद्ध प्रतिमाओं तथा बोधिसत्वों की पूजा की ज़मीन तैयार की।

A गलत है: कथन 1 गलत है, क्योंकि स्थविरवादी महायानी नहीं हैं।

C गलत है: कथन 2 भी सही है।

D गलत है: कथन 1 गलत है।

परीक्षा टिप: स्थविरवाद से थेरवाद (हीनयान); महासांघिक और लोकोत्तरवाद से महायान की ओर।

Q3.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2020, GS Paper Iमध्यम

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत के संविधान के अनुसार, मतदान के लिए पात्र व्यक्ति को किसी राज्य में छह माह के लिए मंत्री बनाया जा सकता है, भले ही वह उस राज्य के विधानमंडल का सदस्य न हो। 2. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अनुसार, किसी आपराधिक अपराध में दोषसिद्ध और पाँच वर्ष के कारावास से दंडित व्यक्ति जेल से छूटने के बाद भी चुनाव लड़ने से स्थायी रूप से अयोग्य हो जाता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. A.केवल 1
  2. B.केवल 2
  3. C.1 और 2 दोनों
  4. D.न तो 1 और न ही 2
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. न तो 1 और न ही 2

व्याख्या

सही उत्तर है D, न तो 1 और न ही 2। मंत्री बनने के लिए केवल मतदान की पात्रता पर्याप्त नहीं है, और दोषसिद्धि के बाद की अयोग्यता स्थायी नहीं होती।

कथन 1 गलत है: अनुच्छेद 164(4) गैर-सदस्य को अधिकतम छह लगातार महीनों तक राज्य में मंत्री रहने देता है, पर उस व्यक्ति में विधानमंडल का सदस्य बनने की योग्यता होनी चाहिए, जिसके लिए विधानसभा हेतु न्यूनतम आयु 25 और विधान परिषद हेतु 30 वर्ष है। मतदाता के लिए केवल 18 वर्ष की आयु चाहिए, इसलिए मतदान की पात्रता मात्र से कोई मंत्री बनने योग्य नहीं हो जाता।

कथन 2 गलत है: लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) दो वर्ष या अधिक के कारावास की सज़ा पाए व्यक्ति को दोषसिद्धि की तिथि से और रिहाई के बाद छह वर्ष तक अयोग्य करती है। यह अवधि पूरी होने पर रोक समाप्त हो जाती है; यह आजीवन नहीं है।

A गलत है: कथन 1 असत्य है।

B गलत है: कथन 2 असत्य है।

C गलत है: दोनों कथन असत्य हैं।

परीक्षा टिप: गैर-सदस्य मंत्री को छह माह में सदन का सदस्य बनना होता है (अनुच्छेद 75(5) और 164(4)); दो वर्ष या अधिक की सज़ा = सज़ा की अवधि और उसके बाद छह वर्ष तक अयोग्य।

Q4.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2020, GS Paper Iआसान

भारत के संविधान के भाग IV में निहित उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? 1. वे न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय होंगे। 2. वे किसी भी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं होंगे। 3. इस भाग में निर्धारित सिद्धांत राज्य द्वारा विधि-निर्माण को प्रभावित करने के लिए हैं। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. A.केवल 1
  2. B.केवल 2
  3. C.केवल 1 और 3
  4. D.केवल 2 और 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. केवल 2 और 3

व्याख्या

सही उत्तर है D, केवल 2 और 3। भाग IV में राज्य के नीति निदेशक तत्व हैं, जिन्हें कोई न्यायालय लागू नहीं करा सकता, पर विधि बनाते समय राज्य को इन्हें लागू करना होता है।

अनुच्छेद 37 कहता है कि भाग IV के उपबंध किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं होंगे, फिर भी इनमें दिए गए सिद्धांत देश के शासन में मूलभूत हैं और विधि बनाने में इन्हें लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा। नीति निदेशक तत्व अनुच्छेद 36 से 51 तक हैं और आयरलैंड के संविधान से प्रेरित हैं। इनमें समान कार्य के लिए समान वेतन, समान नागरिक संहिता, ग्राम पंचायतों का गठन, न्यायपालिका का कार्यपालिका से पृथक्करण और अंतरराष्ट्रीय शांति को बढ़ावा देना शामिल हैं।

A गलत है: नीति निदेशक तत्व वाद-योग्य नहीं हैं, इसलिए कथन 1 असत्य है।

B गलत है: इसमें कथन 3 छूट जाता है, जो भी सही है।

C गलत है: इसमें असत्य कथन 1 शामिल है और कथन 2 छूट जाता है।

परीक्षा टिप: भाग III के मौलिक अधिकार वाद-योग्य हैं; भाग IV के नीति निदेशक तत्व (अनुच्छेद 36-51) वाद-योग्य नहीं, पर शासन में मूलभूत हैं (अनुच्छेद 37)।

Q5.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2020, GS Paper Iआसान

"गोल्ड ट्रांश" (रिज़र्व ट्रांश) से क्या तात्पर्य है?

  1. A.विश्व बैंक की एक ऋण प्रणाली
  2. B.किसी केंद्रीय बैंक के कार्यों में से एक
  3. C.विश्व व्यापार संगठन द्वारा अपने सदस्यों को दी जाने वाली एक साख प्रणाली
  4. D.अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा अपने सदस्यों को दी जाने वाली एक साख प्रणाली
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा अपने सदस्यों को दी जाने वाली एक साख प्रणाली

व्याख्या

सही उत्तर है D, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा अपने सदस्यों को दी जाने वाली एक साख प्रणाली। रिज़र्व ट्रांश सदस्य देश के IMF कोटे का वह भाग है जिसे वह कभी भी, बिना किसी शर्त के निकाल सकता है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का हर सदस्य कोटा अंशदान देता है। पहले इसका एक-चौथाई भाग सोने में चुकाना होता था, इसलिए इसे गोल्ड ट्रांश कहा गया। आज यह भाग SDR या प्रमुख मुद्राओं जैसी आरक्षित परिसंपत्तियों में दिया जाता है और इसे रिज़र्व ट्रांश कहते हैं। इसे निकालना उधार नहीं माना जाता: न ब्याज लगता है, न लौटाने की बाध्यता है, न कोई नीतिगत शर्त, इसलिए देश इसे अपने विदेशी मुद्रा भंडार में गिनते हैं। आरबीआई भी इसे भंडार के घटकों में दिखाता है।

A गलत है: विश्व बैंक विकास परियोजनाओं के लिए ऋण देता है, उसमें रिज़र्व ट्रांश नहीं होता।

B गलत है: यह केंद्रीय बैंक का कोई कार्य नहीं है, हालाँकि केंद्रीय बैंक इसे भंडार के रूप में रखते हैं।

C गलत है: विश्व व्यापार संगठन व्यापार नियमों को देखता है, साख नहीं देता।

परीक्षा टिप: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार = विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ + सोना + SDR + IMF में रिज़र्व ट्रांश स्थिति।

Q6.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2020, GS Paper Iमध्यम

गांधीवाद और मार्क्सवाद के बीच एक साझा सहमति है

  1. A.राज्यविहीन समाज का अंतिम लक्ष्य
  2. B.वर्ग संघर्ष
  3. C.निजी संपत्ति का उन्मूलन
  4. D.आर्थिक नियतिवाद
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. राज्यविहीन समाज का अंतिम लक्ष्य

व्याख्या

सही उत्तर है A, राज्यविहीन समाज का अंतिम लक्ष्य। गांधी और मार्क्स दोनों राज्य को बलप्रयोग का साधन मानते थे और ऐसे आदर्श समाज की कल्पना करते थे जिसमें राज्य की आवश्यकता न रहे।

मार्क्स के अनुसार सर्वहारा क्रांति और सर्वहारा अधिनायकत्व के संक्रमण काल के बाद वर्ग भेद मिट जाएँगे और राज्य "मुरझा कर समाप्त" हो जाएगा, जिससे वर्गविहीन, राज्यविहीन साम्यवादी समाज बनेगा। गांधी ने राज्य को "संगठित और केंद्रित रूप में हिंसा" कहा और प्रबुद्ध अराजकता की आशा की, यानी आत्मनिर्भर, स्वशासी ग्राम गणराज्यों वाला रामराज्य, जिसमें लोग स्वयं पर शासन करें। साधनों पर दोनों में तीखा मतभेद था: मार्क्स हिंसक क्रांति स्वीकार करते थे, जबकि गांधी अहिंसा और हृदय परिवर्तन पर अड़े रहे।

B गलत है: वर्ग संघर्ष मार्क्सवाद का केंद्र है, पर गांधी ने इसे नकारकर वर्गों के बीच सामंजस्य की बात की।

C गलत है: मार्क्स निजी संपत्ति का उन्मूलन चाहते थे, जबकि गांधी ने न्यासिता (ट्रस्टीशिप) का विचार दिया।

D गलत है: आर्थिक नियतिवाद मार्क्सवादी विचार है; गांधी नैतिक और आध्यात्मिक शक्तियों को प्रधान मानते थे।

परीक्षा टिप: गांधी और मार्क्स लक्ष्य (राज्यविहीन समाज) पर सहमत, साधनों पर असहमत (अहिंसा और न्यासिता बनाम वर्ग संघर्ष और क्रांति)।

Q7.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2020, GS Paper Iआसान

भारत के संविधान का कौन-सा भाग कल्याणकारी राज्य के आदर्श की घोषणा करता है?

  1. A.राज्य के नीति निदेशक तत्त्व
  2. B.मौलिक अधिकार
  3. C.प्रस्तावना
  4. D.सातवीं अनुसूची
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. राज्य के नीति निदेशक तत्त्व

व्याख्या

सही उत्तर है A, राज्य के नीति निदेशक तत्त्व। भाग IV के नीति निदेशक तत्त्व वे सामाजिक और आर्थिक लक्ष्य तय करते हैं जो भारत को कल्याणकारी राज्य बनाते हैं।

अनुच्छेद 36 से 51 राज्य को निर्देश देते हैं कि वह सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय पर आधारित व्यवस्था बनाए (अनुच्छेद 38), आजीविका के पर्याप्त साधन, संसाधनों का न्यायपूर्ण बँटवारा और समान कार्य के लिए समान वेतन सुनिश्चित करे (अनुच्छेद 39), काम, शिक्षा और सार्वजनिक सहायता का अधिकार दे (अनुच्छेद 41) तथा काम की मानवोचित दशाएँ और प्रसूति सहायता दे (अनुच्छेद 42)। ये न्यायालय द्वारा लागू नहीं कराए जा सकते (अनुच्छेद 37), पर देश के शासन में मूलभूत हैं। डॉ. बी. आर. आंबेडकर ने इन्हें "अनोखी विशेषता" कहा था; ये आयरलैंड के संविधान से प्रेरित हैं।

B गलत है: भाग III के मौलिक अधिकार राज्य पर सीमा लगाकर राजनीतिक लोकतंत्र स्थापित करते हैं।

C गलत है: प्रस्तावना न्याय, स्वतंत्रता और समानता के लक्ष्य सामान्य रूप में बताती है, कल्याणकारी राज्य का विस्तृत आदर्श निदेशक तत्त्वों में है।

D गलत है: सातवीं अनुसूची केवल संघ और राज्यों के बीच विषयों का बँटवारा करती है।

परीक्षा टिप: मौलिक अधिकार = राजनीतिक लोकतंत्र; नीति निदेशक तत्त्व (भाग IV, अनुच्छेद 36–51, आयरलैंड से) = सामाजिक-आर्थिक लोकतंत्र, कल्याणकारी राज्य।

Q8.पर्यावरण और पारिस्थितिकीपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2020, GS Paper Iमध्यम

निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए :

अंतरराष्ट्रीय समझौता / व्यवस्था : विषय

1. अल्मा-अता घोषणा : लोगों की स्वास्थ्य देखभाल

2. हेग अभिसमय : जैविक और रासायनिक हथियार

3. तलानोआ संवाद : वैश्विक जलवायु परिवर्तन

4. अंडर2 गठबंधन : बाल अधिकार

उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?

  1. A.केवल 1 और 2
  2. B.केवल 4
  3. C.केवल 1 और 3
  4. D.केवल 2, 3 और 4
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. केवल 1 और 3

व्याख्या

सही उत्तर है C, केवल 1 और 3। अल्मा-अता घोषणा प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल से और तलानोआ संवाद जलवायु परिवर्तन से जुड़ा है; बाकी दोनों युग्म गलत हैं।

1978 की अल्मा-अता घोषणा, जो वर्तमान कज़ाखस्तान के अल्माटी में WHO और UNICEF के सम्मेलन में अपनाई गई, ने प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के जरिए "सबके लिए स्वास्थ्य" का लक्ष्य रखा। तलानोआ संवाद 2017 में फिजी की अध्यक्षता वाले COP23 में शुरू हुआ और 2018 तक चला, ताकि पेरिस समझौते के तहत प्रयासों की समीक्षा हो सके; "तलानोआ" प्रशांत क्षेत्र का शब्द है, जिसका अर्थ है खुली और समावेशी बातचीत।

A गलत है: युग्म 2 गलत है, क्योंकि जैविक हथियार 1972 के जैविक हथियार अभिसमय और रासायनिक हथियार 1993 के रासायनिक हथियार अभिसमय के अंतर्गत आते हैं, जबकि हेग अभिसमय मुख्यतः युद्ध के नियमों और निजी अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़े हैं।

B गलत है: अंडर2 गठबंधन उप-राष्ट्रीय सरकारों का समूह है, जो तापवृद्धि को 2 डिग्री से काफी नीचे रखने के लिए बना है, बाल अधिकारों के लिए नहीं।

D गलत है: युग्म 2 और 4 गलत हैं और सही युग्म 1 छूट गया है।

परीक्षा टिप: अल्मा-अता 1978 = सबके लिए स्वास्थ्य; तलानोआ = COP23 फिजी; अंडर2 = राज्य और क्षेत्र, जलवायु के लिए।

Q9.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · 2020कठिन

भारतीय इतिहास के संदर्भ में, 1884 का रखमाबाई मामला किन विषयों से संबंधित था?
1. महिलाओं का शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार
2. सहमति की आयु
3. दांपत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना
नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनें:

  1. A.केवल 1 और 2
  2. B.केवल 2 और 3
  3. C.केवल 1 और 3
  4. D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. केवल 2 और 3

व्याख्या

सही उत्तर B, केवल 2 और 3 है। रखमाबाई का विवाह बाल्यावस्था में हुआ था और वयस्क होने पर उन्होंने पति के घर जाने से इनकार कर दिया; पति ने दांपत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना के लिए न्यायालय की शरण ली, इसलिए कथन 3 मामले का भाग है। निर्णय और उसके बाद उठे विवाद का केंद्र यह प्रश्न था कि बाल्यावस्था में विवाहित कन्या को सहवास के लिए बाध्य किया जा सकता है या नहीं, और इसी अभियान से 1891 का सहमति आयु अधिनियम आया जिसने आयु दस से बारह वर्ष की, अतः कथन 2 भी सही है। कथन 1 इसका भाग नहीं है; रखमाबाई ने बाद में इंग्लैंड में चिकित्सा की शिक्षा लेकर भारत की आरंभिक महिला चिकित्सकों में स्थान बनाया, परंतु मुकदमा शिक्षा के अधिकार पर नहीं था, इसीलिए कथन 1 वाले विकल्प A, C और D गलत हैं।

Q10.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2020, GS Paper Iमध्यम

बजट के साथ, वित्त मंत्री संसद के समक्ष अन्य दस्तावेज़ भी रखते हैं, जिनमें 'वृहद् आर्थिक रूपरेखा विवरण' शामिल है। यह दस्तावेज़ इसलिए प्रस्तुत किया जाता है क्योंकि यह अनिवार्य किया गया है

  1. A.दीर्घकालीन संसदीय परंपरा द्वारा
  2. B.भारत के संविधान के अनुच्छेद 112 और अनुच्छेद 110(1) द्वारा
  3. C.भारत के संविधान के अनुच्छेद 113 द्वारा
  4. D.राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003 के प्रावधानों द्वारा
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003 के प्रावधानों द्वारा

व्याख्या

सही उत्तर है D, राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003 के प्रावधानों द्वारा। FRBM अधिनियम सरकार से अपेक्षा करता है कि यह विवरण बजट के साथ संसद में रखा जाए।

FRBM अधिनियम, 2003 की धारा 3 उन राजकोषीय नीति विवरणों की सूची देती है जो वार्षिक वित्तीय विवरण के साथ रखे जाने चाहिए: वृहद् आर्थिक रूपरेखा विवरण और मध्यम अवधि राजकोषीय नीति सह राजकोषीय नीति रणनीति विवरण। वृहद् आर्थिक रूपरेखा विवरण में अर्थव्यवस्था की विकास संभावनाओं का आकलन होता है, जैसे GDP वृद्धि, राजकोषीय संतुलन और बाहरी क्षेत्र का संतुलन। इस अधिनियम का उद्देश्य सरकारी उधारी और घाटे में अनुशासन लाना है।

A गलत है, क्योंकि यह दस्तावेज़ कानून पर आधारित है, परंपरा पर नहीं।

B गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 112 वार्षिक वित्तीय विवरण से और अनुच्छेद 110 धन विधेयक की परिभाषा से संबंधित है।

C गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 113 प्राक्कलनों और अनुदान माँगों की प्रक्रिया बताता है।

परीक्षा टिप: अनुच्छेद 112 = बजट; FRBM अधिनियम, 2003 = उसके साथ रखे जाने वाले राजकोषीय नीति विवरण।

Q11.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC सिविल सेवा · 2020कठिन

निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. भारत का संविधान अपनी मूल संरचना को संघवाद, पंथनिरपेक्षता, मूल अधिकार और लोकतंत्र के रूप में परिभाषित करता है। 2. भारत के संविधान में न्यायिक पुनरावलोकन का उपबंध नागरिकों की स्वतंत्रता की रक्षा और उन आदर्शों को बनाए रखने के लिए है जिन पर संविधान आधारित है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा या कौन से सही हैं?

  1. A.केवल 1
  2. B.केवल 2
  3. C.1 और 2 दोनों
  4. D.न 1 न 2
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. न 1 न 2

व्याख्या

सही उत्तर है D, न 1 न 2। कथन 1 गलत है क्योंकि संविधान में मूल संरचना पद कहीं प्रयुक्त ही नहीं हुआ और उसकी कोई परिभाषा नहीं दी गई है। यह सिद्धांत 1973 के केशवानंद भारती वाद में सर्वोच्च न्यायालय की देन है और न्यायालयों ने हर वाद में उसमें विशेषताएँ जोड़ी हैं, इसलिए कोई बंद सूची नहीं है। कथन 2 इस रूप में गलत है क्योंकि संविधान में ऐसा कोई उपबंध नहीं है जो न्यायिक पुनरावलोकन को इस प्रयोजन के साथ घोषित करता हो; यह शक्ति अनुच्छेद 13, 32, 131 से 136, 226 और 246 जैसे उपबंधों से निकलती है, और स्वतंत्रता की रक्षा तथा आदर्शों को बनाए रखने की भाषा निर्णयों और टीकाओं की है, संविधान के पाठ की नहीं।

इसलिए विकल्प A और विकल्प B गलत हैं, क्योंकि दोनों में से प्रत्येक एक त्रुटिपूर्ण कथन को स्वीकार करता है, और विकल्प C गलत है क्योंकि वह दोनों को स्वीकार करता है। कथन आधारित प्रश्नों में परिभाषित करता है और उपबंध जैसे शब्दों पर कठोर रहें।

Q12.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · 2020मध्यम

बीसवीं शताब्दी के आरंभ तक भारत में नील की खेती का पतन किस कारण हुआ?

  1. A.बागान मालिकों के दमनकारी आचरण के विरुद्ध किसानों का प्रतिरोध
  2. B.नए आविष्कारों के कारण विश्व बाज़ार में इसकी अलाभकारी स्थिति
  3. C.नील की खेती के विरुद्ध राष्ट्रीय नेताओं का विरोध
  4. D.बागान मालिकों पर सरकार का नियंत्रण
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. नए आविष्कारों के कारण विश्व बाज़ार में इसकी अलाभकारी स्थिति

व्याख्या

सही उत्तर है B, नए आविष्कारों के कारण विश्व बाज़ार में इसकी अलाभकारी स्थिति। जब रसायनशास्त्रियों ने कारख़ाने में ही नील बनाना सीख लिया, तब नील का बाज़ार हाथ से निकल गया, भारतीय फ़सल घाटे की हो गई और खेती सिमट गई। एडोल्फ़ फ़ॉन बेयर ने अठारह सौ अस्सी के दशक में नील की संरचना समझ ली और जर्मन कंपनी बीएएसएफ़ ने 1897 में संश्लेषित नील बेचना शुरू किया; कुछ ही वर्षों में उसने विश्व व्यापार का बड़ा हिस्सा ले लिया, क्योंकि कारख़ाने का रंग पौधे से निकाले रंग की तुलना में सस्ता और अधिक एकसार गुणवत्ता वाला था। बंगाल और बिहार, जो नील के निर्यात पर टिके थे, वहाँ बीसवीं सदी के पहले दशक में रकबा धड़ाम से गिर गया। A गलत है क्योंकि 1859 का बंगाल का नील विद्रोह और 1917 का चंपारण सत्याग्रह कुछ ज़िलों में बागान मालिकों पर अंकुश लगा सके, पर उद्योग को समाप्त नहीं किया। C गलत है क्योंकि राष्ट्रीय नेताओं ने किसानों की शिकायतें उठाईं, फ़सल के विरुद्ध कोई अभियान नहीं चलाया। D गलत है क्योंकि सरकार बागान मालिकों पर अंकुश लगाने की जगह उनका संरक्षण करती रही। परीक्षा टिप: जर्मनी का संश्लेषित नील, 1897 - इसी ने प्राकृतिक रंग का व्यापार समाप्त किया।

Q13.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: UPSC सिविल सेवा · 2020कठिन

व्यापार से संबंधित निवेश उपाय (TRIMS) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं? 1. विदेशी निवेशकों द्वारा आयात पर मात्रात्मक प्रतिबंध वर्जित हैं। 2. ये वस्तुओं और सेवाओं, दोनों के व्यापार से जुड़े निवेश उपायों पर लागू होते हैं। 3. इनका विदेशी निवेश के नियमन से कोई संबंध नहीं है। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करके सही उत्तर चुनिए:

  1. A.केवल 1 और 2
  2. B.केवल 2
  3. C.केवल 1 और 3
  4. D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. केवल 1 और 3

व्याख्या

सही उत्तर है C, केवल 1 और 3। कथन 1 और 3 सही हैं तथा कथन 2 सही नहीं है, इसलिए यही युग्म ठीक बैठता है। व्यापार से संबंधित निवेश उपायों पर करार विश्व व्यापार संगठन के उन समझौतों में से एक है जो 1995 में उरुग्वे दौर से निकले। यह किसी सदस्य देश को विदेशी निवेशक पर ऐसी शर्तें लगाने से रोकता है जो वस्तुओं के व्यापार को विकृत करती हैं, और इसमें नामित दो प्रमुख निषेध हैं स्थानीय सामग्री की अनिवार्यता तथा व्यापार संतुलन की अनिवार्यता; इसी कारण निवेशक के आयात पर मात्रात्मक सीमा लगाना वर्जित है। यह करार निवेश उपायों को केवल उतना ही छूता है जितना वे वस्तुओं के व्यापार को प्रभावित करते हैं, इसलिए कथन 2 गलत है; सेवाओं का मामला अलग से गैट्स के अंतर्गत आता है। कथन 3 सही है क्योंकि करार यह तय नहीं करता कि कोई देश किसे निवेशक के रूप में आने दे या किन शर्तों पर, अतः वह विदेशी निवेश का नियमन नहीं करता। A और D गलत हैं क्योंकि दोनों में कथन 2 शामिल है। B गलत है क्योंकि वह केवल कथन 2 पर टिका है। परीक्षा टिप: ट्रिम्स वस्तुओं का, गैट्स सेवाओं का और ट्रिप्स बौद्धिक संपदा का विषय है।

Q14.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC सिविल सेवा · 2020आसान

संसदीय शासन प्रणाली वह है जिसमें

  1. A.संसद में सभी राजनीतिक दलों को सरकार में प्रतिनिधित्व दिया जाता है
  2. B.सरकार संसद के प्रति उत्तरदायी होती है और संसद उसे हटा सकती है
  3. C.सरकार जनता द्वारा चुनी जाती है और जनता उसे हटा सकती है
  4. D.सरकार संसद द्वारा चुनी जाती है, पर एक निश्चित कार्यकाल पूरा होने से पहले उसे हटाया नहीं जा सकता
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. सरकार संसद के प्रति उत्तरदायी होती है और संसद उसे हटा सकती है

व्याख्या

सही उत्तर है B, सरकार संसद के प्रति उत्तरदायी होती है और संसद उसे हटा सकती है। संसदीय प्रणाली की जड़ इसी बात में है कि कार्यपालिका विधायिका को जवाब देती है, इसलिए मंत्रिपरिषद तभी तक पद पर रहती है जब तक सदन का विश्वास उसके साथ है। भारत ने यह रूप ब्रिटेन से लिया है: मंत्री विधायिका में से ही लिए जाते हैं, अनुच्छेद 75 के अनुसार वे लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होते हैं, और उनके विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाने पर पूरी मंत्रिपरिषद गिर जाती है। राष्ट्रपति नाममात्र का प्रमुख होता है और प्रधानमंत्री कार्यपालिका का वास्तविक प्रमुख। A गलत है क्योंकि सभी दलों की सरकार एक राष्ट्रीय या गठबंधन व्यवस्था है, प्रणाली की विशेषता नहीं। C गलत है क्योंकि जनता विधायिका चुनती है और सरकार बनाने-गिराने का काम विधायिका करती है; मतदाताओं द्वारा सीधे हटाने की व्यवस्था भारत में किसी पद के लिए नहीं है। D गलत है क्योंकि सदन जिसे बीच में न हटा सके, ऐसा निश्चित कार्यकाल अध्यक्षात्मक प्रणाली की पहचान है। परीक्षा टिप: संसदीय का अर्थ उत्तरदायी सरकार, अध्यक्षात्मक का अर्थ निश्चित कार्यकाल।

Q15.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · 2020कठिन

भारत के इतिहास की निम्नलिखित घटनाओं पर विचार कीजिए: 1. राजा भोज के अधीन प्रतिहारों का उत्कर्ष 2. महेंद्रवर्मन प्रथम के अधीन पल्लव शक्ति की स्थापना 3. परांतक प्रथम द्वारा चोल शक्ति की स्थापना 4. गोपाल द्वारा पाल वंश की स्थापना। आरंभ से प्रारंभ करते हुए उपरोक्त घटनाओं का सही कालानुक्रम क्या है?

  1. A.2 - 1 - 4 - 3
  2. B.3 - 1 - 4 - 2
  3. C.2 - 4 - 1 - 3
  4. D.3 - 4 - 1 - 2
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 2 - 4 - 1 - 3

व्याख्या

सही उत्तर है C, 2 - 4 - 1 - 3। सबसे पहले महेंद्रवर्मन प्रथम आते हैं, उसके बाद गोपाल, फिर भोज और अंत में परांतक प्रथम, और यही क्रम इस विकल्प में दिया गया है। महेंद्रवर्मन प्रथम ने सातवीं शताब्दी के आरंभ में कांची के पल्लवों पर शासन किया और मंडगपट्टु के शैलकृत मंदिरों तथा अपने नाटक मत्तविलास प्रहसन के लिए याद किए जाते हैं। गोपाल आठवीं शताब्दी के मध्य के आसपास बंगाल की गद्दी पर बैठे और उन्होंने पाल वंश की नींव रखी। मिहिर भोज ने नौवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में कन्नौज के गुर्जर-प्रतिहारों का नेतृत्व किया, जो त्रिपक्षीय संघर्ष का चरम काल था। चोल शासक परांतक प्रथम दसवीं शताब्दी के आरंभ में शासन कर रहे थे और उन्होंने वेल्लूर में पांड्यों को हराया। A गलत है क्योंकि इसमें भोज को गोपाल से पहले रखा गया है। B और D गलत हैं क्योंकि दोनों की शुरुआत परांतक प्रथम से होती है, जो चारों में सबसे बाद के शासक हैं। परीक्षा टिप: क्रम है पल्लव, फिर पाल, फिर प्रतिहार, फिर चोल।

Q16.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: UPSC सिविल सेवा · 2020मध्यम

निम्नलिखित में से किस एक समूह के चारों देश G20 के सदस्य हैं?

  1. A.अर्जेंटीना, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की
  2. B.ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, मलेशिया और न्यूज़ीलैंड
  3. C.ब्राज़ील, ईरान, सऊदी अरब और वियतनाम
  4. D.इंडोनेशिया, जापान, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. अर्जेंटीना, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की

व्याख्या

सही उत्तर है A, अर्जेंटीना, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की। ये चारों देश G20 में शामिल हैं, इसलिए यही एक समूह है जिसमें कोई भी नाम इस मंच से बाहर का नहीं है। G20 की शुरुआत 1999 में वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक के रूप में हुई थी, और वैश्विक वित्तीय संकट के बाद 2008 में इसे शासनाध्यक्षों के शिखर सम्मेलन का दर्जा दिया गया। इसमें उन्नीस देश और यूरोपीय संघ शामिल हैं, तथा नई दिल्ली शिखर सम्मेलन में अफ्रीकी संघ को भी सदस्य बनाया गया। इसके एशियाई सदस्यों में भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और तुर्की आते हैं। B गलत है क्योंकि मलेशिया और न्यूज़ीलैंड सदस्य नहीं हैं, जबकि ऑस्ट्रेलिया और कनाडा सदस्य हैं। C गलत है क्योंकि ईरान और वियतनाम इस समूह से बाहर हैं, पर ब्राज़ील और सऊदी अरब इसमें हैं। D गलत है क्योंकि सिंगापुर सदस्य नहीं है, हालाँकि उसे अक्सर अतिथि के रूप में बुलाया जाता है। परीक्षा टिप: दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में केवल इंडोनेशिया G20 का सदस्य है।

Q17.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC सिविल सेवा · Prelims GS Paper I, 4 Oct 2020कठिन

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. भारत का राष्ट्रपति संसद का सत्र ऐसे स्थान पर आहूत कर सकता है, जिसे वह उचित समझे।

2. भारत का संविधान एक वर्ष में संसद के तीन सत्रों का प्रावधान करता है, किंतु तीनों सत्रों का आयोजन अनिवार्य नहीं है।

3. एक वर्ष में संसद की बैठकों के लिए दिनों की कोई न्यूनतम संख्या निर्धारित नहीं है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. A.केवल 1
  2. B.केवल 2
  3. C.केवल 1 और 3
  4. D.केवल 2 और 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. केवल 1 और 3

व्याख्या

सही उत्तर है C, केवल 1 और 3। अनुच्छेद 85 राष्ट्रपति को हर सदन को 'ऐसे समय और स्थान पर, जो वह ठीक समझे' आहूत करने की शक्ति देता है, और बैठकों के न्यूनतम दिन कहीं तय नहीं हैं। अनुच्छेद 85(1) का एकमात्र नियम यह है कि एक सत्र की अंतिम बैठक और अगले सत्र की पहली बैठक के बीच छह महीने से अधिक का अंतर नहीं होगा, इसलिए संसद को साल में कम से कम दो बार मिलना ही पड़ता है। राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह पर सत्र बुलाते, सत्रावसान करते और लोकसभा भंग करते हैं। कथन 2 गलत है, क्योंकि संविधान में तीन सत्रों का कोई उल्लेख नहीं है; बजट, मानसून और शीतकालीन सत्र केवल परंपरा हैं। कथन 1 सही है, क्योंकि अनुच्छेद 85 समय के साथ स्थान चुनने की छूट भी देता है। कथन 3 सही है, क्योंकि कोई न्यूनतम सीमा नहीं है, इसीलिए NCRWC (2002) ने लोकसभा के लिए साल में कम से कम 120 बैठक-दिन सुझाए थे। इसलिए A, B और D गलत हैं। परीक्षा टिप: अनुच्छेद 85, अधिकतम छह महीने का अंतर, तीन सत्र केवल परंपरा।

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