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UPSC सिविल सेवा 2026 पिछले वर्ष के GK प्रश्न

UPSC सिविल सेवा 2026 में पूछे गए GK प्रश्न, उत्तर और व्याख्या सहित।

पिछले वर्ष के प्रश्न

Q1.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2026, GS Paper Iकठिन

1856 में अवध के विलय के तुरंत बाद वहाँ की ब्रिटिश नीति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

1. तालुकदारों को उनकी जागीरों से बेदखल कर दिया गया, किंतु उन्हें अपने हथियार और किले रखने की अनुमति दी गई।

2. 1856 में यह मानकर संक्षिप्त राजस्व बंदोबस्त (समरी सेटलमेंट) किया गया कि तालुकदार बाहरी लोग थे।

3. अंग्रेज़ तालुकदारों को हटाकर सीधे किसानों से राजस्व लेने में विश्वास रखते थे।

ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?

  1. A.केवल 2 और 3
  2. B.केवल 1 और 3
  3. C.1, 2 और 3
  4. D.केवल 2
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. केवल 2 और 3

व्याख्या

सही उत्तर है A, केवल 2 और 3। कथन 2 और 3 सही हैं; तालुकदारों को निःशस्त्र किया गया और उनके किले गिरा दिए गए, उनके पास नहीं छोड़े गए।

डलहौज़ी ने फरवरी 1856 में कुशासन के आधार पर अवध का विलय किया। 1856 के संक्षिप्त बंदोबस्त में तालुकदारों को घुसपैठिए या बाहरी माना गया, जिनका भूमि में कोई स्थायी हित नहीं था, और राजस्व सीधे वास्तविक किसानों और ग्राम-स्वामियों से तय करने का प्रयास हुआ। बहुत से तालुकदारों के गाँवों का बड़ा भाग छिन गया। उन्हें निःशस्त्र भी किया गया: उनके सशस्त्र अनुचर भंग कर दिए गए और किले ढहा दिए गए। भूमि, शक्ति और प्रतिष्ठा की इसी हानि के कारण अवध के तालुकदार बड़ी संख्या में 1857 के विद्रोह में शामिल हुए, और बाद में अंग्रेज़ों ने उनकी जागीरें लौटा दीं।

B गलत है: कथन 1 गलत है, क्योंकि तालुकदारों के हथियार और किले दोनों छिन गए।

C गलत है: कथन 1 गलत है।

D गलत है: कथन 3 भी सही है।

परीक्षा टिप: अवध का विलय 1856 (कुशासन, डलहौज़ी); संक्षिप्त बंदोबस्त से तालुकदार प्रभावित हुए, जिन्होंने अवध में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किया।

Q2.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2026, GS Paper Iमध्यम

प्रारंभिक ऐतिहासिक तमिलकम के राजा और उसके राजवंश के निम्नलिखित युग्मों में से कौन-सा/कौन-से सही सुमेलित नहीं है/हैं?

1. सेनगुट्टुवन : चेर

2. उदियनजेरल : चोल

3. नेडुंजेलियन : पांड्य

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :

  1. A.1 और 2
  2. B.केवल 2
  3. C.1 और 3
  4. D.केवल 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. केवल 2

व्याख्या

सही उत्तर है B, केवल 2। उदियनजेरल चेर राजा था, चोल नहीं, इसलिए केवल युग्म 2 गलत है।

संगम कविताओं में तमिलकम के तीन मुकुटधारी राजवंशों का वर्णन है: पश्चिमी (केरल) तट पर चेर, कावेरी डेल्टा में चोल और मदुरै के आसपास पांड्य। उदियनजेरल को संगम संकलनों में प्रशंसित सबसे आरंभिक चेर शासकों में गिना जाता है। सबसे प्रसिद्ध चेर राजा सेनगुट्टुवन का संबंध शिलप्पदिकारम में वर्णित पत्तिनी (कण्णगी) पूजा से है। नेडुंजेलियन प्रसिद्ध पांड्य राजा था, जिसकी प्रशंसा तलैयालंगानम के युद्ध में चेर, चोल और सरदारों के संघ पर विजय के लिए होती है।

A गलत है: युग्म 1 (सेनगुट्टुवन : चेर) सही सुमेलित है, इसलिए वह उत्तर में नहीं आ सकता।

C गलत है: युग्म 1 और 3 दोनों सही सुमेलित हैं।

D गलत है: युग्म 3 (नेडुंजेलियन : पांड्य) सही सुमेलित है।

परीक्षा टिप: चेर = उदियनजेरल, सेनगुट्टुवन; चोल = करिकाल; पांड्य = नेडुंजेलियन (तलैयालंगानम)।

Q3.कला और संस्कृतिपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2026, GS Paper Iमध्यम

आरंभिक बौद्ध प्रतिमा-विज्ञान में खाली आसन किसका प्रतीक है?

  1. A.बुद्ध का ध्यान
  2. B.बुद्ध का प्रथम उपदेश
  3. C.बुद्ध का महापरिनिब्बान
  4. D.बुद्ध का महाभिनिष्क्रमण
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. बुद्ध का ध्यान

व्याख्या

सही उत्तर है A, बुद्ध का ध्यान। आरंभिक बौद्ध कला में बुद्ध को मानव रूप में नहीं दिखाया जाता था, और खाली आसन ध्यान में बैठे बुद्ध का प्रतीक था।

लगभग दूसरी और पहली सदी ईसा पूर्व के भरहुत, साँची और अन्य आरंभिक स्थलों पर शिल्पियों ने बुद्ध की आकृति के स्थान पर प्रतीकों का प्रयोग किया। प्रायः बोधि वृक्ष के नीचे बना खाली आसन उनके ध्यान और ज्ञान-प्राप्ति को दर्शाता था। चक्र (धर्मचक्र) सारनाथ के प्रथम उपदेश का, स्तूप महापरिनिब्बान का और बिना सवार का घोड़ा गृह-त्याग का प्रतीक था। बुद्ध की मानव प्रतिमाएँ बाद में गांधार और मथुरा शैलियों में आम हुईं।

B गलत है: प्रथम उपदेश को धर्मचक्र से, प्रायः हिरणों के साथ, दिखाया जाता है।

C गलत है: महापरिनिब्बान, यानी बुद्ध का अंतिम देहावसान, स्तूप से दिखाया जाता है।

D गलत है: महाभिनिष्क्रमण, यानी गृह-त्याग, बिना सवार के घोड़े से दिखाया जाता है।

परीक्षा टिप: खाली आसन = ध्यान; चक्र = प्रथम उपदेश; स्तूप = महापरिनिब्बान; घोड़ा = महाभिनिष्क्रमण; कमल या हाथी = जन्म।

Q4.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2026, GS Paper Iकठिन

भारत में स्थानीय मान पद्धति के उपयोग से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

1. भारत में स्थानीय मान पद्धति का सबसे प्राचीन अभिलेखीय उपयोग गुजरात के मनकनी ताम्रपत्रों (595 - 596 ई.) में मिलता है।

2. नौवीं शताब्दी में पूरे भारत के अभिलेखों में स्थानीय मान का उपयोग सामान्य हो गया।

3. दक्षिण-पूर्व एशिया के संस्कृत अभिलेखों में स्थानीय मान सातवीं शताब्दी में ही मिलने लगते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

  1. A.केवल 1 और 2
  2. B.केवल 1 और 3
  3. C.केवल 2 और 3
  4. D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 1, 2 और 3

व्याख्या

सही उत्तर है D, 1, 2 और 3। तीनों कथन अभिलेखों से मिली उस जानकारी से मेल खाते हैं कि दाशमिक स्थानीय मान पद्धति कैसे फैली।

स्थानीय मान पद्धति में किसी अंक का मान उसकी स्थिति पर निर्भर करता है, इसलिए नौ अंकों और शून्य से कोई भी संख्या लिखी जा सकती है। आर्यभट जैसे गणितज्ञ लगभग 499 ई. में इस विचार का उपयोग कर चुके थे, पर किसी भारतीय अभिलेख में इसका सबसे पुराना तिथियुक्त उपयोग गुजरात के मनकनी (संखेड़ा) ताम्रपत्रों में है, जिनकी तिथि 595-596 ई. है। दहाई और सैकड़े के अलग चिह्नों वाली पुरानी पद्धति धीरे-धीरे हटी, और नौवीं शताब्दी तक पूरे भारत के अभिलेखों में स्थानीय मान वाले अंक सामान्य हो गए; 876 ई. के ग्वालियर अभिलेख में लिखित शून्य मिलता है। कंबोडिया और सुमात्रा के संस्कृत अभिलेखों में सातवीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक ये अंक दिखते हैं।

A गलत है: इसमें कथन 3 छूट गया है, जो सही है।

B गलत है: इसमें कथन 2 छूट गया है, जो सही है।

C गलत है: इसमें कथन 1 छूट गया है, जो सही है।

परीक्षा टिप: अभिलेखों में स्थानीय मान = मनकनी ताम्रपत्र 595-596 (सबसे पहले), दक्षिण-पूर्व एशिया सातवीं सदी, भारत में नौवीं सदी तक सामान्य, ग्वालियर 876 में शून्य।

Q5.कला और संस्कृतिपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2026, GS Paper Iकठिन

बाघ गुफाओं में हल्लीसलास्य चित्र किसे दर्शाता है?

  1. A.एक उल्लासपूर्ण लोक नृत्य
  2. B.ध्यान मुद्रा में बुद्ध
  3. C.कैलाश पर शिव और पार्वती का चित्रण
  4. D.समुद्रमंथन
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. एक उल्लासपूर्ण लोक नृत्य

व्याख्या

सही उत्तर है A, एक उल्लासपूर्ण लोक नृत्य। हल्लीसक एक गोलाकार सामूहिक नृत्य था, और बाघ का यह चित्र ढोल और मंजीरे की धुन पर बीच की आकृति के चारों ओर घेरे में नाचती स्त्रियों को दिखाता है।

बाघ गुफाएँ मध्य प्रदेश के धार जिले में बाघनी नदी के तट पर स्थित नौ बौद्ध शैलकृत गुफाएँ हैं, जो लगभग पाँचवीं-छठी शताब्दी ईस्वी की हैं। अजंता से मिलती-जुलती शैली वाले इनके भित्तिचित्र अधिकतर लौकिक विषयों पर हैं। सबसे प्रसिद्ध चित्र गुफा 4 (रंग महल) में है, जिसमें हल्लीसक नृत्य दिखाया गया है: स्त्री वादकों की टोली एक नर्तक के चारों ओर घेरा बनाती है, यह पूजा का नहीं, उत्सव का दृश्य है। संरक्षण के लिए मूल चित्रों का बड़ा भाग बाद में ग्वालियर के गूजरी महल संग्रहालय में ले जाया गया।

B गलत है: हल्लीसलास्य चित्र में नर्तक और वादक हैं, ध्यानस्थ बुद्ध नहीं।

C गलत है: कैलाश पर शिव-पार्वती एलोरा की प्रसिद्ध मूर्तिकला का विषय है, इस चित्र का नहीं।

D गलत है: समुद्रमंथन पौराणिक विषय है, जो इस बौद्ध गुफा चित्र में नहीं है।

परीक्षा टिप: बाघ गुफाएँ, धार (मध्य प्रदेश) = गुप्तकालीन लौकिक भित्तिचित्र, गुफा 4 में हल्लीसक नृत्य; जातक कथाओं के लिए अजंता।

Q6.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2026, GS Paper Iमध्यम

जैन धर्म में मान्य जीवन के अस्तित्व के चार मुख्य रूपों में से निम्नलिखित में से कौन-सा शामिल नहीं है?

  1. A.देव (देवता)
  2. B.यक्ष (उपदेवता)
  3. C.मनुष्य (मानव)
  4. D.तिर्यंच (पशु और वनस्पति)
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. यक्ष (उपदेवता)

व्याख्या

सही उत्तर है B, यक्ष (उपदेवता)। जैन धर्म अस्तित्व की चार अवस्थाएँ मानता है, जिन्हें गति कहते हैं, और यक्ष उनमें से एक नहीं है।

जैन दर्शन के अनुसार कर्म से बँधा जीव बार-बार चार में से किसी एक गति में जन्म लेता है: देव (स्वर्ग के प्राणी), मनुष्य, तिर्यंच (पशु, पक्षी, कीट और वनस्पति) तथा नारकी (नरक के प्राणी)। मोक्ष केवल मनुष्य गति से ही संभव है, इसलिए मानव जन्म को बहुत मूल्यवान माना गया है। जैन कला में यक्ष और यक्षिणी तीर्थंकरों के सेवक देवता के रूप में दिखते हैं, पर उन्हें अलग गति नहीं माना जाता।

A गलत है: देव, यानी स्वर्ग के प्राणी, चार गतियों में से एक है।

C गलत है: मनुष्य गति इनमें शामिल है और इसी से मुक्ति संभव मानी गई है।

D गलत है: पशु और वनस्पति वाली तिर्यंच गति भी चार गतियों में आती है।

परीक्षा टिप: जैन धर्म की चार गतियाँ हैं देव, मनुष्य, तिर्यंच और नारकी; ऐसे प्रश्नों में छूटी हुई गति प्रायः नारकी होती है।

Q7.कला और संस्कृतिपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2026, GS Paper Iमध्यम

हिंदुस्तानी संगीत के राग बिलावल के समान कर्नाटक संगीत का कौन-सा राग है?

  1. A.नट भैरवी
  2. B.कामवर्धिनी
  3. C.हनुमतोडी
  4. D.धीर शंकराभरणम्
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. धीर शंकराभरणम्

व्याख्या

सही उत्तर है D, धीर शंकराभरणम्। दोनों रागों में सातों स्वर शुद्ध रूप में लगते हैं, यानी इनका स्वर-ढाँचा एक ही है।

हिंदुस्तानी संगीत में पंडित वी. एन. भातखंडे की दस थाट वाली पद्धति में बिलावल को मूल थाट माना जाता है, जिसमें हर स्वर शुद्ध होता है। कर्नाटक संगीत की 72 मेलकर्ता पद्धति में धीर शंकराभरणम् 29वाँ मेलकर्ता राग है और इसमें ठीक यही स्वर लगते हैं। इसी कारण दोनों परंपराओं में इन्हें एक-दूसरे का समकक्ष माना जाता है। पाश्चात्य संगीत का मेजर स्केल भी इसी ढाँचे पर है।

A गलत है: नट भैरवी (20वाँ मेलकर्ता) में कोमल ग, ध और नि लगते हैं, जो आसावरी थाट से मेल खाता है।

B गलत है: कामवर्धिनी (51वाँ मेलकर्ता) में कोमल रे, ध और तीव्र म लगते हैं, जो पूर्वी थाट के निकट है।

C गलत है: हनुमतोडी (8वाँ मेलकर्ता) में कोमल रे, ग, ध, नि लगते हैं, जो भैरवी थाट जैसा है।

परीक्षा टिप: बिलावल = शंकराभरणम् (सभी शुद्ध स्वर); कल्याण = मेचकल्याणी; भैरवी थाट = हनुमतोडी।

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