सरकारी उधारी योजना: दूसरी छमाही में ₹7,86,000 करोड़ जुटाएगी सरकार
भारत सरकार वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में 23 साप्ताहिक नीलामियों के जरिये बाजार से ₹7,86,000 करोड़ की उधारी जुटाएगी, यह घोषणा 25 सितंबर को हुई।

चर्चा में क्यों
25 सितंबर, 2026 को वित्त मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही के लिए सरकार की बाजार उधारी योजना घोषित की और रिजर्व बैंक से सलाह लेकर कुल उधारी ₹7,86,000 करोड़ तय की।
भारत सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक से सलाह-मशविरा करने के बाद चालू वित्त वर्ष की आखिरी छमाही के लिए बाजार से ली जाने वाली उधारी ₹7,86,000 करोड़ तय की है। यह घोषणा 25 सितंबर, 2026 को की गई और यह वित्त वर्ष 2026-27 के अक्टूबर से मार्च तक के हिस्से से जुड़ी है।
रकम कैसे जुटेगी
यह पूरी राशि दिनांकित प्रतिभूतियों की 23 साप्ताहिक नीलामियों के जरिये जुटाई जाएगी। इसी कुल रकम के भीतर सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड भी शामिल हैं, जिनके जरिये सरकार पर्यावरण से जुड़ी परियोजनाओं के लिए पैसा जुटाती है। प्रतिभूतियां आठ अलग-अलग अवधियों में बेची जाएंगी, जिनमें सबसे छोटी अवधि तीन साल की और सबसे लंबी पचास साल की है।
सबसे बड़ा हिस्सा दस साल वाली प्रतिभूतियों का है, जो कार्यक्रम का 26.3 प्रतिशत है। इसके बाद पंद्रह साल की अवधि वाला कागज 17.6 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि पांच साल की प्रतिभूतियों की हिस्सेदारी 12.1 प्रतिशत रहेगी। इतनी अलग-अलग अवधियों में बंटवारा करने से किसी एक साल में भुगतान का बोझ एक साथ नहीं पड़ता।
पूरे साल की तस्वीर
पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार को दिनांकित प्रतिभूतियों से ₹15,99,506 करोड़ जुटाने की उम्मीद है। यह रकम इसी वर्ष के लिए तय ₹17,20,000 करोड़ के बजट अनुमान से कम बैठती है।
ट्रेजरी बिल और डब्ल्यूएमए सीमा
कम अवधि के लिए भी पैसा जुटाया जाएगा। वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में सरकार ट्रेजरी बिल जारी करके 13 नीलामी सप्ताहों में हर हफ्ते ₹23,000 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है। इस साप्ताहिक रकम में से 91 दिन और 182 दिन वाले बिलों से ₹8,000 करोड़ प्रत्येक तथा 364 दिन वाले बिल से ₹7,000 करोड़ आने का अनुमान है।
जब सरकारी खातों में आमदनी और खर्च का मेल नहीं बैठता, उस स्थिति से निपटने के लिए रिजर्व बैंक ने छमाही की वेज एंड मीन्स एडवांस सीमा ₹50,000 करोड़ रखी है। सरकार के पास ग्रीनशू विकल्प भी बना रहेगा, जिसके तहत नीलामी अधिसूचना में शामिल हर प्रतिभूति पर ₹2,000 करोड़ तक की अतिरिक्त राशि अपने पास रखी जा सकती है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| छमाही उधारी | ₹7,86,000 करोड़ |
|---|---|
| अवधि | वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही (अक्टूबर से मार्च) |
| नीलामियां | दिनांकित प्रतिभूतियों की 23 साप्ताहिक नीलामियां |
| प्रतिभूतियों की अवधि | तीन, पांच, सात, दस, पंद्रह, तीस, चालीस और पचास साल |
| सबसे बड़ा हिस्सा | दस साल की प्रतिभूतियां, 26.3 प्रतिशत |
| पूरे साल की उधारी | ₹15,99,506 करोड़ |
| बजट अनुमान | ₹17,20,000 करोड़ |
| तीसरी तिमाही के ट्रेजरी बिल | 13 सप्ताह तक हर हफ्ते ₹23,000 करोड़ |
| वेज एंड मीन्स एडवांस सीमा | ₹50,000 करोड़ |
| ग्रीनशू विकल्प | हर प्रतिभूति पर ₹2,000 करोड़ तक अतिरिक्त |
| किसके साथ परामर्श | भारतीय रिजर्व बैंक |
परीक्षा की दृष्टि से
छमाही उधारी का आंकड़ा (₹7,86,000 करोड़), साप्ताहिक नीलामियों की संख्या (23), पूरे साल का अनुमान (₹15,99,506 करोड़) और बजट अनुमान (₹17,20,000 करोड़), तीसरी तिमाही में ट्रेजरी बिलों से साप्ताहिक रकम (₹23,000 करोड़, 13 सप्ताह) तथा वेज एंड मीन्स एडवांस सीमा (₹50,000 करोड़) याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में भारत सरकार बाजार से कितनी उधारी लेने जा रही है?
- A.₹6,86,000 करोड़
- B.₹7,86,000 करोड़
- C.₹8,86,000 करोड़
- D.₹9,86,000 करोड़
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. ₹7,86,000 करोड़
व्याख्या
सही उत्तर ₹7,86,000 करोड़ है। वित्त मंत्रालय ने भारतीय रिजर्व बैंक से परामर्श करने के बाद चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही के लिए बाजार से ली जाने वाली कुल उधारी यही तय की है, और यह पूरी रकम दिनांकित प्रतिभूतियों की 23 साप्ताहिक नीलामियों के जरिये जुटाई जाएगी। इसी कुल राशि के भीतर सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड भी शामिल हैं, जिनसे पर्यावरण से जुड़ी परियोजनाओं के लिए धन जुटाया जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि घोषित आंकड़े से यह रकम कम बैठती है और योजना के किसी हिस्से से मेल नहीं खाती। विकल्प C भी इसी कारण गलत है, बस दूसरी दिशा में; उधारी कैलेंडर में कहीं भी इतनी बड़ी छमाही राशि नहीं है। विकल्प D भी गलत है, क्योंकि छमाही की योजना इस स्तर तक नहीं पहुंचती। ध्यान रखें कि पूरे वित्त वर्ष के लिए दिनांकित प्रतिभूतियों से उधारी का आंकड़ा अलग और बहुत बड़ा है, यानी ₹15,99,506 करोड़, और उसे छमाही के आंकड़े के साथ नहीं मिलाना चाहिए।
दूसरी छमाही की बाजार उधारी कितनी साप्ताहिक नीलामियों के जरिये पूरी की जाएगी?
- A.13
- B.19
- C.23
- D.26
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 23
व्याख्या
सही उत्तर 23 है। दूसरी छमाही के लिए तय ₹7,86,000 करोड़ की उधारी दिनांकित प्रतिभूतियों की 23 साप्ताहिक नीलामियों के जरिये पूरी की जाएगी, और ये प्रतिभूतियां तीन साल से लेकर पचास साल तक की आठ अलग-अलग अवधियों में बेची जाएंगी। विकल्प A यहां गलत है, हालांकि यह संख्या इसी घोषणा में कहीं और आती है: 13 उन नीलामी सप्ताहों की गिनती है जो तीसरी तिमाही में ट्रेजरी बिलों के लिए तय किए गए हैं। ट्रेजरी बिल अलग साधन हैं और उनका कैलेंडर भी अलग है, इसलिए दोनों संख्याओं को आपस में नहीं मिलाना चाहिए। विकल्प B गलत है क्योंकि उधारी योजना के किसी भी चरण में नीलामियों की यह गिनती नहीं आती। विकल्प D भी गलत है, क्योंकि छमाही में दिनांकित प्रतिभूतियों की इतनी नीलामियां नहीं होंगी। परीक्षा में यही अंतर अक्सर पूछा जाता है।
रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही के लिए वेज एंड मीन्स एडवांस की सीमा कितनी तय की है?
- A.₹30,000 करोड़
- B.₹40,000 करोड़
- C.₹60,000 करोड़
- D.₹50,000 करोड़
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. ₹50,000 करोड़
व्याख्या
सही उत्तर ₹50,000 करोड़ है। वेज एंड मीन्स एडवांस वह सुविधा है जिसके जरिये भारतीय रिजर्व बैंक सरकार को उसकी आमदनी और भुगतान के बीच थोड़े समय के अंतर को पाटने में मदद करता है, और वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही के लिए इस सुविधा की सीमा ₹50,000 करोड़ रखी गई है। विकल्प A, B और C तीनों गलत हैं क्योंकि इनमें से कोई भी आंकड़ा घोषणा में तय की गई सीमा नहीं है; ये केवल असली आंकड़े के आस-पास रखे गए गोल-मटोल विकल्प हैं। अभ्यर्थियों को इस योजना के बाकी आंकड़े भी अलग-अलग याद रखने चाहिए: छमाही की कुल उधारी ₹7,86,000 करोड़ है, तीसरी तिमाही में ट्रेजरी बिलों से साप्ताहिक रकम ₹23,000 करोड़ है, और ग्रीनशू विकल्प के तहत हर प्रतिभूति पर ₹2,000 करोड़ तक अतिरिक्त राशि रखी जा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में सरकार कितनी उधारी लेगी?
₹7,86,000 करोड़ की, जो दिनांकित प्रतिभूतियों की 23 साप्ताहिक नीलामियों के जरिये जुटाई जाएगी। इसमें सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड भी शामिल रहेंगे।
इस छमाही के लिए वेज एंड मीन्स एडवांस की सीमा कितनी है?
₹50,000 करोड़। रिजर्व बैंक यह सीमा इसलिए तय करता है ताकि सरकार अपनी आमदनी और खर्च के बीच अस्थायी अंतर को पाट सके।
तीसरी तिमाही में ट्रेजरी बिलों से हर हफ्ते कितनी रकम जुटेगी?
हर हफ्ते ₹23,000 करोड़, कुल 13 नीलामी सप्ताहों में। इसमें 91 दिन और 182 दिन वाले बिलों से ₹8,000 करोड़ प्रत्येक तथा 364 दिन वाले बिल से ₹7,000 करोड़ शामिल हैं।
स्रोत
- वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही के लिए सरकार की उधार लेने की योजना (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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