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उपराष्ट्रपति ने चौथे इन-स्टेप को संबोधित किया, 22 देश शामिल

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने चौथे इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक एंगेजमेंट प्रोग्राम को संबोधित किया, जिसमें 22 देशों के 25 सहित कुल 38 प्रतिनिधि हैं।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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चर्चा में क्यों

25 सितंबर 2026 को उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति भवन में चौथे इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक एंगेजमेंट प्रोग्राम के प्रतिनिधियों को संबोधित किया और विकासशील देशों के बीच गहरे रणनीतिक सहयोग की अपील की।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने विकासशील देशों यानी ग्लोबल साउथ से कहा कि सुरक्षा और विकास की जो चुनौतियां आज सामने हैं, उन्हें कोई देश अकेले नहीं सुलझा सकता, इसलिए आपसी रणनीतिक सहयोग कहीं अधिक गहरा होना चाहिए। वे राजधानी स्थित उपराष्ट्रपति भवन में इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक एंगेजमेंट प्रोग्राम (इन-स्टेप) के चौथे संस्करण के प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे।

कार्यक्रम कौन कराता है

इन-स्टेप का आयोजन विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय मिलकर करते हैं और इसमें नेशनल डिफेंस कॉलेज का सहयोग रहता है। यह दो सप्ताह चलता है और वरिष्ठ पेशेवरों को रणनीति, सुरक्षा तथा विकास के सवालों पर विचार बांटने और स्थायी संस्थागत एवं पेशेवर रिश्ते बनाने का मंच देता है। उपराष्ट्रपति ने इस पहल की जड़ भारत की जी20 अध्यक्षता के दौरान की गई उस प्रतिबद्धता में बताई, जिसमें संवाद और आपसी सीख का स्थायी मंच बनाने की बात कही गई थी।

इस बार कौन आया है

चौथे संस्करण में कुल 38 प्रतिनिधि हैं। इनमें 25 प्रतिनिधि 22 देशों से आए हैं, जिनमें श्रीलंका, सेशेल्स, मंगोलिया, नेपाल, मॉरिशस, मालदीव, ओमान, गुयाना, चिली, अर्जेंटीना, फिलीपींस, थाईलैंड, आर्मेनिया, किर्गिस्तान, कतर, म्यांमार, उज्बेकिस्तान और ब्राजील शामिल हैं। इससे पहले के संस्करण मार्च 2024, अक्टूबर 2024 और अक्टूबर-नवंबर 2025 में हुए थे।

उपराष्ट्रपति ने क्या कहा

उन्होंने कार्यक्रम की भावना तीन बातों में रखी, वैश्विक स्तर पर सोचें, रणनीतिक रूप से जुड़ें और एकजुट होकर काम करें। उनके अनुसार रणनीतिक माहौल तेजी से बदल रहा है और पुराने ढंग की सुरक्षा चिंताएं अब तकनीक, साइबर दुनिया, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक मजबूती, समुद्री सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और आपूर्ति श्रृंखला के सवालों से एक साथ टकरा रही हैं। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों के पास मजबूती, विकास, शासन और सहयोग के जो अनुभव हैं, वे बहुत कुछ सिखाते हैं, और भारत इन देशों से आपसी सम्मान, साझा हित तथा संप्रभु समानता के आधार पर जुड़ता है।

भ्रष्टाचार और साझा विज्ञान

उपराष्ट्रपति ने भ्रष्टाचार को इन देशों के सामने खड़ी सबसे भारी चुनौतियों में गिना और प्रतिनिधियों से कहा कि हर स्तर पर ऐसी व्यवस्था बने, जो इससे मुक्त हो और जिसमें सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी तथा पारदर्शिता हो। महामारी के दौरान वैक्सीन मैत्री के जरिये दी गई मदद को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक खोजों का लाभ कुछ लोगों तक सीमित न रहकर पूरी मानवता को मिलना चाहिए, जो वसुधैव कुटुंबकम यानी एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य की भावना है। उन्होंने आयोजकों की सराहना भी की।

महत्वपूर्ण तथ्य

आयोजनचौथा इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक एंगेजमेंट प्रोग्राम (इन-स्टेप)
संबोधनउपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन
स्थानउपराष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली
आयोजकविदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय
सहयोगी संस्थाननेशनल डिफेंस कॉलेज
अवधिदो सप्ताह
भागीदारीकुल 38 प्रतिनिधि, जिनमें 22 देशों के 25 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि
पिछले संस्करणमार्च 2024, अक्टूबर 2024 और अक्टूबर-नवंबर 2025
संदेशवैश्विक स्तर पर सोचें, रणनीतिक रूप से जुड़ें, एकजुट होकर काम करें

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें, संस्करण चौथा, स्थान उपराष्ट्रपति भवन, आयोजक विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय तथा सहयोगी नेशनल डिफेंस कॉलेज, अवधि दो सप्ताह, संख्याएं 38 प्रतिनिधि, 25 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि और 22 देश, पिछले संस्करण मार्च 2024, अक्टूबर 2024 तथा अक्टूबर-नवंबर 2025, और तीन सूत्री संदेश।

अभ्यास प्रश्न

Q1.अंतरराष्ट्रीयमध्यम

इन-स्टेप के चौथे संस्करण में अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि कितने देशों से आए हैं?

  1. A.16
  2. B.22
  3. C.25
  4. D.38
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 22

व्याख्या

सही उत्तर 22 है। इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक एंगेजमेंट प्रोग्राम के चौथे संस्करण में कुल 38 प्रतिनिधि हैं और इनमें 25 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि हैं, जो 22 देशों से आए हैं। इन देशों में श्रीलंका, सेशेल्स, मंगोलिया, नेपाल, मॉरिशस, मालदीव, ओमान, गुयाना, चिली, अर्जेंटीना, फिलीपींस, थाईलैंड, आर्मेनिया, किर्गिस्तान, कतर, म्यांमार, उज्बेकिस्तान और ब्राजील शामिल हैं। विकल्प सी में अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की संख्या दी गई है, देशों की नहीं, और विकल्प डी में भारत के प्रतिभागियों सहित कुल संख्या दी गई है, इसलिए दोनों सही आंकड़े होते हुए भी इस प्रश्न का उत्तर नहीं हैं। विकल्प ए का इस कार्यक्रम से कोई संबंध नहीं। इस खबर में तीन संख्याएं साथ चलती हैं, इसलिए याद रखें कि 38 कुल है, 25 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि और 22 देश।

Q2.अंतरराष्ट्रीयमध्यम

इन-स्टेप का आयोजन विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के साथ कौन-सी संस्था मिलकर करती है?

  1. A.नीति आयोग
  2. B.राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय
  3. C.भारतीय विश्व मामले परिषद
  4. D.गृह मंत्रालय
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय

व्याख्या

सही उत्तर राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय है। यह कार्यक्रम दोनों मंत्रालयों और इसी सचिवालय के साझा प्रयास से होता है तथा इसमें नेशनल डिफेंस कॉलेज का सहयोग रहता है, जहां इस तरह के रणनीतिक पाठ्यक्रम चलते हैं। नीति आयोग सरकार का नीति संस्थान है और विकास योजना पर काम करता है, इस तरह के रणनीतिक कार्यक्रम का आयोजक नहीं, इसलिए विकल्प ए गलत है। भारतीय विश्व मामले परिषद अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर शोध करने वाली संस्था है और आयोजकों में इसका नाम नहीं है, इसलिए विकल्प सी भी गलत है। गृह मंत्रालय आंतरिक सुरक्षा देखता है और इस आयोजन में उसकी भूमिका नहीं, इसलिए विकल्प डी भी सही नहीं। उपराष्ट्रपति ने प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाने के लिए इसी सचिवालय और दोनों मंत्रालयों की सराहना की थी।

Q3.अंतरराष्ट्रीयआसान

उपराष्ट्रपति ने इन-स्टेप के प्रतिनिधियों को कौन-सा तीन सूत्री संदेश दिया?

  1. A.सुधार, प्रदर्शन और बदलाव
  2. B.वैश्विक स्तर पर सोचें, रणनीतिक रूप से जुड़ें, एकजुट होकर काम करें
  3. C.सीखें, भुलाएं और फिर से सीखें
  4. D.योजना, उत्पादन और समृद्धि
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. वैश्विक स्तर पर सोचें, रणनीतिक रूप से जुड़ें, एकजुट होकर काम करें

व्याख्या

सही उत्तर है वैश्विक स्तर पर सोचें, रणनीतिक रूप से जुड़ें, एकजुट होकर काम करें। उपराष्ट्रपति ने इन्हीं तीन बातों को कार्यक्रम की मूल भावना बताया और कहा कि तकनीक, साइबर दुनिया, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऊर्जा तथा समुद्री सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियों का सामना विकासशील देशों को मिलकर करना होगा। बाकी विकल्प दूसरे संदर्भों के नारे हैं और यहां नहीं कहे गए, इसलिए वे गलत हैं। इसी संबोधन में उन्होंने भ्रष्टाचार को विकासशील देशों के सामने बड़ी चुनौती बताया और हर स्तर पर भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था बनाने को कहा, तथा वैक्सीन मैत्री को याद करते हुए कहा कि वैज्ञानिक प्रगति का लाभ पूरी मानवता को मिलना चाहिए। परीक्षा में इस खबर से या तो संदेश पूछा जाता है या भागीदारी के आंकड़े।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इन-स्टेप क्या है?

यह इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक एंगेजमेंट प्रोग्राम है, दो सप्ताह का कार्यक्रम, जिसे विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय नेशनल डिफेंस कॉलेज के सहयोग से मित्र देशों के वरिष्ठ पेशेवरों के लिए आयोजित करते हैं।

चौथे संस्करण में कितने देशों की भागीदारी है?

22 देशों की। कुल 38 प्रतिनिधियों में से 25 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि हैं, जो श्रीलंका, सेशेल्स, मंगोलिया, नेपाल, मॉरिशस, मालदीव, ओमान, गुयाना, चिली, अर्जेंटीना, थाईलैंड और ब्राजील जैसे देशों से आए हैं।

विज्ञान को साझा करने की बात पर उपराष्ट्रपति ने किस पहल को याद किया?

वैक्सीन मैत्री को, जिसके जरिये महामारी के दौरान भारत ने विकासशील देशों की मदद की थी। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक प्रगति का लाभ पूरी मानवता को मिलना चाहिए।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS