मुख्य सामग्री पर जाएं
GK24

फार्मा पीएलआई में 46,744 करोड़ रुपये का निवेश, 57 उपकरण बने

औषधि विभाग के अनुसार तीन पीएलआई योजनाओं से फार्मा क्षेत्र में 46,744 करोड़ रुपये का निवेश आया और देश में 57 चिकित्सा उपकरणों का उत्पादन शुरू हुआ।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
Read in English
फार्मा पीएलआई में 46,744 करोड़ रुपये का निवेश, 57 उपकरण बने

चर्चा में क्यों

25 सितंबर 2026 को औषधि विभाग ने थोक दवा, दवा उद्योग और चिकित्सा उपकरणों की अपनी तीन पीएलआई योजनाओं का ब्योरा दिया, जिसमें जून 2026 तक के निवेश, बिक्री, निर्यात और रोजगार के आंकड़े शामिल हैं।

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीन काम करने वाले औषधि विभाग ने बताया है कि उत्पादन आधारित प्रोत्साहन यानी पीएलआई की उसकी तीन योजनाओं से थोक दवा, तैयार दवा और चिकित्सा उपकरण के क्षेत्र में क्या हासिल हुआ। ये तीनों योजनाएं गोली में पड़ने वाले कच्चे माल से लेकर अस्पताल की स्कैन मशीन तक पूरी कड़ी को छूती हैं और नीचे दिए आंकड़े जून 2026 तक के हैं।

थोक दवा, यानी कच्चे माल का सिरा

महत्वपूर्ण प्रारंभिक सामग्री, मध्यवर्ती सामग्री और सक्रिय औषधि अवयवों की योजना 2020 में 6,940 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ मंजूर हुई थी और इसमें 41 ऐसे उत्पाद चुने गए, जिनके लिए देश आयात पर टिका था। मंजूर 48 परियोजनाओं में से 39 चालू हो चुकी हैं और उनमें 28 अवयव बनते हैं। जमीन पर निवेश 5,210.74 करोड़ रुपये पहुंचा, जो वादे के 4,330 करोड़ रुपये से ज्यादा है। लाभार्थियों ने 3,792.49 करोड़ रुपये की बिक्री की, जिसमें 560.16 करोड़ रुपये का निर्यात शामिल है, और करीब 5,127 लोगों को रोजगार मिला। पेनिसिलिन-जी, क्लैवुलैनिक एसिड और रिफैम्पिसिन, जो पहले ज्यादातर बाहर से आते थे, अब देश में ही बनते हैं और आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम की इकाइयां इनमें शामिल हैं।

दवा उद्योग, यानी ऊंचे मूल्य का सिरा

दूसरी योजना 2021 में 15,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ मंजूर हुई और यह निर्माताओं को बायोफार्मास्यूटिकल्स, जटिल जेनेरिक, पेटेंट तथा ऑफ-पेटेंट दवाओं, दुर्लभ बीमारियों की दवाओं और ऑटो-इम्यून दवाओं की ओर ले जाती है। इसमें 55 आवेदक चुने गए, जिनमें 20 छोटी और मझोली इकाइयां हैं। वास्तविक निवेश 46,744 करोड़ रुपये तक पहुंचा, जबकि लक्ष्य 17,275 करोड़ रुपये का था। रोजगार 1,21,294 पैदा हुए और 2022-23 में प्रदर्शन अवधि शुरू होने के बाद से बिक्री 4,02,869 करोड़ रुपये रही, जिसमें 2,57,370 करोड़ रुपये का निर्यात शामिल है।

चिकित्सा उपकरण, यानी मशीनें देश में

उपकरणों की योजना भी 2020 में 3,420 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ मंजूर हुई। इसमें देश में बने पात्र उपकरणों की बढ़ी हुई बिक्री पर पांच साल तक 5 प्रतिशत प्रोत्साहन मिलता है और चार खंड शामिल हैं, कैंसर देखभाल तथा रेडियोथेरेपी, रेडियोलॉजी तथा इमेजिंग, एनेस्थीसिया के साथ हृदय-श्वसन तथा गुर्दा देखभाल, और प्रत्यारोपण। अब 57 उपकरण यहीं बन रहे हैं, जिनमें एमआरआई मशीन, सीटी स्कैनर, कैथ लैब, लीनियर एक्सेलेरेटर, सी-आर्म, मैमोग्राफी और अल्ट्रासाउंड मशीन तथा हृदय वाल्व शामिल हैं। जीई हेल्थकेयर, सीमेंस, फिलिप्स, वेरेक्स, निप्रो और ओमरोन जैसी कंपनियों ने यहां कारखाने लगाए या बढ़ाए हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

क्रियान्वयनऔषधि विभाग, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय
थोक दवा पीएलआई2020 में मंजूर, परिव्यय 6,940 करोड़ रुपये, 41 महत्वपूर्ण उत्पाद
थोक दवा प्रगति48 परियोजनाएं मंजूर, 39 चालू, 28 अवयवों का उत्पादन
थोक दवा निवेश5,210.74 करोड़ रुपये, वादा 4,330 करोड़ रुपये
दवा उद्योग पीएलआई2021 में मंजूर, परिव्यय 15,000 करोड़ रुपये, 20 एमएसएमई सहित 55 आवेदक
दवा उद्योग निवेश46,744 करोड़ रुपये, लक्ष्य 17,275 करोड़ रुपये
रोजगार और बिक्री1,21,294 रोजगार; बिक्री 4,02,869 करोड़ रुपये, निर्यात 2,57,370 करोड़ रुपये
चिकित्सा उपकरण पीएलआई2020 में मंजूर, परिव्यय 3,420 करोड़ रुपये, पांच साल तक 5 प्रतिशत प्रोत्साहन
उपकरण57 उपकरण, जिनमें एमआरआई मशीन, सीटी स्कैनर, कैथ लैब और लीनियर एक्सेलेरेटर
आंकड़े किस तिथि तकजून 2026

परीक्षा की दृष्टि से

तीनों योजनाएं अलग-अलग याद रखें, थोक दवा 2020 और 6,940 करोड़ रुपये तथा 41 उत्पाद, दवा उद्योग 2021 और 15,000 करोड़ रुपये तथा 55 आवेदक, चिकित्सा उपकरण 2020 और 3,420 करोड़ रुपये तथा पांच साल के लिए 5 प्रतिशत प्रोत्साहन एवं 57 उपकरण। सबसे बड़ा आंकड़ा दवा उद्योग योजना का 46,744 करोड़ रुपये का निवेश है।

अभ्यास प्रश्न

Q1.सरकारी योजनाएंमध्यम

थोक दवा के लिए पीएलआई योजना का कुल वित्तीय परिव्यय कितना है?

  1. A.3,420 करोड़ रुपये
  2. B.6,940 करोड़ रुपये
  3. C.15,000 करोड़ रुपये
  4. D.17,275 करोड़ रुपये
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 6,940 करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर 6,940 करोड़ रुपये है। थोक दवा की यह योजना, जिसमें प्रारंभिक सामग्री, मध्यवर्ती सामग्री और सक्रिय औषधि अवयव आते हैं, 2020 में इसी परिव्यय के साथ मंजूर हुई थी और इसमें 41 ऐसे महत्वपूर्ण उत्पाद चुने गए, जिन पर आयात का दबदबा था। विकल्प ए में दिया आंकड़ा दूसरी योजना का है, यानी चिकित्सा उपकरणों के घरेलू विनिर्माण की योजना का, जो उसी वर्ष मंजूर हुई थी, इसलिए वहां दो योजनाएं आपस में मिल जाती हैं। विकल्प सी का आंकड़ा दवा उद्योग की उस योजना का है, जो 2021 में मंजूर हुई और जटिल जेनेरिक तथा बायोफार्मास्यूटिकल्स को बढ़ावा देती है। विकल्प डी परिव्यय है ही नहीं, वह दवा उद्योग योजना का लक्षित निवेश है, जिसे वास्तविक निवेश पार कर चुका है। परिव्यय, लक्ष्य और वास्तविक निवेश को अलग-अलग याद रखें।

Q2.सरकारी योजनाएंमध्यम

चिकित्सा उपकरणों की पीएलआई योजना के तहत कितने विशिष्ट उपकरणों का उत्पादन शुरू हो चुका है?

  1. A.28
  2. B.39
  3. C.48
  4. D.57
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. 57

व्याख्या

सही उत्तर 57 है। इस योजना के तहत 57 विशिष्ट चिकित्सा उपकरणों का उत्पादन शुरू हो चुका है और इनकी सूची में एमआरआई मशीन, सीटी स्कैनर, कैथ लैब, लीनियर एक्सेलेरेटर, सी-आर्म, मैमोग्राफी मशीन, अल्ट्रासाउंड सिस्टम, एनेस्थीसिया मशीन और हृदय वाल्व शामिल हैं, जो पहले ज्यादातर बाहर से मंगाए जाते थे। बाकी तीनों विकल्प थोक दवा योजना के आंकड़े हैं और यहां इसलिए रखे गए हैं ताकि यह परखा जा सके कि दोनों योजनाएं आपस में मिल तो नहीं रहीं। उस योजना में 48 परियोजनाएं मंजूर हुईं, उनमें से 39 चालू हुईं और चालू परियोजनाओं में 28 अवयव बनते हैं। योजना, वर्ष, परिव्यय और मुख्य संख्या की छोटी तालिका बनाकर याद करना सबसे सुरक्षित तरीका है। यह भी ध्यान रखें कि उपकरणों की योजना में पात्र उपकरणों की बढ़ी हुई बिक्री पर पांच साल तक प्रोत्साहन मिलता है और इसमें कैंसर देखभाल, रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया तथा गुर्दा देखभाल एवं प्रत्यारोपण, ये चार खंड आते हैं।

Q3.सरकारी योजनाएंआसान

दवा और चिकित्सा उपकरणों की पीएलआई योजनाएं किस मंत्रालय का विभाग लागू करता है?

  1. A.स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
  2. B.रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय
  3. C.वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
  4. D.विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय

व्याख्या

सही उत्तर रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय है। औषधि विभाग इसी मंत्रालय के अधीन आता है और तीनों योजनाएं यही विभाग लागू करता है, थोक दवा की, दवा उद्योग की और चिकित्सा उपकरणों की। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय अस्पताल, जन स्वास्थ्य कार्यक्रम और अपनी संस्थाओं के जरिये दवाओं का नियमन देखता है, पर ये प्रोत्साहन योजनाएं वह नहीं चलाता, इसलिए विकल्प ए गलत है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय व्यापार नीति और सामान्य औद्योगिक प्रोत्साहन का काम करता है, यहां वह क्रियान्वयन मंत्रालय नहीं है, इसलिए विकल्प सी भी गलत है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय अपने विभागों के जरिये शोध को धन देता है और इन प्रोत्साहनों के वितरण में उसकी कोई भूमिका नहीं, इसलिए विकल्प डी भी सही नहीं। ये योजनाएं मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य से जुड़ी हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

औषधि विभाग कितनी पीएलआई योजनाएं चलाता है?

तीन, एक थोक दवा यानी प्रारंभिक सामग्री, मध्यवर्ती सामग्री और सक्रिय औषधि अवयवों के लिए, दूसरी दवा उद्योग के लिए और तीसरी चिकित्सा उपकरणों के घरेलू विनिर्माण के लिए।

दवा उद्योग की पीएलआई योजना में कितना निवेश आया?

जून 2026 तक 46,744 करोड़ रुपये, जो 17,275 करोड़ रुपये के लक्ष्य से कहीं अधिक है। यह योजना 2021 में 15,000 करोड़ रुपये के परिव्यय से मंजूर हुई थी और इसमें 20 एमएसएमई सहित 55 आवेदक चुने गए।

चिकित्सा उपकरण पीएलआई में कितना प्रोत्साहन मिलता है?

देश में बने पात्र उपकरणों की बढ़ी हुई बिक्री पर पांच साल तक 5 प्रतिशत, और इसमें कैंसर देखभाल, रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया तथा गुर्दा देखभाल और प्रत्यारोपण के खंड आते हैं।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS