भारत के अंतर-राज्यीय सीमा विवाद: अनुच्छेद और प्रकरण
परीक्षा नोट्स: अनुच्छेद 3, 131, 262 और 263, महाजन आयोग, बेलगावी, पूर्वोत्तर के सीमा विवाद, कोटिया गांव तथा चंडीगढ़ का प्रश्न और समाधान की व्यवस्था।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

भारत की आंतरिक सीमाएं एक बार खींचकर छोड़ नहीं दी गईं। वे भाषा के आधार पर, पहाड़ और मैदान के भेद से तथा प्रशासनिक सुविधा से बार-बार बदली गईं, और हर बदलाव ऐसे गांव, राजस्व वृत्त और वन खंड छोड़ गया, जिनका स्वामित्व दो राज्य आज भी भिन्न ढंग से पढ़ते हैं। इसलिए राज्यों के बीच सीमा विवाद अंतर्राष्ट्रीय अर्थ में भूभाग का विवाद नहीं, बल्कि पुरानी अधिसूचनाओं, सर्वेक्षण नक्शों और राजस्व अभिलेखों का विवाद है, और संविधान ने इसे सुलझाने के साधन संसद तथा उच्चतम न्यायालय को दिए हैं।
संवैधानिक व्यवस्था
अनुच्छेद 3 संसद को साधारण बहुमत से नया राज्य बनाने, किसी राज्य का क्षेत्र बढ़ाने या घटाने, उसकी सीमाएं बदलने और नाम बदलने की शक्ति देता है। इसके साथ दो शर्तें हैं: विधेयक राष्ट्रपति की सिफारिश पर ही पेश किया जा सकता है, और राष्ट्रपति उसे प्रभावित राज्य के विधानमंडल को उसकी राय के लिए भेजेंगे, जो बाध्यकारी नहीं होती। इसी कारण कोई राज्य संसद द्वारा किए गए सीमा परिवर्तन को अस्वीकार नहीं कर सकता और ऐसा परिवर्तन संविधान संशोधन नहीं माना जाता। अनुच्छेद 131 उच्चतम न्यायालय को आरंभिक अधिकारिता देता है, अर्थात वह मामला सीधे वहीं आरंभ होता है, और यह भारत सरकार तथा राज्य के बीच तथा दो या अधिक राज्यों के बीच विवादों पर लागू है; भूमि सीमा के अधिकांश वाद इसी मार्ग से वहां पहुंचते हैं। अनुच्छेद 262 अंतर-राज्यीय नदियों के जल से जुड़े विवादों की अलग व्यवस्था करता है और संसद को न्यायालयों की अधिकारिता रोकने की शक्ति देता है, जो उसने अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम 1956 से की; इसलिए जल विवाद अधिकरण में और भूमि विवाद उच्चतम न्यायालय में जाता है। अनुच्छेद 263 राष्ट्रपति को अंतर-राज्यीय परिषद गठित करने की शक्ति देता है, जो राज्यों के विवादों की जांच और उन पर सलाह दे; ऐसी परिषद 1990 में गठित हुई। राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 से पांच क्षेत्रीय परिषदें बनीं और पूर्वोत्तर परिषद बाद में 1971 के अपने अधिनियम से बनी।
सीमाएं कैसे बनीं
पोट्टी श्रीरामुलु के निधन के बाद 1953 में मद्रास से अलग किया गया आंध्र राज्य भाषा के आधार पर बना पहला राज्य था। फजल अली की अध्यक्षता में बना राज्य पुनर्गठन आयोग, जिसमें के. एम. पणिक्कर और हृदय नाथ कुंजरू सदस्य थे, 1955 में रिपोर्ट दी, और राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 ने देश को मोटे तौर पर भाषायी आधार पर राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों में पुनर्गठित किया। बॉम्बे राज्य 1960 में महाराष्ट्र और गुजरात में बंटा। पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 ने हरियाणा बनाया, पहाड़ी क्षेत्र हिमाचल प्रदेश को दिए और चंडीगढ़ को संघ राज्यक्षेत्र बनाकर पंजाब तथा हरियाणा की संयुक्त राजधानी बनाया। पूर्वोत्तर में नगालैंड 1963 में, मेघालय 1972 में तथा मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश 1987 में राज्य बने, और हर विभाजन ने जमीन पर चिह्नित की जाने वाली एक सीमा छोड़ दी।
परीक्षा में पूछे जाने वाले विवाद
| विवाद | राज्य | मुद्दा |
|---|---|---|
| बेलगावी | महाराष्ट्र और कर्नाटक | बेलगावी, निप्पाणी और कारवार क्षेत्र; महाजन आयोग ने परीक्षण किया |
| विवादित क्षेत्र पट्टी | असम और नगालैंड | तराई की पट्टी, जिस पर 1963 में नगालैंड बनने के बाद से दावा है |
| मतभेद के बारह क्षेत्र | असम और मेघालय | लंगपीह सहित खंड, जिनमें छह क्षेत्रों पर 2022 में आंशिक समझौता हुआ |
| इनर लाइन पट्टी | असम और मिजोरम | लुशाई हिल्स की 1875 और 1933 की अधिसूचनाओं पर भिन्न आधार |
| कोटिया गांव समूह | ओडिशा और आंध्र प्रदेश | गांवों का समूह, जिस पर दोनों का दावा है और मामला उच्चतम न्यायालय में है |
| चंडीगढ़ और क्षेत्र हस्तांतरण | पंजाब और हरियाणा | संयुक्त राजधानी की स्थिति तथा हिंदी और पंजाबी भाषी गांव |
महाराष्ट्र और कर्नाटक का विवाद सबसे पुराना और सर्वाधिक पूछा जाने वाला है। 1956 के पुनर्गठन ने बड़ी मराठी भाषी आबादी वाले बेलगावी को मैसूर राज्य में रखा, जिसके बाद महाराष्ट्र ने दावा किया और केंद्र ने 1966 में पूर्व मुख्य न्यायाधीश मेहर चंद महाजन की अध्यक्षता में महाजन आयोग नियुक्त किया। 1967 में दी गई उसकी रिपोर्ट महाराष्ट्र के मुख्य दावे के विरुद्ध रही, जिसे महाराष्ट्र ने अस्वीकार किया और कर्नाटक ने स्वीकार किया, इसलिए मामला उच्चतम न्यायालय में है। कर्नाटक ने बेलगावी में दूसरा विधानमंडल भवन, सुवर्ण विधान सौध, बनाया और वहां शीतकालीन सत्र करता है। पूर्वोत्तर में असम और नगालैंड का विवाद तराई की एक पट्टी पर है, जिसकी वर्षों में न्यायमूर्ति सुंदरम तथा न्यायमूर्ति शास्त्री जैसी समितियों ने जांच की; असम और अरुणाचल प्रदेश की सीमा मैदान तथा तराई के सहारे एक हजार किलोमीटर से अधिक चलती है और दोनों राज्यों ने विवादित गांवों की संख्या घटाने के लिए 2022 में नामसाई घोषणा पर हस्ताक्षर किए।
विवाद सुलझाने के मार्ग
चार मार्ग प्रयोग होते हैं और परीक्षा में इन्हें क्रम से जानना चाहिए। पहला, मुख्यमंत्रियों की द्विपक्षीय बातचीत, जिसमें अधिकारियों और विधायकों की क्षेत्रीय समितियां सर्वेक्षण का काम करती हैं; असम के हाल के समझौते इसी मार्ग से हुए। दूसरा, केंद्र द्वारा नियुक्त आयोग या समिति, जैसे महाजन आयोग, जिसकी रिपोर्ट का महत्व होता है पर वह स्वयं किसी को बाध्य नहीं करती। तीसरा, अनुच्छेद 131 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय में वाद, जहां न्यायालय उस समय की अधिसूचनाओं, बंदोबस्त अभिलेखों और सर्वेक्षण नक्शों पर निर्णय करता है। चौथा, अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद का अधिनियम, जो क्षेत्र को सीधे हस्तांतरित कर विवाद समाप्त कर सकता है, जैसा पहले के सीमा परिवर्तनों में हुआ। इनके साथ स्थायी निकाय भी हैं: अनुच्छेद 263 की अंतर-राज्यीय परिषद, क्षेत्रीय परिषदें, पूर्वोत्तर परिषद और गृह मंत्रालय, तथा भारतीय सर्वेक्षण विभाग वे नक्शे देता है जिन पर अंतिम समाधान लिखा जाता है।
परीक्षा की दृष्टि से
निश्चित अंक अनुच्छेदों और नामित आयोगों से मिलते हैं: सीमा बदलने के लिए अनुच्छेद 3, उच्चतम न्यायालय की आरंभिक अधिकारिता के लिए अनुच्छेद 131, जल के लिए अनुच्छेद 262, अंतर-राज्यीय परिषद के लिए अनुच्छेद 263 और महाराष्ट्र-कर्नाटक प्रश्न के लिए महाजन आयोग। दूसरा मानक प्रश्न विवादित स्थान को उसके दो राज्यों से मिलाना है, इसलिए बेलगावी, कोटिया, लंगपीह और विवादित क्षेत्र पट्टी को उनके राज्यों के साथ याद करें। जाल ये हैं: सीमा परिवर्तन के लिए संविधान संशोधन या राज्य की सहमति आवश्यक मान लेना, जल विवाद को अधिकरण के बजाय उच्चतम न्यायालय भेज देना, महाजन रिपोर्ट को बाध्यकारी समझना, और फजल अली राज्य पुनर्गठन आयोग को महाजन आयोग से मिला देना। याद रखें कि 1953 का आंध्र पहला भाषायी राज्य था और अधिनियम 1956 में आया।
महत्वपूर्ण तथ्य
| अनुच्छेद 3 | संसद नया राज्य बना सकती और क्षेत्र, सीमा तथा नाम बदल सकती है; राष्ट्रपति की सिफारिश आवश्यक, राज्य विधानमंडल की राय बाध्यकारी नहीं |
|---|---|
| अनुच्छेद 131 | संघ-राज्य तथा अंतर-राज्यीय विवादों में उच्चतम न्यायालय की आरंभिक अधिकारिता |
| अनुच्छेद 262 | अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद; अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 |
| अनुच्छेद 263 | अंतर-राज्यीय परिषद; गठन 1990 में |
| क्षेत्रीय परिषदें | पांच, राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 से; पूर्वोत्तर परिषद 1971 के अधिनियम से |
| पहला भाषायी राज्य | आंध्र राज्य, 1953, पोट्टी श्रीरामुलु के निधन के बाद |
| राज्य पुनर्गठन आयोग | अध्यक्ष फजल अली, सदस्य के. एम. पणिक्कर और एच. एन. कुंजरू; रिपोर्ट 1955 |
| महाजन आयोग | महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा पर 1966 में मेहर चंद महाजन की अध्यक्षता में नियुक्त; रिपोर्ट 1967 |
| बेलगावी | महाराष्ट्र का दावा, कर्नाटक के अधीन, जहां सुवर्ण विधान सौध बना |
| असम और नगालैंड | तराई की विवादित क्षेत्र पट्टी, 1963 में नगालैंड बनने के बाद से विवाद |
| असम और मिजोरम | लुशाई हिल्स की 1875 और 1933 की अधिसूचनाओं पर भिन्न आधार |
| कोटिया गांव | ओडिशा और आंध्र प्रदेश दोनों का दावा |
| चंडीगढ़ | पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 के अंतर्गत संघ राज्यक्षेत्र और पंजाब-हरियाणा की संयुक्त राजधानी |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
संविधान का कौन-सा अनुच्छेद संसद को किसी राज्य की सीमाएं बदलने की शक्ति देता है?
- A.अनुच्छेद 1
- B.अनुच्छेद 3
- C.अनुच्छेद 19
- D.अनुच्छेद 169
उत्तर देखें
यह संसद को साधारण बहुमत से कानून बनाकर नया राज्य बनाने, किसी राज्य का क्षेत्र बढ़ाने या घटाने, उसकी सीमाएं बदलने तथा नाम बदलने की शक्ति देता है; विधेयक के लिए राष्ट्रपति की सिफारिश आवश्यक है और राष्ट्रपति उसे प्रभावित राज्य के विधानमंडल को राय के लिए भेजते हैं, जो…
पूरी व्याख्या पढ़ें →महाजन आयोग किन दो राज्यों के सीमा विवाद की जांच के लिए नियुक्त किया गया था?
- A.असम और नगालैंड
- B.महाराष्ट्र और कर्नाटक
- C.ओडिशा और आंध्र प्रदेश
- D.पंजाब और हरियाणा
उत्तर देखें
पूर्व मुख्य न्यायाधीश मेहर चंद महाजन की अध्यक्षता में यह आयोग 1966 में नियुक्त हुआ, जब महाराष्ट्र ने बेलगावी, निप्पाणी और कारवार पर दावा किया, जो बड़ी मराठी भाषी आबादी वाले क्षेत्र थे और 1956 के पुनर्गठन में मैसूर राज्य में रखे गए थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बेलगावी किन दो राज्यों के बीच सीमा विवाद का केंद्र है?
- A.कर्नाटक और केरल
- B.महाराष्ट्र और कर्नाटक
- C.महाराष्ट्र और तेलंगाना
- D.गोवा और कर्नाटक
उत्तर देखें
बेलगावी, जिसे पहले बेलगाम लिखा जाता था, कर्नाटक में है पर वहां बड़ी मराठी भाषी आबादी है, और 1956 के पुनर्गठन के बाद से महाराष्ट्र निप्पाणी तथा कारवार क्षेत्र के साथ इस पर दावा करता आया है; कर्नाटक ने उत्तर में वहां दूसरा विधानमंडल परिसर सुवर्ण विधान सौध बनाया और…
पूरी व्याख्या पढ़ें →दो राज्यों के बीच विवाद में उच्चतम न्यायालय की आरंभिक अधिकारिता किस अनुच्छेद से है?
- A.अनुच्छेद 131
- B.अनुच्छेद 136
- C.अनुच्छेद 143
- D.अनुच्छेद 226
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आरंभिक अधिकारिता का अर्थ है कि मामला उच्चतम न्यायालय में ही आरंभ होता है, और अनुच्छेद 131 भारत सरकार तथा एक या अधिक राज्यों के बीच तथा दो या अधिक राज्यों के बीच विवादों पर लागू है; इसी मार्ग से बेलगावी और कोटिया जैसे भूमि सीमा वाद न्यायालय पहुंचते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अंतर-राज्यीय नदियों के जल से जुड़े विवाद किस अनुच्छेद के अंतर्गत निपटाए जाते हैं?
- A.अनुच्छेद 253
- B.अनुच्छेद 262
- C.अनुच्छेद 263
- D.अनुच्छेद 280
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यह संसद को अंतर-राज्यीय नदियों और नदी घाटियों के जल के उपयोग, वितरण या नियंत्रण से जुड़े विवादों के न्यायनिर्णयन की व्यवस्था करने तथा ऐसे मामलों में न्यायालयों की अधिकारिता रोकने की शक्ति देता है; संसद ने दोनों काम अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम 1956 से किए, जिसके अंतर्गत अधिकरण…
पूरी व्याख्या पढ़ें →1990 में गठित अंतर-राज्यीय परिषद किस अनुच्छेद के अंतर्गत स्थापित की गई?
- A.अनुच्छेद 261
- B.अनुच्छेद 263
- C.अनुच्छेद 312
- D.अनुच्छेद 324
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यह राष्ट्रपति को, लोकहित में प्रतीत होने पर, ऐसी परिषद गठित करने की शक्ति देता है जो राज्यों के बीच विवादों की जांच और सलाह दे, उन विषयों की जांच करे जिनमें कुछ या सभी राज्यों तथा संघ का साझा हित हो, और नीति के बेहतर समन्वय की सिफारिश करे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में क्षेत्रीय परिषदों का गठन किस कानून से हुआ?
- A.राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956
- B.भारत शासन अधिनियम, 1935
- C.पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966
- D.पूर्वोत्तर क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971
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सही उत्तर है A, राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956, जिसने पांच क्षेत्रीय परिषदें स्थायी मंच के रूप में बनाईं, जहां पड़ोसी राज्य और केंद्र साझा चिंता के विषयों पर विचार कर सकें, जिनमें सीमा संबंधी टकराव, विधि व्यवस्था और अंतर-राज्यीय परिवहन शामिल हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →कोटिया गांव समूह पर किन दो राज्यों का दावा है?
- A.ओडिशा और आंध्र प्रदेश
- B.ओडिशा और छत्तीसगढ़
- C.आंध्र प्रदेश और तेलंगाना
- D.ओडिशा और झारखंड
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कोटिया समूह उस पहाड़ी पट्टी में है जहां दोनों राज्य मिलते हैं, और दोनों अपने-अपने अभिलेखों के आधार पर वहां विद्यालय, राशन दुकानें तथा पंचायत चुनाव चलाते हैं, इसी कारण यह दावा दशकों से उच्चतम न्यायालय में है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →असम और मिजोरम का सीमा विवाद किन दो वर्षों की अधिसूचनाओं पर भिन्न आधार से उत्पन्न है?
- A.1875 और 1933
- B.1905 और 1912
- C.1935 और 1947
- D.1956 और 1972
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मिजोरम का आधार 1875 में बंगाल पूर्वी सीमांत विनियम के अंतर्गत अधिसूचित इनर लाइन है, जिसके अनुसार उसने लुशाई हिल्स के लिए व्यापक पट्टी चिह्नित की थी, जबकि असम 1933 में सीमांकित सीमा पर निर्भर है; इन दोनों रेखाओं के बीच की पट्टी ही दोनों के दावे में है और…
पूरी व्याख्या पढ़ें →चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी किस कानून के अंतर्गत है?
- A.राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956
- B.पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966
- C.संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956
- D.हरियाणा राजधानी अधिनियम, 1970
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इसने पुराने पंजाब का विभाजन किया, हरियाणा बनाया, पहाड़ी क्षेत्र हिमाचल प्रदेश को हस्तांतरित किए और चंडीगढ़ को संघ राज्यक्षेत्र बनाकर पंजाब तथा हरियाणा दोनों की राजधानी बनाया; यही व्यवस्था हिंदी और पंजाबी भाषी गांवों के हस्तांतरण के साथ दीर्घकालिक विवाद का विषय है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भाषा के आधार पर बना भारत का पहला राज्य कौन था?
- A.आंध्र राज्य, 1953
- B.गुजरात, 1960
- C.हरियाणा, 1966
- D.नगालैंड, 1963
उत्तर देखें
यह मद्रास के तेलुगु भाषी जिलों से उस समय बनाया गया जब इस मांग के लिए अनशन करने वाले पोट्टी श्रीरामुलु का निधन हो गया, और इसके गठन ने सरकार को फजल अली की अध्यक्षता में राज्य पुनर्गठन आयोग बनाने पर विवश किया, जिसकी 1955 की रिपोर्ट 1956 के अधिनियम…
पूरी व्याख्या पढ़ें →1956 के अधिनियम का आधार बनी रिपोर्ट देने वाले राज्य पुनर्गठन आयोग के अध्यक्ष कौन थे?
- A.मेहर चंद महाजन
- B.फजल अली
- C.के. एम. पणिक्कर
- D.एच. एन. कुंजरू
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1953 में नियुक्त इस आयोग के अध्यक्ष फजल अली थे और सदस्य के. एम. पणिक्कर तथा हृदय नाथ कुंजरू थे; इसकी 1955 की रिपोर्ट राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 का आधार बनी, जिसने देश का नक्शा मोटे तौर पर भाषायी आधार पर राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों में बदला।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या कोई राज्य अपनी सीमा में परिवर्तन से इनकार कर सकता है?
नहीं। अनुच्छेद 3 के अंतर्गत राष्ट्रपति विधेयक को प्रभावित राज्य के विधानमंडल को नियत अवधि में राय देने के लिए भेजते हैं, पर वह राय संसद को बाध्य नहीं करती। संसद साधारण बहुमत से कानून बना सकती है, चाहे राज्य सहमत हो या न हो, और यह परिवर्तन संविधान संशोधन नहीं होता।
दो राज्यों के बीच भूमि सीमा विवाद कहां जाता है?
अनुच्छेद 131 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय में, जो दो या अधिक राज्यों के बीच तथा संघ और राज्य के बीच विवादों में आरंभिक अधिकारिता रखता है। न्यायालय पुरानी अधिसूचनाओं, बंदोबस्त तथा राजस्व अभिलेखों और सर्वेक्षण नक्शों के आधार पर निर्णय करता है। संसद अनुच्छेद 3 के अंतर्गत कानून बनाकर भी इसे सुलझा सकती है।
जल विवाद उच्चतम न्यायालय में क्यों नहीं जाते?
क्योंकि अनुच्छेद 262 संसद को उनके न्यायनिर्णयन की व्यवस्था करने और न्यायालयों की अधिकारिता रोकने की शक्ति देता है, और संसद ने अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम 1956 से यही किया। ऐसे विवाद उस अधिनियम के अंतर्गत गठित अधिकरणों को भेजे जाते हैं।
महाजन आयोग ने क्या सिफारिश की थी?
1966 में नियुक्त पूर्व मुख्य न्यायाधीश मेहर चंद महाजन के आयोग ने 1967 में महाराष्ट्र और कर्नाटक सीमा पर रिपोर्ट दी। उसने बेलगावी पर महाराष्ट्र का मुख्य दावा स्वीकार नहीं किया और दोनों ओर सीमित हस्तांतरण की ही सिफारिश की। महाराष्ट्र ने रिपोर्ट अस्वीकार की, कर्नाटक ने स्वीकार की और प्रश्न उच्चतम न्यायालय पहुंचा।
असम और मिजोरम की सीमा विवादित क्यों है?
दोनों पक्ष भिन्न औपनिवेशिक अधिसूचनाओं पर निर्भर हैं। मिजोरम का आधार 1875 की अधिसूचना की इनर लाइन है, जिसके अनुसार वह व्यापक जनजातीय पट्टी की रक्षा करती थी, जबकि असम 1933 में खींची गई सीमा पर निर्भर है। इन दोनों रेखाओं के बीच का भाग ही दोनों के दावे में है।
अंतर-राज्यीय परिषद क्या है?
यह वह निकाय है जिसे राष्ट्रपति अनुच्छेद 263 के अंतर्गत राज्यों के विवादों की जांच और सलाह, साझा हित के विषयों पर विचार तथा नीति समन्वय की सिफारिश के लिए गठित कर सकते हैं। इसका गठन 1990 में हुआ, इसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं और इसमें मुख्यमंत्री तथा केंद्रीय मंत्री शामिल होते हैं।
स्रोत
- भारत का संविधान, अनुच्छेद 3, 131, 262 और 263 — विधायी विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय
- राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 तथा पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 — इंडिया कोड, भारत सरकार
- अंतर-राज्यीय परिषद सचिवालय: क्षेत्रीय परिषदें और अंतर-राज्यीय परिषद — गृह मंत्रालय, भारत सरकार





