प्रतिजैविक पेनिसिलिन मानव कोशिकाओं को हानि पहुँचाए बिना आक्रमणकारी बैक्टीरिया को मार सकता है, क्योंकि यह बैक्टीरिया के किस भाग को निशाना बनाता है?
- A.कोशिका भित्ति
- B.प्लाज़्मा झिल्ली
- C.राइबोसोम
- D.गुणसूत्र
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है A, कोशिका भित्ति। बैक्टीरिया में कोशिका भित्ति होती है और मानव कोशिकाओं में नहीं, इसलिए कोशिका भित्ति पर हमला करने वाली दवा केवल बैक्टीरिया को नुकसान पहुँचाती है।
बैक्टीरिया की कोशिका भित्ति पेप्टिडोग्लाइकन से बनी होती है, जो शर्कराओं और छोटे पेप्टाइडों का जाल है; यह कोशिका को आकार देता है और उसे फटने से बचाता है। पेनिसिलिन उन एंजाइमों को रोकता है जो इस जाल के आपसी जोड़ बनाते हैं। तब बढ़ता हुआ बैक्टीरिया कमज़ोर भित्ति बनाता है, पानी सोखता है और फट जाता है। मानव कोशिकाओं में केवल प्लाज़्मा झिल्ली होती है, पेप्टिडोग्लाइकन नहीं, इसलिए वे सुरक्षित रहती हैं। अलेक्ज़ेंडर फ्लेमिंग ने 1928 में पेनिसिलियम नोटेटम कवक से पेनिसिलिन खोजा था।
B गलत है: मानव कोशिकाओं में भी प्लाज़्मा झिल्ली होती है, इसलिए उस पर हमला हमारी कोशिकाओं को भी नुकसान पहुँचाता।
C गलत है: टेट्रासाइक्लिन जैसी कुछ प्रतिजैविक दवाएँ बैक्टीरिया के राइबोसोम पर काम करती हैं, पर पेनिसिलिन नहीं।
D गलत है: पेनिसिलिन बैक्टीरिया के गुणसूत्र या DNA पर काम नहीं करता।
परीक्षा टिप: 1928 में फ्लेमिंग द्वारा खोजा गया पेनिसिलिन बैक्टीरिया की कोशिका भित्ति बनने से रोकता है।