मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल का प्रावधान किसमें दिया गया था?
- A.मॉर्ले-मिंटो सुधार, 1909
- B.मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार, 1919
- C.सांप्रदायिक निर्णय, 1932
- D.भारत शासन अधिनियम, 1935
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है A, मॉर्ले-मिंटो सुधार, 1909। इस अधिनियम, जिसका औपचारिक नाम भारतीय परिषद अधिनियम 1909 है, ने पहली बार मुसलमानों को पृथक निर्वाचन मंडल दिया, जिसमें मुस्लिम मतदाता केवल मुस्लिम निर्वाचन क्षेत्रों से मुस्लिम सदस्य चुनते थे। उस समय लॉर्ड मिंटो वायसराय और जॉन मॉर्ले भारत सचिव थे, और यह कदम 1906 के शिमला शिष्टमंडल तथा उसी वर्ष मुस्लिम लीग की स्थापना के बाद आया। इसी अधिनियम ने विधान परिषदों का आकार बढ़ाया और पहली बार भारतीयों को वायसराय की कार्यकारी परिषद में स्थान दिया, जिसमें सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा पहले सदस्य थे। राष्ट्रवादियों ने इसे सांप्रदायिक कदम कहा, क्योंकि इसने धर्म को प्रतिनिधित्व का आधार बना दिया। विकल्प B गलत है, क्योंकि 1919 के सुधारों ने पृथक निर्वाचन को केवल सिखों, भारतीय ईसाइयों, आंग्ल-भारतीयों और यूरोपीयों तक बढ़ाया। विकल्प C गलत है, क्योंकि 1932 के सांप्रदायिक निर्णय ने दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचन जोड़ा। विकल्प D गलत है, क्योंकि 1935 के अधिनियम ने इस व्यवस्था को जारी रखा, बनाया नहीं। परीक्षा टिप: मिंटो को सांप्रदायिक निर्वाचन का जनक कहा जाता है, वर्ष 1909।