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एसबीएम 2.0 में सीवेज शोधन संयंत्रों को 11,785 करोड़ रुपये मंजूर

स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत छोटे शहरों में सीवेज शोधन संयंत्रों के लिए 11,785 करोड़ रुपये की परियोजनाएं मंजूर हुईं, जिनसे 4,900 एमएलडी क्षमता जुड़ेगी।

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एसबीएम 2.0 में सीवेज शोधन संयंत्रों को 11,785 करोड़ रुपये मंजूर

चर्चा में क्यों

30 सितंबर 2026 को जारी पीआईबी बैकग्राउंडर में बताया गया कि स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के तहत उपयोग किए गए जल प्रबंधन से सीवेज को संसाधन में बदला जा रहा है, और जयपुर, इंदौर, सूरत, नवी मुंबई तथा तिरुपति के मॉडल गिनाए गए।

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के तहत इस्तेमाल हो चुके पानी को अब कचरा नहीं, संसाधन माना जा रहा है। इसके उपयोग किए गए जल प्रबंधन घटक में शहरों से कहा गया है कि घरों और दुकानों से निकलने वाले पानी को शोधित करें, बिना शोधित सीवेज को नदियों और तालाबों तक न पहुंचने दें और शोधित पानी को दोबारा काम में लाएं। इस काम के केंद्र में सीवेज शोधन संयंत्र हैं, जिन्हें वाटर प्लस प्रमाणन और ओडीएफ प्लस प्लस प्रोटोकॉल मजबूती देते हैं।

पैसा और क्षमता

एसबीएम 2.0 के तहत छोटे शहरों में सीवेज शोधन संयंत्र लगाने के लिए 11,785 करोड़ रुपये की परियोजनाएं मंजूर की गई हैं। इनसे 4,900 एमएलडी यानी मिलियन लीटर प्रतिदिन शोधन क्षमता जुड़ेगी। शहरी स्थानीय निकायों से कहा गया है कि वे शोधित पानी के पुनः उपयोग के लिए शहर स्तर की दीर्घकालिक योजनाएं बनाएं।

चार शहर, चार तरीके

शहरक्या किया
जयपुरदेहलावास संयंत्र 22.50 हेक्टेयर में 2020-23 के दौरान बना; 215 एमएलडी के साथ राजस्थान में सबसे अधिक शोधन क्षमता; स्काडा से पूरी तरह स्वचालित, अनुक्रमिक बैच रिएक्टर पर आधारित, शोधित पानी द्रव्यवती नदी में और परिसर में 30,000 से अधिक पौधे
इंदौरवाटर प्लस प्रमाणन पाने वाला देश का पहला शहर; 2020 तक सात विकेंद्रीकृत और तीन केंद्रीकृत संयंत्र तथा शोधित पानी के लिए 200 किलोमीटर से अधिक पाइप नेटवर्क; 2022 में 1.25 लाख से अधिक वर्षा जल संचयन इकाइयां
सूरतकुल 116 एमएलडी क्षमता के चार तृतीयक शोधन संयंत्र और रोबोटिक तकनीक सहित 170 सीवर सफाई मशीनें
नवी मुंबईमहाराष्ट्र का इकलौता शहर जिसे पांच सितारा रेटिंग के साथ वाटर प्लस प्रमाणन मिला; संयंत्र 30 लाख आबादी के लिए बने और सीवर लाइनों तथा सेप्टिक टैंकों की सफाई पूरी तरह मशीनों से

शोधित पानी से कमाई

तिरुपति, जिसे वाटर प्लस घोषित किया जा चुका है, थुकीवाकम में आत्मनिर्भर संयंत्र चलाता है। 19 करोड़ रुपये की लागत से बना यह 50 एमएलडी का संयंत्र 1,04,057 घरों को सेवा देता है। इसके शोधित पानी में से 24 एमएलडी दोबारा उपयोग में आता है, जिसमें 5 एमएलडी श्रीकालहस्ती पाइप्स लिमिटेड को बेचा जाता है और उससे हर महीने करीब 6 लाख रुपये की शुद्ध आय होती है, जबकि 18 एमएलडी किसानों को निःशुल्क दिया जाता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

मिशनस्वच्छ भारत मिशन-शहरी; उपयोग किए गए जल प्रबंधन घटक
एसबीएम 2.0 में मंजूरीछोटे शहरों में सीवेज शोधन संयंत्रों के लिए 11,785 करोड़ रुपये
जुड़ने वाली क्षमता4,900 एमएलडी
पहला वाटर प्लस शहरइंदौर
राजस्थान का सबसे बड़ा संयंत्रदेहलावास, जयपुर, 215 एमएलडी, 22.50 हेक्टेयर में
सूरतकुल 116 एमएलडी के चार तृतीयक संयंत्र; 170 सीवर सफाई मशीनें
नवी मुंबईमहाराष्ट्र का इकलौता पांच सितारा और वाटर प्लस शहर; संयंत्र 30 लाख आबादी के लिए
तिरुपति संयंत्रथुकीवाकम, 19 करोड़ रुपये, 50 एमएलडी, 1,04,057 घरों को सेवा
प्रमाणनवाटर प्लस प्रमाणन और ओडीएफ प्लस प्लस प्रोटोकॉल

परीक्षा की दृष्टि से

एसबीएम 2.0 के 11,785 करोड़ रुपये और 4,900 एमएलडी क्षमता, इंदौर का पहला वाटर प्लस शहर होना, जयपुर के देहलावास संयंत्र की 215 एमएलडी क्षमता, सूरत के 116 एमएलडी तृतीयक शोधन, नवी मुंबई की पांच सितारा रेटिंग और तिरुपति के 50 एमएलडी राजस्व मॉडल को याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.पर्यावरणमध्यम

वाटर प्लस प्रमाणन पाने वाला भारत का पहला शहर कौन सा था?

  1. A.सूरत
  2. B.इंदौर
  3. C.नवी मुंबई
  4. D.तिरुपति
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. इंदौर

व्याख्या

सही उत्तर इंदौर है। शहर ने यह लक्ष्य रखा कि बिना शोधित पानी पर्यावरण में जाए ही नहीं, और इसी दृष्टिकोण ने उसे वाटर प्लस प्रमाणन पाने वाला पहला शहर बनाया। आज उसकी नदियों तथा प्राकृतिक और मानव निर्मित वर्षा जल नालों में बिना शोधित पानी नहीं बहता। विकल्प A यानी सूरत ने अलग रास्ता चुना और तृतीयक शोधन संयंत्रों तथा बड़े पैमाने पर गैर-पेय उपयोग के जरिए शोधित पानी को आर्थिक मूल्य वाला संसाधन बनाया। विकल्प C यानी नवी मुंबई महाराष्ट्र का इकलौता शहर है जिसे पांच सितारा रेटिंग के साथ वाटर प्लस प्रमाणन मिला, पर वह देश में पहला नहीं था। विकल्प D यानी तिरुपति को भी वाटर प्लस घोषित किया गया है और वह राजस्व कमाने वाले संयंत्र के लिए जाना जाता है। इंदौर के मॉडल ने कई छोटे शहरों को प्रेरित किया।

Q2.पर्यावरणमध्यम

एसबीएम 2.0 में मंजूर सीवेज शोधन संयंत्र परियोजनाओं से कितनी शोधन क्षमता जुड़ेगी?

  1. A.1,500 एमएलडी
  2. B.2,750 एमएलडी
  3. C.4,900 एमएलडी
  4. D.7,200 एमएलडी
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 4,900 एमएलडी

व्याख्या

सही उत्तर 4,900 एमएलडी यानी मिलियन लीटर प्रतिदिन है। स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत छोटे शहरों में सीवेज शोधन संयंत्र लगाने के लिए मंजूर परियोजनाओं से इतनी ही क्षमता जुड़ने का अनुमान है, और इनके पीछे कई हजार करोड़ रुपये की राशि है। विकल्प A, B और D में दिए गए आंकड़े मंजूर क्षमता से मेल नहीं खाते। परीक्षा की दृष्टि से मंजूर राशि और उससे जुड़ने वाली क्षमता, दोनों को साथ याद रखें और यह भी कि ये परियोजनाएं महानगरों के बजाय छोटे शहरों के लिए हैं। साथ ही यह क्षमता वाटर प्लस प्रमाणन ढांचे और ओडीएफ प्लस प्लस प्रोटोकॉल के साथ चलती है, जो सीवेज, मल कीचड़ और सेप्टेज के सुरक्षित प्रबंधन को परखते हैं, इसलिए अकेली क्षमता किसी शहर के प्रदर्शन का पूरा पैमाना नहीं है।

Q3.पर्यावरणआसान

राजस्थान का सबसे बड़ा देहलावास सीवेज शोधन संयंत्र किस शहर में है?

  1. A.जोधपुर
  2. B.उदयपुर
  3. C.कोटा
  4. D.जयपुर
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. जयपुर

व्याख्या

सही उत्तर जयपुर है। देहलावास संयंत्र 22.50 हेक्टेयर में 2020-23 के दौरान बना और 215 एमएलडी क्षमता के साथ राजस्थान में सबसे बड़ा है। यह स्काडा प्रणाली से पूरी तरह स्वचालित है और अनुक्रमिक बैच रिएक्टर पर चलता है, जिसमें पानी पार्शल फ्लूम, प्राथमिक क्लैरिफायर और बेसिन से होकर क्लोरीन टैंक तक पहुंचता है। शोधित पानी सिंचाई और उद्योग में दोबारा इस्तेमाल होता है, कुछ हिस्सा पास की कॉलोनी को बागवानी के लिए जाता है और बाकी द्रव्यवती नदी में छोड़ा जाता है, जबकि परिसर के चारों ओर 30,000 से अधिक पौधे लगाए गए हैं। विकल्प A, B और C राजस्थान के अन्य बड़े शहर जोधपुर, उदयपुर और कोटा हैं, जहां यह संयंत्र नहीं है। संयंत्र का नाम, शहर और क्षमता साथ जोड़कर याद रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसबीएम 2.0 के तहत सीवेज शोधन संयंत्रों के लिए कितनी राशि मंजूर हुई है?

छोटे शहरों में सीवेज शोधन संयंत्र लगाने के लिए 11,785 करोड़ रुपये की परियोजनाएं मंजूर की गई हैं, जिनसे 4,900 एमएलडी शोधन क्षमता जुड़ेगी।

वाटर प्लस प्रमाणन पाने वाला देश का पहला शहर कौन सा है?

इंदौर। शहर ने बिना शोधित पानी को पर्यावरण में जाने से रोका और 2020 तक वहां सात विकेंद्रीकृत तथा तीन केंद्रीकृत संयंत्र और 200 किलोमीटर से अधिक पाइप नेटवर्क था।

तिरुपति अपने सीवेज शोधन संयंत्र से कमाई कैसे करता है?

थुकीवाकम का 50 एमएलडी संयंत्र 5 एमएलडी शोधित पानी श्रीकालहस्ती पाइप्स लिमिटेड को बेचता है, जिससे हर महीने करीब 6 लाख रुपये की शुद्ध आय होती है, और 18 एमएलडी किसानों को मुफ्त मिलता है।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS