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नवीज्ञान 2026 में एमएचआई इंडस्ट्री एक्सेलेरेटर रिपोर्ट जारी

भारी उद्योग मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने नवीज्ञान 2026 में एमएचआई इंडस्ट्री एक्सेलेरेटर की प्रभाव रिपोर्ट जारी की; 35.72 करोड़ रुपये से दस तकनीकें आगे बढ़ीं।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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नवीज्ञान 2026 में एमएचआई इंडस्ट्री एक्सेलेरेटर रिपोर्ट जारी

चर्चा में क्यों

30 सितंबर 2026 को केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने नई दिल्ली में नवीज्ञान 2026 के दौरान एमएचआई इंडस्ट्री एक्सेलेरेटर परियोजना की प्रभाव रिपोर्ट जारी की, जिससे यह परियोजना संपन्न हुई।

केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने नई दिल्ली में नवीज्ञान 2026 के दौरान भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) इंडस्ट्री एक्सेलेरेटर परियोजना की प्रभाव रिपोर्ट जारी की और उसे डिजिटल रूप से लॉन्च किया। इसी के साथ एक्सेलेरेटर परियोजना संपन्न हुई और मंत्री ने परियोजना से जुड़े सदस्यों को सम्मानित भी किया।

एक्सेलेरेटर ने क्या किया

एक्सेलेरेटर के तहत दस तकनीकों को 35.72 करोड़ रुपये अनुदान सहायता के रूप में दिए गए, ताकि हर तकनीक प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर तीन से स्तर नौ तक पहुंच सके, यानी प्रयोगशाला के शुरुआती विचार से बाजार के लायक उत्पाद तक। ये तकनीकें भविष्य की गतिशीलता से जुड़े क्षेत्रों, जैसे इलेक्ट्रिक पावरट्रेन, हाई वोल्टेज मोटर नियंत्रण और ऊर्जा भंडारण से संबंधित हैं। मंत्री के अनुसार सबसे अहम नतीजा यह रहा कि शुरुआती प्रोटोटाइप व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य उत्पादों की ओर बढ़े।

मूल योजना

यह एक्सेलेरेटर भारतीय पूंजीगत वस्तु क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की योजना, चरण दो की पहलों में से एक है। इस योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 1,207 करोड़ रुपये है और यह साझा प्रौद्योगिकी विकास तथा सेवा अवसंरचना को सहारा देती है। अब तक इसके अंतर्गत तैंतीस परियोजनाएं मंजूर की जा चुकी हैं।

मंत्री ने क्या कहा

कुमारस्वामी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का अर्थ केवल उन्नत तकनीक का बड़ा बाजार बनना नहीं है, बल्कि देश को खुद ऐसी तकनीक विकसित करनी, बनानी और निर्यात करनी होगी। उन्होंने भूमिकाओं को एक-दूसरे का पूरक बताया, जिसमें सरकार नीति और लक्षित सहायता देती है, उद्योग बाजार की समझ तथा विनिर्माण क्षमता लाता है, शोध संस्थान और शिक्षा जगत ज्ञान देते हैं और स्टार्टअप नई सोच तथा फुर्ती लाते हैं। उन्होंने भारतीय वाहन अनुसंधान संघ (एआरएआई) जैसी संस्थाओं की भूमिका रेखांकित की, जो तकनीक के विकास, उसके सत्यापन और उद्योग द्वारा अपनाए जाने के बीच की खाई पाटती हैं।

आगे का लक्ष्य

विकसित भारत@2047 की ओर देखते हुए मंत्री ने कहा कि ध्यान शिक्षित करने, नवाचार करने, विनिर्माण करने और तकनीकों को देश के भीतर एकीकृत करने पर रहना चाहिए और फिर भारतीय तकनीक को वैश्विक बाजारों तक ले जाना चाहिए। उन्होंने जोड़ा कि आत्मनिर्भरता आयात के विकल्प तक सीमित न रहकर भारतीय बौद्धिक संपदा, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और कौशल भी खड़ा करे।

महत्वपूर्ण तथ्य

जारी रिपोर्टएमएचआई इंडस्ट्री एक्सेलेरेटर परियोजना की प्रभाव रिपोर्ट
किसने जारी कीएच. डी. कुमारस्वामी, केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री
आयोजननवीज्ञान 2026, नई दिल्ली
अनुदान सहायतादस तकनीकों के लिए 35.72 करोड़ रुपये
प्रौद्योगिकी तैयारी स्तरस्तर तीन से स्तर नौ तक
मूल योजनाभारतीय पूंजीगत वस्तु क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की योजना, चरण दो
योजना परिव्यय1,207 करोड़ रुपये; 33 परियोजनाएं मंजूर
क्षेत्रइलेक्ट्रिक पावरट्रेन, हाई वोल्टेज मोटर नियंत्रण, ऊर्जा भंडारण
उल्लिखित संस्थाभारतीय वाहन अनुसंधान संघ (एआरएआई)

परीक्षा की दृष्टि से

मंत्री (एच. डी. कुमारस्वामी) और मंत्रालय (भारी उद्योग एवं इस्पात), आयोजन (नवीज्ञान 2026, नई दिल्ली), अनुदान (35.72 करोड़ रुपये), तकनीकों की संख्या (दस), स्तर तीन से नौ तक की छलांग, मूल योजना का परिव्यय (1,207 करोड़ रुपये) और 33 मंजूर परियोजनाएं तथा विकसित भारत@2047 याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

एमएचआई इंडस्ट्री एक्सेलेरेटर कार्यक्रम ने दस तकनीकों के लिए कितनी अनुदान सहायता दी?

  1. A.12.50 करोड़ रुपये
  2. B.35.72 करोड़ रुपये
  3. C.120 करोड़ रुपये
  4. D.500 करोड़ रुपये
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 35.72 करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर 35.72 करोड़ रुपये है। एक्सेलेरेटर कार्यक्रम के तहत दस तकनीकों को यही राशि अनुदान सहायता के रूप में दी गई, जिसका उद्देश्य उन्हें प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर तीन से स्तर नौ तक ले जाना था, यानी प्रयोगशाला के शुरुआती चरण से बाजार के लिए तैयार उत्पाद तक। विकल्प A, C और D में दी गई राशियां इस कार्यक्रम से जुड़ी नहीं हैं। ध्यान रखने वाली बड़ी संख्या मूल योजना का परिव्यय है, यानी भारतीय पूंजीगत वस्तु क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की योजना के चरण दो का परिव्यय, जो कहीं अधिक है और कई परियोजनाओं में साझा प्रौद्योगिकी विकास तथा सेवा अवसंरचना को सहारा देता है। परीक्षा में अक्सर ये दोनों आंकड़े आपस में उलझाकर पूछे जाते हैं, इसलिए छोटी राशि को एक्सेलेरेटर से और बड़ी राशि को योजना से जोड़कर याद रखें।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

एक्सेलेरेटर का लक्ष्य तकनीकों को किन प्रौद्योगिकी तैयारी स्तरों के बीच ले जाना था?

  1. A.स्तर एक से स्तर पांच
  2. B.स्तर दो से स्तर छह
  3. C.स्तर तीन से स्तर नौ
  4. D.स्तर पांच से स्तर सात
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. स्तर तीन से स्तर नौ

व्याख्या

सही उत्तर स्तर तीन से स्तर नौ है। अनुदान सहायता का उद्देश्य दस तकनीकों को प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर तीन से, जहां अवधारणा प्रयोगशाला में सिद्ध होती है, स्तर नौ तक पहुंचाना था, जहां तकनीक अपने वास्तविक परिवेश में सिद्ध होकर बेची जा सकती है। मंत्री ने इसे सरल शब्दों में शुरुआती प्रोटोटाइप से व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य उत्पादों की ओर बढ़ना बताया, जो इलेक्ट्रिक पावरट्रेन, हाई वोल्टेज मोटर नियंत्रण और ऊर्जा भंडारण जैसे क्षेत्रों में हुआ। विकल्प A, B और D में बताई गई यात्रा बीच में ही रुक जाती है और बाजार के लिए तैयार उत्पाद तक नहीं पहुंचती, इसलिए वे कार्यक्रम की बनावट से मेल नहीं खातीं। सबसे ऊंचे स्तर तक की पूरी छलांग ही इस पहल की खास बात रही।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

तकनीक के विकास, सत्यापन और उद्योग द्वारा अपनाए जाने के बीच सेतु के रूप में किस संस्था का नाम लिया गया?

  1. A.एआरएआई
  2. B.सीएसआईआर
  3. C.डीआरडीओ
  4. D.आईसीएआर
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. एआरएआई

व्याख्या

सही उत्तर एआरएआई यानी भारतीय वाहन अनुसंधान संघ है। कार्यक्रम में एच. डी. कुमारस्वामी ने एआरएआई जैसी संस्थाओं की भूमिका रेखांकित की, जो किसी तकनीक के विकास, उसके सत्यापन और उद्योग द्वारा उसे अपनाने के बीच की दूरी पाटती हैं। यह भूमिका समर्थित तकनीकों के गतिशीलता संबंधी दायरे से स्वाभाविक रूप से मेल खाती है। विकल्प B यानी सीएसआईआर वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद है, जो सामान्य वैज्ञानिक शोध नेटवर्क है और यहां उसका नाम नहीं आया। विकल्प C यानी डीआरडीओ रक्षा अनुसंधान और विकास से जुड़ा है। विकल्प D यानी आईसीएआर कृषि अनुसंधान और शिक्षा की शीर्ष संस्था है। मंत्री ने सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत और स्टार्टअप की पूरक भूमिकाओं की भी चर्चा की, जिसमें सत्यापन की कड़ी एआरएआई ने जोड़ी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमएचआई इंडस्ट्री एक्सेलेरेटर ने कितनी सहायता दी और कितनी तकनीकों को?

दस तकनीकों के लिए 35.72 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता, ताकि हर तकनीक प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर तीन से स्तर नौ तक, यानी शुरुआती प्रोटोटाइप से व्यावसायिक उत्पाद तक पहुंच सके।

यह एक्सेलेरेटर किस योजना के अंतर्गत आता है?

भारतीय पूंजीगत वस्तु क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की योजना के चरण दो के अंतर्गत। इसका कुल परिव्यय 1,207 करोड़ रुपये है और इसके तहत 33 परियोजनाएं मंजूर हो चुकी हैं।

प्रभाव रिपोर्ट कहां जारी की गई?

नई दिल्ली में नवीज्ञान 2026 के दौरान, केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने, जिन्होंने परियोजना से जुड़े सदस्यों को सम्मानित भी किया।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS