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आईडब्ल्यूसी-70: होबार्ट में भारत ने व्हेल संरक्षण पर रुख रखा

ऑस्ट्रेलिया के होबार्ट में चल रही अंतर्राष्ट्रीय व्हेलिंग आयोग की 70वीं बैठक में भारत ने व्हेल और अन्य सीटेशियन के वैज्ञानिक संरक्षण पर बल दिया।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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आईडब्ल्यूसी-70: होबार्ट में भारत ने व्हेल संरक्षण पर रुख रखा

चर्चा में क्यों

ऑस्ट्रेलिया के होबार्ट में आईडब्ल्यूसी-70 में भारत ने अपने आरंभिक वक्तव्य में व्हेल तथा अन्य सीटेशियन के वैज्ञानिक संरक्षण, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और खतरों से निपटने के व्यावहारिक उपायों पर बल दिया।

भारत ने अंतर्राष्ट्रीय व्हेलिंग आयोग की 70वीं बैठक (आईडब्ल्यूसी-70) में व्हेल, डॉल्फिन और पॉरपॉइज़ के अधिक मजबूत तथा साक्ष्य आधारित संरक्षण की माँग रखी है। यह बैठक ऑस्ट्रेलिया के होबार्ट में 28 सितंबर से 02 अक्टूबर 2026 तक चल रही है और भारत ने पहले ही दिन अपने आरंभिक वक्तव्य में अपना पक्ष रखा।

भारत ने क्या कहा

भारत ने बैठक में कहा कि सीटेशियन यानी समुद्री स्तनधारियों की ठीक से रक्षा तभी हो सकेगी जब उनके प्राकृतिक क्षेत्र वाले देश, वैज्ञानिक संस्थान और अंतर्राष्ट्रीय संगठन मिलकर काम करते रहें। इन जीवों की संख्या, उनका फैलाव, उनकी आवाजाही, प्रजनन और उन पर मंडराते खतरों की बेहतर जानकारी ही, भारत के मत में, किसी भी संरक्षण उपाय का आधार होनी चाहिए। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि आयोग के निर्णय अनुमान पर नहीं, ठोस वैज्ञानिक समझ पर टिके रहने चाहिए। भारत ने सरकारों, शोधकर्ताओं और तटीय समुदायों के बीच गहरे सहयोग की वकालत भी की, ताकि जो उपाय बनें वे व्यावहारिक हों और उस जगह के अनुकूल हों जहाँ उन्हें लागू किया जाना है।

अस्सी वर्ष पुरानी संधि

इस बार की बैठक का महत्व इसलिए भी अधिक है कि यह व्हेलिंग विनियमन संबंधी अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय पर हस्ताक्षर की अस्सीवीं वर्षगाँठ के साथ पड़ रही है। यह संधि वाशिंगटन डीसी में 02.12.1946 को हुई थी और इसी ने अंतर्राष्ट्रीय व्हेलिंग आयोग को व्हेल शिकार के नियमन तथा व्हेल संरक्षण के लिए जिम्मेदार वैश्विक निकाय के रूप में जन्म दिया। आज इसकी सदस्यता 89 सरकारों तक फैली है। भारत 1981 से इसका सदस्य है और तब से इसके कामकाज में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है।

भारत में संरक्षण के उपाय

भारतीय जलक्षेत्र में पाई जाने वाली व्हेल और डॉल्फिन प्रजातियों को वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अंतर्गत सर्वोच्च स्तर का कानूनी संरक्षण प्राप्त है। देश में कई समुद्री संरक्षित क्षेत्र भी अधिसूचित किए गए हैं, जिनमें व्हेल और डॉल्फिन के साथ डुगोंग, शार्क, रे, कछुए और मूँगा भी आते हैं। कानून से आगे बढ़कर सरकार प्रोजेक्ट डॉल्फिन चला रही है, जो डॉल्फिन, व्हेल, पॉरपॉइज़ और उनके जलीय पारितंत्र को अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही समस्या मानकर देखता है। अरब सागर की हंपबैक व्हेल पर भारत विशेष ध्यान देता है, जो केंद्रित संरक्षण प्रयासों के लिए चुनी गई 25 प्रजातियों में शामिल है।

होबार्ट में भारत की माँग

अंत में भारत ने दोहराया कि आयोग का आगे का एजेंडा विज्ञान आधारित प्राथमिकताओं, सीमा पार सहयोग और ऐसे उपायों से तय होना चाहिए जो सीटेशियन पर मंडराते अनेक खतरों के विरुद्ध सचमुच लागू किए जा सकें।

महत्वपूर्ण तथ्य

आयोजनअंतर्राष्ट्रीय व्हेलिंग आयोग की 70वीं बैठक (आईडब्ल्यूसी-70)
स्थानहोबार्ट, ऑस्ट्रेलिया
तिथियाँ28 सितंबर से 02 अक्टूबर 2026
मूल संधिव्हेलिंग विनियमन संबंधी अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय
संधि पर हस्ताक्षरवाशिंगटन डीसी, 02.12.1946
आयोग की सदस्यता89 सरकारें
भारत की सदस्यता1981 से
भारतीय कानूनवन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972
भारतीय कार्यक्रमप्रोजेक्ट डॉल्फिन
विशेष प्रजातिअरब सागर की हंपबैक व्हेल, 25 चयनित प्रजातियों में
संबंधित मंत्रालयपर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय

परीक्षा की दृष्टि से

बैठक का संस्करण (70वाँ), स्थान (होबार्ट, ऑस्ट्रेलिया), तिथियाँ (28 सितंबर से 02 अक्टूबर 2026), मूल संधि (व्हेलिंग विनियमन संबंधी अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय, वाशिंगटन डीसी में 02.12.1946 को हस्ताक्षरित, अब 80 वर्ष पुरानी), आयोग की 89 सदस्य सरकारें, भारत की सदस्यता 1981 से, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972, प्रोजेक्ट डॉल्फिन और 25 प्रजातियों में अरब सागर की हंपबैक व्हेल - ये सब याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.पर्यावरणआसान

अंतर्राष्ट्रीय व्हेलिंग आयोग की 70वीं बैठक (आईडब्ल्यूसी-70) किस शहर में हो रही है?

  1. A.वेलिंगटन, न्यूज़ीलैंड
  2. B.होबार्ट, ऑस्ट्रेलिया
  3. C.रेक्याविक, आइसलैंड
  4. D.बर्गन, नॉर्वे
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. होबार्ट, ऑस्ट्रेलिया

व्याख्या

सही उत्तर होबार्ट, ऑस्ट्रेलिया है। तस्मानिया का यही शहर अंतर्राष्ट्रीय व्हेलिंग आयोग की सत्तरवीं बैठक की मेज़बानी कर रहा है, जो सितंबर की अट्ठाईस तारीख से अक्टूबर की दो तारीख तक चलेगी। भारत ने यहीं अपने आरंभिक वक्तव्य में विज्ञान पर आधारित संरक्षण की वकालत की। विकल्प A गलत है क्योंकि यह बैठक न्यूज़ीलैंड में नहीं हो रही; इस संस्करण का मेज़बान देश ऑस्ट्रेलिया है। विकल्प C गलत है क्योंकि आइसलैंड का नाम व्हेल शिकार की बहसों से जुड़ा रहा है, पर वह इस बैठक का आयोजन स्थल नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि नॉर्वे भी व्हेलिंग के इतिहास में आता है, परंतु सत्तरवीं बैठक वहाँ नहीं हो रही। परीक्षा में संस्करण संख्या, शहर और देश - तीनों को साथ जोड़कर याद रखना चाहिए।

Q2.पर्यावरणमध्यम

भारत किस वर्ष से अंतर्राष्ट्रीय व्हेलिंग आयोग का सदस्य है?

  1. A.1946
  2. B.1972
  3. C.1981
  4. D.1995
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 1981

व्याख्या

सही उत्तर 1981 है। भारत इसी वर्ष अंतर्राष्ट्रीय व्हेलिंग आयोग का सदस्य बना और तब से व्हेल संरक्षण में इस निकाय के भीतर सक्रिय भूमिका निभाता आया है। विकल्प A गलत है क्योंकि उस वर्ष वाशिंगटन डीसी में व्हेलिंग विनियमन संबंधी अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय पर हस्ताक्षर हुए थे, जिससे आयोग की स्थापना हुई; निकाय की स्थापना और भारत की सदस्यता दो अलग घटनाएँ हैं, और आईडब्ल्यूसी-70 उसी हस्ताक्षर की अस्सीवीं वर्षगाँठ के साथ पड़ रही है। विकल्प B गलत है क्योंकि वह भारतीय कानून वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम का वर्ष है, जिसके तहत भारतीय जल की व्हेल और डॉल्फिन को सर्वोच्च संरक्षण मिलता है; यह घरेलू कानून है, सदस्यता की तिथि नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि इस विवरण की कोई घटना उस वर्ष नहीं पड़ती। आयोग में आज 89 सदस्य सरकारें हैं।

Q3.पर्यावरणमध्यम

केंद्रित संरक्षण प्रयासों के लिए चुनी गई 25 प्रजातियों में भारत किस व्हेल को शामिल करता है?

  1. A.ब्लू व्हेल
  2. B.अरब सागर की हंपबैक व्हेल
  3. C.स्पर्म व्हेल
  4. D.ब्राइड्स व्हेल
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. अरब सागर की हंपबैक व्हेल

व्याख्या

सही उत्तर अरब सागर की हंपबैक व्हेल है। भारत इस आबादी को विशेष महत्व देता है और उसे उन प्रजातियों की सूची में रखा है जिन पर केंद्रित संरक्षण प्रयास किए जाने हैं; यह सूची कुल पच्चीस प्रजातियों की है। इस काम का बड़ा ढाँचा प्रोजेक्ट डॉल्फिन है, जो डॉल्फिन, व्हेल, पॉरपॉइज़ और उन्हें सँभालने वाले जलीय पारितंत्र को एक ही संरक्षण कार्य मानकर चलता है। विकल्प A गलत है क्योंकि ब्लू व्हेल सबसे बड़ा जीव होते हुए भी इस वक्तव्य में अलग से चिह्नित प्रजाति नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि स्पर्म व्हेल का नाम यहाँ केंद्रित प्रयास वाली प्रजातियों में नहीं आता। विकल्प D भी इसी कारण गलत है। देश के समुद्री संरक्षित क्षेत्रों में डुगोंग, शार्क, रे, कछुए और मूँगा भी आते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंतर्राष्ट्रीय व्हेलिंग आयोग की 70वीं बैठक कहाँ हो रही है?

ऑस्ट्रेलिया के होबार्ट में, 28 सितंबर से 02 अक्टूबर 2026 तक। भारत ने वहाँ अपने आरंभिक वक्तव्य में व्हेल और अन्य सीटेशियन के वैज्ञानिक संरक्षण की माँग रखी।

व्हेलिंग विनियमन संबंधी अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय पर हस्ताक्षर कब हुए थे?

वाशिंगटन डीसी में 02.12.1946 को। आईडब्ल्यूसी-70 इसकी 80वीं वर्षगाँठ के साथ पड़ रही है। इसी अभिसमय ने अंतर्राष्ट्रीय व्हेलिंग आयोग की स्थापना की, जिसमें अब 89 सदस्य सरकारें हैं।

भारत में व्हेल और डॉल्फिन को कौन सा कानून संरक्षण देता है?

वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 भारतीय जल की सीटेशियन प्रजातियों को सर्वोच्च स्तर का कानूनी संरक्षण देता है। भारत प्रोजेक्ट डॉल्फिन भी चलाता है और कई समुद्री संरक्षित क्षेत्र अधिसूचित किए गए हैं।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS