वाटर प्लस प्रमाणन पाने वाला भारत का पहला शहर कौन सा था?
- A.सूरत
- B.इंदौर
- C.नवी मुंबई
- D.तिरुपति
सही उत्तर
B. इंदौर
व्याख्या
सही उत्तर इंदौर है। शहर ने यह लक्ष्य रखा कि बिना शोधित पानी पर्यावरण में जाए ही नहीं, और इसी दृष्टिकोण ने उसे वाटर प्लस प्रमाणन पाने वाला पहला शहर बनाया। आज उसकी नदियों तथा प्राकृतिक और मानव निर्मित वर्षा जल नालों में बिना शोधित पानी नहीं बहता। विकल्प A यानी सूरत ने अलग रास्ता चुना और तृतीयक शोधन संयंत्रों तथा बड़े पैमाने पर गैर-पेय उपयोग के जरिए शोधित पानी को आर्थिक मूल्य वाला संसाधन बनाया। विकल्प C यानी नवी मुंबई महाराष्ट्र का इकलौता शहर है जिसे पांच सितारा रेटिंग के साथ वाटर प्लस प्रमाणन मिला, पर वह देश में पहला नहीं था। विकल्प D यानी तिरुपति को भी वाटर प्लस घोषित किया गया है और वह राजस्व कमाने वाले संयंत्र के लिए जाना जाता है। इंदौर के मॉडल ने कई छोटे शहरों को प्रेरित किया।
पूरा लेख पढ़ें: एसबीएम 2.0 में सीवेज शोधन संयंत्रों को 11,785 करोड़ रुपये मंजूर
अभ्यास प्रश्न
एसबीएम 2.0 में मंजूर सीवेज शोधन संयंत्र परियोजनाओं से कितनी शोधन क्षमता जुड़ेगी?
- A.1,500 एमएलडी
- B.2,750 एमएलडी
- C.4,900 एमएलडी
- D.7,200 एमएलडी
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 4,900 एमएलडी
व्याख्या
सही उत्तर 4,900 एमएलडी यानी मिलियन लीटर प्रतिदिन है। स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत छोटे शहरों में सीवेज शोधन संयंत्र लगाने के लिए मंजूर परियोजनाओं से इतनी ही क्षमता जुड़ने का अनुमान है, और इनके पीछे कई हजार करोड़ रुपये की राशि है। विकल्प A, B और D में दिए गए आंकड़े मंजूर क्षमता से मेल नहीं खाते। परीक्षा की दृष्टि से मंजूर राशि और उससे जुड़ने वाली क्षमता, दोनों को साथ याद रखें और यह भी कि ये परियोजनाएं महानगरों के बजाय छोटे शहरों के लिए हैं। साथ ही यह क्षमता वाटर प्लस प्रमाणन ढांचे और ओडीएफ प्लस प्लस प्रोटोकॉल के साथ चलती है, जो सीवेज, मल कीचड़ और सेप्टेज के सुरक्षित प्रबंधन को परखते हैं, इसलिए अकेली क्षमता किसी शहर के प्रदर्शन का पूरा पैमाना नहीं है।
राजस्थान का सबसे बड़ा देहलावास सीवेज शोधन संयंत्र किस शहर में है?
- A.जोधपुर
- B.उदयपुर
- C.कोटा
- D.जयपुर
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. जयपुर
व्याख्या
सही उत्तर जयपुर है। देहलावास संयंत्र 22.50 हेक्टेयर में 2020-23 के दौरान बना और 215 एमएलडी क्षमता के साथ राजस्थान में सबसे बड़ा है। यह स्काडा प्रणाली से पूरी तरह स्वचालित है और अनुक्रमिक बैच रिएक्टर पर चलता है, जिसमें पानी पार्शल फ्लूम, प्राथमिक क्लैरिफायर और बेसिन से होकर क्लोरीन टैंक तक पहुंचता है। शोधित पानी सिंचाई और उद्योग में दोबारा इस्तेमाल होता है, कुछ हिस्सा पास की कॉलोनी को बागवानी के लिए जाता है और बाकी द्रव्यवती नदी में छोड़ा जाता है, जबकि परिसर के चारों ओर 30,000 से अधिक पौधे लगाए गए हैं। विकल्प A, B और C राजस्थान के अन्य बड़े शहर जोधपुर, उदयपुर और कोटा हैं, जहां यह संयंत्र नहीं है। संयंत्र का नाम, शहर और क्षमता साथ जोड़कर याद रखें।
नए CAFE ढांचे में रिपोर्टिंग के लिए कौन से दो जांच चक्र अपनाए जाएंगे?
- A.MIDC और WLTP
- B.MIDC और NEDC
- C.WLTP और RDE
- D.ARAI चक्र और FTP-75
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. MIDC और WLTP
व्याख्या
सही उत्तर MIDC और WLTP है। नए CAFE ढांचे में रिपोर्टिंग मॉडिफाइड इंडियन ड्राइविंग साइकल और वर्ल्डवाइड हार्मोनाइज्ड लाइट वीहिकल्स टेस्ट प्रोसीड्योर, दोनों पर होगी। दोनों को साथ अपनाने से भारत अपना स्थापित चक्र बनाए रखते हुए धीरे-धीरे दुनिया भर में प्रचलित जांच पद्धति की ओर बढ़ सकेगा, इसीलिए अधिसूचना इसे दोहरा तरीका कहती है। विकल्प B भारतीय चक्र को एक पुराने चक्र के साथ जोड़ता है, जिसका इस ढांचे में जिक्र नहीं है। विकल्प C में भारतीय चक्र ही छूट जाता है, और विकल्प D में दी गई पद्धतियां इस अधिसूचना का हिस्सा नहीं हैं। परीक्षा के लिए दोनों के पूरे नाम याद रखें, MIDC के लिए मॉडिफाइड इंडियन ड्राइविंग साइकल और WLTP के लिए वर्ल्डवाइड हार्मोनाइज्ड लाइट वीहिकल्स टेस्ट प्रोसीड्योर, और यह भी कि नए मानक दोनों को साथ-साथ इस्तेमाल करते हैं, एक की जगह दूसरा नहीं।
यात्री वाहनों के लिए नए कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल इकॉनमी (CAFE) मानक किस केंद्रीय मंत्रालय ने अधिसूचित किए?
- A.सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय
- B.भारी उद्योग मंत्रालय
- C.विद्युत मंत्रालय
- D.पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. विद्युत मंत्रालय
व्याख्या
सही उत्तर विद्युत मंत्रालय है। यात्री वाहनों के नए CAFE मानक विद्युत मंत्रालय ने अधिसूचित किए हैं। ऊर्जा दक्षता का विषय इसी मंत्रालय के पास है और इसके अधीन काम करने वाला ऊर्जा दक्षता ब्यूरो ही नए ढांचे में क्रेडिट की बायआउट व्यवस्था चलाएगा। ये मानक 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होंगे और 31 मार्च 2032 तक लागू रहेंगे। विकल्प A यानी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय वाहनों की सुरक्षा और पंजीकरण से जुड़े नियम बनाता है, पर यह अधिसूचना उसने जारी नहीं की। विकल्प B यानी भारी उद्योग मंत्रालय वाहन उद्योग और इलेक्ट्रिक गतिशीलता की योजनाएं देखता है, फिर भी ईंधन दक्षता के मानक उसके जरिये अधिसूचित नहीं होते। विकल्प D यानी पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ईंधन आपूर्ति और मिश्रण कार्यक्रम संभालता है, और नए ढांचे में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को कार्बन न्यूट्रैलिटी फैक्टर से मान्यता मिली है, लेकिन अधिसूचना विद्युत मंत्रालय की है। परीक्षार्थी CAFE मानकों को विद्युत मंत्रालय और ऊर्जा दक्षता ब्यूरो से जोड़कर याद रखें।
नए CAFE मानकों के अनुसार 2031-32 तक बेड़ा-स्तरीय ईंधन खपत मानदंड किस स्तर पर लाया जाएगा?
- A.3.996 लीटर प्रति 100 किलोमीटर
- B.3.3273 लीटर प्रति 100 किलोमीटर
- C.4.500 लीटर प्रति 100 किलोमीटर
- D.2.8750 लीटर प्रति 100 किलोमीटर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 3.3273 लीटर प्रति 100 किलोमीटर
व्याख्या
सही उत्तर 3.3273 लीटर प्रति 100 किलोमीटर है। नए ढांचे में ईंधन खपत का बेड़ा-स्तरीय मानदंड 2027-28 में 3.996 लीटर प्रति 100 किलोमीटर से शुरू होता है और हर साल कड़ा होते-होते 2031-32 में 3.3273 लीटर प्रति 100 किलोमीटर पर पहुंच जाता है। कुल मिलाकर यह पांच साल की अवधि में ईंधन दक्षता में लगभग 16.7 प्रतिशत का सुधार है। विकल्प A यानी 3.996 लीटर प्रति 100 किलोमीटर अवधि के पहले साल का आंकड़ा है, अंतिम साल का नहीं, इसलिए वह गलत है। विकल्प C शुरुआती मानदंड से भी ऊंचा है, जिसका मतलब कारों का अधिक ईंधन पीना होता, जो इन मानकों के उद्देश्य के उलट है। विकल्प D अधिसूचित आंकड़े से काफी नीचे है और ढांचे में कहीं नहीं आता। याद रखने का सरल तरीका यह जोड़ी है: अवधि 3.996 से खुलती है और 3.3273 लीटर प्रति 100 किलोमीटर पर बंद होती है।