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CAFE मानक अधिसूचित, 2031-32 तक ईंधन खपत 16.7% घटेगी

विद्युत मंत्रालय ने यात्री वाहनों के लिए नए CAFE मानक अधिसूचित किए, जो 1 अप्रैल 2027 से 31 मार्च 2032 तक लागू रहेंगे और दक्षता 16.7% सुधारेंगे।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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चर्चा में क्यों

30 सितंबर 2026 को विद्युत मंत्रालय ने यात्री वाहनों के लिए नए कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल इकॉनमी (CAFE) मानक अधिसूचित किए। ये 1 अप्रैल 2027 से 31 मार्च 2032 तक लागू रहेंगे और ईंधन दक्षता में करीब 16.7 प्रतिशत सुधार का लक्ष्य रखते हैं।

विद्युत मंत्रालय ने यात्री कारों के लिए नए कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल इकॉनमी (CAFE) मानक अधिसूचित कर दिए हैं। ये मानक 1 अप्रैल 2027 से मौजूदा मानकों की जगह लेंगे और 31 मार्च 2032 तक प्रभावी रहेंगे। इनका दायरा देश में बनी कारों तक ही सीमित नहीं है, बिक्री के लिए बाहर से मंगाई गई कारें भी इनमें आएंगी। वाहन निर्माताओं, उद्योग संगठनों और शिक्षा जगत से लंबी बातचीत के बाद ये मानक तय किए गए।

हर साल घटेगी ईंधन खपत

पूरी अवधि के लिए एक ही लक्ष्य नहीं रखा गया है। पांच में से हर साल का लक्ष्य पिछले साल से कड़ा होगा। ईंधन खपत का बेड़ा-स्तरीय मानदंड 2027-28 में 3.996 लीटर प्रति 100 किलोमीटर से शुरू होकर 2031-32 तक 3.3273 लीटर प्रति 100 किलोमीटर पर आ जाएगा। इस तरह पूरे दौर में ईंधन दक्षता में लगभग 16.7 प्रतिशत का सुधार अपेक्षित है।

भारी कारों पर कड़े लक्ष्य

लक्ष्य रेखा को समतल किया गया है, ताकि वजन के साथ बर्ताव अधिक संतुलित रहे। हल्की कारों को कुछ नरम लक्ष्य मिलेंगे, जबकि भारी कारों से ज्यादा दक्षता मांगी जाएगी। जिस संदर्भ वजन पर लक्ष्य वक्र खींचा जाता है, वह मौजूदा मानकों के 1,082 किलोग्राम से बढ़ाकर 1,229 किलोग्राम कर दिया गया है, यानी करीब 13.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी। इसकी वजह यह है कि भारत में बिकने वाली औसत कार अब पहले से भारी हो चुकी है।

अनुपालन के कई रास्ते

नए ढांचे में कार्बन न्यूट्रैलिटी फैक्टर (CNF) जोड़ा गया है, जिससे नवीकरणीय और कम-कार्बन ईंधनों का लाभ निर्माता के स्कोर में गिना जाएगा। एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल, अन्य जैव ईंधन और संपीडित बायो गैस (CBG) इसी फैक्टर से आंके जाएंगे। इससे इंजन की दक्षता और विद्युतीकरण के अलावा एक तीसरा रास्ता खुलता है।

मान्यता प्राप्त ईंधन-बचत तकनीकों की सूची चार से बढ़ाकर बारह कर दी गई है। सौर परावर्तक पेंट, उन्नत ग्लेजिंग और उच्च दक्षता वाली वातानुकूलन प्रणाली अब इसमें शामिल हैं। हर पात्र तकनीक पर 1 ग्राम CO2 प्रति किलोमीटर की छूट मिलेगी, और कुल छूट की सीमा 9.0 ग्राम CO2 प्रति किलोमीटर रखी गई है।

बैटरी इलेक्ट्रिक, रेंज-एक्सटेंडेड इलेक्ट्रिक, प्लग-इन हाइब्रिड, स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बेड़े की गणना में अतिरिक्त भार मिलेगा, जिसे सुपर क्रेडिट कहा जाता है। लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन करने वाले निर्माता को क्रेडिट मिलेंगे, जिन्हें दो या तीन साल के अनुपालन खंडों में आगे ले जाया जा सकता है, दूसरे निर्माता से अदला-बदली की जा सकती है, या ऊर्जा दक्षता ब्यूरो की बायआउट व्यवस्था से खरीदा जा सकता है।

जांच चक्र और छूट

आंकड़े दो चक्रों पर एक साथ दर्ज होंगे, मॉडिफाइड इंडियन ड्राइविंग साइकल (MIDC) और वर्ल्डवाइड हार्मोनाइज्ड लाइट वीहिकल्स टेस्ट प्रोसीड्योर (WLTP)। यह दोहरा तरीका भारत को दुनिया भर में अपनाई जा रही जांच पद्धति की ओर धीरे-धीरे ले जाने के लिए है। जिन निर्माताओं की सालाना बिक्री 1,000 इकाई से कम रहती है, वे बेड़ा-औसत की बाध्यता से बाहर रहेंगे।

महत्वपूर्ण तथ्य

अधिसूचित कियाविद्युत मंत्रालय, भारत सरकार
मानकयात्री वाहनों के लिए कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल इकॉनमी (CAFE) मानक
अवधि1 अप्रैल 2027 से 31 मार्च 2032
ईंधन खपत मानदंड2027-28 में 3.996 लीटर प्रति 100 किलोमीटर से 2031-32 में 3.3273 लीटर प्रति 100 किलोमीटर
अपेक्षित सुधारपांच साल में लगभग 16.7 प्रतिशत
संदर्भ वजन1,082 किलोग्राम से 1,229 किलोग्राम, करीब 13.6 प्रतिशत अधिक
मान्यता प्राप्त तकनीकेंचार से बारह, हर तकनीक पर 1 ग्राम CO2 प्रति किलोमीटर छूट, अधिकतम 9.0 ग्राम CO2 प्रति किलोमीटर
नई सुविधाएथेनॉल मिश्रित पेट्रोल, जैव ईंधन और CBG के लिए कार्बन न्यूट्रैलिटी फैक्टर
सुपर क्रेडिटBEV, REEV, PHEV, स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को
बायआउट व्यवस्थाऊर्जा दक्षता ब्यूरो द्वारा संचालित
जांच चक्रमॉडिफाइड इंडियन ड्राइविंग साइकल (MIDC) और वर्ल्डवाइड हार्मोनाइज्ड लाइट वीहिकल्स टेस्ट प्रोसीड्योर (WLTP)
छूटसालाना 1,000 इकाई से कम बिक्री वाले निर्माता

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें: मंत्रालय (विद्युत), अवधि (1 अप्रैल 2027 से 31 मार्च 2032), मानदंड में बदलाव (3.996 से 3.3273 लीटर प्रति 100 किलोमीटर, लगभग 16.7 प्रतिशत), संदर्भ वजन (1,082 से 1,229 किलोग्राम), तकनीकों की सूची (चार से बारह, हर तकनीक पर 1 ग्राम CO2 प्रति किलोमीटर, अधिकतम 9.0), कार्बन न्यूट्रैलिटी फैक्टर, सुपर क्रेडिट, दो जांच चक्र MIDC और WLTP, बायआउट व्यवस्था चलाने वाला ऊर्जा दक्षता ब्यूरो, और 1,000 इकाई की छूट।

अभ्यास प्रश्न

Q1.पर्यावरणआसान

यात्री वाहनों के लिए नए कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल इकॉनमी (CAFE) मानक किस केंद्रीय मंत्रालय ने अधिसूचित किए?

  1. A.सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय
  2. B.भारी उद्योग मंत्रालय
  3. C.विद्युत मंत्रालय
  4. D.पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. विद्युत मंत्रालय

व्याख्या

सही उत्तर विद्युत मंत्रालय है। यात्री वाहनों के नए CAFE मानक विद्युत मंत्रालय ने अधिसूचित किए हैं। ऊर्जा दक्षता का विषय इसी मंत्रालय के पास है और इसके अधीन काम करने वाला ऊर्जा दक्षता ब्यूरो ही नए ढांचे में क्रेडिट की बायआउट व्यवस्था चलाएगा। ये मानक 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होंगे और 31 मार्च 2032 तक लागू रहेंगे। विकल्प A यानी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय वाहनों की सुरक्षा और पंजीकरण से जुड़े नियम बनाता है, पर यह अधिसूचना उसने जारी नहीं की। विकल्प B यानी भारी उद्योग मंत्रालय वाहन उद्योग और इलेक्ट्रिक गतिशीलता की योजनाएं देखता है, फिर भी ईंधन दक्षता के मानक उसके जरिये अधिसूचित नहीं होते। विकल्प D यानी पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ईंधन आपूर्ति और मिश्रण कार्यक्रम संभालता है, और नए ढांचे में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को कार्बन न्यूट्रैलिटी फैक्टर से मान्यता मिली है, लेकिन अधिसूचना विद्युत मंत्रालय की है। परीक्षार्थी CAFE मानकों को विद्युत मंत्रालय और ऊर्जा दक्षता ब्यूरो से जोड़कर याद रखें।

Q2.पर्यावरणमध्यम

नए CAFE मानकों के अनुसार 2031-32 तक बेड़ा-स्तरीय ईंधन खपत मानदंड किस स्तर पर लाया जाएगा?

  1. A.3.996 लीटर प्रति 100 किलोमीटर
  2. B.3.3273 लीटर प्रति 100 किलोमीटर
  3. C.4.500 लीटर प्रति 100 किलोमीटर
  4. D.2.8750 लीटर प्रति 100 किलोमीटर
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 3.3273 लीटर प्रति 100 किलोमीटर

व्याख्या

सही उत्तर 3.3273 लीटर प्रति 100 किलोमीटर है। नए ढांचे में ईंधन खपत का बेड़ा-स्तरीय मानदंड 2027-28 में 3.996 लीटर प्रति 100 किलोमीटर से शुरू होता है और हर साल कड़ा होते-होते 2031-32 में 3.3273 लीटर प्रति 100 किलोमीटर पर पहुंच जाता है। कुल मिलाकर यह पांच साल की अवधि में ईंधन दक्षता में लगभग 16.7 प्रतिशत का सुधार है। विकल्प A यानी 3.996 लीटर प्रति 100 किलोमीटर अवधि के पहले साल का आंकड़ा है, अंतिम साल का नहीं, इसलिए वह गलत है। विकल्प C शुरुआती मानदंड से भी ऊंचा है, जिसका मतलब कारों का अधिक ईंधन पीना होता, जो इन मानकों के उद्देश्य के उलट है। विकल्प D अधिसूचित आंकड़े से काफी नीचे है और ढांचे में कहीं नहीं आता। याद रखने का सरल तरीका यह जोड़ी है: अवधि 3.996 से खुलती है और 3.3273 लीटर प्रति 100 किलोमीटर पर बंद होती है।

Q3.पर्यावरणमध्यम

नए CAFE मानकों में मान्यता प्राप्त ईंधन-बचत तकनीकों की संख्या चार से बढ़ाकर कितनी कर दी गई है?

  1. A.आठ
  2. B.दस
  3. C.बारह
  4. D.पंद्रह
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. बारह

व्याख्या

सही उत्तर बारह है। पुराने ढांचे में चार ईंधन-बचत तकनीकों को मान्यता थी, नए मानकों ने यह सूची बारह तक बढ़ा दी है, जिससे निर्माताओं को ईंधन बचाने वाले उपकरणों का श्रेय पाने की ज्यादा गुंजाइश मिलेगी। सौर परावर्तक पेंट, उन्नत ग्लेजिंग और उच्च दक्षता वाली वातानुकूलन प्रणाली अब मान्यता प्राप्त तकनीकों में गिनी जाती हैं। हर पात्र तकनीक पर 1 ग्राम CO2 प्रति किलोमीटर की छूट मिलती है और किसी निर्माता की कुल छूट 9.0 ग्राम CO2 प्रति किलोमीटर से अधिक नहीं हो सकती, इसलिए लाभ असली है पर सीमित भी। विकल्प A, B और D में दी गई संख्याएं इस ढांचे में नहीं आतीं; अधिसूचना में केवल चार से बारह की बढ़ोतरी है। अभ्यर्थी दोनों संख्याएं साथ याद रखें, पुरानी चार और नई बारह, साथ ही प्रति तकनीक छूट और उसकी अधिकतम सीमा भी, क्योंकि प्रश्न अक्सर बढ़ोतरी पर बनते हैं।

Q4.पर्यावरणमध्यम

नए CAFE ढांचे में रिपोर्टिंग के लिए कौन से दो जांच चक्र अपनाए जाएंगे?

  1. A.MIDC और WLTP
  2. B.MIDC और NEDC
  3. C.WLTP और RDE
  4. D.ARAI चक्र और FTP-75
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. MIDC और WLTP

व्याख्या

सही उत्तर MIDC और WLTP है। नए CAFE ढांचे में रिपोर्टिंग मॉडिफाइड इंडियन ड्राइविंग साइकल और वर्ल्डवाइड हार्मोनाइज्ड लाइट वीहिकल्स टेस्ट प्रोसीड्योर, दोनों पर होगी। दोनों को साथ अपनाने से भारत अपना स्थापित चक्र बनाए रखते हुए धीरे-धीरे दुनिया भर में प्रचलित जांच पद्धति की ओर बढ़ सकेगा, इसीलिए अधिसूचना इसे दोहरा तरीका कहती है। विकल्प B भारतीय चक्र को एक पुराने चक्र के साथ जोड़ता है, जिसका इस ढांचे में जिक्र नहीं है। विकल्प C में भारतीय चक्र ही छूट जाता है, और विकल्प D में दी गई पद्धतियां इस अधिसूचना का हिस्सा नहीं हैं। परीक्षा के लिए दोनों के पूरे नाम याद रखें, MIDC के लिए मॉडिफाइड इंडियन ड्राइविंग साइकल और WLTP के लिए वर्ल्डवाइड हार्मोनाइज्ड लाइट वीहिकल्स टेस्ट प्रोसीड्योर, और यह भी कि नए मानक दोनों को साथ-साथ इस्तेमाल करते हैं, एक की जगह दूसरा नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नए CAFE मानक कब से लागू होंगे?

ये 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होंगे और 31 मार्च 2032 तक लागू रहेंगे। ये यात्री वाहनों पर लागू होंगे, चाहे वे भारत में बने हों या बिक्री के लिए आयात किए गए हों।

ईंधन दक्षता में कितना सुधार अपेक्षित है?

लगभग 16.7 प्रतिशत। बेड़ा-स्तरीय मानदंड 2027-28 के 3.996 लीटर प्रति 100 किलोमीटर से घटकर 2031-32 में 3.3273 लीटर प्रति 100 किलोमीटर हो जाएगा, और हर साल का लक्ष्य पिछले साल से कड़ा रहेगा।

कार्बन न्यूट्रैलिटी फैक्टर क्या है?

यह नया प्रावधान एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल, जैव ईंधन और संपीडित बायो गैस जैसे कम-कार्बन ईंधनों का श्रेय देता है, जिससे निर्माता स्वच्छ ईंधन के जरिये अपना बेड़ा-स्तरीय CAFE प्रदर्शन सुधार सकता है।

क्रेडिट की बायआउट व्यवस्था कौन चलाएगा?

ऊर्जा दक्षता ब्यूरो। लक्ष्य से पीछे रहने वाला निर्माता क्रेडिट आगे ले जा सकता है, दूसरे निर्माता से अदला-बदली कर सकता है, या इस व्यवस्था से क्रेडिट खरीद सकता है।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS