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देश के पहले प्रमाण वन प्रमाणन पत्र नई दिल्ली में सौंपे गए

पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने भारतीय वन एवं काष्ठ प्रमाणन योजना के तहत देश के पहले प्रमाण पत्र आंध्र प्रदेश वन विकास निगम और ओडिशा के एक किसान को दिए।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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देश के पहले प्रमाण वन प्रमाणन पत्र नई दिल्ली में सौंपे गए

चर्चा में क्यों

29 सितंबर 2026 को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने भारतीय वन एवं काष्ठ प्रमाणन योजना के तहत देश के पहले प्रमाणपत्र सौंपे, जिससे प्रमाण ढांचा नीति से निकलकर ज़मीनी क्रियान्वयन में पहुंच गया।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 29 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में देश के पहले प्रमाण (पीआरएएमएएएन) प्रमाणपत्र सौंपे। ये प्रमाणपत्र भारतीय वन एवं काष्ठ प्रमाणन योजना के तहत दिए जाते हैं, जिसे मंत्रालय ने दिसंबर 2023 में शुरू किया था।

पहले प्रमाणपत्र किसे मिले

दो प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। पहला आंध्र प्रदेश वन विकास निगम को उसके 33,000 हेक्टेयर में फैले वृक्षारोपण के लिए मिला। दूसरा ओडिशा बांस विकास एजेंसी से जुड़े किसान गोविंद महापात्र को दिया गया। प्रमाणपत्र देने से पहले दोनों जगहों की कड़ी क्षेत्रीय और प्रबंधन जांच की गई। इस कदम से योजना कागज़ पर बनी नीति से निकलकर ज़मीन पर उतर गई है और इसके दायरे में वन वृक्षारोपण के साथ-साथ वृक्ष आधारित खेती भी आती है।

कार्यक्रम का आयोजन भारतीय वन प्रबंध संस्थान, भोपाल ने किया, जो इस योजना की संचालन एजेंसी है। इसमें मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, कई राज्यों के वन विभागों के अधिकारी तथा प्रमाणन संस्थाओं और उद्योग के प्रतिनिधि शामिल हुए।

प्रमाण का मतलब क्या है

प्रमाण का पूरा नाम प्रोग्राम फॉर रिकग्निशन एंड एक्रेडिटेशन ऑफ सस्टेनेबल मैनेजमेंट प्रैक्टिसेज़ फॉर एग्रोफॉरेस्ट्री एंड नेचुरल फॉरेस्ट्री रिसोर्सेज़ है। यह वनों, लकड़ी और गैर-काष्ठ वन उत्पादों के प्रमाणन का राष्ट्रीय ढांचा है और इसका उद्देश्य प्रमाणित वन तथा कृषि-वानिकी उत्पादों को देश और विदेश के बाज़ारों से जोड़ना है। वन प्रबंधन की परख भारतीय वन प्रबंधन मानक पर होती है, जो राष्ट्रीय कार्य योजना संहिता 2023 का हिस्सा है। प्रमाणन की नींव स्वतंत्र जांच है, जो भारतीय गुणवत्ता परिषद के अधीन राष्ट्रीय प्रमाणन संस्था प्रत्यायन बोर्ड से मान्यता प्राप्त संस्थाएं करती हैं, न कि उत्पादक की अपनी घोषणा।

व्यापार और आजीविका के लिए महत्व

मंत्री ने कहा कि यह प्रमाणपत्र भारतीय उत्पादकों, निर्यातकों और वन आधारित उद्यमों के लिए ज़रूरी साधन है, क्योंकि बड़े विदेशी बाज़ार अब लकड़ी की खरीद पर सतर्क जांच और वन-कटाई मुक्त आपूर्ति के नियम लागू कर रहे हैं। उनके अनुसार यह व्यवस्था भारत को केवल नियम मानने वाला नहीं, बल्कि टिकाऊ वन प्रबंधन में अग्रणी देश बनाती है, जो 'वोकल फॉर लोकल एंड एक्ट ग्लोबल' की भावना के अनुरूप है।

उन्होंने प्रमाण को आजीविका का अभियान भी बताया। जनजातीय तथा ग्रामीण समुदायों, छोटे किसानों और वनों पर निर्भर परिवारों को एक जांची-परखी व्यवस्था में लाकर यह उन्हें बेहतर दाम वाले बाज़ारों तक पहुंच देता है, वह भी अनुपालन का बोझ बढ़ाए बिना। गैर-काष्ठ वन उत्पादों के संग्रह और प्रसंस्करण में लगे महिला स्वयं सहायता समूहों तथा सीमांत भूमि वाले किसानों को इससे लाभ मिलेगा। मंत्री ने इसे विकसित भारत 2047 के व्यापक लक्ष्य से जोड़ा, जिसमें आर्थिक वृद्धि के साथ पारिस्थितिक संरक्षण भी शामिल है।

महत्वपूर्ण तथ्य

योजनाभारतीय वन एवं काष्ठ प्रमाणन योजना; प्रमाणपत्र का नाम प्रमाण
प्रमाणपत्र सौंपेभूपेंद्र यादव, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री
पहले प्राप्तकर्ताआंध्र प्रदेश वन विकास निगम और किसान गोविंद महापात्र
प्रमाणित क्षेत्र33,000 हेक्टेयर में फैला वृक्षारोपण (आंध्र प्रदेश वन विकास निगम)
किसान की एजेंसीओडिशा बांस विकास एजेंसी
संचालन एजेंसीभारतीय वन प्रबंध संस्थान, भोपाल
योजना की शुरुआतदिसंबर 2023, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
मानकभारतीय वन प्रबंधन मानक, राष्ट्रीय कार्य योजना संहिता 2023 का हिस्सा
प्रत्यायनभारतीय गुणवत्ता परिषद के अधीन राष्ट्रीय प्रमाणन संस्था प्रत्यायन बोर्ड
स्थाननई दिल्ली

परीक्षा की दृष्टि से

योजना का पूरा नाम भारतीय वन एवं काष्ठ प्रमाणन योजना और प्रमाणपत्र का नाम प्रमाण याद रखें। साथ ही प्रमाणपत्र देने वाले मंत्री, दोनों पहले प्राप्तकर्ता, आंध्र प्रदेश वन विकास निगम का 33,000 हेक्टेयर वृक्षारोपण, दिसंबर 2023 में योजना की शुरुआत, संचालन एजेंसी भारतीय वन प्रबंध संस्थान भोपाल, राष्ट्रीय कार्य योजना संहिता 2023 तथा भारतीय गुणवत्ता परिषद के अधीन प्रत्यायन बोर्ड की भूमिका भी।

अभ्यास प्रश्न

Q1.पर्यावरणमध्यम

सितंबर 2026 में देश के पहले प्रमाण प्रमाणपत्र किस योजना के तहत जारी किए गए?

  1. A.राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति
  2. B.भारतीय वन एवं काष्ठ प्रमाणन योजना
  3. C.हरित भारत मिशन
  4. D.प्रतिपूरक वनीकरण योजना
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. भारतीय वन एवं काष्ठ प्रमाणन योजना

व्याख्या

सही उत्तर भारतीय वन एवं काष्ठ प्रमाणन योजना है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री ने इसी योजना के तहत पहले प्रमाणपत्र नई दिल्ली में सौंपे और प्रमाणपत्र का नाम प्रमाण है। मंत्रालय ने यह योजना दिसंबर 2023 में शुरू की थी और इन प्रमाणपत्रों के साथ यह नीति के दायरे से निकलकर ज़मीनी क्रियान्वयन तक पहुंची है। विकल्प A गलत है, क्योंकि कृषि वानिकी से जुड़ी राष्ट्रीय नीति एक अलग दस्तावेज़ है और वह यह प्रमाणपत्र जारी नहीं करती। विकल्प C गलत है, क्योंकि हरित भारत मिशन वन आवरण और पारिस्थितिक सेवाओं को बढ़ाने पर काम करता है, लकड़ी के प्रमाणन पर नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि प्रतिपूरक वनीकरण मोड़े गए वन क्षेत्र की भरपाई से जुड़ा विषय है।

Q2.पर्यावरणमध्यम

33,000 हेक्टेयर में फैले वृक्षारोपण के लिए प्रमाण प्रमाणपत्र किसे मिला?

  1. A.ओडिशा बांस विकास एजेंसी
  2. B.आंध्र प्रदेश वन विकास निगम
  3. C.भारतीय वन प्रबंध संस्थान, भोपाल
  4. D.भारतीय गुणवत्ता परिषद
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. आंध्र प्रदेश वन विकास निगम

व्याख्या

सही उत्तर आंध्र प्रदेश वन विकास निगम है, जिसे क्षेत्रीय और प्रबंधन जांच के बाद 33,000 हेक्टेयर में फैले वृक्षारोपण के लिए प्रमाणपत्र दिया गया। विकल्प A गलत है, क्योंकि ओडिशा बांस विकास एजेंसी से किसान गोविंद महापात्र जुड़े हुए हैं और दूसरा प्रमाणपत्र उस किसान को मिला, एजेंसी को किसी क्षेत्र के लिए नहीं। विकल्प C गलत है, क्योंकि भारतीय वन प्रबंध संस्थान, भोपाल योजना की संचालन एजेंसी है और उसी ने कार्यक्रम आयोजित किया, यानी वह देने वाली संस्था है। विकल्प D गलत है, क्योंकि भारतीय गुणवत्ता परिषद उस प्रत्यायन बोर्ड की मूल संस्था है, जो जांच करने वाली प्रमाणन संस्थाओं को मान्यता देता है। इन भूमिकाओं को अलग-अलग याद रखें - एक प्राप्तकर्ता निगम, एक प्राप्तकर्ता किसान, एक संचालन संस्थान और एक प्रत्यायन श्रृंखला। यह भी ध्यान रखें कि प्रमाणपत्र देने से पहले दोनों जगहों की कड़ी क्षेत्रीय तथा प्रबंधन जांच की गई थी।

Q3.पर्यावरणकठिन

इस प्रमाणन में प्रयुक्त भारतीय वन प्रबंधन मानक किस दस्तावेज़ का हिस्सा है?

  1. A.राष्ट्रीय कार्य योजना संहिता 2023
  2. B.भारतीय वन अधिनियम
  3. C.राष्ट्रीय वन नीति
  4. D.वन सर्वेक्षण नियमावली
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. राष्ट्रीय कार्य योजना संहिता 2023

व्याख्या

सही उत्तर राष्ट्रीय कार्य योजना संहिता 2023 है। प्रमाण के तहत वन प्रबंधन की परख भारतीय वन प्रबंधन मानक पर होती है और यह मानक इसी संहिता का हिस्सा है, इसलिए प्रमाणन की नींव जांची गई वन प्रबंध व्यवस्था है, न कि उत्पादक की स्वयं की घोषणा। जांच स्वतंत्र रूप से वे प्रमाणन संस्थाएं करती हैं, जिन्हें भारतीय गुणवत्ता परिषद के अधीन राष्ट्रीय प्रमाणन संस्था प्रत्यायन बोर्ड से मान्यता मिली होती है, और प्रत्यायन का यह ढांचा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्थाओं की कसौटी पर बनाया गया है, जिससे घरेलू तथा विदेशी खरीदार और नियामक इसे स्वीकार करते हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि भारतीय वन अधिनियम वनों से जुड़ा पुराना कानून है। विकल्प C और D गलत हैं, क्योंकि नीति व्यापक लक्ष्य तय करती है और कोई सर्वेक्षण नियमावली यह मानक नहीं देती।

Q4.पर्यावरणआसान

देश के पहले प्रमाण प्रमाणपत्र किसने सौंपे?

  1. A.प्रधानमंत्री
  2. B.केंद्रीय पर्यावरण मंत्री
  3. C.केंद्रीय कृषि मंत्री
  4. D.महानिदेशक, वन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. केंद्रीय पर्यावरण मंत्री

व्याख्या

सही उत्तर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव हैं, जिनके पास पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय है और जिन्होंने नई दिल्ली में ये प्रमाणपत्र सौंपे। उन्होंने कहा कि यह प्रमाणपत्र भारतीय उत्पादकों, निर्यातकों और वन आधारित उद्यमों को उन नियमों पर खरा उतरने में मदद करता है, जो बड़े विदेशी बाज़ार सतर्क जांच और वन-कटाई मुक्त लकड़ी की खरीद के लिए लागू कर रहे हैं। उन्होंने इसे जनजातीय समुदायों, छोटे किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों तथा गैर-काष्ठ वन उत्पाद संग्राहकों के लिए आजीविका का अभियान भी बताया। विकल्प A गलत है, क्योंकि प्रधानमंत्री ने प्रमाणपत्र नहीं दिए, हालांकि मंत्री ने उनके 'वोकल फॉर लोकल एंड एक्ट ग्लोबल' के आह्वान का उल्लेख किया। विकल्प C गलत है, क्योंकि यह योजना कृषि मंत्रालय की नहीं है। विकल्प D गलत है, क्योंकि वरिष्ठ अधिकारी केवल कार्यक्रम में उपस्थित थे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रमाण क्या है?

प्रमाण वनों, लकड़ी और गैर-काष्ठ वन उत्पादों के प्रमाणन का राष्ट्रीय ढांचा है, जो भारतीय वन एवं काष्ठ प्रमाणन योजना के तहत चलता है। इसका उद्देश्य प्रमाणित वन तथा कृषि-वानिकी उत्पादों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों से जोड़ना है।

देश के पहले प्रमाण प्रमाणपत्र किसे मिले?

आंध्र प्रदेश वन विकास निगम को 33,000 हेक्टेयर के वृक्षारोपण के लिए और ओडिशा बांस विकास एजेंसी से जुड़े किसान गोविंद महापात्र को।

इस योजना की संचालन एजेंसी कौन है?

भारतीय वन प्रबंध संस्थान, भोपाल। योजना को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने दिसंबर 2023 में शुरू किया था।

वन प्रबंधन प्रमाणन किस मानक पर आधारित है?

भारतीय वन प्रबंधन मानक पर, जो राष्ट्रीय कार्य योजना संहिता 2023 का हिस्सा है। जांच भारतीय गुणवत्ता परिषद के अधीन प्रत्यायन बोर्ड से मान्यता प्राप्त संस्थाएं करती हैं।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLNABARD