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PRIP के पहले दौर में 41 परियोजनाएँ, 1,600 करोड़ की मदद मंजूर

औषध विभाग ने PRIP योजना के पहले चरण में फार्मा और मेडटेक की 41 परियोजनाओं के लिए लगभग 1,600 करोड़ रुपये की सहायता मंजूर की, कुल अनुसंधान खर्च 4,620 करोड़ रुपये आँका गया।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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चर्चा में क्यों

30 सितंबर 2026 को औषध विभाग ने बताया कि PRIP योजना के पहले चरण में फार्मा और मेडटेक की 41 नवाचार परियोजनाओं को लगभग 1,600 करोड़ रुपये की सहायता मंजूर हुई है, जिससे उन पर कुल अनुसंधान खर्च 4,620 करोड़ रुपये तक पहुँचेगा।

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीन औषध विभाग ने 30 सितंबर 2026 को बताया कि फार्मा मेडटेक क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहन योजना, जिसे संक्षेप में PRIP कहा जाता है, के पहले चरण में 41 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं के लिए लगभग 1,600 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता तय की गई है।

राशि का जोड़

सरकारी सहायता से लगभग 3,020 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निजी निवेश आने की उम्मीद है, जिससे इन परियोजनाओं पर कुल अनुसंधान एवं विकास खर्च करीब 4,620 करोड़ रुपये तक पहुँच जाएगा। योजना का मूल विचार यही है कि सार्वजनिक धन शुरुआती अनुसंधान का जोखिम घटाए, ताकि कंपनियाँ अपनी पूँजी अधिक लगाएँ।

मंजूर सूची का स्वरूप

वर्गपरियोजनाएँ
प्रारंभिक चरण12
बाद के चरण29
स्टार्टअप और एमएसएमई19
बड़ी कंपनियाँ22
नई औषधियाँ27
जटिल जेनेरिक और बायोसिमिलर5
नवीन चिकित्सा उपकरण9

तालिका की अंतिम तीन पंक्तियाँ वे प्राथमिकता क्षेत्र हैं जिनके आधार पर विभाग अपनी सूची बाँटता है, और इनमें नई औषधियों का हिस्सा सबसे बड़ा है।

सूची में कौन

मंजूर सूची में स्थापित कंपनियों के रूप में बायोकॉन, भारत बायोटेक, सन फार्मा, वॉकहार्ट, जायडस और मैनकाइंड फार्मा तथा नए नवप्रवर्तकों के रूप में पैंडोरम टेक्नोलॉजीज, सेलोजन थेरेप्यूटिक्स, ऑरिजीन ऑन्कोलॉजी और बगवर्क्स रिसर्च जैसे नाम शामिल हैं। सहायता पाने वाला काम नई दवा की खोज से लेकर नैदानिक विकास और चिकित्सा उपकरणों तक फैला है।

किस विज्ञान को पैसा

विभाग ने उदाहरण गिनाए, जैसे बहु-औषधि प्रतिरोधी ग्राम-नेगेटिव संक्रमण के लिए जीवाणुरोधी दवा, कॉर्निया रोग के लिए एक्सोसोम आधारित पुनर्योजी चिकित्सा, इन-विवो कार-टी मंच, रोगी से प्राप्त स्तन कैंसर ऑर्गेनॉइड, प्रोग्राम की जा सकने वाली आरएनए-लक्षित एंटीवायरल तकनीक, संक्रमण की जाँच के लिए पोर्टेबल प्लाज्मोनिक पीसीआर उपकरण और क्षय रोग की पहचान के लिए माइक्रोफ्लुइडिक मंच।

रणनीतिक प्राथमिकता ढाँचा

रणनीतिक प्राथमिकता ढाँचे के अंतर्गत उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों, दुर्लभ रोगों, भारत के लिए चिंताजनक रोगाणुओं में रोगाणुरोधी प्रतिरोध, महामारी की आशंका वाले रोगाणुओं तथा रोकी जा सकने वाली बीमारियों के टीकों के लिए अधिक सहायता मिलती है। इस मार्ग से अब तक छह परियोजनाएँ मंजूर हुई हैं, जिनमें जीवाणुजन्य निमोनिया और मेनिन्जाइटिस, डेंगू, इन्फ्लूएंजा तथा अगली पीढ़ी के क्षय रोग टीके शामिल हैं। पहले दौर के शेष आवेदनों का मूल्यांकन जारी है और आगामी महीने में और परिणाम आने की उम्मीद है। विभाग इसे मात्रा आधारित दवा उद्योग से नवाचार आधारित उद्योग की ओर बदलाव के रूप में देखता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

योजनाPRIP, फार्मा मेडटेक क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहन
कार्यान्वयन विभागऔषध विभाग, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय
पहले दौर में मंजूर परियोजनाएँ41
वित्तीय सहायतालगभग 1,600 करोड़ रुपये
अपेक्षित निजी निवेश3,020 करोड़ रुपये
कुल अनुसंधान एवं विकास निवेशलगभग 4,620 करोड़ रुपये
प्राथमिकता क्षेत्रनई औषधियाँ 27, जटिल जेनेरिक व बायोसिमिलर पाँच, नवीन चिकित्सा उपकरण नौ
रणनीतिक प्राथमिकता ढाँचाछह परियोजनाएँ, जिनमें अगली पीढ़ी के क्षय रोग टीके शामिल

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें: PRIP का पूरा नाम फार्मा मेडटेक क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहन, विभाग और मंत्रालय, पहले दौर की 41 परियोजनाएँ, सहायता 1,600 करोड़ रुपये, निजी निवेश 3,020 करोड़ रुपये, कुल 4,620 करोड़ रुपये और तीन प्राथमिकता क्षेत्र।

अभ्यास प्रश्न

Q1.सरकारी योजनाएंआसान

PRIP योजना के पहले दौर में 41 परियोजनाओं के लिए कितनी वित्तीय सहायता मंजूर की गई?

  1. A.लगभग 800 करोड़ रुपये
  2. B.लगभग 1,600 करोड़ रुपये
  3. C.लगभग 2,400 करोड़ रुपये
  4. D.लगभग 3,200 करोड़ रुपये
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. लगभग 1,600 करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर लगभग 1,600 करोड़ रुपये है। औषध विभाग ने योजना के पहले चरण में मंजूर 41 परियोजनाओं के लिए यही सहायता तय की है। यह आँकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है कि इसके साथ दो और राशियाँ जुड़ी हैं, अर्थात इन परियोजनाओं से 3,020 करोड़ रुपये का निजी निवेश आने की उम्मीद है और कुल अनुसंधान एवं विकास खर्च करीब 4,620 करोड़ रुपये बैठता है। विकल्प A सरकारी हिस्से को आधा कर देता है, जो इतनी बड़ी सूची के लिए पर्याप्त नहीं होगा। विकल्प C और विकल्प D दोनों वास्तविक स्वीकृत सहायता से अधिक हैं और विकल्प D निजी निवेश के आँकड़े के करीब है, यही भ्रम परीक्षक तब पैदा करता है जब एक ही विज्ञप्ति में तीन राशियाँ आती हैं। इन्हें एक श्रृंखला में याद रखें।

Q2.सरकारी योजनाएंमध्यम

PRIP योजना चलाने वाला औषध विभाग किस मंत्रालय के अधीन आता है?

  1. A.स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
  2. B.विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
  3. C.रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय
  4. D.वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय

व्याख्या

सही उत्तर रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय है, जिसके अधीन औषध विभाग आता है और इसी विभाग ने PRIP के तहत मंजूरियों की घोषणा की। विकल्प A यानी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय जन स्वास्थ्य, अस्पताल और अपने निकायों के माध्यम से औषधि नियमन देखता है, और अभ्यर्थी सहज ही दवाओं को वहाँ रख देते हैं, पर इस क्षेत्र का औद्योगिक प्रोत्साहन उसका काम नहीं है। विकल्प B यानी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय अपने विभागों के जरिये अनुसंधान को धन देता है और अनुसंधान योजना के लिए स्वाभाविक अनुमान लगता है, फिर भी PRIP उसका कार्यक्रम नहीं है। विकल्प D यानी वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय व्यापार और सामान्य औद्योगिक नीति से जुड़ा है। यह जोड़ी याद रखें, क्योंकि औषधि मूल्य नियंत्रण और बल्क ड्रग पार्क जैसे प्रश्न भी इसी विभाग पर आते हैं।

Q3.सरकारी योजनाएंमध्यम

PRIP के पहले दौर में किस प्राथमिकता क्षेत्र में सबसे अधिक परियोजनाएँ मंजूर हुईं?

  1. A.नई औषधियाँ
  2. B.जटिल जेनेरिक और बायोसिमिलर
  3. C.नवीन चिकित्सा उपकरण
  4. D.नैदानिक परीक्षण अधोसंरचना
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. नई औषधियाँ

व्याख्या

सही उत्तर नई औषधियाँ है, जिसके अंतर्गत 41 मंजूर परियोजनाओं में से 27 आती हैं। विकल्प B यानी जटिल जेनेरिक और बायोसिमिलर के अंतर्गत पाँच परियोजनाएँ हैं, इसलिए यह तीन वास्तविक श्रेणियों में सबसे छोटी है, सबसे बड़ी नहीं। विकल्प C यानी नवीन चिकित्सा उपकरण के अंतर्गत नौ परियोजनाएँ हैं, जो दूसरे स्थान पर है पर नई औषधियों से बहुत पीछे। विकल्प D यानी नैदानिक परीक्षण अधोसंरचना घोषणा में नामित प्राथमिकता क्षेत्रों में ही नहीं है और इसे यह जाँचने के लिए रखा गया है कि अभ्यर्थी विभाग की तीन-भागी श्रेणी पहचानता है या नहीं। इसी घोषणा के दो और विभाजन याद रखने योग्य हैं, अर्थात 12 परियोजनाएँ प्रारंभिक चरण और 29 बाद के चरण की हैं, तथा 19 स्टार्टअप व एमएसएमई की और 22 बड़ी कंपनियों की हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PRIP का पूरा नाम क्या है?

फार्मा मेडटेक क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहन। इसे रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीन औषध विभाग चलाता है।

PRIP के पहले दौर में कितनी सहायता मंजूर हुई?

41 परियोजनाओं के लिए लगभग 1,600 करोड़ रुपये। 3,020 करोड़ रुपये के अपेक्षित निजी निवेश के साथ इन पर कुल अनुसंधान एवं विकास खर्च करीब 4,620 करोड़ रुपये होगा।

किन क्षेत्रों को अतिरिक्त सहायता मिलती है?

रणनीतिक प्राथमिकता ढाँचे में उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग, दुर्लभ रोग, भारत के लिए चिंताजनक रोगाणुओं में रोगाणुरोधी प्रतिरोध, महामारी की आशंका वाले रोगाणु और रोकी जा सकने वाली बीमारियों के टीके शामिल हैं।

स्रोत

करेंट अफेयर्स 30 सितंबर 2026

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