पीआरआईपी योजना में नया डिस्कवरी ट्रैक, 50 करोड़ तक सहायता
औषध विभाग ने पीआरआईपी योजना के तहत नया डिस्कवरी ट्रैक शुरू किया है, जिसमें स्टार्टअप और एमएसएमई को 50 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी।

चर्चा में क्यों
30 सितंबर 2026 को औषध विभाग ने पीआरआईपी योजना के अंतर्गत नया डिस्कवरी ट्रैक घोषित किया, जिसमें स्टार्टअप और एमएसएमई को 50 करोड़ रुपये तक की सहायता मिलेगी, और योजना के दूसरे चरण के लिए पोर्टल खोल दिया गया।
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीन औषध विभाग ने फार्मा एवं मेडटेक क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा (पीआरआईपी) योजना के अंतर्गत एक नया डिस्कवरी ट्रैक शुरू करने की घोषणा की है। इसका उद्देश्य स्टार्टअप और एमएसएमई को नई दवाओं तथा नई चिकित्सा पद्धतियों की खोज जैसे अधिक जोखिम वाले काम में उतारना है। योजना के दूसरे चरण के आवेदनों के लिए ऑनलाइन पीआरआईपी पोर्टल खोल दिया गया है।
नए ट्रैक में क्या मिलेगा
प्रति कंपनी, प्रति परियोजना या परियोजनाओं के समूह पर 50 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी। शर्त यह है कि आवेदक परियोजना लागत का कम से कम एक चौथाई हिस्सा वास्तविक संस्थागत निवेशकों से सह-वित्त के रूप में लाए। विभाग ने इस राशि को बड़े पैमाने की जोखिम पूंजी बताया है, जिससे संस्थागत निवेशक दवा विकास में सामान्य से पहले के चरण में ही जुड़ सकेंगे।
कौन आवेदन कर सकता है
नई रासायनिक इकाई या नई जैविक इकाई पर प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर 1, 2 या 3 पर काम कर रहे स्टार्टअप और एमएसएमई इस विशेष ट्रैक में आवेदन कर सकते हैं, और विभाग ऐसी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में सहायता देगा, पर स्तर 6 से आगे नहीं। लक्ष्य यह है कि देश में विकसित अधिक से अधिक परियोजनाएं खोज के चरण से नैदानिक विकास की ओर बढ़ें और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी नवाचार शृंखला बने।
बाकी दो ट्रैक
डिस्कवरी ट्रैक के अलावा आरंभिक चरण और उत्तर चरण, दो और ट्रैक में आवेदन मांगे गए हैं। आरंभिक चरण स्तर 1, 2 या 3 पर काम कर रहे स्टार्टअप और एमएसएमई के लिए है, जिन्हें स्तर 5 तक बढ़ाया जाएगा और प्रति परियोजना 5 करोड़ रुपये तक सहायता मिलेगी। जहां स्वीकृत लागत 1 करोड़ रुपये तक है, वहां सह-वित्त की जरूरत नहीं; उससे अधिक लागत पर अतिरिक्त राशि का आधा हिस्सा आवेदक देगा। उत्तर चरण स्तर 4, 5 या 6 पर काम कर रहे उद्योग, स्टार्टअप और एमएसएमई के लिए है, जिसमें प्रति परियोजना 100 करोड़ रुपये तक सहायता मिलेगी, पर वह स्वीकृत लागत के 35 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।
योजना का आकार और प्राथमिकता क्षेत्र
पीआरआईपी योजना का कुल परिव्यय 5,000 करोड़ रुपये है। दूसरे चरण में तीन प्राथमिकता क्षेत्रों में आवेदन मांगे गए हैं, यानी नई दवाएं जिनमें नई रासायनिक इकाइयां, नई जैविक इकाइयां और फाइटोफार्मास्युटिकल दवाएं शामिल हैं; जटिल जेनेरिक और बायोसिमिलर; तथा नवीन चिकित्सा उपकरण। पहले चरण में 41 परियोजनाओं को लगभग 1,600 करोड़ रुपये की सहायता के लिए मंजूरी दी गई थी और शेष आवेदनों का मूल्यांकन जारी है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| योजना | फार्मा एवं मेडटेक में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा (पीआरआईपी) |
|---|---|
| घोषणा | औषध विभाग, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय |
| नया ट्रैक | स्टार्टअप और एमएसएमई के लिए नया डिस्कवरी ट्रैक |
| सहायता | प्रति कंपनी, परियोजना या परियोजना समूह 50 करोड़ रुपये तक |
| सह-वित्त | परियोजना लागत का कम से कम 25 प्रतिशत, वास्तविक संस्थागत निवेशकों से |
| पात्रता | प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर 1, 2 या 3 पर नई रासायनिक या जैविक इकाई की परियोजनाएं, सहायता स्तर 6 तक |
| कुल परिव्यय | 5,000 करोड़ रुपये |
| आरंभिक चरण ट्रैक | प्रति परियोजना 5 करोड़ रुपये तक, 1 करोड़ रुपये तक की लागत पर सह-वित्त नहीं |
| उत्तर चरण ट्रैक | प्रति परियोजना 100 करोड़ रुपये तक, स्वीकृत लागत के 35 प्रतिशत तक सीमित |
| पहले चरण का परिणाम | 41 परियोजनाओं को लगभग 1,600 करोड़ रुपये मंजूर |
| प्राथमिकता क्षेत्र | नई दवाएं, जटिल जेनेरिक और बायोसिमिलर, तथा नवीन चिकित्सा उपकरण |
परीक्षा की दृष्टि से
योजना का नाम और पूरा रूप, संबंधित मंत्रालय एवं विभाग, 5,000 करोड़ रुपये का परिव्यय, तीनों ट्रैक और उनकी सीमाएं (50 करोड़, 5 करोड़, 100 करोड़ रुपये), 25 प्रतिशत सह-वित्त की शर्त, प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर, तीन प्राथमिकता क्षेत्र तथा पहले चरण के आंकड़े (41 परियोजनाएं, लगभग 1,600 करोड़ रुपये) याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
पीआरआईपी योजना के नए डिस्कवरी ट्रैक में अधिकतम कितनी वित्तीय सहायता उपलब्ध है?
- A.5 करोड़ रुपये
- B.25 करोड़ रुपये
- C.50 करोड़ रुपये
- D.100 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 50 करोड़ रुपये
व्याख्या
सही उत्तर है 50 करोड़ रुपये। औषध विभाग ने घोषणा की है कि नए डिस्कवरी ट्रैक में प्रति कंपनी, प्रति परियोजना या परियोजनाओं के समूह पर इतनी राशि तक सहायता दी जाएगी, बशर्ते परियोजना लागत का कम से कम एक चौथाई हिस्सा वास्तविक संस्थागत निवेशकों से सह-वित्त के रूप में आए। विकल्प A आरंभिक चरण ट्रैक की सीमा है, जो सबसे निचले तत्परता स्तर पर काम कर रहे स्टार्टअप और एमएसएमई के लिए है, इसलिए वह आंकड़ा सही तो है पर दूसरे ट्रैक का है। विकल्प D उत्तर चरण ट्रैक की सीमा है, जो ऊंचे तत्परता स्तर की परियोजनाओं पर लागू होती है। विकल्प B किसी भी ट्रैक की सीमा नहीं है। तीनों सीमाएं एक साथ याद करें। ध्यान रखें कि हर ट्रैक की सहायता सीमा के साथ उसकी पात्रता शर्तें भी अलग हैं, इसलिए सीमा और शर्त दोनों जोड़कर याद करना अधिक सुरक्षित रहता है।
पीआरआईपी योजना का पूरा रूप क्या है?
- A.फार्मा एवं मेडटेक क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा
- B.औषधि अनुसंधान एवं औद्योगिक संवर्धन
- C.ग्रामीण औषधि नवाचार कार्यक्रम
- D.उत्पादन सुधार एवं नवाचार साझेदारी
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. फार्मा एवं मेडटेक क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा
व्याख्या
सही उत्तर है फार्मा एवं मेडटेक क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा। यह योजना रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीन औषध विभाग चलाता है और इसका उद्देश्य स्टार्टअप, एमएसएमई तथा बड़ी कंपनियों की मदद से देश के औषधि और चिकित्सा प्रौद्योगिकी अनुसंधान तंत्र को मजबूत करना है। विकल्प B, C और D मिलती-जुलती शब्दावली से गढ़े गए रूप हैं, और परीक्षा में भ्रम पैदा करने के लिए ठीक इसी तरह के निकट दिखने वाले विकल्प रखे जाते हैं। ध्यान रखें कि इस योजना में दवाओं के साथ चिकित्सा उपकरण भी शामिल हैं, इसीलिए नाम में मेडटेक आता है और प्राथमिकता क्षेत्रों में नवीन चिकित्सा उपकरण भी गिने गए हैं। यह भी ध्यान दें कि योजना स्टार्टअप, एमएसएमई तथा बड़ी कंपनियों, तीनों को नवाचार शृंखला में ऊपर बढ़ाने के लिए बनी है, इसलिए नाम के साथ पात्र श्रेणियां भी याद रखनी चाहिए।
पीआरआईपी योजना का कुल वित्तीय परिव्यय कितना है?
- A.1,600 करोड़ रुपये
- B.3,000 करोड़ रुपये
- C.5,000 करोड़ रुपये
- D.10,000 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 5,000 करोड़ रुपये
व्याख्या
सही उत्तर है 5,000 करोड़ रुपये। इसी परिव्यय के साथ योजना देश के औषधि तथा चिकित्सा प्रौद्योगिकी अनुसंधान और विकास तंत्र को मजबूत करने का लक्ष्य रखती है। विकल्प A वह राशि है जो पहले चरण में पहले ही प्रतिबद्ध की जा चुकी है, जब 41 परियोजनाओं को लगभग उतनी सहायता मंजूर हुई थी, इसलिए यह आंकड़ा घोषणा में तो है पर कुल परिव्यय नहीं, और यही सबसे भ्रामक विकल्प है। विकल्प B और विकल्प D ऐसी गोल संख्याएं हैं जिनका घोषणा में कोई उल्लेख नहीं। याद रखने का सरल तरीका यह है कि कुल परिव्यय का लगभग एक तिहाई से कुछ कम हिस्सा पहले चरण में प्रतिबद्ध हुआ है और शेष आवेदनों का मूल्यांकन अभी चल रहा है।
नए डिस्कवरी ट्रैक में किन प्रौद्योगिकी तत्परता स्तरों की परियोजनाएं आवेदन के लिए पात्र हैं?
- A.स्तर 1, 2 या 3
- B.स्तर 4, 5 या 6
- C.स्तर 6, 7 या 8
- D.स्तर 1 से 9 तक कोई भी
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. स्तर 1, 2 या 3
व्याख्या
सही उत्तर है स्तर 1, 2 या 3। नई रासायनिक इकाई या नई जैविक इकाई की परियोजना इन्हीं तीन तत्परता स्तरों पर चला रहे स्टार्टअप और एमएसएमई इस विशेष ट्रैक में आवेदन कर सकते हैं, और विभाग उन्हें आगे बढ़ाने में सहायता देगा, पर स्तर 6 से आगे नहीं। विकल्प B उत्तर चरण ट्रैक की पात्रता सीमा है, जो उद्योग के साथ स्टार्टअप और एमएसएमई के लिए भी खुली है, इसलिए वही सबसे निकट और सबसे भ्रामक विकल्प है। विकल्प C में ऐसे स्तर हैं जो किसी भी ट्रैक में प्रवेश के लिए स्वीकार नहीं किए गए। विकल्प D गलत है, क्योंकि योजना हर ट्रैक के लिए निश्चित सीमा तय करती है। ध्यान दें कि आरंभिक चरण ट्रैक की प्रवेश सीमा यही है पर सहायता स्तर 5 तक रुक जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पीआरआईपी योजना के नए डिस्कवरी ट्रैक में कितनी सहायता मिलेगी?
प्रति कंपनी, परियोजना या परियोजनाओं के समूह पर 50 करोड़ रुपये तक। शर्त यह है कि परियोजना लागत का कम से कम 25 प्रतिशत वास्तविक संस्थागत निवेशकों से सह-वित्त के रूप में आए।
पीआरआईपी का पूरा रूप क्या है?
फार्मा एवं मेडटेक क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा। यह रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीन औषध विभाग चलाता है और इसका कुल परिव्यय 5,000 करोड़ रुपये है।
नए डिस्कवरी ट्रैक में कौन आवेदन कर सकता है?
प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर 1, 2 या 3 पर नई रासायनिक इकाई या नई जैविक इकाई की परियोजना चला रहे स्टार्टअप और एमएसएमई। विभाग ऐसी परियोजनाओं को आगे बढ़ाएगा, पर स्तर 6 से आगे नहीं।
पहले चरण में कितनी परियोजनाएं मंजूर हुईं?
41 परियोजनाओं को लगभग 1,600 करोड़ रुपये की सहायता के लिए मंजूरी दी गई। शेष आवेदनों का मूल्यांकन जारी है और पहले चरण के आवेदकों से कहा गया है कि वही परियोजना दोबारा न भेजें।
स्रोत
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