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GK24

नीति आयोग ने पीएसीटी और जेडईटी मार्केटप्लेस की शुरुआत की

नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने 5वें ई-फास्ट इंडिया शिखर सम्मेलन 2026 में शून्य-उत्सर्जन माल ढुलाई के लिए पीएसीटी और जेडईटी मार्केटप्लेस शुरू किया।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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नीति आयोग ने पीएसीटी और जेडईटी मार्केटप्लेस की शुरुआत की — GK24 title card

चर्चा में क्यों

7 सितंबर 2026 को 5वें ई-फास्ट इंडिया शिखर सम्मेलन 2026 में नीति आयोग के सदस्य श्री राजीव गौबा ने शून्य-उत्सर्जन ट्रकों की तैनाती तेज करने के लिए प्लेटफॉर्म फॉर एग्रीगेटिंग क्लीन ट्रांसपोर्ट और जीरो एमिशन ट्रक मार्केटप्लेस की शुरुआत की।

नीति आयोग के सदस्य श्री राजीव गौबा ने 7 सितंबर 2026 को 5वें ई-फास्ट इंडिया शिखर सम्मेलन 2026 में दो नए मंच शुरू किए। पहला है प्लेटफॉर्म फॉर एग्रीगेटिंग क्लीन ट्रांसपोर्ट (पीएसीटी)। दूसरा है जीरो एमिशन ट्रक (जेडईटी) मार्केटप्लेस। दोनों ई-फास्ट इंडिया मंच का हिस्सा हैं, जिसका नेतृत्व नीति आयोग करता है।

पीएसीटी क्या करेगा

पीएसीटी शिपर्स, लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं और अन्य साझेदारों से माल ढुलाई की मांग जुटाएगा और उसे चुने हुए कॉरिडोर पर तैनाती में बदलेगा। वाहन निर्माता, वित्तपोषक और चार्जिंग प्वाइंट ऑपरेटर एक ही मंच पर होंगे। मकसद है मांग को स्पष्ट करना, चार्जिंग अवसंरचना की योजना में मदद करना और मध्यम तथा भारी इलेक्ट्रिक वाहनों का व्यावसायिक आधार मजबूत करना। जेडईटी मार्केटप्लेस इसी विचार का कारोबारी सिरा है, जहां ट्रक निर्माता, लॉजिस्टिक्स कंपनियां, चार्जिंग ऑपरेटर, वित्तपोषक और तकनीकी कंपनियां मिलकर साझेदारी बनाती हैं।

शुरुआत के पीछे के आंकड़े

मानकआंकड़ा
ई-फ्रेट वाहन, वित्त वर्ष 2025201
ई-फ्रेट वाहन, वित्त वर्ष 2026826, यानी चार गुना से अधिक वृद्धि
चल रहे मध्यम एवं भारी इलेक्ट्रिक ट्रक3,000 से अधिक
2025 में बिके भारी इलेक्ट्रिक ट्रकलगभग 800
सम्मेलन में प्रतिभागीलगभग 250

माल ढुलाई का विद्युतीकरण क्यों

श्री गौबा ने कहा कि भारी ट्रक वाहन बेड़े का केवल 3 से 4 प्रतिशत हैं, पर परिवहन क्षेत्र के कार्बन उत्सर्जन का एक तिहाई से अधिक हिस्सा इन्हीं से आता है। भारत में लगभग 70 प्रतिशत माल ढुलाई सड़क से होती है, इसलिए उन्होंने प्रमुख कॉरिडोर के रणनीतिक विद्युतीकरण पर जोर दिया। उन्होंने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ना आर्थिक, पर्यावरणीय और रणनीतिक जरूरत बताया, जो 2070 तक नेट जीरो के वैश्विक संकल्प और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से जुड़ी है।

कौन सी बाधाएं

तीन अड़चनें गिनाई गईं: लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों का बिखराव, वित्तपोषण की ऊंची लागत और कॉरिडोर योजना में तालमेल का अभाव। श्री गौबा ने मिश्रित वित्तपोषण, लीजिंग मॉडल और बेहतर डेटा प्रणाली की मांग की, ताकि इलेक्ट्रिक ट्रक के लिए पूंजी की लागत डीजल ट्रक के करीब आ सके। उन्होंने मौजूदा सहारे भी गिनाए, जिनमें ऑटोमोबाइल तथा एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाएं, तेल विपणन कंपनियों की बनाई सार्वजनिक चार्जिंग सुविधा और एफएएमई, पीएम ई-ड्राइव, परिवर्तन तथा पीएम ई-बस सेवा जैसी योजनाएं शामिल हैं। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव श्री वी. उमाशंकर ने कहा कि बैटरी निगरानी प्रणाली और नए परिचालन मॉडल पुनर्विक्रय मूल्य बढ़ाएंगे और वित्तपोषण का जोखिम घटाएंगे।

महत्वपूर्ण तथ्य

शुरुआतप्लेटफॉर्म फॉर एग्रीगेटिंग क्लीन ट्रांसपोर्ट (पीएसीटी) और जीरो एमिशन ट्रक (जेडईटी) मार्केटप्लेस
किसने शुरू कियाश्री राजीव गौबा, सदस्य, नीति आयोग
अवसर5वां ई-फास्ट इंडिया शिखर सम्मेलन 2026, 7 सितंबर 2026
ई-फास्ट इंडियाइलेक्ट्रिक फ्रेट एक्सेलेरेटर फॉर सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट इंडिया, नीति आयोग के नेतृत्व में
ई-फ्रेट तैनाती201 वाहनों से बढ़कर 826, चार गुना से अधिक
चल रहे ई-ट्रक3,000 से अधिक मध्यम एवं भारी इलेक्ट्रिक ट्रक
भारी ट्रकों का हिस्साबेड़े का 3 से 4 प्रतिशत, परिवहन उत्सर्जन का एक तिहाई से अधिक
सड़क से माल ढुलाईलगभग 70 प्रतिशत
उल्लिखित लक्ष्य2070 तक नेट जीरो और 2047 तक विकसित भारत
अन्य उपस्थितश्री वी. उमाशंकर, सचिव, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें पीएसीटी, जेडईटी और ई-फास्ट इंडिया के पूरे नाम, मंच का नेतृत्व नीति आयोग करता है, शुरुआत सदस्य राजीव गौबा ने 5वें सम्मेलन में की, तैनाती के आंकड़े 201 और 826 तथा 3,000 से अधिक ई-ट्रक, भारी ट्रकों का हिस्सा 3 से 4 प्रतिशत पर उत्सर्जन एक तिहाई से अधिक, सड़क से 70 प्रतिशत माल ढुलाई, और लक्ष्य 2070 तक नेट जीरो तथा 2047 तक विकसित भारत।

अभ्यास प्रश्न

Q1.अर्थव्यवस्थामध्यम

5वें ई-फास्ट इंडिया सम्मेलन में शुरू हुए पीएसीटी का पूरा नाम क्या है?

  1. A.प्रोग्राम फॉर एक्सेलरेटेड क्लीन ट्रांसपोर्ट
  2. B.प्लेटफॉर्म फॉर एग्रीगेटिंग क्लीन ट्रांसपोर्ट
  3. C.पार्टनरशिप फॉर अल्टरनेटिव क्लीन टेक्नोलॉजी
  4. D.पोर्टल फॉर एडवांस्ड कार्गो ट्रैकिंग
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. प्लेटफॉर्म फॉर एग्रीगेटिंग क्लीन ट्रांसपोर्ट

व्याख्या

सही उत्तर है प्लेटफॉर्म फॉर एग्रीगेटिंग क्लीन ट्रांसपोर्ट। अर्थ इसी एग्रीगेटिंग शब्द में छिपा है, क्योंकि इस मंच का पूरा मकसद शिपर्स और लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं की मांग को एक जगह जुटाना है, ताकि वह इतनी बड़ी और स्पष्ट हो जाए कि किसी कॉरिडोर पर इलेक्ट्रिक ट्रक चलाना व्यावसायिक रूप से उचित लगे। विकल्प ए में प्रोग्राम और एक्सेलरेटेड शब्द हैं, जो सुनने में सरकारी लगते हैं और किसी योजना पर तो बैठ सकते हैं पर इस मंच पर नहीं। विकल्प सी इसे वैकल्पिक प्रौद्योगिकी की साझेदारी बना देता है, जो नवीकरणीय ऊर्जा की शब्दावली है। विकल्प डी इसे कार्गो ट्रैकिंग पोर्टल बताता है, जो लॉजिस्टिक्स की सूचना प्रौद्योगिकी का काम है और नीति आयोग ने यहां वह शुरू नहीं किया। इसे इसके जोड़ीदार जेडईटी मार्केटप्लेस के साथ याद रखें।

Q2.अर्थव्यवस्थाकठिन

सम्मेलन के अनुसार ई-फ्रेट वाहनों की तैनाती कितनी बढ़ी?

  1. A.201 वाहनों से 826 वाहनों तक
  2. B.826 वाहनों से 3,000 वाहनों तक
  3. C.150 वाहनों से 600 वाहनों तक
  4. D.500 वाहनों से 1,200 वाहनों तक
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. 201 वाहनों से 826 वाहनों तक

व्याख्या

सही उत्तर है 201 वाहनों से 826 वाहनों तक, यानी एक ही वर्ष में चार गुना से अधिक की वृद्धि, और नीति आयोग ने यही आंकड़ा यह दिखाने के लिए रखा कि इलेक्ट्रिक माल ढुलाई का बाजार चल पड़ा है। विकल्प बी दो अलग तथ्यों को मिला देता है, क्योंकि 3,000 से अधिक का आंकड़ा देश भर में पहले से चल रहे मध्यम एवं भारी इलेक्ट्रिक ट्रकों का है और वह इस एक वर्ष की छलांग का अंतिम बिंदु नहीं है। विकल्प सी और डी में गढ़े हुए जोड़े हैं, जो इसलिए विश्वसनीय लगते हैं क्योंकि उनका अनुपात भी लगभग वैसा ही है। एक तीसरा आंकड़ा तस्वीर पूरी करता है: वर्ष 2025 में लगभग 800 भारी इलेक्ट्रिक ट्रक बिके, जिसे नीति आयोग के सदस्य ने कॉरिडोर के रणनीतिक विद्युतीकरण की जरूरत के प्रमाण के रूप में रखा। तीनों अंक अलग-अलग याद रखें।

Q3.अर्थव्यवस्थामध्यम

सम्मेलन के अनुसार भारत की कितनी माल ढुलाई सड़क मार्ग से होती है?

  1. A.लगभग 40 प्रतिशत
  2. B.लगभग 55 प्रतिशत
  3. C.लगभग 70 प्रतिशत
  4. D.लगभग 90 प्रतिशत
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. लगभग 70 प्रतिशत

व्याख्या

सही उत्तर है लगभग 70 प्रतिशत। नीति आयोग के सदस्य ने इसी हिस्से के आधार पर कहा कि प्रमुख माल ढुलाई कॉरिडोर का विद्युतीकरण योजनाबद्ध ढंग से होना चाहिए, बिखरी हुई प्रायोगिक परियोजनाओं के भरोसे नहीं। इसके साथ उन्होंने एक और आंकड़ा रखा जो तर्क को और पैना करता है: भारी ट्रक वाहन बेड़े का केवल 3 से 4 प्रतिशत हैं, फिर भी परिवहन क्षेत्र के कार्बन उत्सर्जन का एक तिहाई से अधिक हिस्सा इन्हीं से आता है, यानी थोड़े से वाहन बड़ी समस्या ढो रहे हैं। विकल्प ए, बी और डी में ऐसे हिस्से हैं जो विज्ञप्ति में नहीं आते। उन्होंने बाजार की तीन अड़चनें भी गिनाईं और मिश्रित वित्तपोषण तथा लीजिंग मॉडल की मांग की, ताकि इलेक्ट्रिक ट्रक की पूंजी लागत डीजल ट्रक के करीब आए।

Q4.अर्थव्यवस्थाआसान

ई-फास्ट इंडिया मंच का नेतृत्व कौन करता है?

  1. A.भारी उद्योग मंत्रालय
  2. B.नीति आयोग
  3. C.सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय
  4. D.ऊर्जा दक्षता ब्यूरो
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. नीति आयोग

व्याख्या

सही उत्तर है नीति आयोग। विज्ञप्ति ई-फास्ट इंडिया को, जिसका पूरा नाम इलेक्ट्रिक फ्रेट एक्सेलेरेटर फॉर सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट इंडिया है, नीति आयोग के नेतृत्व वाला मंच बताती है, जो सरकार और उद्योग को साथ लाता है, जिसमें मूल उपकरण निर्माता, लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाता, वित्तपोषक, शिपर्स और चार्जिंग प्वाइंट ऑपरेटर शामिल हैं, और जिसका ध्यान मध्यम तथा भारी वाहनों पर है। विकल्प ए और सी में वे मंत्रालय हैं जो सम्मेलन में मौजूद और सक्रिय थे, क्योंकि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव ने वहां संबोधन दिया और भारी उद्योग मंत्रालय के अधिकारी भी उपस्थित रहे, पर मंच का नेतृत्व इनमें से कोई नहीं करता। विकल्प डी में ऊर्जा दक्षता ब्यूरो है, जिसका काम ऊर्जा दक्षता मानकों से जुड़ा है। नीति आयोग सरकार का शीर्ष नीति विचार-मंथन निकाय है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएसीटी का पूरा नाम क्या है?

प्लेटफॉर्म फॉर एग्रीगेटिंग क्लीन ट्रांसपोर्ट। यह शिपर्स और लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं से माल ढुलाई की मांग जुटाकर उसे चिह्नित कॉरिडोर पर शून्य-उत्सर्जन ट्रकों की तैनाती में बदलता है।

ई-फास्ट इंडिया क्या है?

इलेक्ट्रिक फ्रेट एक्सेलेरेटर फॉर सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट इंडिया, नीति आयोग के नेतृत्व वाला मंच, जो वाहन निर्माताओं, लॉजिस्टिक्स प्रदाताओं, वित्तपोषकों, शिपर्स और चार्जिंग ऑपरेटरों को साथ लाता है।

भारत में इलेक्ट्रिक माल ढुलाई कितनी तेजी से बढ़ी है?

तैनाती 201 वाहनों से बढ़कर 826 हो गई, यानी चार गुना से अधिक, और अब 3,000 से अधिक मध्यम एवं भारी इलेक्ट्रिक ट्रक चल रहे हैं। वर्ष 2025 में लगभग 800 भारी इलेक्ट्रिक ट्रक बिके।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS