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आरआरआई: सही समय के एक फ्लिप से एंटैंगलमेंट का नुकसान टला

रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने सही समय पर एक फ्लिप लगाकर एंटैंगलमेंट का अचानक अंत टाला; इस शोध को राष्ट्रीय क्वांटम मिशन से मदद मिली।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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आरआरआई: सही समय के एक फ्लिप से एंटैंगलमेंट का नुकसान टला

चर्चा में क्यों

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने 7 सितंबर 2026 को बताया कि रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट और उसके साझेदार संस्थानों के वैज्ञानिकों ने सही क्षण पर एक फ्लिप प्रक्रिया लगाकर एंटैंगलमेंट के अचानक अंत को टालने और रोकने का तरीका खोज लिया है।

वैज्ञानिकों ने क्वांटम एंटैंगलमेंट को अधिक समय तक बनाए रखने का रास्ता निकाला है। वे सही क्षण पर एक ही फ्लिप प्रक्रिया लगाते हैं। इस खोज का सार यह है कि क्वांटम प्रणाली में कब कोई क्रिया की जाए, यह उतना ही मायने रखता है जितना यह कि कौन सी क्रिया की जाए। इसके लिए उपकरण में कोई बदलाव नहीं करना पड़ता।

एंटैंगलमेंट क्या है

एंटैंगलमेंट एक कण की अवस्था को दूर पड़े दूसरे कण की अवस्था से बांध देता है। एक कण पर की गई क्रिया दूसरे को भी उसी तरह प्रभावित करती है, भले ही दोनों अलग-अलग परिवेश में हों। क्वांटम प्रणालियों में यह सबसे बुनियादी संसाधन है। परिवेश के साथ क्रिया होने पर यह कमजोर भी पड़ जाता है।

अचानक अंत की पहेली

दो एंटैंगल कणों को लीजिए। हर कण उत्तेजित अवस्था में हो सकता है या स्थिर अवस्था में। अकेला छोड़ देने पर कण उत्तेजित से स्थिर अवस्था की ओर खिसकता है, ठीक वैसे जैसे कोई परमाणु अपने परिवेश को ऊर्जा देता है। इसी के साथ दोनों के बीच का एंटैंगलमेंट कमजोर होता जाता है। भौतिक विज्ञानी उस अचानक लुप्त होने को, जो एक निश्चित क्षण पर और क्षय पूरा होने से बहुत पहले हो जाता है, एंटैंगलमेंट का अचानक अंत कहते हैं।

प्रयोग कैसे हुआ

यह टीम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (आरआरआई) तथा कैलगरी विश्वविद्यालय और लुइसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों से बनी थी। शोध को विभाग के प्रमुख राष्ट्रीय क्वांटम मिशन से आंशिक वित्त पोषण मिला। समूह ने प्रकाश से दो-स्तरीय प्रणाली बनाई। ध्रुवीकरण बताता है कि प्रकाश तरंग किस दिशा में दोलन कर रही है। ऊर्ध्वाधर ध्रुवीकरण को उत्तेजित अवस्था माना गया और क्षैतिज ध्रुवीकरण को स्थिर अवस्था। ध्रुवीकरण बदलने वाले ऑप्टिकल उपकरण वेवप्लेट से टीम क्षय को नियंत्रित कर सकी। प्राकृतिक क्षय होने देने के बजाय उन्होंने एक ऐसी क्रिया लगाई जिसने दोनों अवस्थाओं के कणों की संख्या आपस में बदल दी।

देरी, तेजी या बचाव

अवधारणाअर्थ
अचानक अंतक्षय पूरा होने से पहले ही एक निश्चित समय पर एंटैंगलमेंट समाप्त
देरीकिसी क्षण पर लगाया गया फ्लिप नुकसान को टाल देता है
बचावसही क्षण का फ्लिप अचानक अंत को होने ही नहीं देता

आरआरआई की क्वांटम सूचना एवं कंप्यूटिंग प्रयोगशाला की समूह प्रमुख और वरिष्ठ प्रोफेसर उर्बासी सिन्हा ने कहा कि समय केवल प्रयोग का ब्योरा नहीं, बल्कि नियंत्रण का साधन है। प्रमुख लेखक सौम्या रंजन बेहरा ने कहा कि क्षय के किस बिंदु पर फ्लिप लगाया गया, यही तय करता है कि अचानक अंत टलेगा, देर से आएगा या जल्दी आएगा। शोध पत्र अमेरिकन फिजिकल सोसाइटी की पत्रिका फिजिकल रिव्यू ए में जुलाई में छपा। नतीजे सूचना क्षय के दोनों पाठ्यपुस्तक मॉडलों में फिट नहीं बैठे, और सिद्धांतकारों ने लगभग एक वर्ष में वह ट्यूनिंग पैरामीटर खोजा जो एक ही सेटअप को दोनों मॉडलों के बीच ले जाता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

खोजसही समय पर लगाई गई एक फ्लिप प्रक्रिया एंटैंगलमेंट के अचानक अंत को टाल या रोक सकती है
प्रमुख संस्थानरमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (आरआरआई), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का स्वायत्त संस्थान
साझेदार संस्थानकैलगरी विश्वविद्यालय और लुइसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी
वित्त पोषणआंशिक रूप से राष्ट्रीय क्वांटम मिशन से
प्रयोगशालाआरआरआई की क्वांटम सूचना एवं कंप्यूटिंग प्रयोगशाला
समूह प्रमुखउर्बासी सिन्हा, आरआरआई में वरिष्ठ प्रोफेसर
प्रमुख लेखकसौम्या रंजन बेहरा
पत्रिकाअमेरिकन फिजिकल सोसाइटी की फिजिकल रिव्यू ए, जुलाई में प्रकाशित
मुख्य शब्दएंटैंगलमेंट का अचानक अंत, यानी निश्चित समय पर एंटैंगलमेंट का लुप्त होना
प्रयुक्त उपकरणवेवप्लेट, ध्रुवीकरण बदलने वाला ऑप्टिकल उपकरण

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें संस्थान रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट है, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का स्वायत्त संस्थान है; वित्त पोषण राष्ट्रीय क्वांटम मिशन से हुआ; साझेदार कैलगरी विश्वविद्यालय और लुइसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी हैं; शब्द है एंटैंगलमेंट का अचानक अंत; विचार यह कि समय स्वयं नियंत्रण का साधन है; उपकरण वेवप्लेट; नाम उर्बासी सिन्हा तथा सौम्या रंजन बेहरा; और पत्रिका फिजिकल रिव्यू ए।

अभ्यास प्रश्न

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

एंटैंगलमेंट के अचानक अंत को टालने वाले अध्ययन का नेतृत्व किस संस्थान ने किया?

  1. A.भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान
  2. B.रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट
  3. C.साहा परमाणु भौतिकी संस्थान
  4. D.टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट

व्याख्या

सही उत्तर है रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का स्वायत्त संस्थान है और जिसकी क्वांटम सूचना एवं कंप्यूटिंग प्रयोगशाला ने इस काम का नेतृत्व किया। टीम ने कैलगरी विश्वविद्यालय और लुइसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर काम किया, और अध्ययन को उसी विभाग के प्रमुख राष्ट्रीय क्वांटम मिशन से आंशिक वित्त पोषण मिला। शेष विकल्पों में खगोल भौतिकी, परमाणु भौतिकी और मूलभूत अनुसंधान के जाने-माने भारतीय संस्थान हैं, पर विज्ञप्ति इस अध्ययन का श्रेय उनमें से किसी को नहीं देती। संस्थान के साथ दो नाम भी याद रखने लायक हैं: प्रयोगशाला की समूह प्रमुख और वरिष्ठ प्रोफेसर उर्बासी सिन्हा, जिन्होंने कहा कि समय केवल प्रयोग का ब्योरा नहीं बल्कि नियंत्रण का साधन है, और प्रमुख लेखक सौम्या रंजन बेहरा, जिनका शोध पत्र फिजिकल रिव्यू ए में जुलाई में छपा।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

एंटैंगलमेंट के अचानक अंत से क्या अभिप्राय है?

  1. A.दोनों कणों का स्थिर अवस्था में पूर्ण क्षय
  2. B.क्षय पूरा होने से पहले ही निश्चित समय पर एंटैंगलमेंट का अचानक लुप्त हो जाना
  3. C.क्वांटम कंप्यूटर का परिणाम पढ़ने में विफल हो जाना
  4. D.मापन पर तरंग फलन का पतन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. क्षय पूरा होने से पहले ही निश्चित समय पर एंटैंगलमेंट का अचानक लुप्त हो जाना

व्याख्या

सही उत्तर है क्षय पूरा होने से पहले ही निश्चित समय पर एंटैंगलमेंट का अचानक लुप्त हो जाना। विज्ञप्ति बताती है कि दो एंटैंगल कणों में से हर कण उत्तेजित अवस्था से स्थिर अवस्था की ओर खिसकता है, ठीक वैसे जैसे कोई परमाणु अपने परिवेश को ऊर्जा देता है, और इसी के साथ एंटैंगलमेंट कमजोर पड़ता जाता है। भौतिक विज्ञानियों को हैरान करने वाली बात यह है कि एंटैंगलमेंट एक निश्चित क्षण पर पूरी तरह समाप्त हो सकता है, जबकि क्षय स्वयं अभी पूरा नहीं हुआ होता, और इसी अचानक लुप्त होने को यह नाम मिला है। विकल्प ए क्षय की प्रक्रिया बताता है, जो अलग बात है और अधिक समय लेती है। विकल्प सी क्वांटम कंप्यूटर की पठन विफलता है, जो व्यावहारिक अभियांत्रिकी समस्या है। विकल्प डी मापन पर तरंग फलन का पतन है, जो क्वांटम यांत्रिकी की अलग अवधारणा है।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के किस मिशन से इस अध्ययन को आंशिक वित्त पोषण मिला?

  1. A.राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन
  2. B.अंतरविषयी साइबर-भौतिक प्रणाली राष्ट्रीय मिशन
  3. C.राष्ट्रीय क्वांटम मिशन
  4. D.गहरे समुद्र मिशन
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. राष्ट्रीय क्वांटम मिशन

व्याख्या

सही उत्तर है राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, जिसे विज्ञप्ति में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का प्रमुख मिशन बताया गया है और जिसने इस अध्ययन का एक हिस्सा वित्त पोषित किया। शेष विकल्पों में भी असली राष्ट्रीय मिशन दिए गए हैं, और यही इस प्रश्न को सही परख बनाता है। राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन उच्च निष्पादन कंप्यूटिंग क्षमता बनाता है, साइबर-भौतिक प्रणाली मिशन रोबोटिक्स तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्रों को सहारा देता है, और गहरे समुद्र मिशन समुद्री अन्वेषण एवं प्रौद्योगिकी पर काम करता है; इनमें से किसी का श्रेय यहां नहीं है। इस परिणाम का व्यावहारिक महत्व यह है कि क्वांटम कंप्यूटर में क्वांटम सूचना के टिके रहने की एक सीमा होती है, और यह प्रयोग दिखाता है कि उस सीमा के भीतर एक ही क्रिया का समय एंटैंगलमेंट का भविष्य बदल सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एंटैंगलमेंट का अचानक अंत क्या है?

यह दो कणों के बीच एंटैंगलमेंट का एक निश्चित समय पर अचानक समाप्त हो जाना है, जो कणों का क्षय पूरा होने से बहुत पहले हो जाता है। टीम ने दिखाया कि इसे टाला या रोका जा सकता है।

यह अध्ययन किन संस्थानों ने किया?

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट ने कैलगरी विश्वविद्यालय और लुइसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर। इसे राष्ट्रीय क्वांटम मिशन से आंशिक वित्त पोषण मिला।

क्रिया का समय क्यों मायने रखता है?

फ्लिप का असर इस बात पर निर्भर करता है कि उसे लगाते समय क्षय कितना बढ़ चुका है। उसी क्षण के अनुसार अचानक अंत टलता है, देर से आता है या जल्दी आता है, इसलिए समय स्वयं नियंत्रण का साधन बन जाता है।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS