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नीति आयोग और टेक्समिन के बीच महत्वपूर्ण खनिज समझौता

नीति आयोग और आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के टेक्समिन ने महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिज क्षेत्र में सहयोग के लिए संयुक्त आशय वक्तव्य पर हस्ताक्षर किए हैं।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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नीति आयोग और टेक्समिन के बीच महत्वपूर्ण खनिज समझौता

चर्चा में क्यों

नीति आयोग और आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के टेक्समिन ने भारत के महत्वपूर्ण खनिज तंत्र को मजबूत करने के लिए संयुक्त आशय वक्तव्य पर हस्ताक्षर किए, जिसकी घोषणा 3 नवंबर 2026 को हुई; सहयोग अनुसंधान, अध्ययन, नीति सहायता और क्षमता निर्माण में होगा।

नीति आयोग और आईआईटी (आईएसएम) धनबाद स्थित प्रौद्योगिकी अनुवाद शोध पार्क टेक्समिन ने महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिज क्षेत्र में मिलकर काम करने के लिए संयुक्त आशय वक्तव्य पर हस्ताक्षर किए हैं। टेक्समिन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की एक पहल है। इस सहयोग का उद्देश्य स्वदेशी तकनीकी क्षमता को आगे बढ़ाना, अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करना तथा देश में महत्वपूर्ण खनिजों की सुदृढ़ और संपोषणीय मूल्य श्रृंखलाओं के विकास में सहायता करना है। यह राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के उद्देश्यों तथा आत्मनिर्भर और विकसित भारत के विजन के अनुरूप है।

सहयोग के चार क्षेत्र

  • सहयोगात्मक अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास
  • तकनीकी एवं रणनीतिक अध्ययन
  • नीतिगत और संस्थागत सहायता
  • क्षमता निर्माण तथा ज्ञान का आदान-प्रदान

इन सभी से मिलकर स्वदेशी क्षमता मजबूत होने, अनुसंधान को काम करने वाली प्रौद्योगिकी तक पहुंचाने तथा सरकार, अकादमिक जगत, शोध संस्थानों और उद्योग के बीच मजबूत संपर्क बनने की आशा है।

धनबाद के संगोष्ठी में हस्ताक्षर

यह दस्तावेज नीति आयोग के सदस्य प्रो. गोबर्धन दास की आईआईटी (आईएसएम) धनबाद यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित हुआ। वहां उन्होंने 31 अक्टूबर 2026 को महत्वपूर्ण खनिज एवं दुर्लभ मृदा पर राष्ट्रीय संगोष्ठी (सीएमआरई 2026) का उद्घाटन किया, जो भारतीय रसायनज्ञ परिषद के 45वें वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन के हिस्से के रूप में आयोजित हुई। संगोष्ठी में नीति निर्माता, शोधकर्ता, प्रौद्योगिकी विकासकर्ता और उद्योग प्रतिनिधि जुटे और देश के महत्वपूर्ण खनिज तथा दुर्लभ मृदा तंत्र को मजबूत करने पर विचार हुआ।

खदान केंद्रित सोच से आगे

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रो. दास ने महत्वपूर्ण खनिजों को राष्ट्रीय सुरक्षा, तकनीकी आत्मनिर्भरता तथा विकसित भारत 2047 के विजन का रणनीतिक आधार बताया। देश की धातुकर्म परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने अनुसंधान, नवाचार और उद्योग के साथ सहयोग के जरिये स्वदेशी क्षमता बनाने पर जोर दिया। उनका मुख्य तर्क था कि यह क्षेत्र खदान केंद्रित सोच से आगे बढ़कर एक एकीकृत मूल्य श्रृंखला अपनाए, जिसमें अन्वेषण, प्रसंस्करण, परिशोधन, उन्नत सामग्री और पुनर्चक्रण शामिल हों।

उन्होंने द्वितीयक स्रोतों से महत्वपूर्ण खनिज प्राप्त करने की संभावना भी रेखांकित की और कोयले की फ्लाई ऐश, रेड मड, खदान अवशेष तथा इलेक्ट्रॉनिक कचरे का नाम लिया, जिन्हें आज कचरा माना जाता है। प्रयोगशाला के अनुसंधान को व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य प्रौद्योगिकी में बदलना तथा संसाधनों का संपोषणीय उपयोग सफलता की कसौटी बताए गए। इस पहल से देश को महत्वपूर्ण खनिजों की सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखला बनाने में मदद मिलने की आशा है।

महत्वपूर्ण तथ्य

समझौतामहत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिज क्षेत्र पर संयुक्त आशय वक्तव्य
पक्षकारनीति आयोग और टेक्समिन (प्रौद्योगिकी अनुवाद शोध पार्क), आईआईटी (आईएसएम) धनबाद
टेक्समिनविज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की पहल
अनुरूपताराष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन तथा आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के विजन के अनुरूप
अवसरनीति आयोग के सदस्य प्रो. गोबर्धन दास की आईआईटी (आईएसएम) धनबाद यात्रा
संगोष्ठीमहत्वपूर्ण खनिज एवं दुर्लभ मृदा पर राष्ट्रीय संगोष्ठी (सीएमआरई 2026), उद्घाटन 31 अक्टूबर 2026
मेजबान सम्मेलनभारतीय रसायनज्ञ परिषद का 45वां वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन
चार क्षेत्रअनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी विकास; तकनीकी एवं रणनीतिक अध्ययन; नीतिगत एवं संस्थागत सहायता; क्षमता निर्माण एवं ज्ञान विनिमय
द्वितीयक स्रोतकोयले की फ्लाई ऐश, रेड मड, खदान अवशेष और इलेक्ट्रॉनिक कचरा

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें कि टेक्समिन आईआईटी (आईएसएम) धनबाद का प्रौद्योगिकी अनुवाद शोध पार्क है और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की पहल है, नीति आयोग के साथ यह समझौता महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों पर संयुक्त आशय वक्तव्य है जो राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के अनुरूप है, इस पर नीति आयोग के सदस्य प्रो. गोबर्धन दास की यात्रा में हस्ताक्षर हुए तथा सीएमआरई 2026 का उद्घाटन 31 अक्टूबर 2026 को हुआ।

अभ्यास प्रश्न

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

नीति आयोग के साथ महत्वपूर्ण खनिजों पर संयुक्त आशय वक्तव्य पर हस्ताक्षर करने वाला टेक्समिन किस संस्थान में है?

  1. A.आईआईटी खड़गपुर
  2. B.आईआईटी (आईएसएम) धनबाद
  3. C.आईआईटी बॉम्बे
  4. D.आईआईटी मद्रास
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. आईआईटी (आईएसएम) धनबाद

टेक्समिन उसी संस्थान का प्रौद्योगिकी अनुवाद शोध पार्क है और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की पहल है; नीति आयोग के साथ संयुक्त आशय वक्तव्य पर हस्ताक्षर आयोग के एक सदस्य की उस परिसर की यात्रा के दौरान हुए।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

नीति आयोग-टेक्समिन संयुक्त आशय वक्तव्य किस मिशन के उद्देश्यों के अनुरूप है?

  1. A.राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन
  2. B.राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन
  3. C.राष्ट्रीय क्वांटम मिशन
  4. D.गहरे समुद्र मिशन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन

यह सहयोग उस मिशन के उद्देश्यों तथा आत्मनिर्भर और विकसित भारत के विजन के अनुरूप बताया गया है, क्योंकि इसका लक्ष्य स्वदेशी तकनीकी क्षमता बढ़ाना तथा महत्वपूर्ण खनिजों की सुदृढ़ एवं संपोषणीय मूल्य श्रृंखला बनाना है।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

महत्वपूर्ण खनिज प्राप्त करने के लिए किसे द्वितीयक स्रोत के रूप में गिनाया गया?

  1. A.कोयले की फ्लाई ऐश
  2. B.नदी की रेत
  3. C.चूना पत्थर की धूल
  4. D.समुद्री नमक
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. कोयले की फ्लाई ऐश

महत्वपूर्ण खनिज एवं दुर्लभ मृदा पर संगोष्ठी को संबोधित करते हुए नीति आयोग के सदस्य ने द्वितीयक स्रोतों से महत्वपूर्ण खनिज प्राप्त करने की संभावना रेखांकित की और कोयले की फ्लाई ऐश, रेड मड, खदान अवशेष तथा इलेक्ट्रॉनिक कचरे का नाम लिया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टेक्समिन क्या है?

यह आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में स्थित प्रौद्योगिकी अनुवाद शोध पार्क है, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की पहल है। इसने महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिज क्षेत्र में नीति आयोग के साथ संयुक्त आशय वक्तव्य पर हस्ताक्षर किए हैं।

नीति आयोग-टेक्समिन समझौता किन क्षेत्रों को शामिल करता है?

चार क्षेत्रों को - सहयोगात्मक अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी विकास, तकनीकी एवं रणनीतिक अध्ययन, नीतिगत एवं संस्थागत सहायता तथा क्षमता निर्माण और ज्ञान विनिमय। यह राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के अनुरूप है।

किन द्वितीयक स्रोतों से महत्वपूर्ण खनिज प्राप्त किए जा सकते हैं?

प्रो. गोबर्धन दास ने कोयले की फ्लाई ऐश, रेड मड, खदान अवशेष और इलेक्ट्रॉनिक कचरे का नाम लिया तथा अन्वेषण, प्रसंस्करण, परिशोधन, उन्नत सामग्री एवं पुनर्चक्रण वाली एकीकृत मूल्य श्रृंखला पर जोर दिया।

स्रोत

करेंट अफेयर्स 3 नवंबर 2026

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