जल संचय जनभागीदारी: 1.58 करोड़ से अधिक पुनर्भरण संरचनाएं बनीं
पीआईबी की पृष्ठभूमि रिपोर्ट के अनुसार 3 सितंबर 2026 तक जल संचय जनभागीदारी के तहत 1.58 करोड़ से अधिक कृत्रिम भूजल पुनर्भरण संरचनाएं बन चुकी हैं।

चर्चा में क्यों
पीआईबी की 3 सितंबर 2026 की पृष्ठभूमि रिपोर्ट में जल संचय जनभागीदारी की प्रगति बताई गई, जिसमें 1.58 करोड़ से अधिक कृत्रिम भूजल पुनर्भरण संरचनाएं और जल शक्ति मंत्रालय का पहला विभागीय शिखर सम्मेलन शामिल है।
पीआईबी की 3 सितंबर 2026 की पृष्ठभूमि रिपोर्ट में जल संचय जनभागीदारी की प्रगति बताई गई, जो सामुदायिक भागीदारी पर टिकी जल संरक्षण पहल है। इसकी शुरुआत 6 सितंबर 2024 को हुई थी। यह पहल कम लागत वाली भूजल पुनर्भरण तथा जल भंडारण संरचनाएं बनाती है और निष्क्रिय बोरवेल को फिर से चालू करती है। यह संपूर्ण सरकार और संपूर्ण समाज के दृष्टिकोण पर चलती है तथा 3 सी से निर्देशित होती है, अर्थात समुदाय, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व और लागत।
आंकड़े कैसे बढ़े
| शुरुआत | 6 सितंबर 2024 |
| जेएसजेबी 1.0, मई 2025 तक | 27 लाख से अधिक संरचनाएं |
| जेएसजेबी 2.0 की शुरुआत | जून 2025 |
| जेएसजेबी 2.0, मई 2026 तक | 1.5 करोड़ से अधिक संरचनाएं |
| कैच द रेन के साथ एकीकरण | जून 2026 |
| 3 सितंबर 2026 तक कुल | 1.58 करोड़ से अधिक संरचनाएं |
जून 2026 में इस पहल का दायरा बढ़ाया गया। इसे जल शक्ति अभियान: कैच द रेन अभियान के साथ जोड़ दिया गया और इसका नाम जल संचय जनभागीदारी: कैच द रेन हो गया।
जल शक्ति शिखर सम्मेलन
जल शक्ति मंत्रालय ने 1 और 2 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में अपना विभागीय शिखर सम्मेलन किया। यह ऐसे सम्मेलनों की श्रृंखला में पहला था, जिनका उद्देश्य सहकारी संघवाद और केंद्र-राज्य सहयोग मजबूत करना है। जल संचय जनभागीदारी: कैच द रेन सम्मेलन के चार विषयगत स्तंभों में से एक था। बाकी तीन थे जल अवसंरचना परियोजनाएं, पेयजल प्रणालियों की स्रोत स्थिरता, और जल जीवन मिशन 2.0 के तहत ग्रामीण जल आपूर्ति। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जन जागरूकता बढ़ाने के लिए जल उत्सव को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। उन्होंने विश्वविद्यालयों तथा उच्च शिक्षण संस्थानों में जल प्रबंधन पर ज्ञान और क्षमता मजबूत करने, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और किसानों के अंतर-राज्यीय अध्ययन दौरों तथा मजबूत जल डेटा प्रबंधन का आह्वान किया। सम्मेलन को जल सुरक्षित भारत और विकसित भारत 2047 की दिशा में एक कदम बताया गया।
दो राज्यों का उदाहरण
छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में किसानों ने जल संरक्षण के लिए अपनी जमीन का हिस्सा दिया। आवा पानी झोकी आंदोलन के तहत उन्होंने स्वेच्छा से अपनी कृषि भूमि का 5 प्रतिशत हिस्सा पुनर्भरण तालाबों और सीढ़ीदार गड्ढों के लिए समर्पित किया। 1,260 से अधिक किसानों ने यह मॉडल अपनाया और जिले में 2,000 से अधिक सोख्ता गड्ढे बनाए गए। कई गांवों में भूजल स्तर 3 से 4 मीटर बढ़ा और 17 दूरदराज के आदिवासी बसाहटों में झरने फिर से जीवित हो गए। सरकार ने सूक्ष्म जलग्रहण मानचित्रण, जलभूवैज्ञानिक आकलन और तकनीकी मार्गदर्शन से सहयोग दिया।
आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले में मुरुगुम्मी, मरेल्ला और थंगेल्ला गांव अनियमित वर्षा, गिरते भूजल और बोरवेल के विफल होने की समस्या झेल रहे थे। जागरूकता के लिए ग्राम सभाएं, घर-घर अभियान, कलाजत्था और कार्यशालाएं आयोजित हुईं तथा रिज-टू-वैली दृष्टिकोण अपनाया गया। मुरुगुम्मी में 71 संरचनाएं बनीं, जिनसे लगभग 8.11 लाख घन मीटर भंडारण क्षमता मिली। मरेल्ला में 53 और थंगेल्ला में 71 संरचनाएं बनीं। इन प्रयासों से लगभग 5,900 लोगों के लिए भूजल की उपलब्धता बढ़ी और संकटग्रस्त पलायन कम हुआ।
महत्वपूर्ण तथ्य
| पहल | जल संचय जनभागीदारी (जेएसजेबी) |
|---|---|
| शुरुआत | 6 सितंबर 2024 |
| मार्गदर्शक सिद्धांत | 3 सी: समुदाय, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व और लागत |
| जेएसजेबी 1.0 की प्रगति | मई 2025 तक 27 लाख से अधिक संरचनाएं |
| जेएसजेबी 2.0 की शुरुआत | जून 2025 |
| जेएसजेबी 2.0 की प्रगति | मई 2026 तक 1.5 करोड़ से अधिक संरचनाएं |
| जून 2026 में एकीकरण | जल शक्ति अभियान: कैच द रेन के साथ |
| 3 सितंबर 2026 तक कुल | 1.58 करोड़ से अधिक पुनर्भरण संरचनाएं |
| जल शक्ति विभागीय शिखर सम्मेलन | नई दिल्ली, 1 और 2 सितंबर 2026, श्रृंखला का पहला |
| छत्तीसगढ़ का आंदोलन | कोरिया जिले में आवा पानी झोकी, कृषि भूमि का 5 प्रतिशत |
| आंध्र प्रदेश का जिला | प्रकाशम, रिज-टू-वैली दृष्टिकोण के साथ |
परीक्षा की दृष्टि से
शुरुआत की तिथि (6 सितंबर 2024), 3 सी, प्रगति के आंकड़े (मई 2025 तक 27 लाख और मई 2026 तक 1.5 करोड़), जून 2026 में जल शक्ति अभियान: कैच द रेन के साथ एकीकरण, कुल 1.58 करोड़ संरचनाएं और जल शक्ति विभागीय शिखर सम्मेलन के चार स्तंभ याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
जल संचय जनभागीदारी 3 सी से निर्देशित होती है। ये तीन सी क्या हैं?
- A.समुदाय, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व और लागत
- B.जलग्रहण, संरक्षण और समुदाय
- C.लागत, क्षमता और समन्वय
- D.समुदाय, संरक्षण और अनुपालन
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. समुदाय, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व और लागत
व्याख्या
सही उत्तर समुदाय, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व और लागत है। पृष्ठभूमि रिपोर्ट बताती है कि यह पहल 3 सी से निर्देशित होती है और इन्हें ठीक इन्हीं शब्दों में गिनाती है। बाकी विकल्प उसी विषय के शब्दों से बनाए गए हैं और इसीलिए सही लगते हैं, जो ऐसे प्रश्नों की बनावट है। जलग्रहण, संरक्षण, क्षमता, समन्वय और अनुपालन जैसे शब्द जल नीति के लेखन में आते हैं, पर यहां के तीन सी नहीं हैं। यह परिभाषा पहल के बाकी ढांचे के साथ याद रखनी चाहिए, क्योंकि जल संचय जनभागीदारी कम लागत वाली भूजल पुनर्भरण और जल भंडारण संरचनाएं बनाती है, निष्क्रिय बोरवेल को पुनर्जीवित करती है तथा संपूर्ण सरकार एवं संपूर्ण समाज के दृष्टिकोण से वैज्ञानिक पर स्थानीय रूप से उपयुक्त समाधान बढ़ाती है। इसकी शुरुआत 6 सितंबर 2024 को हुई थी।
3 सितंबर 2026 तक जल संचय जनभागीदारी के तहत कितनी कृत्रिम भूजल पुनर्भरण संरचनाएं बन चुकी थीं?
- A.27 लाख से अधिक
- B.1.5 करोड़ से अधिक
- C.1.58 करोड़ से अधिक
- D.2.4 करोड़ से अधिक
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 1.58 करोड़ से अधिक
व्याख्या
सही उत्तर 1.58 करोड़ से अधिक है। पृष्ठभूमि रिपोर्ट आंकड़ों की एक श्रृंखला देती है और हर आंकड़ा अलग तिथि का है, यहीं छात्र चूक जाते हैं। जेएसजेबी 1.0 के तहत मई 2025 तक 27 लाख से अधिक संरचनाएं बनी थीं, जो विकल्प क है। जून 2025 में शुरू हुए जेएसजेबी 2.0 के तहत मई 2026 तक 1.5 करोड़ से अधिक पुनर्भरण संरचनाएं बनी थीं, जो विकल्प ख है। यहां जो आंकड़ा पूछा गया है उसकी कट-ऑफ तिथि 3 सितंबर 2026 है और तब तक कुल संख्या 1.58 करोड़ से अधिक हो चुकी थी। विकल्प घ गढ़ा हुआ है। बीच में हुआ बदलाव भी ध्यान रखें, क्योंकि जून 2026 में इस पहल का दायरा बढ़ाकर इसे जल शक्ति अभियान: कैच द रेन के साथ जोड़ा गया और यह जल संचय जनभागीदारी: कैच द रेन बन गई।
आवा पानी झोकी आंदोलन, जिसमें किसानों ने जल संरक्षण के लिए अपनी भूमि का 5 प्रतिशत दिया, किस जिले में है?
- A.प्रकाशम जिला, आंध्र प्रदेश
- B.कोरिया जिला, छत्तीसगढ़
- C.कालाहांडी जिला, ओडिशा
- D.बाड़मेर जिला, राजस्थान
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. कोरिया जिला, छत्तीसगढ़
व्याख्या
सही उत्तर कोरिया जिला, छत्तीसगढ़ है। पृष्ठभूमि रिपोर्ट बताती है कि वहां किसानों ने आवा पानी झोकी आंदोलन के तहत स्वेच्छा से अपनी कृषि भूमि का 5 प्रतिशत हिस्सा पुनर्भरण तालाबों और सीढ़ीदार गड्ढों के लिए समर्पित किया, और इस मॉडल को इस बात का प्रमाण बताती है कि स्थायी जल प्रबंधन के लिए न बड़े पैमाने पर विस्थापन जरूरी है, न भारी पूंजी। 1,260 से अधिक किसानों ने इसे अपनाया, जिले में 2,000 से अधिक सोख्ता गड्ढे बने, कई गांवों में भूजल स्तर 3 से 4 मीटर बढ़ा और 17 दूरदराज की आदिवासी बसाहटों में झरने पुनर्जीवित हुए। विकल्प क जाल है, क्योंकि आंध्र प्रदेश का प्रकाशम जिला भी इसी रिपोर्ट में आता है, पर वहां मुरुगुम्मी, मरेल्ला और थंगेल्ला गांवों ने ग्राम सभाओं तथा कलाजत्था के साथ रिज-टू-वैली दृष्टिकोण अपनाया। विकल्प ग और घ के जिलों का कोई उल्लेख नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जल संचय जनभागीदारी कब शुरू हुई और इसके 3 सी क्या हैं?
इसकी शुरुआत 6 सितंबर 2024 को हुई। इसके 3 सी हैं समुदाय, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व और लागत। यह पहल कम लागत वाली भूजल पुनर्भरण तथा जल भंडारण संरचनाएं बनाती है और निष्क्रिय बोरवेल को फिर चालू करती है।
अब तक कितनी पुनर्भरण संरचनाएं बन चुकी हैं?
3 सितंबर 2026 तक 1.58 करोड़ से अधिक कृत्रिम भूजल पुनर्भरण संरचनाएं। जेएसजेबी 1.0 के तहत मई 2025 तक 27 लाख से अधिक और जेएसजेबी 2.0 के तहत मई 2026 तक 1.5 करोड़ से अधिक संरचनाएं बनी थीं।
जल संचय जनभागीदारी को किस अभियान के साथ जोड़ा गया?
जून 2026 में जल शक्ति अभियान: कैच द रेन अभियान के साथ। संयुक्त पहल का नाम जल संचय जनभागीदारी: कैच द रेन है।
आवा पानी झोकी आंदोलन क्या है?
छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में किसानों का प्रयास, जिसमें उन्होंने स्वेच्छा से अपनी कृषि भूमि का 5 प्रतिशत हिस्सा पुनर्भरण तालाबों तथा सीढ़ीदार गड्ढों के लिए दिया। 1,260 से अधिक किसानों ने इसे अपनाया और कई गांवों में भूजल स्तर 3 से 4 मीटर बढ़ा।
स्रोत
- जल संचय जनभागीदारी: सामुदायिक सहयोग से जल सुरक्षा (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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