जल संचय जनभागीदारी 3 सी से निर्देशित होती है। ये तीन सी क्या हैं?
- A.समुदाय, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व और लागत
- B.जलग्रहण, संरक्षण और समुदाय
- C.लागत, क्षमता और समन्वय
- D.समुदाय, संरक्षण और अनुपालन
सही उत्तर
A. समुदाय, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व और लागत
व्याख्या
सही उत्तर समुदाय, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व और लागत है। पृष्ठभूमि रिपोर्ट बताती है कि यह पहल 3 सी से निर्देशित होती है और इन्हें ठीक इन्हीं शब्दों में गिनाती है। बाकी विकल्प उसी विषय के शब्दों से बनाए गए हैं और इसीलिए सही लगते हैं, जो ऐसे प्रश्नों की बनावट है। जलग्रहण, संरक्षण, क्षमता, समन्वय और अनुपालन जैसे शब्द जल नीति के लेखन में आते हैं, पर यहां के तीन सी नहीं हैं। यह परिभाषा पहल के बाकी ढांचे के साथ याद रखनी चाहिए, क्योंकि जल संचय जनभागीदारी कम लागत वाली भूजल पुनर्भरण और जल भंडारण संरचनाएं बनाती है, निष्क्रिय बोरवेल को पुनर्जीवित करती है तथा संपूर्ण सरकार एवं संपूर्ण समाज के दृष्टिकोण से वैज्ञानिक पर स्थानीय रूप से उपयुक्त समाधान बढ़ाती है। इसकी शुरुआत 6 सितंबर 2024 को हुई थी।
पूरा लेख पढ़ें: जल संचय जनभागीदारी: 1.58 करोड़ से अधिक पुनर्भरण संरचनाएं बनीं
अभ्यास प्रश्न
3 सितंबर 2026 तक जल संचय जनभागीदारी के तहत कितनी कृत्रिम भूजल पुनर्भरण संरचनाएं बन चुकी थीं?
- A.27 लाख से अधिक
- B.1.5 करोड़ से अधिक
- C.1.58 करोड़ से अधिक
- D.2.4 करोड़ से अधिक
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 1.58 करोड़ से अधिक
व्याख्या
सही उत्तर 1.58 करोड़ से अधिक है। पृष्ठभूमि रिपोर्ट आंकड़ों की एक श्रृंखला देती है और हर आंकड़ा अलग तिथि का है, यहीं छात्र चूक जाते हैं। जेएसजेबी 1.0 के तहत मई 2025 तक 27 लाख से अधिक संरचनाएं बनी थीं, जो विकल्प क है। जून 2025 में शुरू हुए जेएसजेबी 2.0 के तहत मई 2026 तक 1.5 करोड़ से अधिक पुनर्भरण संरचनाएं बनी थीं, जो विकल्प ख है। यहां जो आंकड़ा पूछा गया है उसकी कट-ऑफ तिथि 3 सितंबर 2026 है और तब तक कुल संख्या 1.58 करोड़ से अधिक हो चुकी थी। विकल्प घ गढ़ा हुआ है। बीच में हुआ बदलाव भी ध्यान रखें, क्योंकि जून 2026 में इस पहल का दायरा बढ़ाकर इसे जल शक्ति अभियान: कैच द रेन के साथ जोड़ा गया और यह जल संचय जनभागीदारी: कैच द रेन बन गई।
आवा पानी झोकी आंदोलन, जिसमें किसानों ने जल संरक्षण के लिए अपनी भूमि का 5 प्रतिशत दिया, किस जिले में है?
- A.प्रकाशम जिला, आंध्र प्रदेश
- B.कोरिया जिला, छत्तीसगढ़
- C.कालाहांडी जिला, ओडिशा
- D.बाड़मेर जिला, राजस्थान
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सही उत्तर: B. कोरिया जिला, छत्तीसगढ़
व्याख्या
सही उत्तर कोरिया जिला, छत्तीसगढ़ है। पृष्ठभूमि रिपोर्ट बताती है कि वहां किसानों ने आवा पानी झोकी आंदोलन के तहत स्वेच्छा से अपनी कृषि भूमि का 5 प्रतिशत हिस्सा पुनर्भरण तालाबों और सीढ़ीदार गड्ढों के लिए समर्पित किया, और इस मॉडल को इस बात का प्रमाण बताती है कि स्थायी जल प्रबंधन के लिए न बड़े पैमाने पर विस्थापन जरूरी है, न भारी पूंजी। 1,260 से अधिक किसानों ने इसे अपनाया, जिले में 2,000 से अधिक सोख्ता गड्ढे बने, कई गांवों में भूजल स्तर 3 से 4 मीटर बढ़ा और 17 दूरदराज की आदिवासी बसाहटों में झरने पुनर्जीवित हुए। विकल्प क जाल है, क्योंकि आंध्र प्रदेश का प्रकाशम जिला भी इसी रिपोर्ट में आता है, पर वहां मुरुगुम्मी, मरेल्ला और थंगेल्ला गांवों ने ग्राम सभाओं तथा कलाजत्था के साथ रिज-टू-वैली दृष्टिकोण अपनाया। विकल्प ग और घ के जिलों का कोई उल्लेख नहीं है।
भूतापीय ऊर्जा पर राष्ट्रीय नीति के कार्यान्वयन के लिए नोडल मंत्रालय कौन सा है?
- A.पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय
- B.पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
- C.नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
- D.विद्युत मंत्रालय
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सही उत्तर: C. नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
व्याख्या
सही उत्तर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने सितंबर 2025 में भूतापीय ऊर्जा पर राष्ट्रीय नीति अधिसूचित की और इसके कार्यान्वयन के लिए यही मंत्रालय नोडल है। यही मंत्रालय अक्षय ऊर्जा अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास कार्यक्रम भी चलाता है तथा इसने जुलाई और अगस्त 2025 के बीच पांच अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएं मंजूर कीं, जिनमें संसाधन आकलन, स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास और क्षेत्रीय प्रदर्शन शामिल हैं। विकल्प क में दिया पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय इसलिए लुभाता है क्योंकि पहले कुएं ओएनजीसी ऊर्जा केंद्र ने चालू किए और नीति परित्यक्त तेल तथा गैस कुओं के पुन: उपयोग की बात करती है, पर नोडल भूमिका उसके पास नहीं है। विकल्प ख में दिया पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय स्वाभाविक पर गलत अनुमान है। विकल्प घ में दिया विद्युत मंत्रालय पारंपरिक बिजली देखता है।
भारत के पहले दो भूतापीय कुएं कहां चालू किए गए?
- A.तातापानी, छत्तीसगढ़
- B.पूगा घाटी, लद्दाख
- C.मणिकरण, हिमाचल प्रदेश
- D.अंकलेश्वर, गुजरात
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सही उत्तर: B. पूगा घाटी, लद्दाख
व्याख्या
सही उत्तर लद्दाख की पूगा घाटी है। पृष्ठभूमि रिपोर्ट के अनुसार ओएनजीसी ऊर्जा केंद्र ने जुलाई 2026 में वहां देश के पहले दो भूतापीय कुएं चालू किए। यह घाटी समुद्र तल से 14,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर है, अपने गर्म जलस्रोतों और भूमिगत ताप भंडार के लिए जानी जाती है तथा भारत के सबसे संभावनाशील भूतापीय स्थलों में गिनी जाती है। प्रत्येक कुआं लगभग 1,000 मीटर गहरा है और ये दोनों मिलकर भारत की पहली 1 मेगावाट प्रदर्शन आधारित भूतापीय परियोजना की नींव रखेंगे। विकल्प क में दिया तातापानी और विकल्प ग में दिया मणिकरण भारत के जाने-माने भूतापीय क्षेत्र हैं, इसलिए ऐसे प्रश्न में यही सबसे मजबूत भ्रामक विकल्प बनते हैं, पर पहले कुएं वहां नहीं हैं। विकल्प घ में दिया अंकलेश्वर इसी रिपोर्ट में आता है, पर अलग भूमिका में, जहां अनुत्पादक तेल और गैस कुओं की रेट्रोफिटिंग की पायलट परियोजना चल रही है।
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने देश में कितने गर्म झरनों की मैपिंग की है?
- A.183
- B.381
- C.420
- D.106
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 381
व्याख्या
सही उत्तर 381 है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने देश भर में 381 गर्म झरनों की मैपिंग की है और 10 भूतापीय प्रांतों की पहचान की है, जबकि भारत की सैद्धांतिक भूतापीय क्षमता लगभग 10.6 गीगावॉट है, जिसमें से 42 स्थल बिजली उत्पादन और प्रत्यक्ष ताप उपयोग के लिए संभावनाशील माने गए हैं। विकल्प क में सही आंकड़े के अंक उलट दिए गए हैं, जो संख्या वाले प्रश्नों की सबसे पुरानी चाल है और उन छात्रों को फंसाती है जिन्हें अंक याद हैं पर उनका क्रम नहीं। विकल्प ग संभावनाशील स्थलों की संख्या बयालीस से गढ़ा गया है और विकल्प घ सैद्धांतिक क्षमता 10.6 गीगावॉट से, यानी दोनों इसी अनुच्छेद की असली संख्याएं हैं पर गलत शीर्षक के नीचे रखी गई हैं। इस अनुच्छेद के चारों आंकड़े क्रम से याद रखें।