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GK24

एनबीए ने जैव विविधता बोर्डों को 1.04 करोड़ रुपये एबीएस राशि दी

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने कृषि जैविक संसाधनों से मिली लगभग 1.04 करोड़ रुपये की एबीएस राशि 27 राज्य जैव विविधता बोर्डों तथा दो केंद्रशासित परिषदों में बांटी।

लेखक प्रकाशित · अपडेट · 2 मिनट
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एनबीए ने जैव विविधता बोर्डों को 1.04 करोड़ रुपये एबीएस राशि दी — GK24 title card

चर्चा में क्यों

24 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने बताया कि तीन बीज एवं फसल सुरक्षा कंपनियों से मिली लगभग 1.04 करोड़ रुपये की एबीएस राशि संरक्षण कार्य के लिए 27 राज्य जैव विविधता बोर्डों और दो केंद्रशासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों को दे दी गई है।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने पहुंच एवं लाभ साझाकरण (एबीएस) व्यवस्था के तहत जुटाई गई लगभग 1.04 करोड़ रुपये की राशि 27 राज्य जैव विविधता बोर्डों और दो केंद्रशासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों को जारी की है। यह धन उन कंपनियों से मिला जिन्होंने शोध तथा व्यावसायिक उपयोग के लिए कृषि जैविक संसाधन लिए थे, और अब यह उन्हीं राज्यों में संरक्षण कार्य पर खर्च होगा जहां वे फसलें उगती हैं।

राशि किसने दी और किन फसलों के लिए

लाभ साझाकरण की यह राशि तीन कंपनियों ने जमा कराई — क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लिमिटेड, सवाना सीड्स प्राइवेट लिमिटेड तथा नुनहेम्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड। भुगतान पांच फसलों तक पहुंच से जुड़ा है — बाजरा (पेनिसेटम ग्लॉकम), ज्वार (सोरगम बाइकलर), मक्का (जिया मेज), धान (ओराइजा सैटाइवा) और लौकी (लेजेनेरिया सिसेरेरिया)। ये पांचों फसलें भारत की कृषि जैव विविधता का आधार हैं और खाद्य सुरक्षा, किसानों की आजीविका तथा कृषि नवाचार इन पर टिके हैं।

हर राज्य का हिस्सा कैसे तय हुआ

जब जैविक संसाधन बाजार, व्यापारियों या बिचौलियों के रास्ते कंपनी तक पहुंचता है, तो कोई एक लाभ दावेदार पहचाना नहीं जा सकता। ऐसे मामलों में एनबीए क्षेत्र आधारित तरीका अपनाता है: राज्य का हिस्सा उस फसल के भौगोलिक फैलाव और उसके अधीन रकबे के अनुपात में तय होता है, जिसके आंकड़े कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय अपने एकीकृत कृषि सांख्यिकी पोर्टल पर प्रकाशित करता है।

सबसे बड़े हिस्से

उत्तर प्रदेश10,35,790 रुपये
महाराष्ट्र10,05,218 रुपये
मध्य प्रदेश9,81,132 रुपये
बिहार7,95,968 रुपये
पश्चिम बंगाल7,91,609 रुपये
कर्नाटक7,34,400 रुपये
शेष राज्य मिलाकर29,34,084 रुपये
कुल जारी राशि1,03,63,188 रुपये

कानूनी आधार

भारत की एबीएस व्यवस्था जैविक विविधता अधिनियम, 2002 पर खड़ी है, जिसमें 2023 में संशोधन हुआ, तथा जैविक विविधता नियम, 2024 और पहुंच एवं लाभ साझाकरण विनियम, 2025 पर। अधिनियम की धारा 21 वह प्रावधान है जिसके तहत जैविक संसाधन के उपयोग से मिलने वाले लाभ का न्यायसंगत बंटवारा तय किया जाता है। यह ढांचा जैविक विविधता अभिसमय और नागोया प्रोटोकॉल के तहत भारत के दायित्व पूरे करता है तथा कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे के लक्ष्य 13 को आगे बढ़ाता है, जो आनुवंशिक संसाधनों, डिजिटल क्रम सूचना और उनसे जुड़े पारंपरिक ज्ञान से मिले लाभ के उचित बंटवारे की बात करता है।

अब तक का कुल आंकड़ा

कृषि क्षेत्र से अब तक लगभग 87 करोड़ रुपये यानी करीब 9.16 लाख डॉलर की एबीएस राशि आ चुकी है, जिससे यह इस व्यवस्था का एक बड़ा स्रोत बन गया है। सभी क्षेत्रों को मिलाकर एनबीए ने अब तक 204 करोड़ रुपये से अधिक, लगभग 21.48 लाख डॉलर, एबीएस लाभ के रूप में जारी किए हैं। भारत अपना यह अनुभव सीबीडी सीओपी 17 के एक सहयोगी कार्यक्रम में रखेगा, जो 28 अक्टूबर 2026 को येरेवान, आर्मेनिया में होगा। बोर्डों और परिषदों को यह राशि संरक्षण, संपोषणीय उपयोग, प्रलेखन, शोध, क्षमता निर्माण तथा स्थानीय जैव विविधता प्रशासन को मजबूत करने पर ही खर्च करनी होगी।

महत्वपूर्ण तथ्य

संस्थाराष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए)
वितरित राशिलगभग 1.04 करोड़ रुपये (1,03,63,188 रुपये)
प्राप्तकर्ता27 राज्य जैव विविधता बोर्ड और 2 केंद्रशासित प्रदेश जैव विविधता परिषदें
राशि देने वाली कंपनियांक्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन, सवाना सीड्स, नुनहेम्स इंडिया
शामिल फसलेंबाजरा, ज्वार, मक्का, धान और लौकी
सर्वाधिक हिस्साउत्तर प्रदेश, 10,35,790 रुपये
आवंटन का तरीकाक्षेत्र आधारित, एकीकृत कृषि सांख्यिकी पोर्टल के आंकड़ों से
अब तक जारी एबीएस लाभ204 करोड़ रुपये से अधिक (लगभग 21.48 लाख डॉलर)
कानूनजैविक विविधता अधिनियम, 2002 (2023 में संशोधित); धारा 21
वैश्विक संबंधकुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे का लक्ष्य 13; नागोया प्रोटोकॉल
आगामी कार्यक्रम28 अक्टूबर 2026, येरेवान, आर्मेनिया में सीबीडी सीओपी 17 सहयोगी कार्यक्रम

परीक्षा की दृष्टि से

राशि (लगभग 1.04 करोड़ रुपये), प्राप्तकर्ता (27 राज्य बोर्ड और दो केंद्रशासित परिषदें), पांच फसलें, क्षेत्र आधारित तरीका और एकीकृत कृषि सांख्यिकी पोर्टल, अब तक जारी 204 करोड़ रुपये से अधिक, जैविक विविधता अधिनियम 2002 की धारा 21, नागोया प्रोटोकॉल, कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ढांचे का लक्ष्य 13 तथा येरेवान (आर्मेनिया) में सीबीडी सीओपी 17 याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.पर्यावरणआसान

भारत में पहुंच एवं लाभ साझाकरण (एबीएस) व्यवस्था किस अधिनियम के तहत चलती है?

  1. A.वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972
  2. B.जैविक विविधता अधिनियम, 2002
  3. C.पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
  4. D.वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. जैविक विविधता अधिनियम, 2002

भारत की एबीएस व्यवस्था इसी अधिनियम से संचालित होती है, जिसमें 2023 में संशोधन हुआ, तथा इसके साथ जैविक विविधता नियम, 2024 और पहुंच एवं लाभ साझाकरण विनियम, 2025 लागू हैं।

Q2.पर्यावरणमध्यम

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा बांटी गई एबीएस राशि में सर्वाधिक हिस्सा किस राज्य को मिला?

  1. A.महाराष्ट्र
  2. B.मध्य प्रदेश
  3. C.उत्तर प्रदेश
  4. D.बिहार
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. उत्तर प्रदेश

राशि बराबर नहीं बांटी गई: राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने क्षेत्र आधारित तरीका अपनाया, इसलिए हर राज्य का हिस्सा संबंधित फसलों के भौगोलिक फैलाव और उनके अधीन रकबे के अनुसार तय हुआ, जिसके आंकड़े कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के एकीकृत कृषि सांख्यिकी पोर्टल से लिए गए।

Q3.पर्यावरणमध्यम

भारत का एबीएस ढांचा किस वैश्विक ढांचे के लक्ष्य 13 को आगे बढ़ाता है?

  1. A.कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचा
  2. B.आपदा जोखिम न्यूनीकरण का सेंडाई ढांचा
  3. C.आइची जैव विविधता लक्ष्य
  4. D.पेरिस समझौता
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचा

इसका लक्ष्य 13 कहता है कि आनुवंशिक संसाधनों, डिजिटल क्रम सूचना तथा उनसे जुड़े पारंपरिक ज्ञान के उपयोग से मिले लाभ का उचित और न्यायसंगत बंटवारा सुनिश्चित करने के लिए ठोस उपाय किए जाएं, और राज्य जैव विविधता बोर्डों को दी गई यह राशि ठीक वही काम करती है।

Q4.पर्यावरणमध्यम

भारत के जैव विविधता और एबीएस कार्य को दिखाने वाला सीबीडी सीओपी 17 सहयोगी कार्यक्रम कहां होगा?

  1. A.कैली, कोलंबिया
  2. B.येरेवान, आर्मेनिया
  3. C.मॉन्ट्रियल, कनाडा
  4. D.नागोया, जापान
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. येरेवान, आर्मेनिया

'फ्रॉम पॉलिसी टू प्रैक्टिस: एडवांसिंग इंडियाज बायोडायवर्सिटी कमिटमेंट्स थ्रू इनोवेशन, फाइनेंस एंड एबीएस' नाम का यह सहयोगी कार्यक्रम 28 अक्टूबर 2026 को जैविक विविधता अभिसमय के पक्षकारों के सम्मेलन में रखा जाएगा और इसमें दिखाया जाएगा कि भारत नीति, नवाचार, वित्त तथा लाभ साझाकरण के जरिये अपने जैव विविधता वादों…

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पहुंच एवं लाभ साझाकरण (एबीएस) क्या है?

यह वह व्यवस्था है जिसमें किसी जैविक संसाधन का उपयोग करने वाला उसके संरक्षकों के साथ लाभ बांटता है। भारत में यह जैविक विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 21 के तहत चलती है और एनबीए ने अब तक 204 करोड़ रुपये से अधिक लाभ जारी किए हैं।

एनबीए ने राज्य जैव विविधता बोर्डों को कितनी राशि दी है?

लगभग 1.04 करोड़ रुपये, यानी कुल 1,03,63,188 रुपये, जो 27 राज्य जैव विविधता बोर्डों और दो केंद्रशासित प्रदेश परिषदों में बंटे। सर्वाधिक हिस्सा उत्तर प्रदेश को 10,35,790 रुपये मिला, इसके बाद महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश रहे।

भारत का एबीएस ढांचा किन वैश्विक समझौतों से जुड़ा है?

जैविक विविधता अभिसमय और नागोया प्रोटोकॉल से। यह कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे के लक्ष्य 13 को भी आगे बढ़ाता है, जो आनुवंशिक संसाधनों और उनसे जुड़े पारंपरिक ज्ञान से मिले लाभ के उचित बंटवारे पर है।

स्रोत

करेंट अफेयर्स 24 अक्टूबर 2026

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