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GK24

एनबीए का एबीएस वितरण ₹200 करोड़ के पार पहुंचा

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण का संचयी एबीएस वितरण ₹200 करोड़ पार कर गया, और उसने 27 राज्य बोर्डों तथा 5 केंद्र शासित परिषदों को ₹8.23 करोड़ स्वीकृत किए।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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एनबीए का एबीएस वितरण ₹200 करोड़ के पार पहुंचा — GK24 title card

चर्चा में क्यों

5 सितंबर 2026 को पर्यावरण मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण का संचयी एबीएस वितरण ₹200 करोड़ से ऊपर पहुंच गया है और उसने 27 राज्य जैव विविधता बोर्डों तथा 5 केंद्र शासित प्रदेश परिषदों को ₹8.23 करोड़ और स्वीकृत किए हैं।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने भारत के पहुंच एवं लाभ-साझाकरण (एबीएस) ढांचे में एक बड़ा पड़ाव पार किया है। इसका संचयी एबीएस वितरण ₹200 करोड़ से ऊपर पहुंच गया है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने यह जानकारी 5 सितंबर 2026 को दी।

इस बार क्या स्वीकृत हुआ

प्राधिकरण ने ₹8.23 करोड़ की नई एबीएस राशि स्वीकृत की। यह राशि 27 राज्य जैव विविधता बोर्डों और 5 केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों को जाएगी। यह चार सब्जी फसलों से जुड़े जैव संसाधनों के उपयोग से मिली है। ये फसलें करेला, भिंडी, मिर्च और प्याज हैं। राशि उन तीन बीज कंपनियों से प्राप्त हुई जिन्होंने अनुसंधान और वाणिज्यिक उपयोग के लिए इन संसाधनों तक पहुंच बनाई थी।

किसानों की जगह राज्यों को क्यों

ये संसाधन खुले बाजार या व्यापारियों से खरीदे गए थे। किसी एक किसान, समुदाय या मूल स्थान का पता नहीं लगाया जा सका। इसलिए लाभार्थी हिस्सा उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बोर्डों तथा परिषदों में बांटा जा रहा है जहां ये फसलें उगाई जाती हैं। बंटवारा खेती के क्षेत्रफल के आधार पर हुआ है, जिसके आंकड़े कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय प्रकाशित करता है। यह तरीका विशेषज्ञ समिति ने सुझाया और प्राधिकरण ने मंजूर किया।

सबसे बड़ा हिस्सा किसे

प्राप्तकर्ताओं में क्रमराज्य या केंद्र शासित प्रदेश
पहलामध्य प्रदेश
दूसरामहाराष्ट्र
तीसराआंध्र प्रदेश
चौथाकर्नाटक
पांचवांगुजरात
इसके बाद सूची मेंओडिशा, बिहार, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश

चारों फसलों को मिलाकर मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सबसे बड़े प्राप्तकर्ता हैं। मध्य प्रदेश को यह जगह करेला, मिर्च और प्याज की खेती से मिली है। महाराष्ट्र को यह जगह मुख्य रूप से प्याज से मिली है, क्योंकि देश के प्याज क्षेत्रफल में उसका हिस्सा 49 प्रतिशत से अधिक है।

राशि कहां खर्च होगी

बोर्डों और परिषदों को यह राशि जैव विविधता कानून, 2002 की धारा 32(2) में दर्ज कामों पर ही खर्च करनी होगी। इनमें लोक जैव विविधता रजिस्टरों का दस्तावेजीकरण और अद्यतन, जैव संसाधनों का प्राकृतिक आवास में और उससे बाहर संरक्षण, क्षरित पारिस्थितिकी तंत्रों की बहाली, जैव विविधता विरासत स्थलों को मजबूत करना, जैव विविधता प्रबंधन समितियों की क्षमता बढ़ाना और सामुदायिक आजीविका सुधारना शामिल हैं।

वैश्विक कड़ी

यह कदम जैव विविधता पर कन्वेंशन और पहुंच एवं लाभ-साझाकरण पर नागोया प्रोटोकॉल के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं से जुड़ता है। यह कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क की भी पूर्ति करता है, और खास तौर पर लक्ष्य 13 की, जो आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से मिले लाभों के निष्पक्ष और न्यायसंगत बंटवारे की बात करता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

संस्थाराष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए)
मंत्रालयपर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
पड़ावसंचयी एबीएस वितरण ₹200 करोड़ से अधिक
नई स्वीकृति₹8.23 करोड़
प्राप्तकर्ता27 राज्य जैव विविधता बोर्ड और 5 केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदें
फसलेंकरेला, भिंडी, मिर्च और प्याज
सबसे बड़े प्राप्तकर्तामध्य प्रदेश, उसके बाद महाराष्ट्र
महाराष्ट्र में प्याजदेश के प्याज क्षेत्रफल में 49 प्रतिशत से अधिक हिस्सा
बंटवारे का आधारखेती का क्षेत्रफल, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार
कानूनी प्रावधानजैव विविधता कानून, 2002 की धारा 32(2)
वैश्विक कड़ीजैव विविधता पर कन्वेंशन, नागोया प्रोटोकॉल और कुनमिंग-मॉन्ट्रियल फ्रेमवर्क का लक्ष्य 13

परीक्षा की दृष्टि से

₹200 करोड़ का पड़ाव और ₹8.23 करोड़ की नई स्वीकृति याद रखें। 27 राज्य बोर्ड और 5 केंद्र शासित परिषदें, चारों फसलें, शीर्ष दो प्राप्तकर्ता मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र, जैव विविधता कानून 2002 की धारा 32(2) तथा कुनमिंग-मॉन्ट्रियल फ्रेमवर्क का लक्ष्य 13 भी याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.पर्यावरणमध्यम

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने राज्य बोर्डों और केंद्र शासित परिषदों को कितनी नई एबीएस राशि स्वीकृत की?

  1. A.₹8.23 करोड़
  2. B.₹82.3 करोड़
  3. C.₹200 करोड़
  4. D.₹23.8 करोड़
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. ₹8.23 करोड़

व्याख्या

सही उत्तर ₹8.23 करोड़ है। विज्ञप्ति दर्ज करती है कि प्राधिकरण ने यह राशि 27 राज्य जैव विविधता बोर्डों और 5 केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों को स्वीकृत की, जो चार सब्जी फसलों के जैव संसाधनों तक पहुंच से प्राप्त हुई। विकल्प C इस प्रश्न का पुराना जाल है, क्योंकि ₹200 करोड़ भी विज्ञप्ति में है, पर वह संचयी आंकड़ा है। ढांचा शुरू होने के बाद से प्राधिकरण का कुल एबीएस वितरण अब ₹200 करोड़ पार कर गया है, और ₹8.23 करोड़ उसी कुल के भीतर की नई किस्त है। विकल्प B और विकल्प D में केवल दशमलव हटाया गया है या अंक उलट दिए गए हैं, जो राशि वाले प्रश्नों में प्रश्न बनाने वालों की पसंदीदा चाल है। दोहराते समय दोनों आंकड़े साथ रखें, यानी ₹200 करोड़ संचयी और ₹8.23 करोड़ इस दौर की राशि। यह भी याद रखें कि राशि उन तीन बीज कंपनियों से मिली जिन्होंने करेला, भिंडी, मिर्च और प्याज के संसाधनों तक पहुंच बनाई थी।

Q2.पर्यावरणकठिन

चारों फसलों को मिलाकर इस एबीएस राशि का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता राज्य कौन है?

  1. A.महाराष्ट्र
  2. B.मध्य प्रदेश
  3. C.आंध्र प्रदेश
  4. D.कर्नाटक
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. मध्य प्रदेश

व्याख्या

सही उत्तर मध्य प्रदेश है। विज्ञप्ति की तालिका प्राप्तकर्ताओं का क्रम देती है, जिसमें मध्य प्रदेश सबसे ऊपर है और उसके बाद महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक तथा गुजरात आते हैं। कारण भी विज्ञप्ति बताती है, यानी मध्य प्रदेश इसलिए पहले स्थान पर है कि वहां चारों में से तीन फसलें होती हैं, यानी करेला, मिर्च और प्याज। विकल्प A सबसे मजबूत भ्रम है, क्योंकि महाराष्ट्र का नाम उसी वाक्य में बड़े प्राप्तकर्ता के रूप में आता है और देश के प्याज क्षेत्रफल में उसका हिस्सा 49 प्रतिशत से अधिक है, पर चारों फसलों के कुल आंकड़े में वह दूसरे स्थान पर है। विकल्प C और विकल्प D सूची के अगले दो राज्यों आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के नाम हैं, जिन्हें अच्छी राशि मिली है, पर शीर्ष दो से कम। क्रम का कारण भी याद रखें, क्योंकि बंटवारा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के प्रकाशित क्षेत्रफल आंकड़ों पर आधारित है, और संसाधन खुले बाजार से लिए जाने के कारण किसी एक किसान या समुदाय तक नहीं पहुंचाए जा सके।

Q3.पर्यावरणमध्यम

राज्य जैव विविधता बोर्डों को मिली एबीएस राशि किस प्रावधान के तहत खर्च करनी होती है?

  1. A.पर्यावरण संरक्षण कानून की धारा 21
  2. B.जैव विविधता कानून, 2002 की धारा 32(2)
  3. C.वन्यजीव संरक्षण कानून की धारा 6
  4. D.वन संरक्षण कानून की धारा 15
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. जैव विविधता कानून, 2002 की धारा 32(2)

व्याख्या

सही उत्तर जैव विविधता कानून, 2002 की धारा 32(2) है। विज्ञप्ति कहती है कि बोर्डों और परिषदों को यह राशि उसी प्रावधान में दर्ज कामों पर खर्च करनी होगी, और वह सूची भी देती है। इसमें लोक जैव विविधता रजिस्टरों का दस्तावेजीकरण और अद्यतन, जैव संसाधनों का प्राकृतिक आवास में तथा उससे बाहर संरक्षण, क्षरित पारिस्थितिकी तंत्रों की बहाली, जैव विविधता विरासत स्थलों को मजबूत करना, जैव विविधता प्रबंधन समितियों की क्षमता बढ़ाना और सामुदायिक आजीविका में सुधार शामिल हैं। विकल्प A, विकल्प C और विकल्प D भारत के जाने-पहचाने पर्यावरण कानूनों के नाम हैं, और जब सही कानून याद न रहे तो विद्यार्थी इन्हीं में से कोई चुन लेता है, पर एबीएस का पूरा ढांचा जैव विविधता कानून के भीतर ही है। नोट्स में पूरी कड़ी जोड़ें, क्योंकि यही कानून राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, राज्य जैव विविधता बोर्ड और जैव विविधता प्रबंधन समितियां बनाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने कौन सा पड़ाव पार किया है?

उसका संचयी पहुंच एवं लाभ-साझाकरण वितरण ₹200 करोड़ पार कर गया है। इसके साथ उसने 27 राज्य जैव विविधता बोर्डों और 5 केंद्र शासित प्रदेश परिषदों को ₹8.23 करोड़ की नई राशि स्वीकृत की है।

यह एबीएस राशि किन चार फसलों से मिली?

करेला, भिंडी, मिर्च और प्याज से। तीन बीज कंपनियों ने अनुसंधान और वाणिज्यिक उपयोग के लिए इन जैव संसाधनों तक पहुंच बनाई थी और यह राशि चुकाई।

राशि किसानों की जगह राज्य बोर्डों को क्यों दी जा रही है?

संसाधन खुले बाजार या व्यापारियों से लिए गए थे, इसलिए किसी एक किसान, समुदाय या भौगोलिक स्रोत की पहचान संभव नहीं थी। ऐसे में हिस्सा खेती के क्षेत्रफल के आधार पर उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बांटा जाता है जहां ये फसलें होती हैं।

बोर्ड यह राशि कहां खर्च कर सकते हैं?

केवल जैव विविधता कानून, 2002 की धारा 32(2) में दर्ज कामों पर, जैसे लोक जैव विविधता रजिस्टर, जैव संसाधनों का संरक्षण, क्षरित पारिस्थितिकी तंत्रों की बहाली, जैव विविधता विरासत स्थल और सामुदायिक आजीविका।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS