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कोयला गैसीकरण योजना: ₹37,500 करोड़, एनटीपीसी का आवेदन

कोयला मंत्रालय ने बताया कि ₹37,500 करोड़ की सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण योजना में तालचर फर्टिलाइजर्स तथा एनटीपीसी लिमिटेड ने आवेदन जमा कर दिए हैं।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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कोयला गैसीकरण योजना: ₹37,500 करोड़, एनटीपीसी का आवेदन — GK24 title card

चर्चा में क्यों

5 सितंबर 2026 को कोयला मंत्रालय ने साफ किया कि ₹37,500 करोड़ की सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण योजना में तालचर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड तथा एनटीपीसी लिमिटेड के आवेदन आ चुके हैं, और कोई आवेदक न मिलने की खबरें समय से पहले का आकलन हैं।

कोयला मंत्रालय ने 5 सितंबर 2026 को सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने की योजना पर स्थिति साफ की। प्रेस की खबरों में कहा गया था कि योजना में कोई आवेदन नहीं आया। मंत्रालय ने इन खबरों को समय से पहले का आकलन बताया।

योजना क्या है

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना को 13 मई 2026 को मंजूरी दी। इसका कुल वित्तीय परिव्यय ₹37,500 करोड़ है। उद्देश्य देश में कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण को गति देना है। घरेलू कोयला और लिग्नाइट को अधिक मूल्य वाले उत्पादों में बदला जाना है। विज्ञप्ति सिनगैस, मेथनॉल, अमोनिया और यूरिया के नाम लेती है। मकसद आयातित कच्चे माल पर निर्भरता घटाना और देश की ऊर्जा तथा आर्थिक सुरक्षा मजबूत करना है।

आवेदन की समयरेखा

चरणतारीख
मंत्रिमंडल की मंजूरी13 मई 2026
नई दिल्ली में रोड शो28 मई 2026
हैदराबाद में रोड शो11 जून 2026
मुंबई में रोड शो18 जून 2026
प्रस्ताव के लिए अनुरोध7 जुलाई 2026
पूर्व-आवेदन सम्मेलन20 जुलाई 2026
पहले दौर की अंतिम तिथि7 सितंबर 2026

आवेदन किसने किए

मंत्रालय ने बताया कि तालचर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड और एनटीपीसी लिमिटेड ने ऑनलाइन पोर्टल से आवेदन जमा कर दिए हैं। उसके अनुसार यही तथ्य कोई आवेदक न मिलने के दावे को गलत साबित करता है। मंत्रालय ने जोड़ा कि वह अन्य संभावित आवेदकों के संपर्क में है, जो परियोजना की तैयारी के विभिन्न चरणों में हैं।

आवेदन में समय क्यों लगता है

इस आकार की परियोजनाओं में भारी तैयारी लगती है। आवेदक को पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट बनानी होती है, प्रौद्योगिकी विकल्प तौलने होते हैं, कोयला या लिग्नाइट तथा अन्य कच्चे माल की व्यवस्था करनी होती है, परियोजना की आर्थिक स्थिति आंकनी होती है और विस्तृत प्रस्ताव तैयार करना होता है। मंत्रालय को उम्मीद है कि अंतिम तिथि नजदीक आने पर और प्रस्ताव आएंगे।

निरंतर दौर की व्यवस्था

आवेदन के दौर निरंतर चलते हैं। एक दौर बंद होने पर अगला दौर अगले ही दिन शुरू होता है और दो महीने तक खुला रहता है। इसलिए जिस कंपनी को अधिक समय चाहिए, वह पिछला दौर चूकने पर बाहर नहीं हो जाती।

योजना से क्या अपेक्षा है

मंत्रालय को लगभग 25 परियोजनाओं में ₹2.5 लाख करोड़ से ₹3 लाख करोड़ तक के निवेश की उम्मीद है। इससे करीब 50,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार बनने की आशा है। यह योजना 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण क्षमता के व्यापक लक्ष्य में भी योगदान देगी।

महत्वपूर्ण तथ्य

योजनासतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने की योजना
मंत्रालयकोयला मंत्रालय
मंजूरीकेंद्रीय मंत्रिमंडल, 13 मई 2026
परिव्यय₹37,500 करोड़
लक्षित उत्पादसिनगैस, मेथनॉल, अमोनिया और यूरिया
आवेदक कंपनियांतालचर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड और एनटीपीसी लिमिटेड
प्रस्ताव के लिए अनुरोध7 जुलाई 2026
पहले दौर की अंतिम तिथि7 सितंबर 2026
अपेक्षित निवेशलगभग 25 परियोजनाओं में ₹2.5 लाख करोड़ से ₹3 लाख करोड़
अपेक्षित रोजगारकरीब 50,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष अवसर
राष्ट्रीय लक्ष्य2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण क्षमता

परीक्षा की दृष्टि से

₹37,500 करोड़ का परिव्यय, 13 मई 2026 की मंत्रिमंडल मंजूरी, उत्पाद सिनगैस, मेथनॉल, अमोनिया तथा यूरिया, दोनों आवेदक कंपनियों के नाम, लगभग 25 परियोजनाएं और 50,000 रोजगार, तथा 2030 तक 100 मिलियन टन गैसीकरण क्षमता का लक्ष्य याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.सरकारी योजनाएंमध्यम

सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं की योजना का कुल वित्तीय परिव्यय कितना है?

  1. A.₹8,500 करोड़
  2. B.₹37,500 करोड़
  3. C.₹1 लाख करोड़
  4. D.₹6,000 करोड़
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. ₹37,500 करोड़

व्याख्या

सही उत्तर ₹37,500 करोड़ है। कोयला मंत्रालय बताता है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 13 मई 2026 को इसी कुल वित्तीय परिव्यय के साथ योजना को मंजूरी दी, और यही आंकड़ा प्रेस खबरों पर जारी स्पष्टीकरण की शुरुआत में भी आता है। विकल्प A, विकल्प C और विकल्प D ऐसी गोल या पास-पास की संख्याएं हैं जिनसे योजना वाले प्रश्नों में भ्रम पैदा किया जाता है, और इनका समर्थन विज्ञप्ति में नहीं है। दो और आंकड़े परिव्यय से अलग रखें। पहला, योजना से अपेक्षित निवेश, जो लगभग 25 परियोजनाओं में ₹2.5 लाख करोड़ से ₹3 लाख करोड़ है। दूसरा, अपेक्षित रोजगार, जो करीब 50,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष अवसर हैं। परिव्यय सरकार की प्रतिबद्धता है, जबकि निवेश उद्योग की ओर से आने वाली राशि है। योजना का उद्देश्य भी याद रखें, यानी घरेलू कोयला और लिग्नाइट को सिनगैस, मेथनॉल, अमोनिया और यूरिया में बदलना, ताकि आयातित कच्चे माल पर निर्भरता घटे।

Q2.सरकारी योजनाएंमध्यम

कोयला मंत्रालय ने गैसीकरण योजना में आवेदन करने वाली किन दो कंपनियों के नाम बताए?

  1. A.कोल इंडिया लिमिटेड और गेल
  2. B.तालचर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड और एनटीपीसी लिमिटेड
  3. C.एनएलसी इंडिया और आईओसीएल
  4. D.सेल और ओएनजीसी
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. तालचर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड और एनटीपीसी लिमिटेड

व्याख्या

सही उत्तर तालचर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड और एनटीपीसी लिमिटेड है। मंत्रालय ने बताया कि उसे सूचित किया गया है कि दोनों कंपनियों ने ऑनलाइन पोर्टल से अपने आवेदन जमा कर दिए हैं, और इसी तथ्य से उसने यह दावा खारिज किया कि योजना में कोई आवेदक नहीं मिला। बाकी विकल्पों में कोयला, गैस, लिग्नाइट, रिफाइनिंग और स्टील क्षेत्र की जानी-पहचानी सार्वजनिक कंपनियों के नाम हैं, जिन्हें विद्यार्थी गैसीकरण कार्यक्रम से सहज ही जोड़ लेता है, और इसीलिए वे भ्रम वाले विकल्प बनते हैं। परीक्षा के लिहाज से संदर्भ भी याद रखें, क्योंकि पहले दौर की अंतिम तिथि 7 सितंबर 2026 थी और मंत्रालय ने कहा था कि खिड़की खुली रहते आवेदनों की संख्या पर निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। योजना में दौर निरंतर चलते हैं, इसलिए एक दौर बंद होने के अगले दिन अगला दौर शुरू होकर दो महीने खुला रहता है और बाद में भी आवेदक आ सकते हैं।

Q3.सरकारी योजनाएंमध्यम

यह योजना 2030 तक कितनी कोयला गैसीकरण क्षमता के लक्ष्य में योगदान देगी?

  1. A.50 मिलियन टन
  2. B.75 मिलियन टन
  3. C.100 मिलियन टन
  4. D.200 मिलियन टन
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 100 मिलियन टन

व्याख्या

सही उत्तर 100 मिलियन टन है। विज्ञप्ति कहती है कि यह योजना 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण क्षमता हासिल करने के सरकार के व्यापक लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देगी, इसलिए 100 मिलियन टन और वर्ष 2030 की जोड़ी इस खबर से पूछे जाने वाले सबसे संभावित तथ्यों में है। विकल्प A, विकल्प B और विकल्प D देखने में संभव लगते हैं, पर विज्ञप्ति में इनका समर्थन नहीं है। दोहराते समय इस राष्ट्रीय लक्ष्य को योजना से जुड़े तीन अन्य आंकड़ों से अलग रखें, यानी 13 मई 2026 को मंत्रिमंडल से मंजूर ₹37,500 करोड़ का परिव्यय, लगभग 25 परियोजनाओं में ₹2.5 लाख करोड़ से ₹3 लाख करोड़ का अपेक्षित निवेश, और करीब 50,000 प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रोजगार। गैसीकरण के उत्पाद भी याद रखें, यानी सिनगैस, मेथनॉल, अमोनिया और यूरिया, क्योंकि प्रश्न आंकड़ों की जगह इन उत्पादों पर भी बन सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण योजना का परिव्यय कितना है?

₹37,500 करोड़। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे 13 मई 2026 को मंजूरी दी, ताकि गैसीकरण को गति मिले और घरेलू कोयला अधिक मूल्य वाले उत्पादों में बदले।

योजना में किन कंपनियों ने आवेदन किया है?

तालचर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड और एनटीपीसी लिमिटेड ने ऑनलाइन पोर्टल से आवेदन जमा किए हैं। कोयला मंत्रालय ने बताया कि अन्य संभावित आवेदक तैयारी के विभिन्न चरणों में हैं।

योजना किन उत्पादों को बढ़ावा देती है?

घरेलू कोयला और लिग्नाइट से बनने वाले अधिक मूल्य के उत्पादों को, यानी सिनगैस, मेथनॉल, अमोनिया और यूरिया। मकसद आयातित कच्चे माल पर निर्भरता घटाना है।

आवेदन के दौर कैसे चलते हैं?

निरंतर आधार पर। एक दौर बंद होने के अगले ही दिन अगला दौर शुरू होता है और दो महीने खुला रहता है, इसलिए अधिक समय चाहने वाली कंपनी बाहर नहीं होती। पहला दौर 7 सितंबर 2026 को बंद हुआ।

स्रोत

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