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वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम: सीमावर्ती गांवों को 11,639 करोड़

गृह मंत्रालय के 6 सितंबर 2026 के दस्तावेज के अनुसार वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम 11,639 करोड़ रुपये से 2,616 से अधिक सीमावर्ती गांवों तक पहुंच रहा है।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम: सीमावर्ती गांवों को 11,639 करोड़

चर्चा में क्यों

6 सितंबर 2026 को जारी पीआईबी दस्तावेज में वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के दोनों चरणों, 11,639 करोड़ रुपये के परिव्यय और जुलाई 2026 तक सीमावर्ती गांवों में मंजूर परियोजनाओं का पूरा ब्योरा दिया गया।

वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम देश की जमीनी सीमा पर बसे गांवों को आखिरी नहीं, बल्कि पहला गांव मानता है। इसका नोडल मंत्रालय गृह मंत्रालय है। 6 सितंबर 2026 को जारी एक दस्तावेज में बताया गया कि यह योजना अब कहां तक पहुंची है।

दो चरण, एक सीमा

योजना दो हिस्सों में चलती है। वीवीपी-1 उत्तरी सीमा को लेता है और राज्यों के साथ मिलकर चलने वाली केंद्र प्रायोजित योजना है। वीवीपी-2 बाकी जमीनी सीमाओं को लेता है और पूरी तरह केंद्र के पैसे से चलने वाली केंद्रीय क्षेत्र की योजना है। दोनों चरण मिलकर 2,616 से अधिक गांवों तक पहुंचते हैं और इनका कुल परिव्यय 11,639 करोड़ रुपये है।

चरणप्रकारदायरा
वीवीपी-1केंद्र प्रायोजित योजना19 जिलों के 46 ब्लॉकों के 662 प्राथमिक गांव, 4 राज्य और लद्दाख; परिव्यय 4,800 करोड़ रुपये
वीवीपी-2केंद्रीय क्षेत्र की योजना15 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों के 334 ब्लॉकों के 1,954 गांव

सीमा पर योजना की जरूरत क्यों पड़ी

भारत की अंतर्राष्ट्रीय जमीनी सीमा 15,000 किलोमीटर से अधिक लंबी है और सात पड़ोसी देशों को छूती है। सबसे लंबा हिस्सा बांग्लादेश के सामने है, जो 4,096.7 किलोमीटर का है। इसके बाद चीन की सीमा 3,488 किलोमीटर और पाकिस्तान की सीमा 3,323 किलोमीटर है। कठिन भूभाग, कमजोर संपर्क और रोजगार की कमी ने इन गांवों से परिवारों को पलायन के लिए मजबूर किया था। इसी खाई को पाटने के लिए 2023 में यह कार्यक्रम लाया गया।

पहला चरण जमीन पर

वीवीपी-1 की घोषणा 2022-23 के आम बजट में हुई और इसकी शुरुआत अरुणाचल प्रदेश के अंजाव जिले के किबिथू से 10 अप्रैल 2023 को हुई। इसका 4,800 करोड़ रुपये का परिव्यय 2022-23 से 2026-27 तक के लिए है, जिसमें से 2,500 करोड़ रुपये केवल सड़कों के लिए रखे गए। पहले चुने गए 662 गांवों की आबादी करीब 1.42 लाख है। ये गांव अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में हैं।

अब तक क्या मंजूर हुआ

जुलाई 2026 तक गृह मंत्रालय ने 3,020.32 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली 1,248 परियोजनाएं मंजूर कीं। केंद्रीय मंत्रालयों ने अपनी योजनाओं को जोड़कर 1,655 और परियोजनाएं मंजूर कीं। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 953.47 करोड़ रुपये जारी हुए और 283 परियोजनाएं पूरी बताई गईं। सड़कों की 111 परियोजनाएं 2,481.93 करोड़ रुपये की हैं, जो 134 ऐसे गांवों को सड़क देंगी जहां पहले सड़क नहीं थी, और इनमें 35 लंबे पुल शामिल हैं। पर्यटन की 327 परियोजनाएं 145 करोड़ रुपये की मंजूर हुईं।

लोगों तक सीधी पहुंच

शिविर, जागरूकता अभियान, स्वास्थ्य और पशु चिकित्सा शिविर तथा कौशल प्रशिक्षण मिलाकर 31 जुलाई 2026 तक 8,800 से अधिक गतिविधियां हुईं। इनमें अरुणाचल प्रदेश ने 2,990 और लद्दाख ने 2,221 गतिविधियां कीं। उत्तराखंड ने 2,038, हिमाचल प्रदेश ने 1,037 और सिक्किम ने 530 गतिविधियां कीं। सड़कें पीएमजीएसवाई-4 से बन रही हैं और कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार समिति जरूरत पड़ने पर नियमों में ढील दे सकती है। 1986-87 में शुरू हुआ पुराना सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम 39,000 से अधिक काम मंजूर करने के बाद अब समाप्ति की ओर है।

महत्वपूर्ण तथ्य

योजनावाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम (वीवीपी-1 और वीवीपी-2)
नोडल मंत्रालयगृह मंत्रालय
कुल परिव्यय11,639 करोड़ रुपये
कुल गांव2,616 से अधिक
वीवीपी-1 परिव्यय4,800 करोड़ रुपये, जिसमें 2,500 करोड़ रुपये सड़कों के लिए
वीवीपी-1 की शुरुआतकिबिथू, अंजाव जिला, अरुणाचल प्रदेश, 10 अप्रैल 2023
वीवीपी-1 के प्राथमिक गांव662 गांव, आबादी करीब 1.42 लाख
वीवीपी-2 का दायरा15 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों के 334 ब्लॉकों के 1,954 गांव
सबसे लंबी जमीनी सीमाबांग्लादेश, 4,096.7 किलोमीटर; कुल सीमा 15,000 किलोमीटर से अधिक
गृह मंत्रालय से मंजूर परियोजनाएंजुलाई 2026 तक 3,020.32 करोड़ रुपये की 1,248 परियोजनाएं
पुरानी योजनासीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम, 1986-87 में शुरू

परीक्षा की दृष्टि से

दोनों चरणों के प्रकार, कुल परिव्यय 11,639 करोड़ रुपये, वीवीपी-1 का परिव्यय 4,800 करोड़ रुपये, 10 अप्रैल 2023 को अरुणाचल प्रदेश के किबिथू से शुरुआत, पहले चरण के 662 गांव, दूसरे चरण के 1,954 गांव, नोडल गृह मंत्रालय तथा 15,000 किलोमीटर से अधिक जमीनी सीमा में बांग्लादेश की सबसे लंबी 4,096.7 किलोमीटर सीमा याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.सरकारी योजनाएंआसान

वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के वीवीपी-1 और वीवीपी-2 का कुल परिव्यय कितना है?

  1. A.4,800 करोड़ रुपये
  2. B.11,639 करोड़ रुपये
  3. C.15,000 करोड़ रुपये
  4. D.9,250 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 11,639 करोड़ रुपये

दस्तावेज बताता है कि वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम दो चरणों में चल रहा है और दोनों का परिव्यय मिलाकर यही रकम बनती है।

Q2.सरकारी योजनाएंमध्यम

वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के पहले चरण की शुरुआत 10 अप्रैल 2023 को कहां से हुई थी?

  1. A.नाथनपुर, कछार जिला, असम
  2. B.किबिथू, अंजाव जिला, अरुणाचल प्रदेश
  3. C.तवांग, अरुणाचल प्रदेश
  4. D.लेह, लद्दाख
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. किबिथू, अंजाव जिला, अरुणाचल प्रदेश

दस्तावेज के अनुसार वीवीपी-1 की शुरुआत वहीं से 10 अप्रैल 2023 को की गई थी। किबिथू को उसकी सामरिक स्थिति, इतिहास और विकास की जरूरत को देखते हुए चुना गया।

Q3.सरकारी योजनाएंमध्यम

भारत की अंतर्राष्ट्रीय जमीनी सीमा का सबसे लंबा हिस्सा किस देश के साथ लगता है?

  1. A.चीन
  2. B.पाकिस्तान
  3. C.बांग्लादेश
  4. D.नेपाल
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. बांग्लादेश

दस्तावेज भारत की कुल अंतर्राष्ट्रीय जमीनी सीमा 15,000 किलोमीटर से अधिक बताता है, जो सात पड़ोसी देशों से लगती है, और कहता है कि सबसे लंबा हिस्सा बांग्लादेश के साथ 4,096.7 किलोमीटर का है।

Q4.सरकारी योजनाएंआसान

वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम का नोडल मंत्रालय कौन सा है?

  1. A.ग्रामीण विकास मंत्रालय
  2. B.रक्षा मंत्रालय
  3. C.गृह मंत्रालय
  4. D.पंचायती राज मंत्रालय
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. गृह मंत्रालय

दस्तावेज इसे ही नोडल मंत्रालय बताता है, जो राज्य सरकारों, जिला प्रशासनों और सीमा सुरक्षा बलों के साथ मिलकर योजना और क्रियान्वयन में तालमेल बैठाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम का कुल परिव्यय कितना है?

दोनों चरणों को मिलाकर 11,639 करोड़ रुपये। इसमें उत्तरी सीमा के लिए वीवीपी-1 का हिस्सा 4,800 करोड़ रुपये है और बाकी रकम वीवीपी-2 की है, जो पूरी तरह केंद्र के पैसे से चलने वाली केंद्रीय क्षेत्र की योजना है।

यह कार्यक्रम कब और कहां शुरू हुआ?

वीवीपी-1 की घोषणा 2022-23 के आम बजट में हुई और इसकी शुरुआत 10 अप्रैल 2023 को अरुणाचल प्रदेश के अंजाव जिले के किबिथू गांव से की गई। इसका नोडल मंत्रालय गृह मंत्रालय है।

इस कार्यक्रम में कितने गांव आते हैं?

कुल मिलाकर 2,616 से अधिक गांव। वीवीपी-1 ने उत्तरी सीमा के 662 गांव प्राथमिकता पर लिए, जिनकी आबादी करीब 1.42 लाख है, और वीवीपी-2 में 15 राज्यों तथा 2 केंद्र शासित प्रदेशों के 334 ब्लॉकों के 1,954 गांव शामिल हैं।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS