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वाटरशेड दिशानिर्देश: नागपुर में तीसरा राष्ट्रीय परामर्श

भूमि संसाधन विभाग, एनआरएए और आईसीएआर मृदा सर्वेक्षण ब्यूरो ने 4-5 नवंबर 2026 को नागपुर में वाटरशेड प्रबंधन के मसौदा राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देशों पर तीसरा परामर्श किया।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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वाटरशेड दिशानिर्देश: नागपुर में तीसरा राष्ट्रीय परामर्श

चर्चा में क्यों

5 नवंबर 2026 को भूमि संसाधन विभाग, राष्ट्रीय वर्षा सिंचित क्षेत्र प्राधिकरण और नागपुर के आईसीएआर मृदा सर्वेक्षण ब्यूरो ने विश्व बैंक की सहायता वाले रिवॉर्ड कार्यक्रम के अंतर्गत वाटरशेड प्रबंधन के मसौदा राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देशों पर दो दिवसीय तीसरी राष्ट्रीय परामर्श बैठक पूरी की।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग (डीओएलआर) और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय वर्षा सिंचित क्षेत्र प्राधिकरण (एनआरएए) ने नागपुर में वाटरशेड प्रबंधन पर दो दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श बैठक की। यह बैठक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग नियोजन ब्यूरो, नागपुर के साथ मिलकर 4 और 5 नवंबर 2026 को हुई।

बैठक का विषय

यह वाटरशेड प्रबंधन में सुधार के लिए बने मसौदा राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देशों (एनटीजी) पर तीसरी राष्ट्रीय स्तर की परामर्श बैठक थी। यह काम विश्व बैंक की सहायता से चल रहे रिवॉर्ड कार्यक्रम के अंतर्गत हो रहा है, जिसका पूरा नाम रिजुवनेटिंग वाटरशेड्स फॉर एग्रीकल्चरल रेजिलिएंस थ्रू इनोवेटिव डेवलपमेंट है। नीति निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ, शोधकर्ता, विकास साझेदार और कई राज्यों के प्रतिनिधि एक वैज्ञानिक, तकनीक आधारित, किफायती और जन भागीदारी वाले ढांचे पर विचार करने के लिए जुटे।

किसने क्या कहा

डीओएलआर के सचिव श्री दिलीप कुमार ने कहा कि वैज्ञानिक कठोरता और व्यावहारिक अमल के बीच संतुलन जरूरी है, क्योंकि बहुत कड़े दिशानिर्देश मैदानी स्तर पर काम में अड़चन बन जाते हैं। उन्होंने राज्यों को उनकी संस्थागत क्षमता, तकनीकी सामर्थ्य और प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार छूट देने की बात कही और जोड़ा कि लचीले तथा यथार्थपरक ढांचे से 80 से 90 प्रतिशत लक्ष्य पा लेना अत्यधिक कड़े मानकों से बेहतर है। उन्होंने डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0 के पुष्ट आधार आंकड़ों और प्रभाव आकलन पर भी जोर दिया, ताकि मिली कमियां डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 3.0 की रूपरेखा को बेहतर बना सकें।

एनआरएए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. चंद्र शेखर कुमार ने ओडिशा और कर्नाटक में बनी प्रणालियों की सर्वोत्तम विशेषताओं को लेकर एक समन्वित राष्ट्रीय निर्णय समर्थन प्रणाली बनाने की बात कही। संयुक्त सचिव श्री नितिन खड़े ने दिशानिर्देशों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने पर जोर दिया और इस काम को 2047 तक विकसित तथा सूखा-सहिष्णु भारत के लक्ष्य से जोड़ा।

तकनीक और जन भागीदारी

  • भूमि संसाधन सूची (एलआरआई), डिजिटल मृदा पुस्तकालय और निर्णय समर्थन प्रणाली से गांव स्तर पर मिट्टी-पानी संरक्षण, फसल चक्र और पोषक तत्व प्रबंधन की योजना बदल सकती है।
  • परियोजना की अवधि डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 1.0 के सात वर्ष से घटाकर डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0 में पांच वर्ष कर दी गई है।
  • जीआईएस, सुदूर संवेदन, उच्च गुणवत्ता वाले उपग्रह चित्र और ड्रोन का उपयोग स्थानीय जरूरत के अनुसार होगा।
  • किसान उत्पादक संगठन, उपयोगकर्ता समूह और स्वयं सहायता समूह मजबूत किए जाएंगे, जिससे परियोजना खत्म होने के बाद भी जल संचयन ढांचों का रखरखाव होता रहे।

बैठक में डीओएलआर, एनआरएए, विश्व बैंक, रिवॉर्ड की परियोजना राज्यों ओडिशा और कर्नाटक, नाबार्ड, इक्रीसैट, वासन, एनआरएससी, मैनेज, स्वयंसेवी संस्थाओं और आईसीएआर संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए। उद्घाटन सत्र में विश्व बैंक की वरिष्ठ कृषि विशेषज्ञ तथा कार्यक्रम की टास्क टीम लीडर सुश्री प्रीति कुमार और मेजबान संस्थान के निदेशक डॉ. एन.जी. पाटिल भी उपस्थित रहे।

महत्वपूर्ण तथ्य

कार्यक्रमवाटरशेड प्रबंधन के मसौदा राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देशों पर तीसरी राष्ट्रीय स्तर परामर्श बैठक
तिथि4 और 5 नवंबर 2026 (दो दिवसीय)
स्थानआईसीएआर-राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग नियोजन ब्यूरो, नागपुर
आयोजकभूमि संसाधन विभाग (ग्रामीण विकास मंत्रालय), राष्ट्रीय वर्षा सिंचित क्षेत्र प्राधिकरण (कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय) और आईसीएआर मृदा सर्वेक्षण ब्यूरो
कार्यक्रमविश्व बैंक की सहायता वाला रिवॉर्ड कार्यक्रम
रिवॉर्ड का पूरा नामरिजुवनेटिंग वाटरशेड्स फॉर एग्रीकल्चरल रेजिलिएंस थ्रू इनोवेटिव डेवलपमेंट
सचिव, डीओएलआरश्री दिलीप कुमार
मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एनआरएएडॉ. चंद्र शेखर कुमार
विश्व बैंक टास्क टीम लीडरसुश्री प्रीति कुमार
रिवॉर्ड परियोजना राज्यओडिशा और कर्नाटक

परीक्षा की दृष्टि से

संस्करण (तीसरा), तिथि (4-5 नवंबर 2026), स्थान (आईसीएआर मृदा सर्वेक्षण ब्यूरो, नागपुर), तीनों आयोजक और उनके मंत्रालय, सहायता देने वाली संस्था (विश्व बैंक), रिवॉर्ड का पूरा नाम, दोनों परियोजना राज्य (ओडिशा, कर्नाटक) और अवधि में कटौती (1.0 के सात वर्ष से 2.0 के पांच वर्ष) याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.सरकारी योजनाएंआसान

वाटरशेड प्रबंधन के मसौदा राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देश विश्व बैंक की सहायता वाले किस कार्यक्रम के अंतर्गत तैयार हो रहे हैं?

  1. A.रिवॉर्ड
  2. B.प्रणाम
  3. C.अमृत
  4. D.रफ्तार
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. रिवॉर्ड

मसौदा राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देशों पर तीसरी राष्ट्रीय स्तर की परामर्श बैठक विश्व बैंक की सहायता वाले इसी कार्यक्रम के अंतर्गत हुई, जिसका पूरा नाम रिजुवनेटिंग वाटरशेड्स फॉर एग्रीकल्चरल रेजिलिएंस थ्रू इनोवेटिव डेवलपमेंट है।

Q2.सरकारी योजनाएंमध्यम

4 और 5 नवंबर 2026 को वाटरशेड दिशानिर्देशों पर तीसरी राष्ट्रीय परामर्श बैठक किस संस्थान में हुई?

  1. A.आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली
  2. B.आईसीएआर-राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग नियोजन ब्यूरो, नागपुर
  3. C.आईसीएआर-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून
  4. D.राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र, हैदराबाद
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. आईसीएआर-राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग नियोजन ब्यूरो, नागपुर

दो दिवसीय परामर्श बैठक इसी ब्यूरो के सहयोग से और उसके परिसर में आयोजित हुई, तथा इसके निदेशक डॉ. एन.जी. पाटिल ने उद्घाटन सत्र में भूमि संसाधन सूची को समेकित वाटरशेड नियोजन का वैज्ञानिक और समग्र आधार बताया।

Q3.सरकारी योजनाएंमध्यम

डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0 के अंतर्गत एक वाटरशेड परियोजना की अवधि कितनी है?

  1. A.तीन वर्ष
  2. B.पांच वर्ष
  3. C.सात वर्ष
  4. D.दस वर्ष
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पांच वर्ष

भूमि संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव श्री नितिन खड़े ने बैठक में बताया कि वाटरशेड विकास घटक की परियोजना अवधि क्रमशः घटाई गई है, पहले चरण के सात वर्ष से दूसरे चरण में पांच वर्ष, और उन्होंने इस छोटी अवधि में अमल की गति बढ़ाने की जरूरत बताई।

Q4.सरकारी योजनाएंकठिन

एनआरएए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने जिस समन्वित राष्ट्रीय निर्णय समर्थन प्रणाली का सुझाव दिया, वह किन दो राज्यों की प्रणालियों पर आधारित होगी?

  1. A.ओडिशा और कर्नाटक
  2. B.गुजरात और महाराष्ट्र
  3. C.राजस्थान और मध्य प्रदेश
  4. D.तेलंगाना और आंध्र प्रदेश
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. ओडिशा और कर्नाटक

राष्ट्रीय वर्षा सिंचित क्षेत्र प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. चंद्र शेखर कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर एक समन्वित निर्णय समर्थन प्रणाली बनाई जाए, जिसमें इन दोनों राज्यों की बनी प्रणालियों की सर्वोत्तम विशेषताएं शामिल हों, जिससे राज्यों में वाटरशेड नियोजन समेकित हो सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाटरशेड प्रबंधन के राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देश किस कार्यक्रम के अंतर्गत बनाए जा रहे हैं?

विश्व बैंक की सहायता वाले रिवॉर्ड कार्यक्रम के अंतर्गत, जिसका पूरा नाम रिजुवनेटिंग वाटरशेड्स फॉर एग्रीकल्चरल रेजिलिएंस थ्रू इनोवेटिव डेवलपमेंट है। ओडिशा और कर्नाटक इसके परियोजना राज्य हैं और ये दिशानिर्देश डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 3.0 के लिए तकनीकी आधार बनेंगे।

तीसरी परामर्श बैठक कहां और कब हुई?

नागपुर स्थित आईसीएआर-राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग नियोजन ब्यूरो में 4 और 5 नवंबर 2026 को। इसका आयोजन भूमि संसाधन विभाग और राष्ट्रीय वर्षा सिंचित क्षेत्र प्राधिकरण ने मेजबान संस्थान के साथ मिलकर किया।

डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0 में परियोजना कितने वर्ष चलती है?

पांच वर्ष। पहले चरण में यह अवधि सात वर्ष थी, जिसे घटाया गया, और संयुक्त सचिव नितिन खड़े ने दूसरे चरण में अमल की गति बढ़ाने पर जोर दिया।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS