स्वच्छता ही सेवा 2026: विषय, तारीखें और ओडीएफ प्लस की प्रगति
स्वच्छता ही सेवा 2026 की शुरुआत 17 सितंबर को 'स्वच्छता में सहभाग' विषय के साथ हुई। देश में अब 5.69 लाख ओडीएफ प्लस गांव हैं, जिनमें 5.25 लाख मॉडल गांव हैं।

चर्चा में क्यों
स्वच्छता ही सेवा 2026 अभियान की शुरुआत के साथ पीआईबी ने ग्रामीण स्वच्छता पर एक बैकग्राउंडर जारी किया, जिसमें 17 सितंबर 2026 तक के ओडीएफ प्लस आंकड़े दिए गए हैं।
स्वच्छता ही सेवा 2026
इस साल का स्वच्छता ही सेवा (एसएचएस) अभियान 17 सितंबर 2026 से शुरू हुआ है। इसका विषय है 'स्वच्छता में सहभाग; स्वच्छ भारत, विकसित भारत'। 20 सितंबर को जारी पीआईबी के बैकग्राउंडर में अभियान का कार्यक्रम बताया गया है और स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (एसबीएम-जी) के तहत गांवों में स्वच्छता की स्थिति का लेखा-जोखा दिया गया है।
- 1 अक्टूबर: नागरिक 'एक दिन, एक घंटा, एक साथ' के तहत सामूहिक श्रमदान करेंगे।
- 2 अक्टूबर: गांवों में विशेष ग्राम सभाएं और स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम होंगे।
एसएचएस की शुरुआत 2017 में स्वच्छता में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने वाले सालाना अभियान के रूप में हुई थी। 2025 के अभियान में 18.06 करोड़ से ज़्यादा नागरिकों ने हिस्सा लिया। 2026 का अभियान छात्रों और युवाओं को केंद्र में रखता है। इसमें स्वच्छता ज्ञान यात्राएं, स्कूल संवाद, कचरे को स्रोत पर अलग करने के प्रदर्शन और स्वच्छता एवं जल संवाद होंगे, और छात्र सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (एसडब्ल्यूएम) नियम, 2026 के बारे में जानेंगे।
ओडीएफ से ओडीएफ प्लस तक
2014 में जब स्वच्छ भारत मिशन शुरू हुआ, तब ग्रामीण स्वच्छता कवरेज 39 प्रतिशत था। 2014 से 2019 के बीच 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 10.28 करोड़ से ज़्यादा शौचालय बने, ग्रामीण भारत में कवरेज 100 प्रतिशत हुआ और 2019 में ग्रामीण भारत को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया गया। इसके बाद एसबीएम-जी के दूसरे चरण में ज़ोर ओडीएफ का दर्जा बनाए रखने और ठोस व तरल कचरे के प्रबंधन पर आ गया।
ओडीएफ प्लस गांव वह है जो ओडीएफ का दर्जा बनाए रखता है, ठोस और तरल कचरे का प्रबंधन करता है और साफ-सुथरा दिखता है। ऐसे गांव तीन चरणों से गुज़रते हैं:
- एस्पायरिंग: ठोस या तरल, किसी एक तरह के कचरे का प्रबंधन
- राइजिंग: ठोस और तरल, दोनों तरह के कचरे का प्रबंधन
- मॉडल: दोनों तरह के कचरे का प्रबंधन, साथ में साफ-सफाई और ओडीएफ प्लस से जुड़े संदेशों का प्रदर्शन
अभी की स्थिति
| संकेतक (17 सितंबर 2026 तक) | आंकड़ा |
|---|---|
| ओडीएफ प्लस गांव | 5.69 लाख |
| ओडीएफ प्लस मॉडल गांव | 5.25 लाख |
| ठोस कचरा प्रबंधन वाले गांव | 5.38 लाख |
| तरल कचरा प्रबंधन वाले गांव | 5.65 लाख |
| चालू गोबरधन बायोगैस प्लांट | 582 जिलों में 1,314 |
| बने व्यक्तिगत शौचालय | 12.22 करोड़ |
| घरेलू बायोगैस प्लांट | 98,273 |
गोबरधन यानी गैल्वनाइजिंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज धन, एसबीएम-जी के दूसरे चरण की प्रमुख पहल है। यह मवेशियों के गोबर, फसल अवशेषों और जैविक कचरे को बायोगैस, कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) और जैविक खाद में बदलती है।
आंकड़ों के पीछे के लोग
बैकग्राउंडर बुनियादी ढांचे जितना ही ज़ोर व्यवहार में बदलाव पर देता है। एसबीएम-जी के दिशानिर्देश स्वच्छाग्रही के रूप में महिलाओं को प्राथमिकता देते हैं और डीएवाई-एनआरएलएम के स्वयं सहायता समूहों को व्यवहार परिवर्तन संचार का अहम मंच मानते हैं। इसमें दिए गए कुछ उदाहरण:
- पश्चिम बंगाल के हावड़ा में स्वयं सहायता समूहों ने गंगा किनारे की 18 ग्राम पंचायतों से 18 दिनों में 9.32 टन प्लास्टिक कचरा इकट्ठा किया।
- हरियाणा की गाडली ग्राम पंचायत ने ओडीएफ प्लस मॉडल का दर्जा पाया; सरपंच कांता कंवर के नेतृत्व में पांच तालाबों से ग्रे-वॉटर का ट्रीटमेंट होता है।
- कर्नाटक के 'स्वच्छ शनिवार' में हर महीने के पहले शनिवार को लोग सार्वजनिक जगहों की सफाई करते हैं।
- मध्य प्रदेश के बैतूल में बबीता धुर्वे ज़िले की पहली महिला ई-रिक्शा कचरा संग्राहक बनीं।
- गुजरात का वेदांचा गांव रोज़ 200 किलो-लीटर ग्रे-वॉटर ट्रीट करता है और खाद तथा साफ पानी के दोबारा इस्तेमाल से सालाना लगभग ₹2.5 लाख कमाता है।
परीक्षा के लिए
सबसे संभावित प्रश्न: एसएचएस 2026 का विषय और शुरुआत की तारीख, एसएचएस की शुरुआत का वर्ष (2017), ओडीएफ प्लस के तीन चरण, 5.69 लाख ओडीएफ प्लस गांव, गोबरधन का पूरा नाम, और 2014 में 39 प्रतिशत ग्रामीण स्वच्छता कवरेज।
महत्वपूर्ण तथ्य
| एसएचएस 2026 का विषय | स्वच्छता में सहभाग; स्वच्छ भारत, विकसित भारत |
|---|---|
| एसएचएस 2026 की शुरुआत | 17 सितंबर 2026 |
| 1 अक्टूबर | सामूहिक श्रमदान: एक दिन, एक घंटा, एक साथ |
| 2 अक्टूबर | गांवों में विशेष ग्राम सभाएं |
| एसएचएस की शुरुआत | 2017 |
| एसएचएस 2025 में भागीदारी | 18.06 करोड़ से ज़्यादा नागरिक |
| ओडीएफ प्लस गांव | 5.69 लाख (5.25 लाख मॉडल), 17 सितंबर 2026 तक |
| ओडीएफ प्लस के चरण | एस्पायरिंग, राइजिंग, मॉडल |
| गोबरधन | गैल्वनाइजिंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज धन; 582 जिलों में 1,314 प्लांट |
| 2014 में ग्रामीण स्वच्छता कवरेज | 39 प्रतिशत |
| ग्रामीण भारत ओडीएफ घोषित | 2019 |
परीक्षा की दृष्टि से
एसएचएस 2026 का विषय और तारीखें (17 सितंबर से शुरुआत, 1 अक्टूबर को श्रमदान, 2 अक्टूबर को ग्राम सभाएं), 2017 में एसएचएस की शुरुआत, ओडीएफ प्लस के तीन चरण, 5.69 लाख ओडीएफ प्लस गांव और गोबरधन का पूरा नाम याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
17 सितंबर 2026 से शुरू हुए स्वच्छता ही सेवा 2026 अभियान का विषय क्या है?
- A.स्वच्छता में सहभाग; स्वच्छ भारत, विकसित भारत
- B.स्वभाव स्वच्छता, संस्कार स्वच्छता
- C.कचरा मुक्त भारत
- D.एक दिन, एक घंटा, एक साथ
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. स्वच्छता में सहभाग; स्वच्छ भारत, विकसित भारत
व्याख्या
सही उत्तर स्वच्छता में सहभाग; स्वच्छ भारत, विकसित भारत है। 20 सितंबर 2026 के पीआईबी बैकग्राउंडर के अनुसार यह स्वच्छता ही सेवा 2026 का विषय है, जिसकी शुरुआत 17 सितंबर को हुई। यह अभियान टिकाऊ व्यवहार परिवर्तन के केंद्र में छात्रों और युवाओं को रखता है।
विकल्प D एक जाल है। 'एक दिन, एक घंटा, एक साथ' इसी अभियान का हिस्सा है, लेकिन यह 1 अक्टूबर को होने वाले सामूहिक श्रमदान का नारा है, अभियान का विषय नहीं। विकल्प B और C को विज्ञप्ति में 2026 का विषय नहीं बताया गया है, इसलिए वे भी गलत हैं। अभियान का कार्यक्रम क्रम से याद रखें: 17 सितंबर को शुरुआत, 1 अक्टूबर को श्रमदान और 2 अक्टूबर को गांवों में विशेष ग्राम सभाएं। यह अभियान 2017 में शुरू हुआ था और 2025 में इसमें 18.06 करोड़ से ज़्यादा नागरिकों ने भाग लिया था।
स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के तहत जो ओडीएफ प्लस गांव ठोस और तरल दोनों तरह के कचरे का प्रबंधन करता है, लेकिन अभी सबसे ऊंचे चरण तक नहीं पहुंचा है, उसे किस श्रेणी में रखा जाता है?
- A.एस्पायरिंग
- B.राइजिंग
- C.मॉडल
- D.इमर्जिंग
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. राइजिंग
व्याख्या
सही उत्तर राइजिंग है। बैकग्राउंडर के अनुसार ओडीएफ प्लस गांवों को तीन चरणों में बांटा गया है। एस्पायरिंग गांव या तो ठोस कचरे का प्रबंधन करते हैं या तरल कचरे का। राइजिंग गांव ठोस और तरल, दोनों तरह के कचरे का प्रबंधन करते हैं। मॉडल गांव दोनों तरह के कचरे का प्रबंधन करने के साथ साफ-सफाई भी बनाए रखते हैं और ओडीएफ प्लस से जुड़े संदेश प्रदर्शित करते हैं।
विकल्प A गलत है, क्योंकि एस्पायरिंग गांव केवल एक तरह के कचरे का प्रबंधन करता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि प्रश्न में ऐसे गांव की बात है जो सबसे ऊंचे चरण तक नहीं पहुंचा, और मॉडल ही सबसे ऊंचा चरण है। विकल्प D यानी इमर्जिंग इन तीन चरणों में है ही नहीं। क्रम याद रखें: एस्पायरिंग, फिर राइजिंग, फिर मॉडल। 17 सितंबर 2026 तक देश के 5.69 लाख ओडीएफ प्लस गांवों में से 5.25 लाख मॉडल चरण तक पहुंच चुके थे।
17 सितंबर 2026 तक देश में कितने गांवों ने ओडीएफ प्लस का दर्जा हासिल कर लिया था?
- A.5.25 लाख
- B.5.38 लाख
- C.5.69 लाख
- D.6.10 लाख
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 5.69 लाख
व्याख्या
सही उत्तर 5.69 लाख है। पीआईबी बैकग्राउंडर के अनुसार 17 सितंबर 2026 तक भारत में 5.69 लाख ओडीएफ प्लस गांव बन चुके थे। ओडीएफ प्लस गांव खुले में शौच से मुक्त का दर्जा बनाए रखता है, ठोस और तरल कचरे का प्रबंधन करता है और साफ-सफाई बनाए रखता है।
बाकी आंकड़े भ्रम पैदा करने लायक करीब हैं और इनमें से दो इसी विज्ञप्ति से लिए गए हैं। विकल्प A यानी 5.25 लाख उन गांवों की संख्या है जिन्होंने ओडीएफ प्लस मॉडल का दर्जा पाया है, जो कुल का एक हिस्सा है। विकल्प B यानी 5.38 लाख उन गांवों की संख्या है जहां ठोस कचरा प्रबंधन की व्यवस्था है। विकल्प D यानी 6.10 लाख विज्ञप्ति में नहीं है। विज्ञप्ति में तरल कचरा प्रबंधन वाले 5.65 लाख गांवों का आंकड़ा भी है, इसलिए ऐसे प्रश्न ध्यान से पढ़ें और हर आंकड़े को उसके अर्थ से मिलाएं।
स्वच्छता में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने वाला सालाना अभियान स्वच्छता ही सेवा किस वर्ष शुरू हुआ था?
- A.2014
- B.2017
- C.2019
- D.2021
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 2017
व्याख्या
सही उत्तर 2017 है। पीआईबी बैकग्राउंडर के अनुसार स्वच्छता ही सेवा 2017 में एक सालाना अभियान के रूप में शुरू किया गया, जो सरकारी संस्थानों, स्थानीय निकायों, संगठनों और नागरिकों को स्वच्छता की साझा ज़िम्मेदारी के लिए एक साथ लाता है। 2025 के अभियान में 18.06 करोड़ से ज़्यादा नागरिकों ने हिस्सा लिया।
विकल्प A यानी 2014 वह वर्ष है जब स्वच्छ भारत मिशन शुरू हुआ था और ग्रामीण स्वच्छता कवरेज 39 प्रतिशत था; एसएचएस इसके बाद आया। विकल्प C यानी 2019 वह वर्ष है जब ग्रामीण भारत को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया गया। विकल्प D यानी 2021 विज्ञप्ति में इस अभियान की शुरुआत से नहीं जुड़ा है। स्वच्छता से जुड़े प्रश्नों में ये वर्ष अक्सर विकल्प बनते हैं, इसलिए क्रम याद रखें: 2014 में एसबीएम, 2017 में एसएचएस और 2019 में ग्रामीण भारत ओडीएफ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
स्वच्छता ही सेवा 2026 का विषय क्या है?
इसका विषय 'स्वच्छता में सहभाग; स्वच्छ भारत, विकसित भारत' है। अभियान की शुरुआत 17 सितंबर 2026 को हुई।
ओडीएफ प्लस मॉडल गांव क्या होता है?
ऐसा गांव जो खुले में शौच से मुक्त का दर्जा बनाए रखता है, ठोस और तरल दोनों तरह के कचरे का प्रबंधन करता है, साफ-सुथरा दिखता है और ओडीएफ प्लस से जुड़े संदेश प्रदर्शित करता है। इससे नीचे के दो चरण एस्पायरिंग और राइजिंग हैं।
गोबरधन का पूरा नाम क्या है?
गैल्वनाइजिंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज धन। यह एसबीएम-जी के दूसरे चरण की प्रमुख पहल है, जो गोबर, फसल अवशेष और जैविक कचरे को बायोगैस, कंप्रेस्ड बायोगैस और जैविक खाद में बदलती है।
स्वच्छता ही सेवा अभियान कब शुरू हुआ था?
स्वच्छता ही सेवा 2017 में स्वच्छता में नागरिक भागीदारी बढ़ाने वाले सालाना अभियान के रूप में शुरू हुआ। 2025 के अभियान में 18.06 करोड़ से ज़्यादा नागरिकों ने भाग लिया।
स्रोत
- जब स्वच्छता एक जन-आंदोलन बनी (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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