सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम ने पहली बार मेरठ के आसमान में दिखाए करतब
भारतीय वायु सेना की सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम ने 19 और 20 सितंबर 2026 को पहली बार मेरठ में हवाई प्रदर्शन किया, जिसे दो दिनों में एक लाख से अधिक लोगों ने देखा।

चर्चा में क्यों
भारतीय वायु सेना की सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम ने 19 और 20 सितंबर 2026 को पहली बार मेरठ के आसमान में हवाई करतब दिखाए, जिन्हें एक लाख से अधिक लोगों ने देखा।
मेरठ के लिए पहला मौका
भारतीय वायु सेना की सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम (एसकेएटी) ने 19 और 20 सितंबर 2026 को पहली बार मेरठ के आसमान में अपने हवाई करतब दिखाए। रक्षा मंत्रालय के अनुसार दो दिनों में एक लाख से अधिक लोग यह प्रदर्शन देखने पहुंचे, जिनमें बड़ी संख्या में विद्यार्थी, एनसीसी कैडेट और एनएसएस स्वयंसेवक थे। इस आयोजन का मेरठ से खास जुड़ाव भी रहा, क्योंकि टीम के तीन सदस्य मेरठ के ही हैं और इनमें हवाई करतब दिखाने वाले दो पायलट भी शामिल हैं।
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने 20 सितंबर को यह प्रदर्शन देखा और एक्स पर इसे अनुशासन, सटीकता, टीम भावना और पेशेवर दक्षता का बेहतरीन मेल बताया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले दिन के प्रदर्शन के बाद पायलटों की सटीकता और साहस की तारीफ की, जिन्होंने आसमान को तिरंगे के रंगों से सजा दिया। उन्होंने इसे राज्य और पूरे देश के लिए गर्व का क्षण बताया। उनकी पोस्ट के अनुसार यह प्रदर्शन सेवा संकल्प अभियान के तहत हुआ।
दर्शकों ने क्या देखा
टीम 2026 का प्रशिक्षण सत्र पूरा करने के तुरंत बाद मेरठ पहुंची और वहां अपना नया विन्यास पहली बार लोगों के सामने रखा। टीम नौ लाल-सफेद हॉक एमके-132 विमान उड़ाती है, जिन्हें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) भारत में लाइसेंस के तहत बनाता है। प्रदर्शन में लूप, बैरल रोल, उल्टी उड़ान और टीम का मशहूर डीएनए करतब शामिल था। इस दौरान विमान एक-दूसरे से पांच मीटर से भी कम दूरी पर उड़ते हैं।
आसमान में दिखने वाले रंग भारत में किए गए एक बदलाव का नतीजा हैं। नाशिक स्थित भारतीय वायु सेना के बेस रिपेयर डिपो में हॉक एमके-132 विमानों में ऐसे उपकरण लगाए गए हैं जिनसे रंगीन धुआं निकलता है। इसी वजह से टीम आसमान में केसरिया, सफेद और हरा रंग बिखेर पाती है।
एसकेएटी के बारे में
1996 में गठित एसकेएटी एशिया की नौ विमानों वाली एकमात्र एरोबैटिक टीम है और दुनिया की चुनिंदा ऐसी टीमों में गिनी जाती है। 30 वर्षों के सफर में यह 800 से अधिक हवाई प्रदर्शन कर चुकी है और चीन, श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और दुबई के अंतरराष्ट्रीय एयर शो में वायु सेना का प्रतिनिधित्व कर चुकी है। इसे भारतीय वायु सेना का दूत कहा जाता है और इसके प्रदर्शन युवाओं को रक्षा सेवाओं में करियर के लिए प्रेरित करने का भी काम करते हैं।
परीक्षा की दृष्टि से
एसकेएटी पर प्रश्नों में आमतौर पर चार तथ्य पूछे जाते हैं: टीम का विमान (एचएएल द्वारा लाइसेंस के तहत निर्मित हॉक एमके-132), गठन का वर्ष (1996), एशिया की नौ विमानों वाली एकमात्र एरोबैटिक टीम होने की पहचान और इसका उपनाम, यानी भारतीय वायु सेना के दूत। नाशिक में किया गया रंगीन धुएं वाला बदलाव भी नोट्स में जोड़ने लायक नया तथ्य है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| टीम | सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम (एसकेएटी), भारतीय वायु सेना |
|---|---|
| स्थान और तारीख | मेरठ, 19 और 20 सितंबर 2026 (शहर में पहला प्रदर्शन) |
| दर्शक | दो दिनों में एक लाख से अधिक |
| विमान | नौ हॉक एमके-132, एचएएल द्वारा भारत में लाइसेंस के तहत निर्मित |
| रंगीन धुएं के उपकरण | वायु सेना का बेस रिपेयर डिपो, नाशिक |
| गठन | 1996 |
| विशेषता | एशिया की नौ विमानों वाली एकमात्र एरोबैटिक टीम |
| अब तक के प्रदर्शन | 30 वर्षों में 800 से अधिक |
| पहचान | भारतीय वायु सेना के दूत |
| उपस्थित मंत्री | रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ (20 सितंबर) |
परीक्षा की दृष्टि से
टीम का विमान (एचएएल द्वारा लाइसेंस के तहत निर्मित हॉक एमके-132), गठन का वर्ष (1996), एशिया की नौ विमानों वाली एकमात्र एरोबैटिक टीम होने का तथ्य, 'भारतीय वायु सेना के दूत' की पहचान और नाशिक के बेस रिपेयर डिपो में विकसित रंगीन धुएं के उपकरण याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
सितंबर 2026 में पहली बार मेरठ में प्रदर्शन करने वाली भारतीय वायु सेना की सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम कौन-सा विमान उड़ाती है?
- A.एचएएल तेजस
- B.हॉक एमके-132
- C.किरण एमके-II
- D.पिलेटस पीसी-7
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. हॉक एमके-132
व्याख्या
सही उत्तर हॉक एमके-132 है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम नौ विशेष लाल और सफेद रंग के हॉक एमके-132 विमान उड़ाती है, जिन्हें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) भारत में लाइसेंस के तहत बनाता है। इन विमानों में भारत में ही रंगीन धुआं छोड़ने वाले उपकरण भी लगाए गए हैं, जिनसे टीम आसमान में केसरिया, सफेद और हरा रंग बिखेरती है।
एचएएल तेजस, किरण एमके-II और पिलेटस पीसी-7 जैसे नाम रक्षा से जुड़े प्रश्नों में अक्सर गलत विकल्प के रूप में आते हैं, लेकिन विज्ञप्ति में इनमें से किसी को भी एसकेएटी का विमान नहीं बताया गया है। इसलिए विकल्प A, C और D गलत हैं। दोहराते समय टीम, विमान और निर्माता को एक साथ याद रखें: सूर्यकिरण, हॉक एमके-132 और एचएएल। विमानों की संख्या यानी नौ भी याद रखें, क्योंकि एसकेएटी एशिया की नौ विमानों वाली एकमात्र एरोबैटिक टीम है।
भारतीय वायु सेना की सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम (एसकेएटी) का गठन किस वर्ष हुआ था?
- A.1982
- B.1996
- C.2002
- D.2011
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1996
व्याख्या
सही उत्तर 1996 है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार एसकेएटी का गठन वर्ष 1996 में हुआ था और यह एशिया की नौ विमानों वाली एकमात्र एरोबैटिक टीम है। अपने 30 वर्षों के सफर में टीम देश-विदेश में 800 से अधिक हवाई प्रदर्शन कर चुकी है, जिनमें चीन, श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और दुबई के अंतरराष्ट्रीय एयर शो शामिल हैं।
1982 मंत्रालय द्वारा बताए गए वर्ष से पहले का है, जबकि 2002 और 2011 बाद के वर्ष हैं, जो 30 साल पूरे कर चुकी टीम से मेल नहीं खाते। इसलिए विकल्प A, C और D गलत हैं। ऐसे प्रश्नों में एक आसान जांच काम आती है: विज्ञप्ति 2026 तक के 30 वर्षों के सफर की बात करती है, जो 1996 की ओर इशारा करता है। गठन के वर्ष को टीम की दो प्रमुख पहचानों के साथ याद रखें: एशिया की नौ विमानों वाली एकमात्र एरोबैटिक टीम और भारतीय वायु सेना के दूत।
सूर्यकिरण टीम के हॉक एमके-132 विमानों में रंगीन धुआं छोड़ने वाले उपकरण भारतीय वायु सेना के किस शहर स्थित बेस रिपेयर डिपो में लगाए गए?
- A.नाशिक
- B.बेंगलुरु
- C.कानपुर
- D.चंडीगढ़
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. नाशिक
व्याख्या
सही उत्तर नाशिक है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार हॉक एमके-132 विमानों में देश में ही एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है, जिसके तहत रंगीन धुआं छोड़ने वाले उपकरण लगाए गए हैं। यह बदलाव भारतीय वायु सेना के नाशिक स्थित बेस रिपेयर डिपो में किया गया। इसी कारण टीम आसमान में राष्ट्रीय ध्वज के तीनों रंग, केसरिया, सफेद और हरा, बिखेर पाती है।
विज्ञप्ति में इस बदलाव के संबंध में बेंगलुरु, कानपुर या चंडीगढ़ का कोई उल्लेख नहीं है, इसलिए विकल्प B, C और D गलत हैं। दो अलग तथ्यों को आपस में न मिलाएं: हॉक एमके-132 विमान एचएएल भारत में लाइसेंस के तहत बनाता है, जबकि रंगीन धुएं वाला बदलाव वायु सेना के अपने नाशिक स्थित बेस रिपेयर डिपो में हुआ। रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण से जुड़े प्रश्नों में ऐसे ही तथ्य पूछे जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम कौन-सा विमान उड़ाती है?
एसकेएटी हॉक एमके-132 विमान उड़ाती है, जिन्हें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड भारत में लाइसेंस के तहत बनाता है। टीम के प्रदर्शन में ऐसे नौ लाल-सफेद विमान उड़ते हैं।
सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम का गठन कब हुआ था?
एसकेएटी का गठन 1996 में हुआ था। यह एशिया की नौ विमानों वाली एकमात्र एरोबैटिक टीम है और देश-विदेश में 800 से अधिक प्रदर्शन कर चुकी है।
मेरठ का यह हवाई प्रदर्शन खास क्यों था?
यह मेरठ में टीम का पहला प्रदर्शन था। 19 और 20 सितंबर 2026 को एक लाख से अधिक लोगों ने इसे देखा और टीम के तीन सदस्य, जिनमें दो पायलट हैं, मेरठ के ही हैं।
स्रोत
- सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम का पहली बार मेरठ के आसमान में हवाई करतब प्रदर्शन (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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