पीएम-सेतु का एक साल: 850 आईटीआई चुने गए, 14 क्लस्टर मंजूर
सरकारी आईटीआई को बदलने वाली ₹60,000 करोड़ की योजना पीएम-सेतु 4 अक्टूबर 2026 को एक साल पूरा कर रही है; अब तक 850 आईटीआई चुने गए और 14 क्लस्टर मंजूर हुए।

चर्चा में क्यों
3 अक्टूबर 2026 को जारी पीआईबी पृष्ठभूमि दस्तावेज़ में 4 अक्टूबर 2026 को एक साल पूरा कर रही पीएम-सेतु योजना का लेखा-जोखा दिया गया — ₹60,000 करोड़ का परिव्यय, 850 आईटीआई का चयन और ₹3,446 करोड़ के 14 क्लस्टरों की मंजूरी।
पीएम-सेतु यानी प्रधानमंत्री कौशल एवं रोजगारपरकता परिवर्तन योजना (उन्नत आईटीआई के माध्यम से) 4 अक्टूबर 2026 को अपना एक साल पूरा कर रही है। यह योजना 4 अक्टूबर 2025 को शुरू हुई थी, ताकि सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक और उद्योग की ज़रूरत के मुताबिक ढाला जा सके। खास बात यह है कि इसमें उद्योग को बाहर से सलाह देने वाला नहीं, बल्कि क्लस्टर चलाने वाला भागीदार बनाया गया है।
पैसा और ढाँचा
योजना का कुल परिव्यय ₹60,000 करोड़ है। इसमें केंद्र ₹30,000 करोड़, राज्य ₹20,000 करोड़ और उद्योग ₹10,000 करोड़ देंगे। पहले घटक में 1,000 सरकारी आईटीआई आते हैं, जिनमें 200 हब आईटीआई और 800 स्पोक आईटीआई हैं। औसतन हर हब से चार स्पोक जुड़े हैं, जो हब की आधुनिक कार्यशालाएँ, डिजिटल पढ़ाई की व्यवस्था और इनक्यूबेशन सुविधाएँ साझा करते हैं। हब में नवाचार केंद्र, प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण की सुविधा, उत्पादन इकाई और प्लेसमेंट सेवाएँ भी रहती हैं। दूसरे घटक में पाँच राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान — भुवनेश्वर, चेन्नई, हैदराबाद, कानपुर और लुधियाना — की क्षमता बढ़ाई जा रही है, जहाँ क्षेत्रवार राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र बन रहे हैं।
एक साल में कहाँ तक पहुँची
| चुने गए आईटीआई | 850, इनमें 172 हब और 678 स्पोक |
| क्लस्टर और बजट मद बनाने वाले राज्य/केंद्रशासित प्रदेश | 36 |
| राज्य संचालन समिति बनाने वाले | 35 |
| उद्योग को न्योता देने वाले | 26 |
| मंजूर रणनीतिक निवेश योजनाएँ | 14 क्लस्टर, ₹3,446 करोड़ के निवेश की |
| नए दौर के पाठ्यक्रम | शिल्पकार प्रशिक्षण योजना में 32 |
कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय संचालन समिति ने योजना को प्रायोगिक चरण से निकालकर चिह्नित सभी 200 क्लस्टरों में लागू करने की मंजूरी दे दी है। मंजूर 14 रणनीतिक निवेश योजनाएँ आठ राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में फैली हैं, और इनके एंकर साझेदारों में इस्पात, दवा, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचे की कंपनियाँ शामिल हैं।
उद्योग के हाथ में कमान
हर उन्नत क्लस्टर एक विशेष प्रयोजन कंपनी (एसपीवी) के ज़रिए चलेगा, जिसमें एंकर उद्योग साझेदार की हिस्सेदारी 51% होगी तथा केंद्र और राज्य के पास 24.5% – 24.5% रहेगी। जो कंपनी इसमें आना चाहती है, उसे पहले रणनीतिक निवेश योजना देनी होती है। इसके बाद यह कंपनी पाठ्यक्रम, पढ़ाने का तरीका, ढाँचा और कारखाने में मिलने वाले अनुभव की रूपरेखा तय करती है।
पाठ्यक्रम और विदेशी साझेदार
प्रशिक्षण महानिदेशालय ने शिल्पकार प्रशिक्षण योजना में 32 नए दौर के पाठ्यक्रम जोड़े हैं, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर तकनीक, रोबोटिक्स, हरित हाइड्रोजन, ड्रोन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, सौर ऊर्जा, 5जी और सॉफ्टवेयर परीक्षण शामिल हैं। उन्नत कौशल के लिए एनएसटीआई चेन्नई हेतु सिंगापुर, कानपुर हेतु फ्रांस और भुवनेश्वर हेतु ऑस्ट्रेलिया के साथ समझौता ज्ञापन हुआ है, जबकि हैदराबाद के लिए जर्मनी के साथ आशय का संयुक्त घोषणापत्र साझा किया गया है।
किस आधार पर खड़ी है योजना
सरकारी और निजी, दोनों तरह के आईटीआई की संख्या 2014 के 9,776 से बढ़कर 2026 में 13,888 हो गई है, यानी 42% की बढ़त। दाखिले 2014-15 सत्र के 9.51 लाख से बढ़कर 2025-26 में 14.70 लाख हो गए, यानी 54% ज़्यादा। शिल्पकार प्रशिक्षण योजना में प्रशिक्षण की अवधि व्यवसाय के हिसाब से छह महीने से दो साल तक है। आईटीआई राज्य सरकारों के प्रशासनिक और वित्तीय नियंत्रण में रहते हैं, जबकि प्रशिक्षण महानिदेशालय नीति, पाठ्यक्रम, संबद्धता मानदंड, प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण और व्यवसाय परीक्षा का काम देखता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| योजना | पीएम-सेतु (उन्नत आईटीआई के माध्यम से कौशल एवं रोजगारपरकता परिवर्तन) |
|---|---|
| शुरुआत | 4 अक्टूबर 2025; एक साल 4 अक्टूबर 2026 को |
| मंत्रालय | कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, प्रशिक्षण महानिदेशालय के माध्यम से |
| परिव्यय | ₹60,000 करोड़ — केंद्र ₹30,000 करोड़, राज्य ₹20,000 करोड़, उद्योग ₹10,000 करोड़ |
| पहला घटक | 1,000 सरकारी आईटीआई — 200 हब और 800 स्पोक |
| दूसरा घटक | भुवनेश्वर, चेन्नई, हैदराबाद, कानपुर और लुधियाना के पाँच एनएसटीआई |
| एक साल की प्रगति | 850 आईटीआई चुने गए — 172 हब और 678 स्पोक |
| मंजूर निवेश योजनाएँ | आठ राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश के 14 क्लस्टर, ₹3,446 करोड़ |
| एसपीवी हिस्सेदारी | एंकर उद्योग साझेदार 51%, केंद्र 24.5%, राज्य 24.5% |
| नए पाठ्यक्रम | शिल्पकार प्रशिक्षण योजना में 32 |
| विदेशी साझेदार | चेन्नई-सिंगापुर, कानपुर-फ्रांस, भुवनेश्वर-ऑस्ट्रेलिया, हैदराबाद-जर्मनी |
| आईटीआई की बढ़त | 2014 में 9,776 से 2026 में 13,888; दाखिले 9.51 लाख से 14.70 लाख |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें: पीएम-सेतु का पूरा नाम, शुरुआत की तारीख (4 अक्टूबर 2025), ₹60,000 करोड़ का परिव्यय और उसका तीन हिस्सों में बँटवारा, पहला घटक (1,000 आईटीआई — 200 हब और 800 स्पोक), दूसरा घटक (भुवनेश्वर, चेन्नई, हैदराबाद, कानपुर और लुधियाना के पाँच एनएसटीआई), एसपीवी में 51% और 24.5% – 24.5% की हिस्सेदारी, 850 आईटीआई का चयन और ₹3,446 करोड़ के 14 क्लस्टर।
अभ्यास प्रश्न
सरकारी आईटीआई को उन्नत बनाने वाली पीएम-सेतु योजना का कुल परिव्यय कितना है?
- A.₹40,000 करोड़
- B.₹50,000 करोड़
- C.₹60,000 करोड़
- D.₹75,000 करोड़
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. ₹60,000 करोड़
व्याख्या
सही उत्तर है ₹60,000 करोड़। इस योजना का पैसा तीन तरफ से आता है — केंद्र ₹30,000 करोड़, राज्य सरकारें ₹20,000 करोड़ और उद्योग ₹10,000 करोड़ देते हैं, और यही मिलकर पूरा परिव्यय बनाते हैं। इसी रकम से पहले घटक में सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों का हब-एंड-स्पोक ढाँचे में उन्नयन होता है और दूसरे घटक में पाँच राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों की क्षमता बढ़ाई जाती है। विकल्प A, B और D में दी गई रकमें योजना के किसी हिस्से से मेल नहीं खातीं; न केंद्र के हिस्से से, न राज्यों के, न उद्योग के और न ही कुल परिव्यय से। ध्यान रखें कि ₹3,446 करोड़ अलग आँकड़ा है, जो पहले साल में मंजूर 14 रणनीतिक निवेश योजनाओं के निवेश का है, योजना के परिव्यय का नहीं।
पीएम-सेतु के पहले घटक के 1,000 सरकारी आईटीआई में हब आईटीआई कितने हैं?
- A.100
- B.200
- C.400
- D.800
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 200
व्याख्या
सही उत्तर है 200। पहले घटक में एक हज़ार सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान आते हैं, जिनमें 200 हब आईटीआई और 800 स्पोक आईटीआई हैं। इसलिए विकल्प D में दी गई संख्या हब की नहीं, स्पोक की है। औसतन हर हब से चार स्पोक जुड़े हैं, इसी कारण हब की संख्या कुल का पाँचवाँ हिस्सा है; इस व्यवस्था से स्पोक संस्थानों को हब की आधुनिक प्रयोगशालाएँ, डिजिटल सामग्री, इनक्यूबेशन सुविधा और प्लेसमेंट सेवाएँ मिल जाती हैं। विकल्प A और C ढाँचे से मेल नहीं खाते — सौ हब होते तो हर हब पर नौ स्पोक आते और चार सौ होते तो दो से भी कम, जो बताए गए मॉडल के अनुसार नहीं है। यही आँकड़ा राष्ट्रीय संचालन समिति के उस फैसले में भी दिखता है जिसमें चिह्नित सभी 200 क्लस्टरों में योजना लागू करने की मंजूरी दी गई।
पीएम-सेतु के तहत बनने वाली क्लस्टर एसपीवी में एंकर उद्योग साझेदार की हिस्सेदारी कितनी होती है?
- A.24.5%
- B.26%
- C.49%
- D.51%
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 51%
व्याख्या
सही उत्तर है 51%। पीएम-सेतु में क्लस्टर का संचालन उद्योग के हाथ में दिया गया है, इसलिए एंकर उद्योग साझेदार को विशेष प्रयोजन कंपनी में इक्यावन प्रतिशत की बहुमत हिस्सेदारी मिलती है, जबकि बाकी हिस्सा केंद्र और राज्य सरकार बराबर-बराबर रखते हैं। विकल्प A में दी गई हिस्सेदारी केंद्र और राज्य में से हर एक की है, यानी 24.5%, और दोनों मिलकर भी आधे से कम ही बैठते हैं। विकल्प B और C की हिस्सेदारी इस ढाँचे में कहीं नहीं आती। जो कंपनी एंकर साझेदार बनना चाहती है, उसे पहले रणनीतिक निवेश योजना देनी पड़ती है; कंपनी बन जाने के बाद वही क्लस्टर का विकास और संचालन देखती है और क्षेत्र के उद्योगों के हिसाब से पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण, ढाँचे तथा उद्योग के अनुभव में बदलाव सुझाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पीएम-सेतु क्या है और कब शुरू हुई?
यह उन्नत आईटीआई के माध्यम से कौशल एवं रोजगारपरकता बदलने की प्रधानमंत्री योजना है। इसकी शुरुआत 4 अक्टूबर 2025 को हुई और 4 अक्टूबर 2026 को इसका एक साल पूरा हो रहा है; परिव्यय ₹60,000 करोड़ है।
पीएम-सेतु में आईटीआई किस ढाँचे में जोड़े गए हैं?
पहले घटक में 1,000 सरकारी आईटीआई हैं, जिनमें 200 हब और 800 स्पोक हैं। औसतन हर हब से चार स्पोक जुड़े हैं, जो हब की आधुनिक सुविधाएँ, नए ट्रेड और डिजिटल पढ़ाई साझा करते हैं।
क्लस्टर की विशेष प्रयोजन कंपनी किसके नियंत्रण में रहती है?
एंकर उद्योग साझेदार के पास 51% हिस्सेदारी रहती है, जबकि केंद्र और राज्य सरकार के पास 24.5% – 24.5%। यही कंपनी पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण, ढाँचा और उद्योग के अनुभव की रूपरेखा तय करती है।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2318631 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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