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राजस्थान के अफीम क्षेत्र में राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस मनाया गया

केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की राजस्थान इकाई ने गांधी जयंती पर राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस मनाते हुए अफीम उत्पादक जिलों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए।

लेखक प्रकाशित · अपडेट · 2 मिनट
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राजस्थान के अफीम क्षेत्र में राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस मनाया गया

चर्चा में क्यों

3 अक्तूबर 2026 को पत्र सूचना कार्यालय ने बताया कि केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की राजस्थान इकाई ने राज्य के अफीम उत्पादक क्षेत्रों में जागरूकता और स्वच्छता कार्यक्रमों के साथ राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस मनाया।

केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) ने, जो केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधीन काम करता है और देश में वैध अफीम की खेती का लाइसेंस तथा निगरानी देखता है, राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस के अवसर पर नशे के विरुद्ध संदेश सीधे राजस्थान के अफीम उत्पादक गाँवों तक पहुँचाया। ब्यूरो की राजस्थान इकाई ने यह आयोजन महात्मा गांधी की जयंती पर किया, जो 2 अक्तूबर को पड़ती है, और कई कार्यक्रमों के साथ स्वच्छता अभियान भी चलाया।

किन जिलों में कार्यक्रम हुए

शहर में एक बड़ा समारोह करने के बजाय इकाई ने उन्हीं इलाकों को चुना जहाँ लाइसेंस पर पोस्त की खेती होती है। कोटा, झालावाड़, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ और उदयपुर जिलों के मंडल अफीम कार्यालयों ने किसानों और उनके आसपास रहने वाले परिवारों के लिए अलग-अलग बैठकें कीं।

  • झालावाड़ में बैठक झालरापाटन तहसील के बाबरीखड़ा के पास एक पोस्त उत्पादक गाँव में हुई।
  • भीलवाड़ा में सवाईपुर-बडाला बाईपास राजमार्ग पर हुए कार्यक्रम में सैकड़ों ग्रामीण और काश्तकार जुटे।
  • उदयपुर जिले की वल्लभनगर तहसील के मेनार गाँव में चित्तौड़गढ़-प्रथम कार्यालय ने जागरूकता के साथ सफाई अभियान भी जोड़ा।
  • मांगरोल नामक एक अन्य पोस्त उत्पादक गाँव में हुई चर्चा को ग्राम सभा की कार्यवाही में दर्ज किया गया।
  • प्रतापगढ़-द्वितीय ने छोटी सादड़ी के गोमाना में स्वच्छता और नशा विरोधी संयुक्त कार्यक्रम चलाया।

कोटा विश्वविद्यालय में ऑपरेशन युवा रक्षा

दिन का विद्यार्थी-केंद्रित हिस्सा कोटा विश्वविद्यालय में ऑपरेशन युवा रक्षा के तहत हुआ। कोटा के उप नारकोटिक्स आयुक्त नरेश बुंदेल मुख्य अतिथि रहे, और विश्वविद्यालय के कुलसचिव मुरलीधर प्रतिहार तथा एनएसएस प्रमुख शिक्षकों व छात्रों के साथ मौजूद रहे। बुंदेल ने कहा कि केवल पढ़ाई-लिखाई नशे से बचाव की गारंटी नहीं है — बहकावा, साथियों का दबाव और सामाजिक आदत पढ़े-लिखे युवाओं को भी इस ओर खींच सकते हैं। तेज़ प्रतिक्रिया करने वाले मन और ठहरकर सोचने वाले मन की अवधारणा से उन्होंने समझाया कि पहली बार का सेवन कैसे दोहराव, आदत और अंततः निर्भरता में बदल जाता है, और छात्रों से पहली ही बार मना कर देने को कहा।

ली गई शपथ

हर सत्र सामूहिक शपथ के साथ समाप्त हुआ। कोटा में छात्रों ने नशा मुक्ति शपथ ली, जबकि मंडल कार्यक्रमों में किसानों ने नशामुक्त भारत की शपथ लेकर अपने गाँवों में संदेश फैलाने का वचन दिया। चित्तौड़गढ़-प्रथम का कार्यक्रम युवा रक्षा और नशा मुक्त भारत अभियान के बैनर तले हुआ, जिससे यह दिवस राष्ट्रीय अभियान से जुड़ गया। सीबीएन ने पूरे आयोजन को गांधी के आत्मानुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व के विचार से जोड़ा और कहा कि रोकथाम तभी काम करती है जब काश्तकार और स्थानीय समुदाय खुद भागीदार बनें, न कि इसे केवल अधिकारियों पर छोड़ दें।

महत्वपूर्ण तथ्य

अवसरराष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस, महात्मा गांधी की जयंती (2 अक्तूबर) पर
एजेंसीकेंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन), राजस्थान इकाई
संबंधित मंत्रालयवित्त मंत्रालय
छात्र अभियानऑपरेशन युवा रक्षा
छात्र सत्र का स्थानकोटा विश्वविद्यालय
कोटा में मुख्य अतिथिनरेश बुंदेल, उप नारकोटिक्स आयुक्त, कोटा
शामिल जिलेकोटा, झालावाड़, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ और उदयपुर
दिलाई गई शपथनशा मुक्ति शपथ (नशामुक्त भारत की शपथ)
व्यापक अभियाननशा मुक्त भारत अभियान

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें कि राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस 2 अक्तूबर को गांधी जयंती से जुड़ा है, केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो वित्त मंत्रालय के अधीन आता है, ऑपरेशन युवा रक्षा का नाम, नशा मुक्त भारत अभियान से जुड़ाव और वे राजस्थानी जिले जहाँ लाइसेंस पर पोस्त उगाई जाती है।

अभ्यास प्रश्न

Q1.महत्वपूर्ण दिवसआसान

राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस किस नेता की जयंती पर मनाया जाता है?

  1. A.सरदार वल्लभभाई पटेल
  2. B.महात्मा गांधी
  3. C.लाल बहादुर शास्त्री
  4. D.डॉ. बी. आर. आंबेडकर
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. महात्मा गांधी

व्याख्या

सही उत्तर महात्मा गांधी है। राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस 2 अक्तूबर को पड़ता है, जो मोहनदास करमचंद गांधी की जयंती है, और केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो ने अपने राजस्थान कार्यक्रमों को गांधी के आत्मानुशासन तथा सामाजिक उत्तरदायित्व के संदेश से जोड़ा। विकल्प A गलत है क्योंकि सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती अलग से राष्ट्रीय एकता के दिवस के रूप में मनाई जाती है और उसका इस आयोजन से कोई संबंध नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि लाल बहादुर शास्त्री का जन्म भी 2 अक्तूबर को हुआ था, फिर भी यह दिवस जिन नेता के नाम से जोड़ा जाता है वे राष्ट्रपिता हैं, और ब्यूरो के कार्यक्रमों में उन्हीं का उल्लेख था। विकल्प D गलत है क्योंकि डॉ. बी. आर. आंबेडकर की जयंती दूसरी तारीख को आती है और वह सामाजिक न्याय से जुड़े आयोजनों से संबंधित है, इस नशा विरोधी अभियान से नहीं।

Q2.महत्वपूर्ण दिवसमध्यम

केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) किस केंद्रीय मंत्रालय के अधीन कार्य करता है?

  1. A.गृह मंत्रालय
  2. B.स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय
  3. C.वित्त मंत्रालय
  4. D.कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. वित्त मंत्रालय

व्याख्या

सही उत्तर वित्त मंत्रालय है। राजस्थान इकाई के नशा विरोधी कार्यक्रमों की विज्ञप्ति वित्त मंत्रालय की ओर से जारी हुई, जो केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो का पालक मंत्रालय है; यही ब्यूरो वैध अफीम पोस्त की खेती का लाइसेंस और निगरानी करता है। विकल्प A गलत है क्योंकि गृह मंत्रालय पुलिस व्यवस्था और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो देखता है, पर सीबीएन उसके अधीन नहीं आता। विकल्प B गलत है क्योंकि स्वास्थ्य मंत्रालय नशा मुक्ति उपचार और सेवाओं से जुड़ा है, पोस्त की खेती के लाइसेंस से नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि पोस्त भले ही एक कृषि फसल है, पर उसकी खेती स्वापक और राजस्व विषय के रूप में नियंत्रित होती है, कृषि मंत्रालय द्वारा नहीं। परीक्षार्थियों को सीबीएन का यह राजस्व पक्ष स्थायी तथ्य के रूप में याद रखना चाहिए।

Q3.महत्वपूर्ण दिवसमध्यम

कोटा विश्वविद्यालय में सीबीएन का नशा जागरूकता सत्र किस अभियान के तहत आयोजित हुआ?

  1. A.ऑपरेशन युवा रक्षा
  2. B.ऑपरेशन सागर मंथन
  3. C.ऑपरेशन स्वच्छ परिसर
  4. D.ऑपरेशन नशा बंधन
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. ऑपरेशन युवा रक्षा

व्याख्या

सही उत्तर ऑपरेशन युवा रक्षा है। कोटा विश्वविद्यालय का छात्र सत्र सीबीएन कोटा ने इसी अभियान के तहत आयोजित किया, जिसमें उप नारकोटिक्स आयुक्त नरेश बुंदेल मुख्य अतिथि थे और विश्वविद्यालय के कुलसचिव मुरलीधर प्रतिहार उपस्थित रहे; सत्र के अंत में प्रतिभागियों ने नशा मुक्ति शपथ ली। विकल्प B गलत है क्योंकि वह नाम समुद्री स्तर के एक अलग नशा विरोधी प्रयास से जुड़ा है और इस परिसर कार्यक्रम का बैनर नहीं था। विकल्प C और D गलत हैं क्योंकि इस आयोजन के साथ ऐसे किसी अभियान का उल्लेख नहीं हुआ; दूसरा बैनर केवल युवा रक्षा तथा नशा मुक्त भारत अभियान था, जिसके तहत चित्तौड़गढ़ में जागरूकता और सफाई अभियान चला। युवाओं से जुड़ा यही नाम यहाँ याद रखने योग्य है।

Q4.महत्वपूर्ण दिवसआसान

सीबीएन राजस्थान इकाई के नशा विरोधी कार्यक्रम मुख्यतः किस लाइसेंसी फसल वाले क्षेत्रों में हुए?

  1. A.गन्ना
  2. B.अफीम पोस्त
  3. C.कपास
  4. D.सरसों
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. अफीम पोस्त

व्याख्या

सही उत्तर अफीम पोस्त है। ब्यूरो ने जानबूझकर अपने कार्यक्रम राजस्थान की लाइसेंसी पोस्त उत्पादक पट्टी में ले जाकर कोटा, झालावाड़, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ और उदयपुर जिलों के काश्तकारों के लिए बैठकें कीं, जिनमें मांगरोल तथा झालरापाटन तहसील के बाबरीखड़ा के पास का गाँव शामिल थे। विकल्प A गलत है क्योंकि गन्ना कोई स्वापक फसल नहीं है और ब्यूरो के लाइसेंस दायरे से बाहर है। विकल्प C गलत है क्योंकि कपास राज्य के कई हिस्सों में उगाई जाती है, पर उसका स्वापक नियमन से कोई संबंध नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि सरसों राजस्थान की एक सामान्य तिलहन फसल है और केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो उसका लाइसेंस या निगरानी नहीं करता। ब्यूरो और पोस्त की खेती का यही संबंध प्रश्न का केंद्र है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस कब मनाया जाता है?

यह 2 अक्तूबर को, महात्मा गांधी की जयंती पर मनाया जाता है। वर्ष 2026 में केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की राजस्थान इकाई ने अफीम उत्पादक क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम और स्वच्छता अभियान चलाकर इसे मनाया।

केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो किस मंत्रालय के अधीन है?

केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधीन काम करता है। यह वैध अफीम पोस्त की खेती का लाइसेंस और निगरानी देखता है, और इसकी राजस्थान इकाई ने 3 अक्तूबर 2026 को बताए गए कार्यक्रम चलाए।

ऑपरेशन युवा रक्षा क्या है?

यह केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो का युवाओं पर केंद्रित अभियान है। इसी के तहत सीबीएन कोटा ने कोटा विश्वविद्यालय में नशा जागरूकता सत्र आयोजित किया, जहाँ छात्रों ने नशा मुक्ति शपथ ली।

स्रोत

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