उपराष्ट्रपति ने 5वें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन का उद्घाटन किया
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली में 5वें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन का उद्घाटन किया, जिसकी थीम ‘उतार-चढ़ाव के दौर में लचीलापन’ रखी गई थी।

चर्चा में क्यों
3 अक्टूबर 2026 को उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली में इंस्टिट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ द्वारा आयोजित 5वें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन का उद्घाटन किया, जिसकी थीम ‘उतार-चढ़ाव के दौर में लचीलापन’ रखी गई थी।
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने 3 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में 5वें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन का उद्घाटन भाषण दिया। इंस्टिट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ (आईईजी) द्वारा आयोजित इस सम्मेलन की थीम ‘उतार-चढ़ाव के दौर में लचीलापन’ थी और इसमें नीति-निर्माता, अर्थशास्त्री, शिक्षाविद तथा उद्योग जगत के लोग शामिल हुए।
भाषण की मुख्य बात
उपराष्ट्रपति ने कहा कि किसी देश की आर्थिक मजबूती को सामाजिक मजबूती से अलग नहीं किया जा सकता, और तेजी से बदलती दुनिया में झटके सहने की ताकत समावेशन से ही आती है। सच्चा लचीलापन तभी है जब कोई नागरिक, कोई उद्यम और कोई क्षेत्र विकास से बाहर न रह जाए। उन्होंने कहा कि भारत ने दिखाया है कि लोकतंत्र और विकास साथ-साथ चल सकते हैं, और सहमति से बने सुधार अधिक टिकाऊ होते हैं — यही अनुभव 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का आधार है।
उद्धृत आँकड़े
| जन धन खाते (अगस्त 2026 तक) | 59 करोड़ से अधिक |
| जीएसटी पंजीकरण | 2017 में लगभग 66.5 लाख से मई 2026 में 1.65 करोड़ |
| स्वयं सहायता समूह | लगभग 92 लाख, 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाएँ |
| लखपति दीदी | 3.46 करोड़ से अधिक |
| अत्यधिक गरीबी से बाहर | 25 करोड़ से अधिक भारतीय |
उन्होंने जैम ट्रिनिटी, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और वस्तु एवं सेवा कर को वित्तीय समावेशन बढ़ाने, पारदर्शिता लाने तथा अर्थव्यवस्था को औपचारिक रूप देने का श्रेय दिया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि समावेशन का अर्थ लोगों को औपचारिक व्यवस्था में लाकर रुक जाना नहीं है; उन्हें कमाने, मूल्य बनाने और उद्यमी बनने का अवसर भी मिलना चाहिए। उनके अनुसार लचीलापन केवल बोर्डरूम और वित्तीय बाजारों में नहीं बनता, बल्कि तब भी बनता है जब गाँव की एक महिला का बैंक खाता हो, उसे लाभ सीधे मिले और वह स्वयं सहायता समूह को उद्यम में बदल दे। शिक्षा और अर्थव्यवस्था में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी महिला सशक्तीकरण से महिला-नेतृत्व वाले विकास की ओर बदलाव दिखाती है।
संस्थान और साझेदारी
उपराष्ट्रपति ने याद दिलाया कि आईईजी की स्थापना 1952 में प्रोफेसर वी. के. आर. वी. राव के नेतृत्व में हुई थी। उन्होंने कहा कि नीति जमीनी हालात की सही समझ पर टिकी होनी चाहिए और परिस्थितियों के अनुसार लचीली रहनी चाहिए। राज्यसभा के सभापति के रूप में उन्होंने कहा कि खुली बहस लोकतंत्र को मजबूत करती है, पर उसका अंत ऐसे निर्णयों में होना चाहिए जिन्हें व्यापक स्वीकृति मिले, और अधिकार तथा कर्तव्य साथ चलते हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और आईईजी के बीच शोध साझेदारी का स्वागत किया। इस अवसर पर आईईजी न्यासी बोर्ड के अध्यक्ष एन. के. सिंह तथा शासी निकाय के अध्यक्ष डॉ. माइकल देबब्रत पात्रा उपस्थित रहे।
महत्वपूर्ण तथ्य
| आयोजन | 5वाँ कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन |
|---|---|
| थीम | ‘उतार-चढ़ाव के दौर में लचीलापन’ |
| स्थान और तारीख | नई दिल्ली, 3 अक्टूबर 2026 |
| उद्घाटन | उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन |
| आयोजक | इंस्टिट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ (आईईजी), स्थापना 1952 |
| आईईजी के संस्थापक | प्रोफेसर वी. के. आर. वी. राव |
| जन धन खाते | अगस्त 2026 तक 59 करोड़ से अधिक |
| जीएसटी पंजीकरण | 2017 में 66.5 लाख से मई 2026 में 1.65 करोड़ |
| स्वयं सहायता समूह | लगभग 92 लाख, 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाएँ |
| लखपति दीदी | 3.46 करोड़ से अधिक |
| अत्यधिक गरीबी से बाहर | 25 करोड़ से अधिक भारतीय |
| लक्ष्य | 2047 तक विकसित भारत |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें — संस्करण (5वाँ), स्थान (नई दिल्ली), थीम (‘उतार-चढ़ाव के दौर में लचीलापन’), आयोजक (इंस्टिट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ, स्थापना 1952, प्रोफेसर वी. के. आर. वी. राव), उद्घाटन करने वाले (उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन) और आँकड़े: 59 करोड़ से अधिक जन धन खाते, मई 2026 में 1.65 करोड़ जीएसटी पंजीकरण, 92 लाख स्वयं सहायता समूह, 3.46 करोड़ लखपति दीदी तथा 25 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर।
अभ्यास प्रश्न
नई दिल्ली में हुए 5वें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन की थीम क्या थी?
- A.सुधार, प्रदर्शन, परिवर्तन
- B.उतार-चढ़ाव के दौर में लचीलापन
- C.हरित बदलाव के साथ विकास
- D.एक पृथ्वी, एक अर्थव्यवस्था
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. उतार-चढ़ाव के दौर में लचीलापन
व्याख्या
सही उत्तर उतार-चढ़ाव के दौर में लचीलापन है। इंस्टिट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ ने इसी थीम पर सम्मेलन आयोजित किया और उपराष्ट्रपति ने इसी के सहारे कहा कि आर्थिक मजबूती को सामाजिक मजबूती से अलग नहीं किया जा सकता, समावेशन ही लचीलेपन की नींव है, और कोई नागरिक, उद्यम या क्षेत्र पीछे नहीं छूटना चाहिए। विकल्प A एक शासन-संबंधी नारा है, इस आयोजन की थीम नहीं। विकल्प C जलवायु और ऊर्जा से जुड़ी बात कहता है, जिसे उद्घाटन भाषण ने आयोजन के शीर्षक के रूप में नहीं अपनाया। विकल्प D अन्य वैश्विक मंचों पर प्रयोग होने वाला वाक्यांश है। इसलिए केवल दूसरा विकल्प 3 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में हुए इस आयोजन की थीम से मेल खाता है। परीक्षा में इस सम्मेलन का संस्करण, स्थान, आयोजक और थीम चारों पूछे जा सकते हैं, इसलिए इन्हें एक साथ याद रखना चाहिए।
कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन का आयोजन कौन करता है और उस संस्थान की स्थापना कब हुई?
- A.इंस्टिट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ, स्थापना 1952
- B.इंस्टिट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ, स्थापना 1964
- C.एनसीएईआर, स्थापना 1956
- D.आईसीआरआईईआर, स्थापना 1981
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. इंस्टिट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ, स्थापना 1952
व्याख्या
सही उत्तर इंस्टिट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ, स्थापना 1952 है। उपराष्ट्रपति ने याद दिलाया कि इस संस्थान की शुरुआत उसी वर्ष प्रोफेसर वी. के. आर. वी. राव के नेतृत्व में हुई और तब से यह भारत की विकास यात्रा से जुड़ा रहा है; यही संस्थान इस सम्मेलन का आयोजक है। विकल्प B संस्थान तो सही बताता है पर स्थापना वर्ष गलत देता है, और ऐसे प्रश्नों में यही सबसे आम भ्रम होता है। विकल्प C और D अन्य प्रसिद्ध आर्थिक शोध संस्थानों के नाम हैं, जिन्होंने इस आयोजन का संचालन नहीं किया, इसलिए उनके साथ दिया गया वर्ष चाहे कुछ भी हो, वे गलत हैं। यह भी याद रखें कि आईईजी न्यासी बोर्ड के अध्यक्ष एन. के. सिंह और शासी निकाय के अध्यक्ष डॉ. माइकल देबब्रत पात्रा हैं।
उपराष्ट्रपति के अनुसार अगस्त 2026 तक कितने जन धन खाते खोले गए थे?
- A.39 करोड़ से अधिक
- B.45 करोड़ से अधिक
- C.52 करोड़ से अधिक
- D.59 करोड़ से अधिक
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 59 करोड़ से अधिक
व्याख्या
सही उत्तर 59 करोड़ से अधिक है। उद्घाटन भाषण में यह आँकड़ा यह दिखाने के लिए दिया गया कि वित्तीय समावेशन कितना फैल चुका है, और इसका श्रेय जैम ट्रिनिटी, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण तथा वस्तु एवं सेवा कर को दिया गया, जिन्होंने पहुँच बढ़ाई, पारदर्शिता दी और अर्थव्यवस्था को औपचारिक रूप दिया। इसी प्रसंग में उपराष्ट्रपति ने कहा कि जीएसटी पंजीकरण 2017 के लगभग 66.5 लाख से बढ़कर मई 2026 में 1.65 करोड़ हो गए। बाकी तीनों विकल्प इससे कम संख्या बताते हैं और अगस्त 2026 के लिए दिए गए आँकड़े से मेल नहीं खाते, इसलिए गलत हैं। भाषण की तुलना भी याद रखें कि लचीलापन बोर्डरूम के साथ-साथ गाँव की महिला के बैंक खाते से भी बनता है। परीक्षा में यह आँकड़ा अक्सर जीएसटी पंजीकरण के आँकड़े के साथ पूछा जाता है, इसलिए दोनों को जोड़कर याद रखना बेहतर है।
उपराष्ट्रपति ने भारत में कितनी लखपति दीदी बनने की बात कही?
- A.1.46 करोड़ से अधिक
- B.2.46 करोड़ से अधिक
- C.3.46 करोड़ से अधिक
- D.4.46 करोड़ से अधिक
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 3.46 करोड़ से अधिक
व्याख्या
सही उत्तर 3.46 करोड़ से अधिक है। उपराष्ट्रपति ने इस आँकड़े के साथ दो और आँकड़े रखे, जिससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी का विस्तार दिखे — लगभग 92 लाख स्वयं सहायता समूह, जिनकी पहुँच 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाओं तक है, और 25 करोड़ से अधिक भारतीय जो अत्यधिक गरीबी से बाहर आए। उन्होंने कहा कि समावेशन केवल औपचारिक अर्थव्यवस्था में नाम दर्ज कराने तक सीमित न रहे, बल्कि लोगों को मूल्य बनाने, आय कमाने और उद्यम खड़ा करने का अवसर मिले; इसी बदलाव को उन्होंने महिला सशक्तीकरण से महिला-नेतृत्व वाले विकास की ओर कदम कहा। बाकी तीनों विकल्प संख्या बदल देते हैं, इसलिए भाषण में कही बात से मेल नहीं खाते। परीक्षा के लिए लखपति दीदी और स्वयं सहायता समूह के आँकड़े एक साथ याद रखें, क्योंकि प्रश्न इन्हें जोड़कर पूछे जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
5वें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन की थीम क्या थी?
थीम ‘उतार-चढ़ाव के दौर में लचीलापन’ थी। नई दिल्ली में इसका उद्घाटन उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने किया और आयोजन इंस्टिट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ ने किया।
अगस्त 2026 तक कितने जन धन खाते खोले गए थे?
उपराष्ट्रपति के अनुसार 59 करोड़ से अधिक। उन्होंने यह भी कहा कि जीएसटी पंजीकरण 2017 के लगभग 66.5 लाख से बढ़कर मई 2026 में 1.65 करोड़ हो गए।
इंस्टिट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ की स्थापना कब और किसके नेतृत्व में हुई?
इसकी स्थापना 1952 में प्रोफेसर वी. के. आर. वी. राव के नेतृत्व में हुई थी, और यही संस्थान कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन का आयोजन करता है।
सम्मेलन में लखपति दीदी और स्वयं सहायता समूहों के कौन से आँकड़े बताए गए?
3.46 करोड़ से अधिक लखपति दीदी बनी हैं, और लगभग 92 लाख स्वयं सहायता समूह 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाओं तक पहुँचे हैं।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2318564 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
करेंट अफेयर्स 3 अक्टूबर 2026
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