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GK24

नीति आयोग ने विकसित पंचायत पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की

नीति आयोग ने असम सरकार के साथ मिलकर अपने राज्य सहायता मिशन के अंतर्गत विकसित पंचायत विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की, जिसमें पंचायतों को सशक्त बनाने पर जोर रहा।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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नीति आयोग ने विकसित पंचायत पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की — GK24 title card

चर्चा में क्यों

नीति आयोग ने 29 सितंबर 2026 को बताया कि उसने असम सरकार के साथ मिलकर अपने राज्य सहायता मिशन के अंतर्गत विकसित पंचायत पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की, ताकि पंचायतें नियोजन और सेवा वितरण की सक्षम संस्थाएं बनें।

नीति आयोग ने 28 सितंबर 2026 को ‘विकसित पंचायत: व्यक्तियों, स्थानों, संसाधनों और अवसरों का संयोजन’ विषय पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की। यह कार्यशाला असम सरकार के गोलप बोरबोरा राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान (जीबीएसआईपीआरडी) के सहयोग से हुई और नीति आयोग के राज्य सहायता मिशन (एसएसएम) का हिस्सा है।

कार्यशाला का उद्देश्य

एक दिवसीय इस आयोजन में इस बात पर विचार हुआ कि पंचायतों को ऐसी संस्थाओं के रूप में कैसे सक्षम बनाया जाए जो समावेशी विकास को गति दें, सार्वजनिक सेवाएं ठीक से पहुंचाएं और गांव के स्तर पर सतत प्रगति बनाए रखें। यह दिशा विकसित भारत @2047 के लक्ष्य के अनुरूप है। चर्चा चार क्षेत्रों के इर्द-गिर्द रही: विकेंद्रीकृत और स्थानिक नियोजन, जमीनी स्तर पर क्षमता विकास, प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए स्थानिक नियोजन, तथा ग्राम पंचायत विकास योजना की प्रक्रिया में स्थानिक नियोजन का समावेश।

कौन शामिल हुआ

मुख्य अतिथिश्री अतुल बोरा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री, असम सरकार
विशिष्ट अतिथिडॉ आर बालासुब्रमण्यम, सदस्य, नीति आयोग
उपस्थितडॉ रवि कोटा, मुख्य सचिव, असम सरकार
उपस्थितश्री रोहित कंसल, सचिव, ग्रामीण विकास विभाग

किन विषयों पर चर्चा हुई

प्रतिभागियों ने पंचायती राज की संवैधानिक बुनियाद यानी 73वें संविधान संशोधन और संविधान के भाग 9 पर चर्चा की, तथा स्पष्ट गतिविधि मानचित्रण, पर्याप्त धनराशि, उचित कर्मचारी संख्या, अधिक निर्णय अधिकार, ग्राम सभा की भागीदारी और संस्थागत जवाबदेही जैसे विषय उठाए। कार्यशाला में क्षेत्रवार दृष्टिकोण से हटकर स्थानिक और एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत बताई गई। स्थानीय संसाधनों, अवसंरचना की कमियों, भूमि-उपयोग के तौर-तरीकों और विकास के अवसरों की पहचान के लिए भौगोलिक सूचना प्रणाली, भू-स्थानिक आंकड़ों, ग्राम मास्टर प्लान और डिजिटल मंचों पर विचार हुआ। साक्ष्य आधारित नियोजन के लिए स्थानिक जानकारी को ग्राम पंचायत विकास योजना, ई-ग्राम स्वराज तथा पंचायत उन्नति सूचकांक से जोड़ने की बात रखी गई। डॉ बालासुब्रमण्यम ने मानव एवं सामाजिक पूंजी तथा स्थानीय आर्थिक समूहों के विकास पर अधिक ध्यान देने का आह्वान किया।

तय की गई प्राथमिकताएं

  • पंचायतों के लिए स्पष्ट कार्यात्मक विकेंद्रीकरण और गतिविधि मानचित्रण
  • बेहतर वित्तीय संसाधन तथा अपने स्रोतों से राजस्व जुटाने की मजबूत क्षमता
  • अंतिम छोर तक मजबूत क्षमता और तकनीकी सहायता
  • जिला योजना समितियों को क्रियाशील बनाना
  • विभागों और योजनाओं के बीच अधिक अभिसरण तथा जिला स्तर पर ग्रामीण-शहरी नियोजन

महत्वपूर्ण तथ्य

कार्यशालाविकसित पंचायत: व्यक्तियों, स्थानों, संसाधनों और अवसरों का संयोजन
आयोजकनीति आयोग, अपने राज्य सहायता मिशन (एसएसएम) के अंतर्गत
सहयोगीगोलप बोरबोरा राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान, असम सरकार
तिथि28 सितंबर 2026
मुख्य अतिथिअतुल बोरा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री, असम
विशिष्ट अतिथिडॉ आर बालासुब्रमण्यम, सदस्य, नीति आयोग
संवैधानिक आधार73वां संविधान संशोधन और संविधान का भाग 9
चर्चित मंचग्राम पंचायत विकास योजना, ई-ग्राम स्वराज, पंचायत उन्नति सूचकांक
लक्ष्यविकसित भारत @2047

परीक्षा की दृष्टि से

आयोजक (नीति आयोग), मिशन (राज्य सहायता मिशन), सहयोगी संस्थान (जीबीएसआईपीआरडी, असम), कार्यशाला की तिथि (28 सितंबर 2026), मुख्य अतिथि (अतुल बोरा) और विशिष्ट अतिथि (डॉ आर बालासुब्रमण्यम, सदस्य नीति आयोग) याद रखें। पंचायती राज की बुनियाद 73वें संविधान संशोधन और संविधान के भाग 9 में है।

अभ्यास प्रश्न

Q1.राष्ट्रीयकठिन

विकसित पंचायत पर राष्ट्रीय कार्यशाला नीति आयोग ने अपने किस मिशन के अंतर्गत आयोजित की?

  1. A.आकांक्षी जिला कार्यक्रम
  2. B.राज्य सहायता मिशन
  3. C.अटल नवाचार मिशन
  4. D.प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. राज्य सहायता मिशन

व्याख्या

सही उत्तर है राज्य सहायता मिशन, जिसे संक्षेप में एसएसएम कहा जाता है। मजबूत पंचायतों के जरिए व्यक्तियों, स्थानों, संसाधनों और अवसरों को जोड़ने वाली यह कार्यशाला इसी मिशन के अंतर्गत एक पहल थी, और इसका आयोजन असम सरकार के राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान के सहयोग से हुआ। विकल्प ए में उस कार्यक्रम का नाम है जो विकास के पैमानों पर पिछड़े जिलों के नतीजे सुधारने पर काम करता है, और वह इसी संस्थान की अलग पहल है। विकल्प सी में उस मिशन का नाम है जो नवाचार तथा उद्यमिता को बढ़ावा देता है, जिसमें स्कूलों की टिंकरिंग प्रयोगशालाएं भी शामिल हैं, और उसका पंचायत नियोजन से कोई संबंध नहीं। विकल्प डी में कृषि मंत्रालय के अधीन चलने वाले खेती से जुड़े कार्यक्रम का नाम है, जो नीति आयोग का मिशन नहीं है। परीक्षार्थी राज्य सहायता मिशन को राज्यों के साथ नीति आयोग के काम से जोड़कर याद रखें।

Q2.राष्ट्रीयमध्यम

कार्यशाला में चर्चित किस संविधान संशोधन से भारत में पंचायती राज की बुनियाद बनती है?

  1. A.42वां संशोधन
  2. B.73वां संशोधन
  3. C.74वां संशोधन
  4. D.86वां संशोधन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 73वां संशोधन

व्याख्या

सही उत्तर है 73वां संशोधन। कार्यशाला में प्रतिभागियों ने पंचायती राज की संवैधानिक बुनियाद पर इसी संशोधन तथा संविधान के भाग 9 के संदर्भ में चर्चा की, जो मिलकर गांव स्तर की संस्थाओं को उनकी हैसियत देते हैं, और वहीं से बात गतिविधि मानचित्रण, वित्तीय संसाधनों, कर्मचारी संख्या, निर्णय के अधिकारों, ग्राम सभा की भागीदारी तथा संस्थागत जवाबदेही तक पहुंची। विकल्प ए में उस संशोधन का नाम है जिसने आपातकाल के दौर में संविधान में व्यापक बदलाव किए थे, जिसका ग्रामीण स्थानीय निकायों से कोई संबंध नहीं। विकल्प सी में शहरी स्थानीय निकायों यानी नगरपालिकाओं से जुड़े संशोधन का नाम है, जो सही उत्तर का सहयोगी तो है पर गांवों के बजाय कस्बों और शहरों पर लागू होता है। विकल्प डी में शिक्षा के अधिकार से जुड़े संशोधन का नाम है। ग्रामीण निकाय पहले क्रमांक से और शहरी निकाय बाद वाले से जोड़कर याद रखें।

Q3.राष्ट्रीयमध्यम

विकसित पंचायत कार्यशाला में विशिष्ट अतिथि के रूप में कौन शामिल हुए?

  1. A.अतुल बोरा, मंत्री, असम सरकार
  2. B.डॉ रवि कोटा, मुख्य सचिव, असम
  3. C.डॉ आर बालासुब्रमण्यम, सदस्य, नीति आयोग
  4. D.रोहित कंसल, सचिव, ग्रामीण विकास विभाग
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. डॉ आर बालासुब्रमण्यम, सदस्य, नीति आयोग

व्याख्या

सही उत्तर है डॉ आर बालासुब्रमण्यम, नीति आयोग के सदस्य। वे उद्घाटन सत्र में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए और अपने संबोधन में क्षेत्रवार नियोजन से हटकर स्थानिक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया, जिसमें मानव एवं सामाजिक पूंजी तथा स्थानीय आर्थिक समूहों के विकास पर अधिक जोर देने की बात रही। विकल्प ए में राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री का नाम है, जिन्होंने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यशाला का उद्घाटन किया, और यह पूछी गई भूमिका से अलग पदनाम है। विकल्प बी में राज्य के मुख्य सचिव का नाम है, जो उद्घाटन सत्र में उपस्थित तो थे पर इन दोनों में से किसी भूमिका में नहीं। विकल्प डी में ग्रामीण विकास विभाग के सचिव का नाम है, जो इसी तरह उपस्थित रहे पर उनका पदनाम यह नहीं था। ऐसे प्रश्न सटीक पदनाम पर टिके होते हैं, इसलिए हर नाम उसकी भूमिका के साथ याद रखें।

Q4.राष्ट्रीयकठिन

गांव स्तर के नियोजन को मजबूत करने के लिए स्थानिक जानकारी के साथ निम्नलिखित में से किसे जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया?

  1. A.पंचायत उन्नति सूचकांक
  2. B.बहुआयामी गरीबी सूचकांक
  3. C.समग्र जल प्रबंधन सूचकांक
  4. D.व्यापार सुगमता सूचकांक
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. पंचायत उन्नति सूचकांक

व्याख्या

सही उत्तर है पंचायत उन्नति सूचकांक। कार्यशाला में स्थानिक जानकारी को ग्राम पंचायत विकास योजना की प्रक्रिया, ई-ग्राम स्वराज मंच तथा इसी सूचकांक के साथ जोड़ने पर प्रकाश डाला गया, ताकि नियोजन साक्ष्य आधारित बने और विभागों तथा योजनाओं के बीच अभिसरण की दिशा में बढ़े। विकल्प बी में वह माप है जो कई आयामों पर अभाव को दर्ज करता है और गरीबी पर नजर रखने के काम आता है, पंचायत स्तर के नियोजन के लिए नहीं। विकल्प सी में राज्यों के जल संसाधन प्रबंधन से जुड़े सूचकांक का नाम है, जो गांव के नियोजन से अलग विषय है। विकल्प डी में कारोबार के लिए नियामकीय माहौल का माप है, जिसका यहां चर्चित नियोजन उपकरणों से कोई संबंध नहीं। एक साथ याद रखने वाले तीन नाम हैं: विकास योजना की प्रक्रिया, पंचायत के लेखे और शासन का डिजिटल मंच, तथा उन्नति सूचकांक।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विकसित पंचायत कार्यशाला नीति आयोग के किस मिशन के अंतर्गत आयोजित हुई?

राज्य सहायता मिशन के अंतर्गत, जिसे एसएसएम कहा जाता है। यह कार्यशाला असम सरकार के गोलप बोरबोरा राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान के साथ मिलकर आयोजित की गई।

कार्यशाला में चर्चा के अनुसार पंचायती राज की संवैधानिक बुनियाद क्या है?

73वां संविधान संशोधन और संविधान का भाग 9। प्रतिभागियों ने गतिविधि मानचित्रण, वित्तीय संसाधन, कर्मचारी संख्या, निर्णय के अधिकार और ग्राम सभा की भागीदारी पर भी विचार किया।

स्थानिक नियोजन के साथ किन सूचकांकों और मंचों को जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया?

ग्राम पंचायत विकास योजना की प्रक्रिया, ई-ग्राम स्वराज मंच और पंचायत उन्नति सूचकांक को, ताकि गांव के स्तर पर नियोजन साक्ष्य आधारित और अभिसरण उन्मुख बन सके।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS