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जेसीआर ने भारत की सॉवरेन रेटिंग बढ़ाकर 'ए-' की, आउटलुक स्थिर

जापान की क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने भारत की दीर्घकालिक विदेशी और स्थानीय मुद्रा जारीकर्ता रेटिंग एक पायदान बढ़ाकर ट्रिपल बी+ से ए- कर दी और आउटलुक स्थिर रखा।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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जेसीआर ने भारत की सॉवरेन रेटिंग बढ़ाकर 'ए-' की, आउटलुक स्थिर — GK24 title card

चर्चा में क्यों

भारत सरकार ने 2 सितंबर 2026 को जापान की क्रेडिट रेटिंग एजेंसी के उस निर्णय का स्वागत किया जिसमें भारत की दीर्घकालिक सॉवरेन जारीकर्ता रेटिंग ट्रिपल बी+ से बढ़ाकर ए- की गई और कंट्री सीलिंग ए कर दी गई।

भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग बढ़ गई है। यह फैसला जापान की क्रेडिट रेटिंग एजेंसी यानी जेसीआर ने लिया है। भारत सरकार ने 2 सितंबर 2026 को इसका स्वागत किया। दीर्घकालिक विदेशी मुद्रा और स्थानीय मुद्रा, दोनों की जारीकर्ता रेटिंग एक पायदान ऊपर गई हैं। ये ट्रिपल बी+ से बढ़कर ए- हो गई हैं। आउटलुक स्थिर ही रखा गया है।

कंट्री सीलिंग भी बढ़ी

जेसीआर ने भारत की कंट्री सीलिंग भी एक पायदान बढ़ाकर कर दी है। कंट्री सीलिंग किसी देश के भीतर के कर्जदारों को दी जा सकने वाली अधिकतम रेटिंग तय करती है। इसके बढ़ने से भारतीय कंपनियों को, चाहे वे निजी हों या सरकारी, विदेशी बाजारों से सस्ता कर्ज मिलना आसान हो जाता है।

एजेंसी ने किन बातों को देखा

पुरानी रेटिंगट्रिपल बी+
नई रेटिंगए-
आउटलुकस्थिर
नई कंट्री सीलिंग
वित्त वर्ष 2026 में वृद्धि7.8 प्रतिशत
वित्त वर्ष 2026 में राजकोषीय घाटा4.4 प्रतिशत

चार खूबियां गिनाई गई हैं। पहली है वृद्धि दर। एजेंसी ने कहा कि निजी उपभोग और सार्वजनिक निवेश के बल पर भारत की वृद्धि दर ऊंची बनी हुई है। वित्त वर्ष 2026 में वास्तविक जीडीपी 7.8 प्रतिशत बढ़ी। वैश्विक चुनौतियों के बीच वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भी यही रफ्तार रही।

दूसरी खूबी सरकारी खर्च की गुणवत्ता है। केंद्र का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2025 के 4.7 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2026 में 4.4 प्रतिशत रह गया। इसके बावजूद पूंजीगत व्यय, खासकर ढांचागत निवेश, ऊंचा बना रहा।

तीसरी खूबी वित्तीय प्रणाली है। दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, सरकार की पूंजी और रिजर्व बैंक की कड़ी निगरानी से बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता सुधरी है। बैंकिंग में पूंजी पर्याप्तता और लाभप्रदता ठीक है। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में भी दोनों मोर्चों पर सुधार हुआ है।

चौथी खूबी बाह्य क्षेत्र है। सेवाओं के अधिशेष के सहारे चालू खाता घाटा नियंत्रण में है। विदेशी मुद्रा भंडार अल्पकालिक बाह्य ऋण से कहीं अधिक है, जो बाहरी झटकों से बचाव देता है।

एक साल में चौथा उन्नयन

जेसीआर ने उत्पादकता बढ़ाने वाली नीतियों को भी श्रेय दिया, जिनमें डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और वस्तु एवं सेवा कर शामिल हैं। ऐसा फैसला हाल में पहली बार नहीं हुआ। मॉर्निंगस्टार डीबीआरएस ने मई 2025 में, स्टैंडर्ड एंड पूअर्स ग्लोबल रेटिंग्स ने अगस्त 2025 में और जापान की रेटिंग एंड इन्वेस्टमेंट इंफॉर्मेशन, इंक. ने सितंबर 2025 में भारत की रेटिंग बढ़ाई थी।

महत्वपूर्ण तथ्य

एजेंसीजापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (जेसीआर)
पुरानी रेटिंगट्रिपल बी+
नई रेटिंगए- (एक पायदान ऊपर)
आउटलुकस्थिर
कंट्री सीलिंगएक पायदान बढ़कर ए
कौन-सी रेटिंगदीर्घकालिक विदेशी मुद्रा और स्थानीय मुद्रा जारीकर्ता रेटिंग
जीडीपी वृद्धिवित्त वर्ष 2026 में 7.8 प्रतिशत
राजकोषीय घाटावित्त वर्ष 2025 में 4.7 प्रतिशत से वित्त वर्ष 2026 में 4.4 प्रतिशत
पिछले उन्नयनमॉर्निंगस्टार डीबीआरएस (मई 2025), एसएंडपी ग्लोबल (अगस्त 2025), आरएंडआई जापान (सितंबर 2025)

परीक्षा की दृष्टि से

एजेंसी का नाम जेसीआर, ट्रिपल बी+ से ए- का एक पायदान का उन्नयन, स्थिर आउटलुक, ए की नई कंट्री सीलिंग, वित्त वर्ष 2026 में 7.8 प्रतिशत वृद्धि, 4.7 से 4.4 प्रतिशत होता राजकोषीय घाटा और तीन पुराने उन्नयन याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.अर्थव्यवस्थाआसान

जेसीआर ने भारत की दीर्घकालिक सॉवरेन जारीकर्ता रेटिंग ट्रिपल बी+ से बढ़ाकर क्या कर दी?

  1. A.ए+
  2. B.ए-
  3. C.डबल ए-
  4. D.ट्रिपल बी
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. ए-

व्याख्या

सही उत्तर ए- है। एजेंसी ने दीर्घकालिक विदेशी मुद्रा जारीकर्ता रेटिंग और दीर्घकालिक स्थानीय मुद्रा जारीकर्ता रेटिंग, दोनों को ठीक एक पायदान ऊपर किया है, यानी ट्रिपल बी+ से ए-, और आउटलुक स्थिर ही रखा है। विकल्प ए यानी ए+ नई रेटिंग से दो पायदान ऊपर है; एक पायदान की बढ़ोतरी से वहां पहुंचा ही नहीं जा सकता। विकल्प सी यानी डबल ए- उससे भी ऊपर की अलग श्रेणी है। विकल्प डी यानी ट्रिपल बी उस रेटिंग से नीचे है जो भारत के पास पहले से थी, इसलिए वह उन्नयन नहीं बल्कि अवनयन होता। यह भी ध्यान रखें कि कंट्री सीलिंग अलग चीज है और उसे एक पायदान बढ़ाकर ए किया गया है, जो नई सॉवरेन रेटिंग से एक कदम ऊपर है। परीक्षा में दोनों को अलग-अलग याद रखें।

Q2.अर्थव्यवस्थामध्यम

विज्ञप्ति के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा कितना रहा?

  1. A.5.6 प्रतिशत
  2. B.4.9 प्रतिशत
  3. C.4.7 प्रतिशत
  4. D.4.4 प्रतिशत
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. 4.4 प्रतिशत

व्याख्या

सही उत्तर 4.4 प्रतिशत है। जेसीआर ने कहा कि केंद्र का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2025 के 4.7 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2026 में 4.4 प्रतिशत रह गया, और यह तब हुआ जब पूंजीगत व्यय ऊंचा बना रहा तथा ढांचागत निवेश पर खास जोर रहा। घाटा घटे पर उत्पादक खर्च न कटे, इसी संयोजन को एजेंसी ने राजकोषीय व्यय की गुणवत्ता में सुधार कहा है। विकल्प सी यानी 4.7 प्रतिशत पिछले वर्ष वित्त वर्ष 2025 का आंकड़ा है और इसी में परीक्षार्थी सबसे ज्यादा उलझते हैं। विकल्प ए और बी विज्ञप्ति में कहीं नहीं हैं। घाटे के साथ वृद्धि दर भी याद रखें: वित्त वर्ष 2026 में वास्तविक जीडीपी 7.8 प्रतिशत बढ़ी और वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भी यही रफ्तार रही।

Q3.अर्थव्यवस्थामध्यम

जेसीआर के फैसले से पहले वाले वर्ष में इनमें से किसने भारत की सॉवरेन रेटिंग नहीं बढ़ाई थी?

  1. A.मॉर्निंगस्टार डीबीआरएस
  2. B.एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स
  3. C.रेटिंग एंड इन्वेस्टमेंट इंफॉर्मेशन, इंक.
  4. D.एशियाई विकास बैंक
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. एशियाई विकास बैंक

व्याख्या

सही उत्तर एशियाई विकास बैंक है। यह एक बहुपक्षीय विकास बैंक है जो अपने सदस्य देशों को ऋण देता है। यह क्रेडिट रेटिंग एजेंसी नहीं है और किसी देश को सॉवरेन रेटिंग नहीं देता, इसलिए इस सूची में उसका नाम आ ही नहीं सकता। विज्ञप्ति में तीन एजेंसियों का उल्लेख है जिन्होंने पिछले एक वर्ष में भारत की रेटिंग बढ़ाई। सबसे पहले मॉर्निंगस्टार डीबीआरएस ने मई 2025 में ऐसा किया। इसके बाद अगस्त 2025 में एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने और सितंबर 2025 में जापान की ही रेटिंग एंड इन्वेस्टमेंट इंफॉर्मेशन, इंक. ने रेटिंग बढ़ाई। जेसीआर का फैसला इस तरह लगभग एक वर्ष में चौथा है, इसीलिए इसे किसी एक राय के बजाय भारत की आर्थिक बुनियाद के लगातार मजबूत होने का प्रमाण बताया गया है।

Q4.अर्थव्यवस्थामध्यम

जेसीआर ने भारतीय बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता सुधरने का श्रेय किस सुधार को दिया?

  1. A.दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता
  2. B.कंपनी अधिनियम
  3. C.प्रतिस्पर्धा अधिनियम
  4. D.विदेश व्यापार नीति
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता

व्याख्या

सही उत्तर दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता है। जेसीआर ने भारतीय बैंकों की बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता के पीछे तीन बातें गिनाईं: इस संहिता की स्थापना, सरकार द्वारा बैंकों में डाली गई पूंजी और भारतीय रिजर्व बैंक की कड़ी निगरानी। उसने यह भी कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में पूंजी पर्याप्तता और लाभप्रदता ठीक बनी हुई है तथा गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र में भी परिसंपत्ति गुणवत्ता और पूंजी पर्याप्तता सुधरी है, जिससे पूरी वित्तीय प्रणाली मजबूत हुई है। विकल्प बी यानी कंपनी अधिनियम कंपनियों के गठन और संचालन से जुड़ा है, इसका यहां उल्लेख नहीं है। विकल्प सी यानी प्रतिस्पर्धा अधिनियम प्रतिस्पर्धा-विरोधी व्यवहार से जुड़ा अलग विषय है। विकल्प डी यानी विदेश व्यापार नीति निर्यात और आयात से जुड़ी है। इनमें से किसी का भी नाम बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता के संदर्भ में विज्ञप्ति में नहीं आया है, इसलिए वे तीनों गलत हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की सॉवरेन रेटिंग किस एजेंसी ने ए- की?

जापान की क्रेडिट रेटिंग एजेंसी यानी जेसीआर ने। उसने भारत की दीर्घकालिक विदेशी मुद्रा और स्थानीय मुद्रा जारीकर्ता रेटिंग एक पायदान बढ़ाकर ट्रिपल बी+ से ए- की और कंट्री सीलिंग ए कर दी।

कंट्री सीलिंग क्या होती है?

यह वह अधिकतम रेटिंग है जो किसी देश के भीतर के कर्जदारों को आमतौर पर दी जा सकती है। जेसीआर ने भारत की कंट्री सीलिंग एक पायदान बढ़ाकर ए कर दी, जिससे भारतीय निजी और सरकारी कंपनियों के लिए विदेश से कम ब्याज पर कर्ज जुटाना आसान होगा।

इससे पहले किन एजेंसियों ने भारत की रेटिंग बढ़ाई थी?

मॉर्निंगस्टार डीबीआरएस ने मई 2025 में, स्टैंडर्ड एंड पूअर्स ग्लोबल रेटिंग्स ने अगस्त 2025 में और जापान की रेटिंग एंड इन्वेस्टमेंट इंफॉर्मेशन, इंक. ने सितंबर 2025 में। जेसीआर का फैसला इस तरह लगभग एक वर्ष में चौथा है।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLबैंकिंग