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पहली तिमाही 2026-27 का जीडीपी अनुमान और दोहरी अपस्फीति

नई श्रृंखला में 2026-27 की पहली तिमाही का जीडीपी मौजूदा कीमतों पर 88.27 लाख करोड़ रुपये रहा तथा विनिर्माण के लिए दोहरी अपस्फीति पद्धति अपनाई गई है।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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पहली तिमाही 2026-27 का जीडीपी अनुमान और दोहरी अपस्फीति

चर्चा में क्यों

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने 2 सितंबर 2026 को 2026-27 की पहली तिमाही के जीडीपी अनुमानों पर प्रश्नोत्तर जारी किए, जिनमें नया आधार वर्ष 2022-23, दोहरी अपस्फीति और पिछले वर्ष के आंकड़ों के संशोधन समझाए गए हैं।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने 2 सितंबर 2026 को एक बैकग्राउंडर जारी किया। इसमें 2026-27 की पहली तिमाही के जीडीपी अनुमानों पर उठे सवालों के उत्तर दिए गए हैं। यह तिमाही अप्रैल से जून तक की है। दो पद्धतिगत बदलाव ही लगभग हर सवाल की जड़ हैं।

आधार वर्ष बदला

वार्षिक और तिमाही अनुमानों की नई श्रृंखला 31 अगस्त 2026 को जारी हुई थी। इसका आधार वर्ष 2022-23 है। आधार वर्ष वे संदर्भ कीमतें तय करता है जिनसे वास्तविक वृद्धि नापी जाती है। इसे समय-समय पर बदला जाता है ताकि सापेक्ष कीमतें अर्थव्यवस्था की मौजूदा तस्वीर दिखाती रहें। नई श्रृंखला में इसी आधार वर्ष वाला नया उत्पादक मूल्य सूचकांक और बैंकिंग सेवा मूल्य सूचकांक भी जोड़ा गया है।

दोहरी अपस्फीति क्या करती है

दूसरा बदलाव विनिर्माण क्षेत्र में दोहरी अपस्फीति है। इसमें उत्पादन और मध्यवर्ती खपत को अलग-अलग अपस्फीत किया जाता है। दोनों का अंतर ही वास्तविक सकल मूल्य वर्धन कहलाता है। आईएमएफ इसी तरीके को मात्रा के हिसाब से उत्पादन नापने का सर्वोत्तम तरीका मानता है। इस तिमाही में आगत की कीमतें उत्पादन की कीमतों से तेज बढ़ीं। इसलिए नाममात्र जीवीए वास्तविक जीवीए से धीमा बढ़ा और निहित अपस्फीतिकारक ऋणात्मक हो गया। इसका अर्थ यह नहीं कि कारखाने के सामान सस्ते हुए। कपास ओटाई और वस्त्र, मूल धातु तथा रबर व प्लास्टिक ऐसे ही क्षेत्र रहे।

जिन आंकड़ों पर सवाल उठे

विनिर्माण का नाममात्र जीवीए7.7 प्रतिशत
विनिर्माण का वास्तविक जीवीए9.2 प्रतिशत
विनिर्माण का निहित अपस्फीतिकारक-1.5 प्रतिशत
कृषि की निहित महंगाई3.9 प्रतिशत
खनन का वास्तविक जीवीए-2.4 प्रतिशत
खनन का नाममात्र जीवीए22.3 प्रतिशत
अनुमानित जीडीपी महंगाई2.5 प्रतिशत

कृषि में क्रम उल्टा रहता है। उसका जीवीए पहले स्थिर कीमतों पर बनता है, फिर उत्पादक मूल्य सूचकांक से मौजूदा कीमतों पर लाया जाता है। इस समूह का सूचकांक लगभग 5 प्रतिशत चढ़ा। निहित जीडीपी डिफ्लेटर न सीपीआई है न डब्ल्यूपीआई। यह मौजूदा और स्थिर कीमतों के जीडीपी का अनुपात है, पूरी अर्थव्यवस्था को समेटता है और 300 से अधिक वस्तु-स्तरीय अपस्फीतिकारकों से निकलता है।

पिछले साल का आंकड़ा क्यों बदला

खनन में वास्तविक और नाममात्र वृद्धि का फासला सबसे चौड़ा है। कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतें अप्रैल में 69.5, मई में 72.2 और जून में 33.7 प्रतिशत चढ़ीं। वहीं 2025-26 की पहली तिमाही का आंकड़ा चार बार बदला। पुरानी 2011-12 श्रृंखला में 29 अगस्त 2025 को यह 86.05 लाख करोड़ रुपये था। नई श्रृंखला आने पर 80.32 लाख करोड़ रुपये हुआ। 5 जून 2026 के अनंतिम अनुमानों के साथ 80.44 लाख करोड़ रुपये हुआ। नई आईआईपी और पीपीआई श्रृंखला जुड़ने पर यह 80.00 लाख करोड़ रुपये रह गया। मंत्रालय का कहना है कि 88.27 लाख करोड़ रुपये की तुलना उसी श्रृंखला के 80.32 लाख करोड़ रुपये से होनी चाहिए, पुराने 86.05 लाख करोड़ रुपये से नहीं।

महत्वपूर्ण तथ्य

मंत्रालयसांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय
तिमाही2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून)
नया आधार वर्ष2022-23, जो 2011-12 की जगह लेता है
नई श्रृंखला जारी31 अगस्त 2026
नई पद्धतिविनिर्माण के लिए दोहरी अपस्फीति
मौजूदा कीमतों पर जीडीपी88.27 लाख करोड़ रुपये
तुलना-योग्य पिछला आंकड़ा80.32 लाख करोड़ रुपये
विनिर्माण का निहित अपस्फीतिकारक-1.5 प्रतिशत
खनन का नाममात्र जीवीए22.3 प्रतिशत
वस्तु-स्तरीय अपस्फीतिकारक300 से अधिक

परीक्षा की दृष्टि से

नया आधार वर्ष 2022-23, नई श्रृंखला की तारीख 31 अगस्त 2026, दोहरी अपस्फीति और उस पर आईएमएफ की राय, विनिर्माण का -1.5 प्रतिशत अपस्फीतिकारक, खनन की -2.4 और 22.3 प्रतिशत वृद्धि तथा 88.27 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.अर्थव्यवस्थाआसान

भारत की वार्षिक और तिमाही जीडीपी की नई श्रृंखला का आधार वर्ष कौन-सा है?

  1. A.2004-05
  2. B.2011-12
  3. C.2022-23
  4. D.2024-25
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 2022-23

व्याख्या

सही उत्तर 2022-23 है। बैकग्राउंडर के अनुसार वार्षिक और तिमाही जीडीपी अनुमानों की नई श्रृंखला 31 अगस्त 2026 को जारी हुई और इसका आधार वर्ष 2022-23 है। इसी आधार वर्ष पर नया उत्पादक मूल्य सूचकांक और बैंकिंग सेवा मूल्य सूचकांक भी तैयार हुए हैं, जो इसी श्रृंखला में जुड़ते हैं। आधार वर्ष वे संदर्भ कीमतें देता है जिनसे वास्तविक वृद्धि नापी जाती है, और इसे समय-समय पर बदला जाता है ताकि सापेक्ष कीमतें अर्थव्यवस्था की मौजूदा तस्वीर दिखाती रहें। विकल्प बी यानी 2011-12 वह पुरानी श्रृंखला है जिसकी जगह यह नई श्रृंखला ली गई है; विज्ञप्ति में उसका उल्लेख केवल यह समझाने के लिए है कि पुराने 86.05 लाख करोड़ रुपये के अनुमान की तुलना नई श्रृंखला से नहीं हो सकती। विकल्प ए और डी विज्ञप्ति में कहीं नहीं हैं। परीक्षार्थी अक्सर जारी होने के वर्ष और आधार वर्ष में भ्रम कर बैठते हैं, इसलिए ध्यान रखें कि श्रृंखला 2026 में आई और उसका आधार 2022-23 है।

Q2.अर्थव्यवस्थामध्यम

दोहरी अपस्फीति में वास्तविक सकल मूल्य वर्धन निकालने के लिए किन दो मदों को अलग-अलग अपस्फीत किया जाता है?

  1. A.उत्पादन और मध्यवर्ती खपत
  2. B.निर्यात और आयात
  3. C.मजदूरी और मुनाफा
  4. D.सरकारी व्यय और निजी उपभोग
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. उत्पादन और मध्यवर्ती खपत

व्याख्या

सही उत्तर उत्पादन और मध्यवर्ती खपत है। दोहरी अपस्फीति उत्पादन-पक्ष की तकनीक है। इसमें सकल उत्पादन को एक मूल्य सूचकांक से और मध्यवर्ती खपत को दूसरे सूचकांक से अपस्फीत किया जाता है, और दोनों का अंतर ही स्थिर कीमतों पर वास्तविक सकल मूल्य वर्धन होता है। भारत इसे विनिर्माण क्षेत्र के उद्योगों पर लागू करता है और आईएमएफ इसे मात्रा के हिसाब से जीडीपी नापने का सर्वोत्तम तरीका बताता है। विकल्प बी गलत है क्योंकि निर्यात और आयात राष्ट्रीय लेखा के व्यय पक्ष की मदें हैं, इस पद्धति की नहीं। विकल्प सी गलत है क्योंकि मजदूरी और मुनाफा आय पद्धति के घटक हैं। विकल्प डी भी गलत है, क्योंकि निजी अंतिम उपभोग व्यय अंतिम मांग का माप है और विज्ञप्ति स्पष्ट कहती है कि उसमें घटाने के लिए कोई मध्यवर्ती खपत ही नहीं होती, इसलिए दोहरी अपस्फीति उसमें सीधे लागू नहीं होती।

Q3.अर्थव्यवस्थामध्यम

2026-27 की पहली तिमाही में मौजूदा कीमतों पर जीडीपी कितना अनुमानित किया गया?

  1. A.80.32 लाख करोड़ रुपये
  2. B.86.05 लाख करोड़ रुपये
  3. C.88.27 लाख करोड़ रुपये
  4. D.94.60 लाख करोड़ रुपये
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 88.27 लाख करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर 88.27 लाख करोड़ रुपये है। विज्ञप्ति कहती है कि 2026-27 की पहली तिमाही की तुलना उसी श्रृंखला के पिछले वर्ष के आंकड़े से होनी चाहिए, और इसी क्रम में वह इस तिमाही का मौजूदा कीमतों वाला अनुमान बताती है। विकल्प ए यानी 80.32 लाख करोड़ रुपये 2025-26 की पहली तिमाही का वह अनुमान है जो फरवरी 2026 में नई आधार वर्ष श्रृंखला आने पर बना था, और यही तुलना का सही आधार है। विकल्प बी यानी 86.05 लाख करोड़ रुपये 29 अगस्त 2025 को पुरानी 2011-12 श्रृंखला में जारी हुआ था, जिसकी सीधी तुलना नई श्रृंखला से नहीं की जा सकती। विकल्प डी विज्ञप्ति में कहीं नहीं है। यह भी याद रखें कि उसी तिमाही का अनुमान बाद में 5 जून 2026 को 80.44 लाख करोड़ रुपये और फिर नई आईआईपी व पीपीआई श्रृंखला जुड़ने पर 80.00 लाख करोड़ रुपये हुआ।

Q4.अर्थव्यवस्थाकठिन

खनन और उत्खनन क्षेत्र का वास्तविक जीवीए -2.4 प्रतिशत रहा पर नाममात्र जीवीए 22.3 प्रतिशत क्यों बढ़ा?

  1. A.क्योंकि खनन का उत्पादन मात्रा के हिसाब से तेजी से बढ़ा
  2. B.क्योंकि खनिजों, खासकर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतें बहुत बढ़ीं
  3. C.क्योंकि इस क्षेत्र को जीडीपी श्रृंखला से हटा दिया गया
  4. D.क्योंकि कोयला उत्पादन को अनुमानों से बाहर रखा गया
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. क्योंकि खनिजों, खासकर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतें बहुत बढ़ीं

व्याख्या

सही उत्तर खनिज कीमतों में भारी वृद्धि है। खनन के स्थिर कीमतों वाले अनुमान औद्योगिक उत्पादन सूचकांक से बनते हैं, जिसकी वृद्धि अप्रैल में -3.8, मई में -1.4 और जून में 1.6 प्रतिशत रही। यह -2.4 प्रतिशत के वास्तविक जीवीए से लगभग मेल खाती है। नाममात्र अनुमान उत्पादक मूल्य सूचकांक लगाकर निकाले जाते हैं और ये कीमतें तेज चढ़ीं। कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतें अप्रैल में 69.5, मई में 72.2 और जून में 33.7 प्रतिशत बढ़ीं, जबकि धातु अयस्कों के खनन में 27.6, 25.2 और 23.5 प्रतिशत की महंगाई रही। यही अंतर का कारण है, आंकड़ों की कोई गड़बड़ी नहीं। विकल्प ए गलत है क्योंकि तीन में से दो महीनों में मात्रा घटी। विकल्प सी गलत है क्योंकि खनन श्रृंखला में बना हुआ है। विकल्प डी गलत है क्योंकि कोयला और लिग्नाइट शामिल हैं और उनमें तो कीमतें घटी थीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की नई जीडीपी श्रृंखला का आधार वर्ष क्या है?

2022-23, जो 2011-12 की जगह लेता है। वार्षिक और तिमाही अनुमानों की यह श्रृंखला 31 अगस्त 2026 को जारी हुई और इसमें इसी आधार वर्ष वाला नया उत्पादक मूल्य सूचकांक तथा बैंकिंग सेवा मूल्य सूचकांक भी शामिल है।

दोहरी अपस्फीति किसे कहते हैं?

वह पद्धति जिसमें किसी उद्योग के उत्पादन और मध्यवर्ती खपत को अलग-अलग अपस्फीत किया जाता है और दोनों का अंतर वास्तविक जीवीए होता है। भारत इसे विनिर्माण पर लागू करता है और आईएमएफ इसे सर्वोत्तम तरीका मानता है।

विनिर्माण का निहित अपस्फीतिकारक ऋणात्मक क्यों रहा?

क्योंकि आगत की कीमतें उत्पादन की कीमतों से तेज बढ़ीं। नाममात्र जीवीए 7.7 प्रतिशत और वास्तविक जीवीए 9.2 प्रतिशत बढ़ा, जिससे निहित अपस्फीतिकारक -1.5 प्रतिशत हो गया। इसका अर्थ यह नहीं कि विनिर्मित वस्तुएं सस्ती हुईं।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLबैंकिंग