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GK24

गिफ्ट आईएफएससी से एफसीएनआर(बी) स्वैप में 52.82 अरब डॉलर वितरित

गिफ्ट सिटी की 20 आईएफएससी बैंकिंग इकाइयों ने 31 अगस्त 2026 तक आरबीआई की स्वैप सुविधा में 54.02 अरब डॉलर मंजूर किए और 52.82 अरब डॉलर बांट दिए।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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गिफ्ट आईएफएससी से एफसीएनआर(बी) स्वैप में 52.82 अरब डॉलर वितरित — GK24 title card

चर्चा में क्यों

अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण ने 2 सितंबर 2026 को बताया कि गिफ्ट सिटी की आईएफएससी बैंकिंग इकाइयों ने आरबीआई की एफसीएनआर(बी) स्वैप सुविधा में 52.8 अरब डॉलर से अधिक जुटाए हैं, साथ ही ईसीबी और बॉन्ड लिस्टिंग भी बढ़ी है।

अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण यानी आईएफएससीए ने 2 सितंबर 2026 को बताया कि गिफ्ट सिटी के बैंकों ने कितनी विदेशी मुद्रा जुटाई है। यह काम जिस इकाई के जरिए होता है उसे आईएफएससी बैंकिंग इकाई यानी आईबीयू कहते हैं। ऐसी बीस इकाइयां इसमें शामिल हैं।

स्वैप सुविधा क्या है

भारतीय रिजर्व बैंक एफसीएनआर(बी) जमा के लिए एक विशेष स्वैप सुविधा चलाता है। एफसीएनआर(बी) का अर्थ है विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) खाता, जिसमें कोई अनिवासी भारतीय विदेशी मुद्रा में जमा रख सकता है। 31 अगस्त 2026 तक बीस आईबीयू ने इसके अंतर्गत 54.02 अरब अमेरिकी डॉलर मंजूर किए थे। इसमें से लगभग 52.82 अरब डॉलर बांटे जा चुके थे।

अगस्त के आखिरी पखवाड़े की रफ्तार सबसे उल्लेखनीय रही। 14 अगस्त को स्वीकृतियां 28.60 अरब डॉलर थीं। 21 अगस्त को ये 37.26 अरब डॉलर हो गईं। 31 अगस्त तक यह आंकड़ा 54.02 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

दो और रास्ते

स्वैप में स्वीकृत54.02 अरब डॉलर
स्वैप में वितरित52.82 अरब डॉलर
ईसीबी वितरण, अप्रैल से अगस्त 202611.62 अरब डॉलर
बैंकों की बॉन्ड लिस्टिंग11.12 अरब डॉलर
इसमें जुलाई-अगस्त 2026 का हिस्सा9.17 अरब डॉलर
भाग लेने वाली आईबीयू20

दूसरा रास्ता बाहरी वाणिज्यिक उधार यानी ईसीबी है। अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच आईबीयू ने 11.62 अरब डॉलर का ईसीबी वितरित किया। मासिक आंकड़ा अप्रैल के 1.54 अरब डॉलर से बढ़कर अगस्त में 3.54 अरब डॉलर हो गया।

तीसरा रास्ता बॉन्ड लिस्टिंग है। इन्हीं पांच महीनों में भारतीय बैंकों ने आईएफएससी एक्सचेंजों पर लिस्टिंग से 11.12 अरब डॉलर जुटाए, जिसमें से 9.17 अरब डॉलर अकेले जुलाई और अगस्त में आए।

पैसा कहां से आ रहा है

आईबीयू एक साथ कई बाजारों से धन जुटा रही हैं। विज्ञप्ति में यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका, मैक्सिको, पश्चिम एशिया, हॉन्ग कॉन्ग, सिंगापुर और कुछ अफ्रीकी देशों के नाम हैं। इससे पहले केंद्रीय वित्त मंत्री ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों से कहा था कि रिजर्व बैंक की स्वैप सुविधाओं के लिए गिफ्ट-आईएफएससी की व्यवस्था का उपयोग करें।

आईएफएससीए के अध्यक्ष के. राजारामन ने कहा कि यह तेज विस्तार दिखाता है कि गिफ्ट-आईएफएससी वैश्विक पूंजी और भारत की जरूरतों के बीच सेतु का काम कर रहा है। आईएफएससीए भारत के अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों का एकीकृत नियामक है और आईएफएससीए अधिनियम, 2019 के अंतर्गत बना है। गिफ्ट-आईएफएससी सरकार की रणनीतिक परियोजना है और विकसित भारत 2047 के एजेंडे से जुड़ा है।

महत्वपूर्ण तथ्य

नियामकअंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (आईएफएससीए)
किस कानून सेआईएफएससीए अधिनियम, 2019
अध्यक्षके. राजारामन
स्थानगिफ्ट सिटी आईएफएससी, गुजरात
सुविधाएफसीएनआर(बी) जमा के लिए आरबीआई की विशेष स्वैप सुविधा
31 अगस्त 2026 तक स्वीकृतबीस आईबीयू द्वारा 54.02 अरब डॉलर
वितरितलगभग 52.82 अरब डॉलर
ईसीबी वितरणअप्रैल-अगस्त 2026 में 11.62 अरब डॉलर
बॉन्ड लिस्टिंग11.12 अरब डॉलर
जुड़ा एजेंडाविकसित भारत 2047

परीक्षा की दृष्टि से

नियामक आईएफएससीए और उसका अधिनियम 2019, अध्यक्ष के. राजारामन, स्थान गिफ्ट सिटी आईएफएससी, इकाई का नाम आईबीयू, बीस इकाइयों की संख्या तथा तीन आंकड़े - 54.02 अरब डॉलर स्वीकृत, 52.82 अरब डॉलर वितरित और 11.62 अरब डॉलर ईसीबी - याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.बैंकिंग और वित्तमध्यम

31 अगस्त 2026 तक गिफ्ट सिटी की आईएफएससी बैंकिंग इकाइयों ने आरबीआई की एफसीएनआर(बी) स्वैप सुविधा में कितनी राशि मंजूर की थी?

  1. A.28.60 अरब डॉलर
  2. B.37.26 अरब डॉलर
  3. C.54.02 अरब डॉलर
  4. D.62.40 अरब डॉलर
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 54.02 अरब डॉलर

व्याख्या

सही उत्तर 54.02 अरब डॉलर है। 31 अगस्त 2026 तक बीस आईएफएससी बैंकिंग इकाइयों ने रिजर्व बैंक की एफसीएनआर(बी) जमा वाली विशेष स्वैप सुविधा में इतनी राशि मंजूर की थी, और इसमें से लगभग 52.82 अरब डॉलर वितरित भी हो चुका था। विकल्प ए और बी उसी विज्ञप्ति के असली आंकड़े हैं, पर उसी महीने की पिछली तारीखों के। 14 अगस्त को स्वीकृतियां 28.60 अरब डॉलर थीं और 21 अगस्त को 37.26 अरब डॉलर। यह प्रश्न जांचता है कि परीक्षार्थी हर आंकड़े के साथ उसकी तारीख याद रखता है या नहीं, क्योंकि एक पखवाड़े में ही राशि लगभग दोगुनी हो गई। विकल्प डी विज्ञप्ति में कहीं नहीं है। याद रखने का आसान तरीका यह जोड़ी है: 54.02 अरब डॉलर स्वीकृत और 52.82 अरब डॉलर वितरित।

Q2.बैंकिंग और वित्तआसान

अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण की स्थापना किस अधिनियम के अंतर्गत हुई?

  1. A.सेबी अधिनियम, 1992
  2. B.आईएफएससीए अधिनियम, 2019
  3. C.बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949
  4. D.फेमा, 1999
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. आईएफएससीए अधिनियम, 2019

व्याख्या

सही उत्तर आईएफएससीए अधिनियम, 2019 है। विज्ञप्ति के अनुसार आईएफएससीए भारत सरकार द्वारा संसद के अधिनियम के अंतर्गत स्थापित एकीकृत नियामक प्राधिकरण है, जिसका काम अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों में वित्तीय उत्पादों, वित्तीय सेवाओं और वित्तीय संस्थानों का विकास तथा विनियमन है। इसके अध्यक्ष के. राजारामन हैं। विकल्प ए यानी सेबी अधिनियम ने प्रतिभूति बाजार का नियामक बनाया था, आईएफएससीए को नहीं, हालांकि आईएफएससी के भीतर प्रतिभूति कारोबार आईएफएससीए के दायरे में आता है। विकल्प सी यानी बैंककारी विनियमन अधिनियम घरेलू बैंकिंग कंपनियों पर लागू होता है। विकल्प डी यानी फेमा विदेशी मुद्रा लेनदेन से जुड़ा है। मूल कानून केवल आईएफएससीए अधिनियम है और उसका वर्ष 2019 सबसे अधिक पूछा जाता है। साथ में यह भी याद रखें कि गिफ्ट-आईएफएससी भारत सरकार की रणनीतिक परियोजना है और इसे वैश्विक बाजारों से जोड़ने वाले अग्रणी अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

Q3.बैंकिंग और वित्तकठिन

अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच भारतीय बैंकों ने आईएफएससी एक्सचेंजों पर बॉन्ड लिस्टिंग से कितनी राशि जुटाई?

  1. A.9.17 अरब डॉलर
  2. B.11.12 अरब डॉलर
  3. C.11.62 अरब डॉलर
  4. D.14.80 अरब डॉलर
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 11.12 अरब डॉलर

व्याख्या

सही उत्तर 11.12 अरब डॉलर है। अप्रैल से अगस्त 2026 तक पांच महीनों में भारतीय बैंकों ने आईएफएससी एक्सचेंजों पर बॉन्ड लिस्टिंग के जरिए इतनी राशि जुटाई। विकल्प ए यानी 9.17 अरब डॉलर उसी कुल का वह हिस्सा है जो अकेले जुलाई और अगस्त में सूचीबद्ध हुआ, इसलिए वह पूरा आंकड़ा नहीं है। विकल्प सी यानी 11.62 अरब डॉलर बिल्कुल अलग रास्ते का है: यह इसी अवधि में आईबीयू द्वारा वितरित बाहरी वाणिज्यिक उधार है, जिसका मासिक आंकड़ा अप्रैल के 1.54 अरब डॉलर से बढ़कर अगस्त में 3.54 अरब डॉलर हुआ। ये दोनों आंकड़े इतने पास हैं कि आपस में बदल जाते हैं, इसलिए हर आंकड़े को उसके रास्ते के साथ याद करें। विकल्प डी विज्ञप्ति में कहीं नहीं है। स्वैप से जुटाव, ईसीबी वित्तपोषण और बॉन्ड जारी करना, ये तीनों रास्ते मिलकर गिफ्ट-आईएफएससी के गहरे होते अंतर्राष्ट्रीय बैंकिंग तंत्र का प्रमाण माने गए हैं।

Q4.बैंकिंग और वित्तमध्यम

विज्ञप्ति के अनुसार आईएफएससीए के अध्यक्ष कौन हैं?

  1. A.के. राजारामन
  2. B.शक्तिकांत दास
  3. C.तुहिन कांत पांडेय
  4. D.मिया ओका
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. के. राजारामन

व्याख्या

सही उत्तर के. राजारामन हैं। विज्ञप्ति में उनका कथन है कि गिफ्ट-आईएफएससी में बैंकिंग गतिविधियों का तेज विस्तार भारत के इस अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र की गहराई और बढ़ते अंतर्राष्ट्रीय रुझान का प्रमाण है, और यह केंद्र वैश्विक पूंजी तथा भारत की वित्तीय जरूरतों के बीच प्रभावी सेतु का काम कर रहा है। विकल्प बी में भारतीय रिजर्व बैंक के एक पूर्व गवर्नर का नाम है, जो आईएफएससीए से अलग पद है, यद्यपि स्वैप सुविधा रिजर्व बैंक की ही है। विकल्प सी का इस विज्ञप्ति में आईएफएससीए से कोई संबंध नहीं है। विकल्प डी में एक बहुपक्षीय विकास बैंक की अधिकारी का नाम है। याद रखने के लिए नाम, संस्था और कानून को जोड़ लें: के. राजारामन, आईएफएससीए, अधिनियम 2019।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एफसीएनआर(बी) का पूरा अर्थ क्या है?

विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) खाता। इसमें अनिवासी भारतीय विदेशी मुद्रा में जमा रख सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ऐसी जमाओं के लिए विशेष स्वैप सुविधा चलाता है, जिसमें गिफ्ट सिटी की इकाइयों ने 31 अगस्त 2026 तक 54.02 अरब डॉलर मंजूर किए।

आईबीयू किसे कहते हैं?

आईएफएससी बैंकिंग इकाई, यानी वह शाखा जिसके जरिए कोई बैंक अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र में कारोबार करता है। गिफ्ट-आईएफएससी की बीस ऐसी इकाइयों ने इस सुविधा में भाग लिया, जिनमें प्रमुख भारतीय बैंक और विदेशी बैंक दोनों शामिल हैं।

आईएफएससीए किस कानून से बना है?

आईएफएससीए अधिनियम, 2019 से। यह भारत के अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों में वित्तीय उत्पादों, सेवाओं और संस्थानों के विकास तथा विनियमन के लिए बना एकीकृत प्राधिकरण है और इसके अध्यक्ष के. राजारामन हैं।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSC CGLबैंकिंगIBPS