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डीआरडीओ के स्वदेशी एआईपी मॉड्यूल का दूसरा चरण शुरू

डीआरडीओ ने पनडुब्बियों के लिए स्वदेशी एआईपी ऊर्जा मॉड्यूल की सेटिंग टू वर्क चरण-2 गतिविधि का शुभारंभ गुजरात के हजीरा में एलएंडटी परिसर में किया।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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डीआरडीओ के स्वदेशी एआईपी मॉड्यूल का दूसरा चरण शुरू

चर्चा में क्यों

24 अक्तूबर 2026 को भारतीय नौसेना की डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों के लिए बने स्वदेशी एआईपी ऊर्जा मॉड्यूल की सेटिंग टू वर्क चरण-2 गतिविधि गुजरात के हजीरा में शुरू हुई।

पनडुब्बियों के लिए भारत के स्वदेशी एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) कार्यक्रम ने 24 अक्तूबर 2026 को एक नया पड़ाव पार किया। इस दिन एआईपी ऊर्जा मॉड्यूल की सेटिंग टू वर्क (एसटीडब्ल्यू) चरण-2 गतिविधि का शुभारंभ हुआ। यह मॉड्यूल रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की प्रयोगशाला नेवल मैटीरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी (एनएमआरएल) ने देश में ही विकसित किया है। समारोह गुजरात के हजीरा में लार्सन एंड टूब्रो के एएम नाइक हैवी इंजीनियरिंग कॉम्प्लेक्स में आयोजित किया गया।

एआईपी प्रणाली क्या करती है

परंपरागत डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी को बैटरी चार्ज करने के लिए डीजल इंजन चलाना पड़ता है और इसके लिए हवा से ऑक्सीजन चाहिए, इसलिए उसे सतह के पास आना होता है। यही वह क्षण होता है जब पनडुब्बी का पता लगाना सबसे आसान रहता है। एआईपी प्रणाली वायुमंडल की ऑक्सीजन के बिना बिजली बनाती है, जिससे पनडुब्बी कहीं ज्यादा समय तक पानी के भीतर रह सकती है। भारतीय प्रणाली हाइड्रोजन और फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है, और डीआरडीओ अध्यक्ष ने कहा कि ऐसी प्रणालियों में हर कदम पर कड़े सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी है।

कार्यक्रम में कौन शामिल हुआ

रक्षा सचिव, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा डीआरडीओ अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह मुख्य अतिथि रहे और वे वर्चुअल माध्यम से जुड़े। भारतीय नौसेना के चीफ ऑफ मैटीरियल वाइस एडमिरल बी. शिवकुमार तथा डीआरडीओ के महानिदेशक (नेवल सिस्टम्स एंड मैटीरियल्स) डॉ. आर. बालमुरलीकृष्णन एलएंडटी के परिसर में उपस्थित रहे। अध्यक्ष ने वैज्ञानिकों और उद्योग भागीदारों की सराहना करते हुए कहा कि प्रयोगशाला की सोच अब कारखाने के फर्श पर हकीकत बन गई है, और परीक्षण तथा सत्यापन के हर चरण में नौसेना के सहयोग को भी स्वीकार किया।

आगे की राह

अगले चरण में ऊर्जा मॉड्यूल को बिजली उत्पादन के लिए चालू किया जाएगा और भारतीय नौसेना के मानकों के अनुसार उसका कड़ा परीक्षण होगा। मंजूरी मिलने पर इसे मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड को सौंपा जाएगा, जो वर्ष 2027 के आरंभ में इसे कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी में लगाएगी। डीआरडीओ अध्यक्ष ने टीम से कहा कि कार्यक्रम के अगले चरणों पर तेजी से काम किया जाए ताकि नौसेना की शामिल करने की समय-सीमा पूरी हो। नौसेना के लिए इसका लाभ साफ है, क्योंकि परंपरागत पनडुब्बियों को पानी के भीतर अधिक समय तक टिकने की क्षमता भारतीय प्रयोगशालाओं और भारतीय उद्योग से मिलेगी, विदेश से खरीदकर नहीं।

महत्वपूर्ण तथ्य

प्रणालीएयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) ऊर्जा मॉड्यूल
विकसित कियानेवल मैटीरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी (एनएमआरएल), डीआरडीओ
उपलब्धिसेटिंग टू वर्क (एसटीडब्ल्यू) चरण-2 गतिविधि का शुभारंभ
स्थानएएम नाइक हैवी इंजीनियरिंग कॉम्प्लेक्स, एलएंडटी, हजीरा, गुजरात
मुख्य अतिथिराजेश कुमार सिंह, रक्षा सचिव एवं अध्यक्ष, डीआरडीओ (वर्चुअल)
एकीकरणमझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी में 2027 के आरंभ में
तकनीकहाइड्रोजन और फ्यूल सेल आधारित; पानी के भीतर टिकने की क्षमता बढ़ाती है
तिथि24 अक्तूबर 2026

परीक्षा की दृष्टि से

एआईपी का पूरा नाम, विकसित करने वाली प्रयोगशाला (एनएमआरएल, डीआरडीओ), स्थान (एएम नाइक हैवी इंजीनियरिंग कॉम्प्लेक्स, हजीरा, गुजरात), चरण का नाम (सेटिंग टू वर्क चरण-2), एकीकरण करने वाली कंपनी (मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स) तथा पनडुब्बी श्रेणी और समय (कलवरी श्रेणी, 2027 की शुरुआत) याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.रक्षामध्यम

भारतीय नौसेना की पनडुब्बियों के लिए एआईपी ऊर्जा मॉड्यूल किस डीआरडीओ प्रयोगशाला ने स्वदेशी रूप से विकसित किया है?

  1. A.नेवल मैटीरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी
  2. B.डिफेंस मेटलर्जिकल रिसर्च लेबोरेटरी
  3. C.नेवल फिजिकल एंड ओशनोग्राफिक लेबोरेटरी
  4. D.रिसर्च सेंटर इमारत
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. नेवल मैटीरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी

इसी प्रयोगशाला ने डीआरडीओ के स्वदेशी प्रयास के तहत एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन ऊर्जा मॉड्यूल डिजाइन किया और बनाया।

Q2.रक्षाआसान

डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी को एआईपी प्रणाली से मुख्य रूप से क्या लाभ मिलता है?

  1. A.वह बैलिस्टिक मिसाइल ले जाने में सक्षम हो जाती है
  2. B.वायुमंडलीय ऑक्सीजन पर निर्भरता घटने से पानी के भीतर टिकने की क्षमता बढ़ती है
  3. C.उसके टॉरपीडो ट्यूब वर्टिकल लॉन्चर में बदल जाते हैं
  4. D.वह उड़ान डेक से विमान संचालन कर सकती है
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. वायुमंडलीय ऑक्सीजन पर निर्भरता घटने से पानी के भीतर टिकने की क्षमता बढ़ती है

परंपरागत डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी को बैटरी चार्ज करने के लिए डीजल इंजन चलाना पड़ता है और इंजन को हवा चाहिए, इसलिए उसे सतह के पास आना होता है, जहां उसका पता लगना आसान रहता है।

Q3.रक्षामध्यम

स्वदेशी एआईपी ऊर्जा मॉड्यूल किस श्रेणी की पनडुब्बी में और किस कंपनी द्वारा लगाया जाएगा?

  1. A.शिशुमार श्रेणी, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स द्वारा
  2. B.अरिहंत श्रेणी, हिंदुस्तान शिपयार्ड द्वारा
  3. C.कलवरी श्रेणी, मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा
  4. D.सिंधुघोष श्रेणी, कोचीन शिपयार्ड द्वारा
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. कलवरी श्रेणी, मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा

सेटिंग टू वर्क चरण-2 के बाद वाले चरण में एआईपी ऊर्जा मॉड्यूल को बिजली उत्पादन के लिए चालू किया जाएगा और भारतीय नौसेना के मानकों पर उसका कड़ा परीक्षण होगा।

Q4.रक्षाआसान

स्वदेशी एआईपी ऊर्जा मॉड्यूल की सेटिंग टू वर्क चरण-2 गतिविधि कहां शुरू की गई?

  1. A.विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश
  2. B.हजीरा, गुजरात
  3. C.मुंबई, महाराष्ट्र
  4. D.कोच्चि, केरल
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. हजीरा, गुजरात

रक्षा सचिव, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा डीआरडीओ अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह मुख्य अतिथि रहे और वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए, जबकि भारतीय नौसेना के चीफ ऑफ मैटीरियल वाइस एडमिरल बी. शिवकुमार तथा डीआरडीओ के महानिदेशक (नेवल सिस्टम्स एंड मैटीरियल्स) डॉ. आर. बालमुरलीकृष्णन परिसर में उपस्थित थे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पनडुब्बियों के लिए भारत की स्वदेशी एआईपी प्रणाली किस प्रयोगशाला ने विकसित की है?

डीआरडीओ की नेवल मैटीरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी (एनएमआरएल) ने। इसके एआईपी ऊर्जा मॉड्यूल की सेटिंग टू वर्क चरण-2 गतिविधि 24 अक्तूबर 2026 को गुजरात के हजीरा में एलएंडटी के एएम नाइक हैवी इंजीनियरिंग कॉम्प्लेक्स में शुरू हुई।

डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी के लिए एआईपी प्रणाली क्यों महत्वपूर्ण है?

यह प्रणाली वायुमंडल की ऑक्सीजन के बिना बिजली बनाती है, इसलिए पनडुब्बी को डीजल इंजन चलाने के लिए बार-बार सतह के पास आने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे पानी के भीतर टिकने की क्षमता बढ़ती है और उसका पता लगाना कठिन हो जाता है।

यह एआईपी ऊर्जा मॉड्यूल कहां लगाया जाएगा?

बिजली उत्पादन के लिए चालू करने और भारतीय नौसेना के मानकों पर परीक्षण के बाद इसे मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड को सौंपा जाएगा, जो 2027 के आरंभ में इसे कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी में लगाएगी।

स्रोत

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