आईआईटी कानपुर का 'ग्रेटर दैन अस' अभियान शुरू, लक्ष्य 1 अरब डॉलर
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में आईआईटी कानपुर का 'ग्रेटर दैन अस' अभियान शुरू किया, जिसका लक्ष्य मार्च 2029 तक एक अरब अमेरिकी डॉलर जुटाना है।

चर्चा में क्यों
14 अक्टूबर 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में आईआईटी कानपुर का 'ग्रेटर दैन अस' अभियान शुरू किया, जो किसी भी आईआईटी का सबसे बड़ा धन संग्रह अभियान है, और स्वदेशी प्रौद्योगिकी में तेजी के लिए सेनाओं, डीआरडीओ, शिक्षा जगत, रक्षा उपक्रमों तथा निजी उद्योग के घनिष्ठ सहयोग का आह्वान किया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 14 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आईआईटी कानपुर के 'ग्रेटर दैन अस' धन संग्रह अभियान की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने सशस्त्र बलों, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), शैक्षणिक संस्थानों, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों तथा निजी उद्योग और स्टार्टअप के बीच घनिष्ठ सहयोग की आवश्यकता बताई, जिससे स्वदेशी सैन्य प्रौद्योगिकी का विकास, उपयोग और उन्नयन तेज हो सके।
अभियान का स्वरूप
अभियान का लक्ष्य मार्च 2029 तक एक अरब अमेरिकी डॉलर जुटाना है और यह किसी भी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा चलाया गया अब तक का सबसे बड़ा धन संग्रह अभियान है। लक्ष्य का लगभग आधा हिस्सा, 4,155 करोड़ रुपये, पूर्व छात्रों, दानदाताओं, कॉरपोरेट भागीदारों और सरकार की ओर से पहले ही प्रतिबद्ध हो चुका है। यह राशि अनुसंधान अधोसंरचना मजबूत करने, प्रतिभा को संवारने तथा स्वदेशी प्रौद्योगिकी के विकास और व्यावसायीकरण में तेजी लाने पर लगेगी, जो 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से जुड़ी है।
रक्षा मंत्री की बात
राजनाथ सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी सामर्थ्य अब एक-दूसरे से गुंथे हुए हैं, क्योंकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वायत्त प्रणालियां, मानवरहित प्लेटफॉर्म, उन्नत सेंसर, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी युद्ध का स्वरूप बदल रही हैं। उनका कहना था कि आईआईटी जैसे संस्थान शैक्षणिक अनुसंधान को सेनाओं की परिचालन आवश्यकताओं और उद्योग की जरूरतों से जोड़कर बड़ा योगदान दे सकते हैं, जिससे देश ज्ञान और प्रौद्योगिकी का उपभोक्ता मात्र न रहकर उनका सृजनकर्ता बने।
आईआईटी कानपुर में रक्षा परियोजनाएं
- परिसर में पहले से चल रहा डीआरडीओ-उद्योग-शिक्षा उत्कृष्टता केंद्र।
- प्रस्तावित रक्षा प्रौद्योगिकी विद्यालय, जिसका मंत्री ने स्वागत किया।
- राष्ट्रीय सैन्य ड्रोन प्रौद्योगिकी केंद्र, जो रक्षा मंत्रालय के सहयोग से स्वदेशीकरण और नवाचार तेज करने के लिए प्रस्तावित है; इसकी मंजूरी प्रक्रिया पूरी होने के करीब है।
- सी3आई साइबर सुरक्षा प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र तथा संस्थान का चिकित्सा विद्यालय।
नवाचार का बड़ा चित्र
मंत्री ने बताया कि आईआईटी तंत्र ने 6,000 से अधिक स्टार्टअप को सहारा दिया है, 56 यूनिकॉर्न तैयार किए हैं और लगभग 5,000 पेटेंट सृजित किए हैं, जो दिखाता है कि ये संस्थान केवल पढ़ाने की जगह नहीं, बल्कि उद्यम के इंजन बन रहे हैं। उन्होंने उन्नत प्रौद्योगिकी में निजी निवेश खींचने के लिए स्वीकृत एक लाख करोड़ रुपये की अनुसंधान, विकास एवं नवाचार योजना का उल्लेख किया, और उस नीतिगत बदलाव का भी, जिसमें वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद से समर्थित गहन-प्रौद्योगिकी स्टार्टअप के लिए तीन वर्ष पुराना होने की शर्त हटा दी गई। उत्तर प्रदेश के संदर्भ में उन्होंने कहा कि आईआईटी कानपुर वैज्ञानिक अनुसंधान और औद्योगिक उपयोग के बीच पुल बन सकता है और राज्य के एक लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के संकल्प में योगदान दे सकता है। उन्नत सामग्री, सेमीकंडक्टर, क्वांटम प्रौद्योगिकी और पर्यावरणीय संवहनीयता में अनुसंधान को उन्होंने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के लिए निर्णायक बताया।
इस अवसर पर आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मनिंद्र अग्रवाल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी तथा संस्थान के शिक्षक, विद्यार्थी और पूर्व छात्र उपस्थित रहे।
महत्वपूर्ण तथ्य
| अभियान | 'ग्रेटर दैन अस', आईआईटी कानपुर का धन संग्रह अभियान |
|---|---|
| शुरू किया | रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने, नई दिल्ली में |
| तिथि | 14 अक्टूबर 2026 |
| लक्ष्य | मार्च 2029 तक एक अरब अमेरिकी डॉलर; किसी भी आईआईटी का सबसे बड़ा अभियान |
| अब तक प्रतिबद्ध | 4,155 करोड़ रुपये, लगभग आधा लक्ष्य |
| प्रस्तावित रक्षा केंद्र | राष्ट्रीय सैन्य ड्रोन प्रौद्योगिकी केंद्र, रक्षा मंत्रालय के सहयोग से; मंजूरी अंतिम चरण में |
| अन्य प्रस्ताव | आईआईटी कानपुर में रक्षा प्रौद्योगिकी विद्यालय |
| मौजूदा केंद्र | डीआरडीओ-उद्योग-शिक्षा उत्कृष्टता केंद्र और सी3आई साइबर सुरक्षा प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र |
| आईआईटी तंत्र | 6,000 से अधिक स्टार्टअप, 56 यूनिकॉर्न, लगभग 5,000 पेटेंट |
| उल्लिखित योजना | एक लाख करोड़ रुपये की अनुसंधान, विकास एवं नवाचार योजना |
| आईआईटी कानपुर निदेशक | प्रो. मनिंद्र अग्रवाल |
| लक्ष्य वर्ष | 2047 तक विकसित भारत |
परीक्षा की दृष्टि से
अभियान का नाम ('ग्रेटर दैन अस'), संस्थान (आईआईटी कानपुर), शुरू करने वाले (रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह), लक्ष्य (मार्च 2029 तक एक अरब अमेरिकी डॉलर) और अब तक प्रतिबद्ध राशि (4,155 करोड़ रुपये), राष्ट्रीय सैन्य ड्रोन प्रौद्योगिकी केंद्र तथा प्रस्तावित रक्षा प्रौद्योगिकी विद्यालय, डीआरडीओ-उद्योग-शिक्षा उत्कृष्टता केंद्र और सी3आई केंद्र, आईआईटी तंत्र के आंकड़े — 6,000 से अधिक स्टार्टअप, 56 यूनिकॉर्न, लगभग 5,000 पेटेंट — तथा एक लाख करोड़ रुपये की अनुसंधान, विकास एवं नवाचार योजना याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
आईआईटी कानपुर के 'ग्रेटर दैन अस' अभियान का धन संग्रह लक्ष्य क्या है?
- A.मार्च 2029 तक 50 करोड़ अमेरिकी डॉलर
- B.मार्च 2029 तक एक अरब अमेरिकी डॉलर
- C.मार्च 2030 तक दो अरब अमेरिकी डॉलर
- D.मार्च 2028 तक 4,155 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
इस अभियान की शुरुआत रक्षा मंत्री ने नई दिल्ली में की और यह किसी भी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा चलाया गया अब तक का सबसे बड़ा धन संग्रह अभियान है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राष्ट्रीय सैन्य ड्रोन प्रौद्योगिकी केंद्र, जिसकी मंजूरी प्रक्रिया पूरी होने के करीब है, किस संस्थान में स्थापित किया जा रहा है?
- A.आईआईटी मद्रास
- B.आईआईटी दिल्ली
- C.आईआईटी कानपुर
- D.आईआईटी बॉम्बे
उत्तर देखें
रक्षा मंत्री ने बताया कि रक्षा मंत्रालय के सहयोग से आईआईटी कानपुर में राष्ट्रीय सैन्य ड्रोन प्रौद्योगिकी केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव ने अच्छी प्रगति की है और उसकी मंजूरी प्रक्रिया पूरी होने के करीब है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →रक्षा मंत्री के अनुसार आईआईटी तंत्र ने कितने यूनिकॉर्न तैयार किए हैं?
- A.36
- B.46
- C.56
- D.66
उत्तर देखें
यह बताते हुए कि ये संस्थान नवाचार और उद्यम के इंजन बन गए हैं, रक्षा मंत्री ने कहा कि आईआईटी तंत्र ने 6,000 से अधिक स्टार्टअप को सहारा दिया है, 56 यूनिकॉर्न तैयार किए हैं और लगभग 5,000 पेटेंट सृजित किए हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आईआईटी कानपुर का 'ग्रेटर दैन अस' अभियान क्या है?
यह आईआईटी कानपुर का धन संग्रह अभियान है, जिसे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 14 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में शुरू किया। इसका लक्ष्य मार्च 2029 तक एक अरब अमेरिकी डॉलर जुटाना है, जो किसी भी आईआईटी का अब तक का सबसे बड़ा अभियान है, और 4,155 करोड़ रुपये पहले ही प्रतिबद्ध हो चुके हैं।
आईआईटी कानपुर की किन रक्षा परियोजनाओं का उल्लेख हुआ?
मंत्री ने परिसर के डीआरडीओ-उद्योग-शिक्षा उत्कृष्टता केंद्र का उल्लेख किया, रक्षा प्रौद्योगिकी विद्यालय के प्रस्ताव का स्वागत किया और बताया कि रक्षा मंत्रालय के सहयोग से प्रस्तावित राष्ट्रीय सैन्य ड्रोन प्रौद्योगिकी केंद्र की मंजूरी प्रक्रिया पूरी होने के करीब है। उन्होंने सी3आई साइबर सुरक्षा प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र का भी जिक्र किया।
आईआईटी तंत्र के बारे में रक्षा मंत्री ने कौन-से आंकड़े दिए?
उन्होंने कहा कि आईआईटी तंत्र ने 6,000 से अधिक स्टार्टअप को सहारा दिया है, 56 यूनिकॉर्न तैयार किए हैं और लगभग 5,000 पेटेंट सृजित किए हैं। उनके अनुसार यह दिखाता है कि ये संस्थान केवल ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि नवाचार और उद्यम के इंजन बन रहे हैं।
उन्होंने किस अनुसंधान योजना का उल्लेख किया?
उन्होंने अनुसंधान और उन्नत प्रौद्योगिकी में निजी क्षेत्र का निवेश बढ़ाने के लिए स्वीकृत एक लाख करोड़ रुपये की अनुसंधान, विकास एवं नवाचार योजना का उल्लेख किया, तथा उस बदलाव का भी, जिसमें वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद से समर्थित गहन-प्रौद्योगिकी स्टार्टअप के लिए तीन वर्ष पुराना होने की शर्त हटाई गई।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2323554 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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