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डीआरडीओ का उन्नत उच्च ऊंचाई पैराशूट पहली बार जंप में

डीआरडीओ ने न्योमा (मुध डीजेड) में उन्नत उच्च ऊंचाई पैराशूट की पहली लाइव जंप 16,000 फीट से की, पैराशूट 15,500 फीट पर खुला और लैंडिंग 13,700 फीट पर हुई।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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डीआरडीओ का उन्नत उच्च ऊंचाई पैराशूट पहली बार जंप में

चर्चा में क्यों

6 अक्टूबर 2026 को डीआरडीओ ने न्योमा (मुध डीजेड) ड्रॉप जोन पर स्वदेशी उन्नत उच्च ऊंचाई पैराशूट की पहली लाइव जंप की और अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उसकी उपयोगिता सिद्ध की।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने उन्नत उच्च ऊंचाई पैराशूट (एएचएपी) की पहली लाइव जंप न्योमा (मुध डीजेड) में की, जो उपयोग में आने वाले सबसे ऊंचे ड्रॉप जोन में गिना जाता है। रक्षा मंत्रालय ने इसकी जानकारी 6 अक्टूबर 2026 को दी।

जंप कैसे हुई

जंप समुद्र तल से 16,000 फीट की ऊंचाई से की गई। पैराशूट 15,500 फीट पर खोला गया और लैंडिंग न्योमा ड्रॉप जोन पर हुई, जो स्वयं 13,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इस जंप से सिद्ध हुआ कि यह पैराशूट अत्यधिक ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में कारगर है और सामरिक रूप से उपयोग में लाया जा सकता है।

ऐसी जंप कठिन क्यों है

इतनी ऊंचाई पर स्टेटिक लाइन जंप स्वभाव से ही जोखिम भरी होती है। विरल हवा में पैराशूट को पकड़ने के लिए कम सहारा मिलता है, इसलिए खुलते समय का झटका तेज होता है और नीचे उतरने की गति अधिक रहती है। मैदानों के लिए बना पैराशूट पहाड़ों पर वैसे ही नहीं चलाया जा सकता; प्रणाली को उस हवा के हिसाब से गढ़ना पड़ता है।

एएचएपी क्या है

  • यह स्टेटिक लाइन पैराशूट प्रणाली है, जो पैराट्रूपर्स के सामूहिक उतारने के लिए बनी है; विमान से निकलते ही पैराशूट स्वयं खुल जाता है।
  • इसका डिजाइन और विकास आगरा स्थित एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (एडीआरडीई) ने किया है।
  • निर्माण ऑर्डनेंस पैराशूट फैक्ट्री (ओपीएफ), कानपुर में होता है।
  • निरीक्षण डीजीएक्यूए करता है और प्रमाणन सीईएमआईएलएसी, आरसीएमए कानपुर से मिला है।

प्रणाली में कई तरह से खुलने की सुविधा है और इसकी परिचालन ऊंचाई 18,000 फीट तक जाती है। इसकी अवतरण गति को सबसे सुरक्षित बताया गया है, जो भारतीय सशस्त्र बलों की ऊंचाई वाली जरूरतों के अनुकूल है।

किसने क्या कहा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वदेशी पैराशूट प्रणाली की सफल पहली लाइव जंप पर डीआरडीओ, सशस्त्र बलों, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों और उद्योग को बधाई दी और इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और बड़ा कदम बताया। रक्षा सचिव तथा डीआरडीओ अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने प्रणाली के डिजाइन और विकास से जुड़ी टीम को बधाई दी।

एक नजर में

प्रणालीउन्नत उच्च ऊंचाई पैराशूट (एएचएपी)
ड्रॉप जोनन्योमा (मुध डीजेड)
जंप की ऊंचाईसमुद्र तल से 16,000 फीट
पैराशूट खुला15,500 फीट
लैंडिंग की ऊंचाई13,700 फीट

महत्वपूर्ण तथ्य

प्रणालीउन्नत उच्च ऊंचाई पैराशूट (एएचएपी)
घटनाडीआरडीओ द्वारा पहली लाइव जंप
ड्रॉप जोनन्योमा (मुध डीजेड), सबसे ऊंचे ड्रॉप जोन में से एक
जंप की ऊंचाईसमुद्र तल से 16,000 फीट
पैराशूट खुलने की ऊंचाईसमुद्र तल से 15,500 फीट
लैंडिंग की ऊंचाई13,700 फीट
परिचालन सीमा18,000 फीट तक
स्वरूपपैराट्रूपर्स के सामूहिक उतरने के लिए स्टेटिक लाइन पैराशूट प्रणाली
डिजाइनएरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (एडीआरडीई), आगरा
निर्माताऑर्डनेंस पैराशूट फैक्ट्री (ओपीएफ), कानपुर
प्रमाणननिरीक्षण डीजीएक्यूए, प्रमाणन सीईएमआईएलएसी, आरसीएमए कानपुर

परीक्षा की दृष्टि से

प्रणाली का नाम (उन्नत उच्च ऊंचाई पैराशूट, एएचएपी), ड्रॉप जोन (न्योमा, मुध डीजेड), तीनों ऊंचाइयां (जंप 16,000 फीट, पैराशूट खुलना 15,500 फीट, लैंडिंग 13,700 फीट), परिचालन सीमा (18,000 फीट), डिजाइन (एडीआरडीई आगरा) और निर्माता (ऑर्डनेंस पैराशूट फैक्ट्री कानपुर) याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.रक्षामध्यम

डीआरडीओ ने उन्नत उच्च ऊंचाई पैराशूट की पहली लाइव जंप किस ड्रॉप जोन पर की?

  1. A.आगरा
  2. B.न्योमा (मुध डीजेड)
  3. C.पोखरण
  4. D.चांदीपुर
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. न्योमा (मुध डीजेड)

व्याख्या

सही उत्तर न्योमा (मुध डीजेड) है, जिसे सबसे ऊंचाई वाले ड्रॉप जोन में गिना गया है। जंप समुद्र तल से 16,000 फीट की ऊंचाई से की गई, पैराशूट 15,500 फीट पर खोला गया और लैंडिंग उसी ड्रॉप जोन पर हुई, जो स्वयं 13,700 फीट पर स्थित है। इस अभ्यास से अत्यधिक ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में पैराशूट की कार्यक्षमता और सामरिक उपयोगिता सिद्ध हुई। विकल्प A गलत है, क्योंकि आगरा में डिजाइन करने वाली प्रयोगशाला है, जंप वहां नहीं हुई। विकल्प C गलत है, क्योंकि रेगिस्तानी परीक्षण क्षेत्र का नाम इस परीक्षण में नहीं आता और यहां उद्देश्य ऊंचाई था, खुला मैदान नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि समुद्र तट वाला परीक्षण क्षेत्र मिसाइल परीक्षणों के लिए उपयोग होता है, ऊंचाई वाली पैराशूट जंप के लिए नहीं। ड्रॉप जोन के नाम के साथ तीनों ऊंचाइयां भी याद रखें।

Q2.रक्षामध्यम

एएचएपी की जंप समुद्र तल से कितनी ऊंचाई पर की गई?

  1. A.10,000 फीट
  2. B.13,700 फीट
  3. C.16,000 फीट
  4. D.22,000 फीट
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 16,000 फीट

व्याख्या

सही उत्तर 16,000 फीट है। जंप समुद्र तल से इसी ऊंचाई से की गई, इसके बाद पैराशूट 15,500 फीट पर खोला गया और लैंडिंग न्योमा ड्रॉप जोन पर हुई। विकल्प A गलत है, क्योंकि जंप इस आंकड़े से काफी ऊपर से हुई। विकल्प B सावधानी से रखा गया भ्रामक विकल्प है: यह लैंडिंग जोन की ऊंचाई है, वह ऊंचाई नहीं जहां से जंप की गई, और प्रश्नों में दोनों को आपस में मिला दिया जाता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि इस जंप के लिए ऐसी कोई ऊंचाई दर्ज नहीं है, यद्यपि प्रणाली एक विस्तृत ऊंचाई सीमा के लिए स्वीकृत है। इतनी ऊंचाई पर स्टेटिक लाइन जंप खुलते समय के तेज झटके और अवतरण की अधिक गति के कारण जटिल तथा जोखिम भरी होती है, इसी कारण स्वदेशी प्रणाली की यह पहली लाइव जंप उपलब्धि मानी गई।

Q3.रक्षामध्यम

उन्नत उच्च ऊंचाई पैराशूट का निर्माण कौन करता है?

  1. A.ऑर्डनेंस पैराशूट फैक्ट्री, कानपुर
  2. B.हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, बेंगलुरु
  3. C.भारत डायनामिक्स लिमिटेड, हैदराबाद
  4. D.मिश्र धातु निगम, हैदराबाद
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. ऑर्डनेंस पैराशूट फैक्ट्री, कानपुर

व्याख्या

सही उत्तर ऑर्डनेंस पैराशूट फैक्ट्री, कानपुर है। इस प्रणाली का डिजाइन और विकास आगरा स्थित एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट ने किया है और निर्माण कानपुर की इसी फैक्ट्री में होता है; निरीक्षण डीजीएक्यूए करता है तथा प्रमाणन सीईएमआईएलएसी, आरसीएमए कानपुर से मिला है। विकल्प B गलत है, क्योंकि विमान बनाने वाली कंपनी इस पैराशूट के उत्पादन में शामिल नहीं है। विकल्प C गलत है, क्योंकि वह उपक्रम मिसाइल और उससे जुड़ी प्रणालियां बनाता है, पैराशूट नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि वह कंपनी विशेष धातुओं और मिश्र धातुओं पर काम करती है। कार्य विभाजन को एक श्रृंखला के रूप में याद रखें: डिजाइन आगरा में, निर्माण कानपुर में, निरीक्षण डीजीएक्यूए और प्रमाणन सीईएमआईएलएसी से। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस स्वदेशी पैराशूट प्रणाली की सफल पहली लाइव जंप को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और बड़ा कदम बताया और डीआरडीओ, सशस्त्र बलों, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों तथा उद्योग को बधाई दी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एएचएपी की पहली जंप कितनी ऊंचाई से की गई?

जंप समुद्र तल से 16,000 फीट की ऊंचाई से की गई। पैराशूट 15,500 फीट पर खोला गया और लैंडिंग न्योमा (मुध डीजेड) ड्रॉप जोन पर हुई, जो 13,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।

एएचएपी किस प्रकार का पैराशूट है?

यह स्टेटिक लाइन पैराशूट प्रणाली है, जो पैराट्रूपर्स को सामूहिक रूप से उतारने के लिए बनी है। इसमें खुलने के कई तरीके हैं, परिचालन ऊंचाई 18,000 फीट तक जाती है और अवतरण गति सबसे सुरक्षित बताई गई है।

इसका डिजाइन और निर्माण कौन करता है?

डिजाइन और विकास आगरा स्थित एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट ने किया है, निर्माण कानपुर की ऑर्डनेंस पैराशूट फैक्ट्री करती है। निरीक्षण डीजीएक्यूए और प्रमाणन सीईएमआईएलएसी, आरसीएमए कानपुर करता है।

स्रोत

करेंट अफेयर्स 6 अक्टूबर 2026

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