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चाइम दूरबीन ने अकेले पकड़ी हाइड्रोजन की सबसे पुरानी चमक

चाइम रेडियो दूरबीन ने आरआरआई के भारतीय शोधकर्ताओं के साथ पहली बार केवल अपने ही आंकड़ों से आरंभिक ब्रह्मांड की हाइड्रोजन की धुंधली चमक का पता लगाया है।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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चाइम दूरबीन ने अकेले पकड़ी हाइड्रोजन की सबसे पुरानी चमक

चर्चा में क्यों

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने बताया कि रमन अनुसंधान संस्थान के सहयोगियों के साथ चाइम रेडियो दूरबीन ने पहली बार अकेले अपने आंकड़ों से उस दौर की हाइड्रोजन चमक का पता लगाया, जब ब्रह्मांड लगभग पांच अरब वर्ष पुराना था।

कैनेडियन हाइड्रोजन इंटेंसिटी मैपिंग एक्सपेरिमेंट, जिसे चाइम दूरबीन कहा जाता है, ने उस समय की हाइड्रोजन गैस की धुंधली रेडियो चमक का पहली बार अकेले अपने आंकड़ों से पता लगाया है, जब ब्रह्मांड लगभग पांच अरब वर्ष पुराना था। इस अंतरराष्ट्रीय सहयोग में भारत के शोधकर्ता भी शामिल रहे। यह परिणाम ब्रह्मांड के प्रसार और डार्क एनर्जी के अध्ययन के लिए एक नया रास्ता खोलता है।

भारत का जुड़ाव

इस अध्ययन में रमन अनुसंधान संस्थान (आरआरआई) के चाइम सहयोगी शामिल थे, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का एक स्वायत्त संस्थान है। सह-लेखक और आरआरआई में सहायक प्राध्यापक सौरभ सिंह ने बताया कि चाइम ऐसा उपकरण है जो आकाश के अपने ऊपर से गुजरने के साथ ब्रह्मांड के बड़े हिस्से को स्कैन करता है, इसमें कोई गतिशील पुर्जा नहीं है, और यह हर दिन रेडियो तरंगों में आकाश की तस्वीर देता है।

इसमें नया क्या है

चाइम कनाडा में लगी एक इंटरफेरोमेट्रिक रेडियो दूरबीन है, जिसे इसलिए बनाया गया था कि वह आरंभिक ब्रह्मांड में हाइड्रोजन गैस के फैलाव का नक्शा बना सके और खगोलविद उससे ब्रह्मांड के प्रसार की गणना कर डार्क एनर्जी की जांच कर सकें। अब तक उसे अपने प्रेक्षणों का मिलान दूसरी दूरबीनों के गैलेक्सी सर्वेक्षण आंकड़ों से करना पड़ता था। इस बार उसने केवल अपने ही आंकड़ों से संकेत पकड़ा। गैलेक्सी सर्वेक्षण कहीं अधिक महंगे होते हैं और ब्रह्मांड के केवल उन्हीं हिस्सों को देखते हैं जो तारे बनाने लायक गर्म और सघन हैं, इसलिए यह नई विधि डार्क एनर्जी के अध्ययन का तेज और सस्ता रास्ता देती है।

संकेत क्या बताता है

साथ के एक शोधपत्र में देखा गया कि यह संकेत ब्रह्मांड में हाइड्रोजन के फैलाव के बारे में क्या कहता है। एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी के सह-लेखक शब्बीर शेख ने बताया कि आंकड़े संकेत देते हैं कि उस समय ब्रह्मांड की लगभग दो प्रतिशत हाइड्रोजन उदासीन परमाणु रूप में थी, जो अन्य मापों के अनुरूप है। हाइड्रोजन ब्रह्मांड का सबसे आम तत्व और तारों का कच्चा माल है, तथा अपनी धुंधली रेडियो तरंगों के कारण यह ब्रह्मांडीय संकेतक की तरह काम करती है।

परिणाम तक कैसे पहुंचे

यह कोई अचानक हुई खोज नहीं थी। पृष्ठभूमि के ब्रह्मांड, मानव तकनीक और स्वयं उपकरण के शोर के बीच से धुंधला संकेत निकालने के लिए नई विश्लेषण और प्रसंस्करण विधियां लगाई गईं, और फिर दल ने एक वर्ष से अधिक समय उस निष्कर्ष की जांच में लगाया। यह माप 2019 में जुटाए गए 94 रातों के प्रेक्षण आंकड़ों पर टिका है, जो चाइम के कुल आंकड़ों का छोटा हिस्सा है। निष्कर्ष द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित हुए हैं। शोधकर्ताओं के पास अब लगभग सात वर्ष के प्रेक्षण हैं और वे विश्लेषण को उस दौर तक ले जा रहे हैं जब ब्रह्मांड केवल तीन अरब वर्ष पुराना था।

महत्वपूर्ण तथ्य

दूरबीनकैनेडियन हाइड्रोजन इंटेंसिटी मैपिंग एक्सपेरिमेंट (चाइम), कनाडा में इंटरफेरोमेट्रिक रेडियो दूरबीन
उपलब्धिकेवल अपने आंकड़ों से हाइड्रोजन की रेडियो चमक का पहली बार पता लगाना
कौन सा दौरजब ब्रह्मांड लगभग पांच अरब वर्ष पुराना था
भारतीय संस्थानरमन अनुसंधान संस्थान (आरआरआई), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का स्वायत्त संस्थान
उद्देश्यहाइड्रोजन के फैलाव का नक्शा बनाकर ब्रह्मांड के प्रसार और डार्क एनर्जी का अध्ययन
उदासीन हाइड्रोजनउस समय ब्रह्मांड की लगभग दो प्रतिशत हाइड्रोजन उदासीन परमाणु रूप में
प्रयुक्त आंकड़े2019 में जुटाए गए 94 रातों के प्रेक्षण
प्रकाशनद एस्ट्रोफिजिकल जर्नल
अगला कदमउस दौर तक विश्लेषण बढ़ाना जब ब्रह्मांड लगभग तीन अरब वर्ष पुराना था

परीक्षा की दृष्टि से

दूरबीन का पूरा नाम (कैनेडियन हाइड्रोजन इंटेंसिटी मैपिंग एक्सपेरिमेंट), उसका देश (कनाडा), भारत का संस्थान (रमन अनुसंधान संस्थान, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन), क्या पकड़ा गया (हाइड्रोजन की धुंधली रेडियो चमक), उस समय ब्रह्मांड की आयु (लगभग पांच अरब वर्ष), उदासीन हाइड्रोजन का अंश (लगभग दो प्रतिशत), 2019 के 94 रातों के आंकड़े तथा पत्रिका का नाम याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

हाइड्रोजन की चमक का पहली बार अकेले पता लगाने वाली चाइम दूरबीन का पूरा रूप क्या है?

  1. A.कॉस्मिक हाइड्रोजन इमेजिंग एंड मैपिंग एक्सपेरिमेंट
  2. B.कैनेडियन हाइड्रोजन इंटेंसिटी मैपिंग एक्सपेरिमेंट
  3. C.कंबाइंड हाइड्रोजन इंटरफेरोमेट्रिक मेजरमेंट एंडेवर
  4. D.कॉस्मोलॉजिकल हाई-एनर्जी इन्फ्रारेड मैपिंग एक्सपेरिमेंट
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. कैनेडियन हाइड्रोजन इंटेंसिटी मैपिंग एक्सपेरिमेंट

व्याख्या

सही उत्तर है कैनेडियन हाइड्रोजन इंटेंसिटी मैपिंग एक्सपेरिमेंट। चाइम कनाडा में लगी एक इंटरफेरोमेट्रिक रेडियो दूरबीन है, जिसे आरंभिक ब्रह्मांड में हाइड्रोजन गैस के फैलाव का नक्शा बनाने के लिए बनाया गया था, ताकि खगोलविद ब्रह्मांड के प्रसार की गणना कर डार्क एनर्जी का अध्ययन कर सकें। विकल्प A, C और D मिलती-जुलती खगोलीय शब्दावली से गढ़े गए रूप हैं, और ऐसे प्रश्नों में भ्रामक विकल्प इसी तरह बनाए जाते हैं। ध्यान दें कि पहला अक्षर उस देश को दर्शाता है जिसने इस उपकरण की कल्पना की, उसे बनाया और उसका खर्च उठाया। यह भी याद रखें कि चाइम रेडियो तरंगों पर काम करती है और इसमें कोई गतिशील पुर्जा नहीं होता। यह भी जान लें कि यह दूरबीन आकाश के अपने ऊपर से गुजरने के साथ ब्रह्मांड का बड़ा हिस्सा स्कैन करती है और हर दिन रेडियो तरंगों में आकाश की तस्वीर देती है।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

इस खोज से जुड़े चाइम सहयोग में भारत का कौन सा संस्थान शामिल था?

  1. A.भारतीय तारा भौतिकी संस्थान
  2. B.भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला
  3. C.रमन अनुसंधान संस्थान
  4. D.टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. रमन अनुसंधान संस्थान

व्याख्या

सही उत्तर है रमन अनुसंधान संस्थान। जिस अध्ययन में पहली बार अकेले आंकड़ों से हाइड्रोजन की चमक पकड़ने की बात कही गई, उसमें इसी संस्थान के चाइम सहयोगी शामिल थे। यह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का स्वायत्त संस्थान है और वहां के सहायक प्राध्यापक सौरभ सिंह इस परिणाम पर टिप्पणी करने वाले सह-लेखकों में हैं। विकल्प A, B और D भारत के ऐसे अन्य जाने-माने अनुसंधान संस्थान हैं जो खगोल विज्ञान, अंतरिक्ष और मूलभूत भौतिकी में काम करते हैं, और उन्हें इसलिए रखा गया है कि जिस अभ्यर्थी को केवल इतना याद हो कि कोई भारतीय संस्थान शामिल था, वह कोई भी नाम चुन ले। संस्थान के साथ उसका मूल विभाग भी जोड़कर याद रखें। प्रश्न प्रायः यह भी पूछते हैं कि संबंधित संस्थान किस मंत्रालय या विभाग के अधीन आता है, और यहां उत्तर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग है, इसलिए यह जोड़ अवश्य याद रखें।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

चाइम ने जिस दौर का प्रेक्षण किया, उस समय ब्रह्मांड की कितनी हाइड्रोजन उदासीन परमाणु रूप में थी?

  1. A.लगभग दो प्रतिशत
  2. B.लगभग बीस प्रतिशत
  3. C.लगभग आधी
  4. D.लगभग पूरी
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. लगभग दो प्रतिशत

व्याख्या

सही उत्तर है लगभग दो प्रतिशत। साथ के शोधपत्र में देखा गया कि यह संकेत ब्रह्मांड में हाइड्रोजन के फैलाव के बारे में क्या बताता है, और एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी के सह-लेखक शब्बीर शेख ने कहा कि आंकड़े संकेत देते हैं कि उस समय ब्रह्मांड की लगभग इतनी ही हाइड्रोजन उदासीन परमाणु रूप में थी, जो अन्य मापों के मोटे तौर पर अनुरूप है। विकल्प B, C और D इस अंश को बहुत बढ़ाकर बताते हैं, इसलिए गलत हैं। अभ्यर्थी के लिए बड़ी बात यह है कि इसका महत्व क्या है, यानी उस हाइड्रोजन के फैलाव और गुच्छन को मापकर चाइम यह परखने का नया रास्ता देती है कि आकाशगंगाएं कैसे बनती और विकसित होती हैं। हाइड्रोजन ब्रह्मांड का सबसे आम तत्व और तारों का कच्चा माल है, इसीलिए उसकी धुंधली रेडियो तरंगें ब्रह्मांडीय संकेतक की तरह काम करती हैं और पदार्थ का फैलाव उजागर करती हैं।

Q4.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

चाइम की यह खोज किस वर्ष जुटाए गए प्रेक्षण आंकड़ों पर आधारित है?

  1. A.2015
  2. B.2019
  3. C.2022
  4. D.2024
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 2019

व्याख्या

सही उत्तर है 2019। यह माप उसी वर्ष जुटाए गए 94 रातों के प्रेक्षण आंकड़ों पर टिका है, जो दूरबीन के काम शुरू करने के बाद से दर्ज सभी आंकड़ों का छोटा सा हिस्सा भर है। विकल्प A, C और D आसपास के वर्ष हैं, जो भ्रम पैदा करने के लिए रखे गए हैं और घोषणा से मेल नहीं खाते। वर्ष के साथ दो और बातें याद रखने योग्य हैं। पहली, यह निष्कर्ष तुरंत नहीं मिला, क्योंकि शोर के बीच से धुंधला संकेत निकालने के लिए नई विश्लेषण विधियां लगानी पड़ीं और दल ने एक वर्ष से अधिक समय उसकी जांच में लगाया। दूसरी, अब शोधकर्ताओं के पास लगभग सात वर्ष के प्रेक्षण हैं और वे और पुराने दौर तक विश्लेषण बढ़ा रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चाइम (CHIME) का पूरा रूप क्या है?

कैनेडियन हाइड्रोजन इंटेंसिटी मैपिंग एक्सपेरिमेंट। यह कनाडा में लगी इंटरफेरोमेट्रिक रेडियो दूरबीन है, जिसे आरंभिक ब्रह्मांड में हाइड्रोजन गैस के फैलाव का नक्शा बनाने के लिए बनाया गया था ताकि प्रसार और डार्क एनर्जी की जांच हो सके।

इस परिणाम में भारत का कौन सा संस्थान शामिल था?

रमन अनुसंधान संस्थान, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का स्वायत्त संस्थान है। वहां के सहायक प्राध्यापक सौरभ सिंह इस अध्ययन के सह-लेखकों में हैं।

अकेले आंकड़ों से पता लगाना क्यों महत्वपूर्ण है?

पहले चाइम को अपने प्रेक्षणों का मिलान दूसरी दूरबीनों के गैलेक्सी सर्वेक्षण आंकड़ों से करना पड़ता था। केवल अपने आंकड़ों से काम चलने पर डार्क एनर्जी का अध्ययन तेज और कम खर्चीला हो जाता है, और अधिक बड़े पैमाने तथा अधिक पुराने दौर तक देखा जा सकता है।

यह खोज कितने आंकड़ों पर आधारित है?

2019 में जुटाए गए 94 रातों के प्रेक्षणों पर, जो चाइम के कुल आंकड़ों का छोटा हिस्सा है। दल के पास अब लगभग सात वर्ष के प्रेक्षण उपलब्ध हैं और वह विश्लेषण को और पुराने दौर तक बढ़ा रहा है।

स्रोत

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