चाइम की यह खोज किस वर्ष जुटाए गए प्रेक्षण आंकड़ों पर आधारित है?
- A.2015
- B.2019
- C.2022
- D.2024
सही उत्तर
B. 2019
व्याख्या
सही उत्तर है 2019। यह माप उसी वर्ष जुटाए गए 94 रातों के प्रेक्षण आंकड़ों पर टिका है, जो दूरबीन के काम शुरू करने के बाद से दर्ज सभी आंकड़ों का छोटा सा हिस्सा भर है। विकल्प A, C और D आसपास के वर्ष हैं, जो भ्रम पैदा करने के लिए रखे गए हैं और घोषणा से मेल नहीं खाते। वर्ष के साथ दो और बातें याद रखने योग्य हैं। पहली, यह निष्कर्ष तुरंत नहीं मिला, क्योंकि शोर के बीच से धुंधला संकेत निकालने के लिए नई विश्लेषण विधियां लगानी पड़ीं और दल ने एक वर्ष से अधिक समय उसकी जांच में लगाया। दूसरी, अब शोधकर्ताओं के पास लगभग सात वर्ष के प्रेक्षण हैं और वे और पुराने दौर तक विश्लेषण बढ़ा रहे हैं।
पूरा लेख पढ़ें: चाइम दूरबीन ने अकेले पकड़ी हाइड्रोजन की सबसे पुरानी चमक
अभ्यास प्रश्न
हाइड्रोजन की चमक का पहली बार अकेले पता लगाने वाली चाइम दूरबीन का पूरा रूप क्या है?
- A.कॉस्मिक हाइड्रोजन इमेजिंग एंड मैपिंग एक्सपेरिमेंट
- B.कैनेडियन हाइड्रोजन इंटेंसिटी मैपिंग एक्सपेरिमेंट
- C.कंबाइंड हाइड्रोजन इंटरफेरोमेट्रिक मेजरमेंट एंडेवर
- D.कॉस्मोलॉजिकल हाई-एनर्जी इन्फ्रारेड मैपिंग एक्सपेरिमेंट
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. कैनेडियन हाइड्रोजन इंटेंसिटी मैपिंग एक्सपेरिमेंट
व्याख्या
सही उत्तर है कैनेडियन हाइड्रोजन इंटेंसिटी मैपिंग एक्सपेरिमेंट। चाइम कनाडा में लगी एक इंटरफेरोमेट्रिक रेडियो दूरबीन है, जिसे आरंभिक ब्रह्मांड में हाइड्रोजन गैस के फैलाव का नक्शा बनाने के लिए बनाया गया था, ताकि खगोलविद ब्रह्मांड के प्रसार की गणना कर डार्क एनर्जी का अध्ययन कर सकें। विकल्प A, C और D मिलती-जुलती खगोलीय शब्दावली से गढ़े गए रूप हैं, और ऐसे प्रश्नों में भ्रामक विकल्प इसी तरह बनाए जाते हैं। ध्यान दें कि पहला अक्षर उस देश को दर्शाता है जिसने इस उपकरण की कल्पना की, उसे बनाया और उसका खर्च उठाया। यह भी याद रखें कि चाइम रेडियो तरंगों पर काम करती है और इसमें कोई गतिशील पुर्जा नहीं होता। यह भी जान लें कि यह दूरबीन आकाश के अपने ऊपर से गुजरने के साथ ब्रह्मांड का बड़ा हिस्सा स्कैन करती है और हर दिन रेडियो तरंगों में आकाश की तस्वीर देती है।
इस खोज से जुड़े चाइम सहयोग में भारत का कौन सा संस्थान शामिल था?
- A.भारतीय तारा भौतिकी संस्थान
- B.भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला
- C.रमन अनुसंधान संस्थान
- D.टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. रमन अनुसंधान संस्थान
व्याख्या
सही उत्तर है रमन अनुसंधान संस्थान। जिस अध्ययन में पहली बार अकेले आंकड़ों से हाइड्रोजन की चमक पकड़ने की बात कही गई, उसमें इसी संस्थान के चाइम सहयोगी शामिल थे। यह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का स्वायत्त संस्थान है और वहां के सहायक प्राध्यापक सौरभ सिंह इस परिणाम पर टिप्पणी करने वाले सह-लेखकों में हैं। विकल्प A, B और D भारत के ऐसे अन्य जाने-माने अनुसंधान संस्थान हैं जो खगोल विज्ञान, अंतरिक्ष और मूलभूत भौतिकी में काम करते हैं, और उन्हें इसलिए रखा गया है कि जिस अभ्यर्थी को केवल इतना याद हो कि कोई भारतीय संस्थान शामिल था, वह कोई भी नाम चुन ले। संस्थान के साथ उसका मूल विभाग भी जोड़कर याद रखें। प्रश्न प्रायः यह भी पूछते हैं कि संबंधित संस्थान किस मंत्रालय या विभाग के अधीन आता है, और यहां उत्तर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग है, इसलिए यह जोड़ अवश्य याद रखें।
चाइम ने जिस दौर का प्रेक्षण किया, उस समय ब्रह्मांड की कितनी हाइड्रोजन उदासीन परमाणु रूप में थी?
- A.लगभग दो प्रतिशत
- B.लगभग बीस प्रतिशत
- C.लगभग आधी
- D.लगभग पूरी
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. लगभग दो प्रतिशत
व्याख्या
सही उत्तर है लगभग दो प्रतिशत। साथ के शोधपत्र में देखा गया कि यह संकेत ब्रह्मांड में हाइड्रोजन के फैलाव के बारे में क्या बताता है, और एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी के सह-लेखक शब्बीर शेख ने कहा कि आंकड़े संकेत देते हैं कि उस समय ब्रह्मांड की लगभग इतनी ही हाइड्रोजन उदासीन परमाणु रूप में थी, जो अन्य मापों के मोटे तौर पर अनुरूप है। विकल्प B, C और D इस अंश को बहुत बढ़ाकर बताते हैं, इसलिए गलत हैं। अभ्यर्थी के लिए बड़ी बात यह है कि इसका महत्व क्या है, यानी उस हाइड्रोजन के फैलाव और गुच्छन को मापकर चाइम यह परखने का नया रास्ता देती है कि आकाशगंगाएं कैसे बनती और विकसित होती हैं। हाइड्रोजन ब्रह्मांड का सबसे आम तत्व और तारों का कच्चा माल है, इसीलिए उसकी धुंधली रेडियो तरंगें ब्रह्मांडीय संकेतक की तरह काम करती हैं और पदार्थ का फैलाव उजागर करती हैं।
सीएजी-भाषिणी अनुवाद की शुरुआत में उपस्थित भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक कौन हैं?
- A.ए. एम. बजाज
- B.के. संजय मूर्ति
- C.नीलोत्पल गोस्वामी
- D.अमिताभ नाग
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. के. संजय मूर्ति
व्याख्या
सही उत्तर के. संजय मूर्ति है, जो भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक का पद संभालते हैं और इस शुरुआत में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि लेखापरीक्षा के निष्कर्ष और रिपोर्ट नागरिकों तक उनकी समझ की भाषा में पहुंचने चाहिए, और यह भी बताया कि तकनीक लेखापरीक्षा की जानकारी स्थानीय तथा क्षेत्रीय भाषाओं तक ले जाने में कितनी भूमिका निभा सकती है। विकल्प A यानी ए. एम. बजाज गलत है, क्योंकि वे उप नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक हैं। विकल्प C यानी नीलोत्पल गोस्वामी गलत है, क्योंकि वे राजभाषा देखने वाले अतिरिक्त उप नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक हैं। विकल्प D यानी अमिताभ नाग गलत है, क्योंकि वे इस शुरुआत के दूसरे साझेदार से हैं और डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।
भाषिणी मंच वर्तमान में कितनी भारतीय पाठ भाषाओं का समर्थन करता है?
- A.22
- B.23
- C.35
- D.36
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 36
व्याख्या
सही उत्तर 36 है। भाषिणी इतनी भारतीय पाठ भाषाओं का समर्थन करता है। विकल्प B यानी 23 यहां का जाल है, क्योंकि वह मंच की समर्थित भारतीय वाणी भाषाओं की संख्या है, जो जुड़ी हुई पर अलग गिनती है। विकल्प C यानी 35 भी उसी समूह से लिया गया है: वह समर्थित अंतरराष्ट्रीय भाषाओं की संख्या है। विकल्प A यानी 22 गलत है, क्योंकि मंच के लिए दिया गया कोई आंकड़ा उससे मेल नहीं खाता, हालांकि वह अन्य भाषा संदर्भों से जाना-पहचाना लग सकता है। इन तीन आंकड़ों को अलग-अलग याद रखना ही इस तरह के प्रश्न का मकसद है: 36 पाठ भाषाएं, 23 वाणी भाषाएं और 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाएं। भाषाओं से आगे यह मंच 800 से अधिक सरकारी वेबसाइट चलाता है और रोज 24 मिलियन से अधिक अनुमान संसाधित करता है।