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फास्ट ट्रैक विशेष अदालत योजना पांच वर्ष और बढ़ी, 850 अदालतें

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने फास्ट ट्रैक विशेष अदालत योजना पांच वर्ष और बढ़ाई, जिसका परिव्यय 3,788.04 करोड़ रुपये है और अदालतें 779 से 850 हो जाएंगी।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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फास्ट ट्रैक विशेष अदालत योजना पांच वर्ष और बढ़ी, 850 अदालतें — GK24 title card

चर्चा में क्यों

4 नवंबर 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों की केंद्र प्रायोजित योजना को पांच वर्ष और जारी रखने की मंजूरी दी, जिसका परिव्यय 3,788.04 करोड़ रुपये है और अदालतें 850 होंगी।

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 4 नवंबर 2026 को फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों की केंद्र प्रायोजित योजना को, जिसमें विशेष पॉक्सो अदालतें भी शामिल हैं, पांच वर्ष और जारी रखने की मंजूरी दी। यह अवधि 01.04.2026 से 31.03.2031 तक, अर्थात वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक रहेगी।

धन का हिसाब

योजना का कुल परिव्यय 3,788.04 करोड़ रुपये है। इसमें केंद्र का हिस्सा 2,353.15 करोड़ रुपये और राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों का हिस्सा 1,434.89 करोड़ रुपये है। केंद्र का हिस्सा निर्भया कोष से दिया जाएगा।

कितनी अदालतें

योजना में अब 850 फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों की व्यवस्था होगी, जबकि इस समय 779 अदालतें काम कर रही हैं, जिनमें 399 विशेष पॉक्सो अदालतें हैं। नए जिले दुष्कर्म तथा पॉक्सो मामलों के लंबित आंकड़ों के आधार पर चुने जाएंगे। हर अदालत में एक समर्पित न्यायिक अधिकारी, केवल उसी अदालत के लिए नियुक्त विशेष सरकारी अभियोजक और छह सहायक कर्मचारी रहेंगे।

योजना की पृष्ठभूमि

यह योजना 2 अक्टूबर 2019 को शुरू हुई थी, जिसका आधार आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2018 तथा 25 जुलाई 2019 को स्वत: संज्ञान वाली आपराधिक याचिका में उच्चतम न्यायालय का निर्देश था। न्यायालय ने उन सभी जिलों में विशेष अदालतें बनाने को कहा था जहां लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 के तहत 100 से अधिक मामले लंबित थे। इसमें 29 राज्य और संघ राज्य क्षेत्र भाग लेते हैं और शुरुआत से अब तक 4,02,457 मामले निपटाए जा चुके हैं। पहले यह एक वर्ष के लिए मंजूर हुई थी और फिर 31.03.2026 तक कई बार बढ़ाई गई।

क्या अपेक्षित है

न्याय विभाग इस योजना को राज्य सरकारों तथा संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों के साथ चलाता है और प्रदर्शन पर नजर एक डैशबोर्ड, प्रगति रिपोर्ट तथा व्यय विवरण के जरिये रखता है। उद्देश्य है लैंगिक अपराधों के पीड़ितों के मुकदमे जल्दी निपटाना, लंबित मामले घटाना, संवेदनशील गवाह बयान केंद्रों के साथ बालहितैषी अदालत कक्ष बनाना और महिलाओं तथा बच्चों को न्याय तक बेहतर पहुंच देना, जो इस योजना के मुख्य लाभार्थी हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

योजनाफास्ट ट्रैक विशेष अदालतों की केंद्र प्रायोजित योजना
अवधि01.04.2026 से 31.03.2031 (पांच वर्ष)
कुल परिव्यय3,788.04 करोड़ रुपये
केंद्र का हिस्सा2,353.15 करोड़ रुपये, निर्भया कोष से
राज्य व संघ राज्य क्षेत्र का हिस्सा1,434.89 करोड़ रुपये
अदालतें779 से बढ़कर 850
विशेष पॉक्सो अदालतेंमौजूदा 779 में से 399
प्रति अदालत स्टाफएक न्यायिक अधिकारी, एक विशेष सरकारी अभियोजक, छह सहायक कर्मचारी
भागीदार राज्य व संघ राज्य क्षेत्र29
अब तक निपटे मामले4,02,457
शुरुआत2 अक्टूबर 2019
कार्यान्वयनन्याय विभाग

परीक्षा की दृष्टि से

परिव्यय (3,788.04 करोड़ रुपये) और उसका बंटवारा (केंद्र 2,353.15 करोड़ रुपये निर्भया कोष से, राज्य 1,434.89 करोड़ रुपये), 779 से 850 अदालतों की वृद्धि, 399 विशेष पॉक्सो अदालतें, कर्मचारियों का ढांचा, 29 भागीदार राज्य व संघ राज्य क्षेत्र, 4,02,457 निपटाए मामले, 2 अक्टूबर 2019 को शुरुआत और उच्चतम न्यायालय का निर्देश याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.राष्ट्रीयमध्यम

फास्ट ट्रैक विशेष अदालत योजना को जारी रखने के लिए कुल कितना परिव्यय मंजूर किया गया है?

  1. A.2,353.15 करोड़ रुपये
  2. B.3,788.04 करोड़ रुपये
  3. C.1,434.89 करोड़ रुपये
  4. D.4,788.04 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 3,788.04 करोड़ रुपये

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विशेष पॉक्सो अदालतों सहित फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों की केंद्र प्रायोजित योजना को पांच वर्ष और जारी रखने की मंजूरी इसी कुल परिव्यय के साथ दी है।

Q2.राष्ट्रीयमध्यम

बढ़ाई गई योजना के तहत कितनी फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों की व्यवस्था की गई है?

  1. A.399
  2. B.779
  3. C.850
  4. D.1,000
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 850

बढ़ाई गई योजना में भागीदार राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों में कुल 850 फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें चलाने की व्यवस्था है, जो अभी काम कर रही 779 अदालतों से अधिक है।

Q3.राष्ट्रीयमध्यम

फास्ट ट्रैक विशेष अदालत योजना में केंद्र का हिस्सा किस कोष से दिया जाता है?

  1. A.समेकित ऋण शोधन कोष
  2. B.निर्भया कोष
  3. C.राष्ट्रीय निवेश कोष
  4. D.भारत की आपात निधि
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. निर्भया कोष

कुल 3,788.04 करोड़ रुपये के परिव्यय में केंद्र का हिस्सा 2,353.15 करोड़ रुपये निर्भया कोष से दिया जाएगा, जबकि राज्य तथा संघ राज्य क्षेत्र केंद्र प्रायोजित योजनाओं के वित्तपोषण प्रारूप के अनुसार 1,434.89 करोड़ रुपये देंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बढ़ाई गई फास्ट ट्रैक विशेष अदालत योजना का परिव्यय कितना है?

3,788.04 करोड़ रुपये, जिसमें केंद्र का हिस्सा 2,353.15 करोड़ रुपये निर्भया कोष से आएगा और राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों का हिस्सा 1,434.89 करोड़ रुपये होगा। अवधि 01.04.2026 से 31.03.2031 तक है।

योजना के तहत कितनी फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें होंगी?

850 अदालतें, जबकि इस समय 779 काम कर रही हैं, जिनमें 399 विशेष पॉक्सो अदालतें हैं। नए जिले दुष्कर्म और पॉक्सो मामलों के लंबित आंकड़ों के आधार पर जोड़े जाएंगे।

यह योजना क्यों शुरू की गई थी?

इसे 2 अक्टूबर 2019 को आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2018 तथा 25 जुलाई 2019 के उच्चतम न्यायालय के निर्देश के तहत शुरू किया गया था, जिसमें 100 से अधिक लंबित पॉक्सो मामलों वाले जिलों में विशेष अदालतें बनाने को कहा गया था।

स्रोत

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